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Sunday, March 18, 2012

वाई फाई नेटवर्क एक्सेस करते समय रखे विशेष ध्यान

अगर आप वाई  फाई नेटवर्क को एक्सेस कर रहे हो तो आपको नेटवर्क से सम्बंधित काफी सावधानी बरतनी होगी क्यों की आपका डाटा चोरी हो सकता है खासकर की  अगर कोई और अमानीय व्यक्ति आपके नेटवर्क को एक्सेस कर रहा है तब. इसके  लिए आपको अपने नेटवर्क को सिक्योर बनाने के लिए   'सिक्योरिटी की' भी का प्रयोग करना होगा , जिसकी मदद से आप किसी भी  बहारी यूजर  फ्रीलोडर्स और एक्सेस से बच सकते है .  इसलिए अगर आप इस तरह के सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा लेते हैं, तो आपके पर्सनल डाटा के सुरक्षित रहता है  आजकल अक्सर ये देखने को मिलता है की  पब्लिक एरिया में कुछ फालतू हॉट-स्पॉट  जैसे की  'बीटी ओपनजोन' जैसे नेटवर्क आपके लिए खतरनाक  हो सकते है   एक बार जब आपकी डिवाइस इस तरह के नेटवर्क से जुड़ जाती है तो उसके डेवलेपर से आपकाडाटा चोरी होने के चांस काफी बढ़ जाते है .  इसलिए इस तरह के नेटवर्क से बचने की कोशिश करें और फ्री वाई-फाई नेटवर्क यूज करने से पहले उसका नाम जरूर चेक कर लें. 


अक्सर काफी  लोग लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन को फ्री पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करते हैं, जबकि यह खतरनाक भी हो सकता है. हैकर्स इसके सहारे आपके वेबसाइट पर भी कब्ज़ा कर सकते है . ऐसा अक्सर तब होता है जब यूजर अनसिक्योर  वाई-फाई से कनेक्ट हो जाते है  इतना ही नहीं बल्कि , हैकर्स किसी एप्लीकेशन को मेलवेयर का शिकार दिखाकर स्मार्टफोन या टैबलेट से पर्सनल इंफॉर्मेशन भी चोरी कर सकते हैं. इसलिए कुछ चीजों की जरूरत है जिन पर आपको अमल करना होगा.


आज के समय  में स्मार्टफोन और टैबलेट में छिपे हुए एप्लीकेशंस की मदद मेलवेयर में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. गेम डाउनलोड  करते समय भी आपको काफी सावधानी बरतनी होगी जैसे की  'एंग्री बड्र्स' जैसे लोकप्रिय गेम्स डाउनलोड करते वक्त मेलवेयर यूजर के सिस्टम में एंट्री कर जाता है. इसलिए, बेहतर होगा कि जब भी वाई-फाई का इस्तेमाल करें, तो न्यू एप्प डाउनलोड करते वक्त सावधान रहें.

अब बात करते है कुछ प्रमुख उपायों की . अगर हम नेटवर्क सिक्योरिटी पर काम करने वाले व्यक्तियों की बात माने  तो हमको  एवीजी  नाम के एंटी वायरस टूल को डिवाइस में डाउनलोड करलेना चाहिए  एवीजी एंटी वायरस टूल गैजट की सभी एप्लीकेशंस को स्कैन कर समय-समय पर यूजर को इंफॉर्म करता रहता है,इस तरह यूजर पहले ही अलर्ट हो जाता है और उनका गैजट मेलवेयर का शिकार होने से बच जाता है.इतना ही नहीं बल्कि ये एंटी वायरस  एसएमएस मेलवेयर के शिकार होने से भी बचाता है . इसी के साथ साथ यूजर पासवर्ड डालकर ऐसे एप्लीकेशंस को लॉक भी कर सकते हैं, जिससे उनका डिवाइस हैकर्स से बचाया जा सकता है. 


