हाल ही में वैज्ञानिको ने तारो के अधयन्न से सम्बंधित एक नयी रिसर्च में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पहली मरतबा एक ऐसी तकनीक को ...
हाल ही में वैज्ञानिको ने तारो के अधयन्न से सम्बंधित एक नयी रिसर्च में सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने पहली मरतबा एक ऐसी तकनीक को बनाने में सफलता प्राप्त की है जिसकी मदद से कंपायमान बड़े बड़े तारों के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति के बारे में पता लगाया जा सकता है। इस तकनीक की ख़ास बात यह है कि यह तकनीक मेडिकल अल्ट्रासाउंड से काफी मिलती जुलती है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक तारो की उन आंतरिक विशेषताओ के बारे में पता लगा सकते हैं जो अब तक छिपी हुयी थी।

इस शोध में शामिल वैज्ञानिक "University of California Santa Barbara" के "Kavli Institute for Theoretical Physics (KITP) " में कार्यरत हैं। शोध से जुड़े हुए एक प्रमुख वैज्ञानिक Matteo Cantiello ने इस शोध के सम्बंध् में कहा है कि , ‘अब हम तारे के उन क्षेत्रों की जांच कर सकते हैं जो पहले छिपे हुए थे। यह तकनीक मेडिकल अल्ट्रासाउंड के समान है जिसमें मानव शरीर के दिखाई न देने वाले हिस्सों की तस्वीर उतारने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।’
इस तकनीक के प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया की जब किसी तारे के भीतर अधिक चुम्बकीय क्षेत्र उपस्थित होता है तो यह चुम्बकीय क्षेत्र गुरत्वीय तरंगो की गति को रोक देता है जिसके कारण तरंगो की ऊर्जा क्षय होने लगती है और ये तरंगे तारे के भीतरी क्षेत्र में ट्रैप हो जाती हैं जिनके अध्ययन से तारे की आंतरिक विशेषताओ का पता लगाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने इस क्रिया को "Magnetic Greenhouse Effect" नाम दिया है ।
हम आशा करते हैं कि भविष्य में इस तकनीक के प्रयोग से तारो से सम्बंधित अध्यन्न के बारे में नयी नयी विशेषताओ और बातो के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी।
COMMENTS