साथ ही साथ आपको डीवाईस में प्रयोग होने वाले सोफ्टवेयर को भी समय समय पर अपडेट करते रहना चाहिए आजकल स्मार्टफोन और टैबलेट निर्माता कंपनियां इसके फंक्शंस को इंप्रूव करती रहती हैं, उदाहरण के तौर पर अगर आपने कोई डिवाइस दो महीने पहले खरीदा है तो उसमें आज की तारीख में काफी बदलाव आ गए होंगे इसलिए सावधानी इसी में है कि डिवाइस में सिक्योरिटी फीचर्स को अपडेट करते रहें, ताकि नए खतरों से बच सकें.  हालांकि, स्मार्टफोन और टैबलेट अपने आप भी अपडेट होते रहते हैं जिअसे की  आईफोन और आईपैड में आईओएस-5 वर्जन का सॉफ्टवेयर उपलब्ध है. जब यूजर चीप वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट होने लगते हैं, तो यह सॉफ्टवेयर इंफॉर्म कर देता है. 

                           किसी भी मोबाइल डिवाईस की फिजिकल  सिक्योरिटी और टेक्नीकल  सिक्योर्टी दोनों का ही ध्यान रखकर आप उसमे अपने डाटा को सुरक्षित बना सकते है.


Monday, January 2, 2012

"ऑफिस टाइम में चैट और फसबूक करने वाले हो जाये सावधान ...."






 
वो सभी
ऑफिस कर्मचारी ध्यान दे जो ऑफिस में नेट सर्फिंग  करते है , अगर वो सोसिअल नेटवर्किंग  साईट जैसे फेसबुक ,ऑरकुट या फिर चैटिंग में अपना टाइम पास करते है  या  ऑनलाइन गेम खेलते हैं. अगर वो वास्तव में ऐसा कर करते है तो अपनी  इस आदत को दूर करने   की कोशिश करें. वरना बहुत जल्द ही आपके बॉस की  डाट आप पर पड़ने वाली है . क्यों क़ि,ऐसा  सोफ्टवेयर  आ  रहा  है   जो गुप्तचर कि तरह काम करेगा , और आपकी साड़ी किर्या कलापों पर ध्यान रखकर बॉस को सूचित करेगा.अब इसको अभी डीप सोफ्टवेयर कंपनी ने बनाया है  . खासकर वो कर्मचारी जो कि आई टी कंपनी में वर्क करते है या कॉल सेण्टर में जॉब करते है .यह सॉफ्टवेयर  ई-मेल, फोन कॉल, और विडियो  कांफ्रेंसिंग के दौरान आपके हाव-भाव पर नजर रखेगा (.जैसे चित्रों  में दिखाया गया है )


                                             हालाकि सभी कर्मचारी इसका विरोध करना चाएगे मगर क्यों कि आपको अपनी इस  आदत को  दूर करना ही होगा . माइक्रोसॉफ्ट ने भी ऐसे सॉफ्टवेयर को पेश करने का इरादा करते हुए पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया है खबर  तो  यहाँ  तक  है कि  यह सोफ्टवेयर कमर्चारियो  पर निगाह रखकर  उन्हें उनके क्रिया कलापों के अनुसार  पॉजिटिव व निगेटिव मार्क्‍स देगा , जिसका असर कंपनी में आपके प्रोमोसन और सलारी इन्क्रीमेंट पर भी पद सकता है. इस सोफ्टवेयर क़ा नाम  एक्टिविटी मोनिटर दिया गया है , लेकिन इसके बहुत फायदे है जैसे कि  इसके जरिए कोई संस्थान न सिर्फ गुप्त जानकारियों को लीक होने से रोकता है, बल्कि ग्राहकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारियों और ट्रेड सीक्रेट्स को भी बचाए रखता है जैसे कि कुछ संस्थानों में इस सिस्टम से अधिकारियों या सहयोगी कर्मचारियों द्वारा उत्पीड़न को भी रोकने में मदद मिलती है, साथ ही साथ इसके द्वारा गलत  तरीके से किसी डाटा या सॉफ्टवेयर की डॉउनलोडिंग को भी रोका जा सकता है ये टी एक्टिविटी मॉनीटरकर्मचारियों द्वारा विजिट की गई वेबसाइट्स के लॉग पर निगाह रखता है यानी अगर कोई कर्मचारी काम के समय में ऑनलाइन गेम खेलता है, वीडियो देखता है या सोशल नेटवर्किग साइट्स का उपयोग करता है, तो उसकी जानकारी भी ये रखेगा , इस तकनीक से ऑफिस के  काम के दौरान जो लोग फ़ालतू के काम समय बर्बाद करते है अब उनको आसानी से कण्ट्रोल किया जा सकेगा और वो झूठ  भी नहीं बोल पायेंगे .

 मजे कि बात तो ये है कि इस तकनीक में कुछ ऐसे मोड्यूल भी है जिनकी मदद से व्यक्तिगत आईडी से भेजी गई ई-मेल के टेक्सट को भी कैप्चर  कर सकते हैं,और  किसी ने चैटिंग में क्या-क्या बात कीं उस रहस्य क़ा पाता भी लगाया जा सकता  है, इस तरह ऑफिस में आप हमेशा एक जेल में बंद रहेंगे ये सिस्टम एक ही समय में सभी कंप्यूटरों पर न सिर्फ नजर नज़र रखने के साथ ही साथ उनके ऑपरेशन को भी कण्ट्रोल कर सकता है जैसे कि  एक्टिविटी मॉनीटर नेटवर्क कंट्रोलर और मैं इन्चार्गे  को यह परमीसन देता है  कि वह नियंत्रण कक्ष से किसी भी कंप्यूटर को शट डॉउन या सिस्टम को रिबूट कर सकता है, कर्मचारी द्वारा किए जा रहे किसी फालतू के काम को बीच में भी रोका जा सकता है.

                                                 अगर देखा जाये तो ये सोफ्टवेयर काफी हद तक किसी भी संस्था की कार्य विय्वस्था को सुधारने  में काफी हद तक सहायक है .जिसका असर सीधे संस्था की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा . परा यहाँ मै ये भी कहना चाहूँगा  की कुछ संस्थान अपने कर्मचारियों क़ा सही से  काम करने के बाद भी उनका शोषण करते है जो की गलत है जैसे की जब मन चाहे वो कर्मचारियों को निकाल देते है ,कभी कभी तो संस्था अपने फायदे के लिए अपने ही कर्मचारियों से  फर्जी काम भी करवाते है जिससे टैक्स कम देना पड़े  या फिर चेकिंग  के दौरान पकडे ना जाये . सत्यम  सोफ्टवेयर कंपनी क़ा घोटाला इसका एक बड़ा उदहरण है. और भी अनेक इंजीनियरिंग कालिजो में बहुत फर्जीवाड़ा चलता  है जैसे की जायदा टीचर दिखाना रिकॉर्ड में ,उनकी सेलरी नियम के अनुसार दिखाना पर उतनी देते नहीं है .और ना ही उतने अध्यापक होते है उनके पास और ना ही लैब   और वो फिर भी ऍ.आई .सी. टी . की चेकिंग में पकडे नहीं जाते . उन सब क़ा  क्या ? क्या ये सब सही है ? 








Saturday, December 17, 2011

इंजीनियरिंग कोलिजो में में बढती राजनीति , फर्जीवाड़ा और शोषण


आज कल उत्तर प्रदेश में अधिकतर प्राइवेट इंजिनीयरिंग  ग कोलिजो के हालात बहुत ही बेकार हो चुके है , मै ये बात सभी इंजिनीयरिंग कालिजो के लिए नहीं कहा रहा हू . लेकिन अगर इस बात को लेकर  इंजीनियरिंग  कालिजो में एक सर्वे कराया जाये तो ये बात बिलकुल सही निकलेगी , पच्छिम उतर प्रदेश में कुछ कोलिज तो  बिलकुल ही अपनी हद पर उतर आये है, देखिये कहानी कुछ ऐसी है . सबसे पहले शुरवात करते है राजनीति से , आज कल इन कोलिजो को जो माहोल है वो कुछ इस तरह क़ा है की यहाँ पर जो काम करने  कर्मचारी या अध्यापक है उनमे से कुछ माहोल को बिलकुल बिगाड़ कर रख देते है , जैसे की वो नये अध्यापक को किसी ना किसी केश में फसकर निकलवाने की कोशिश , या फिर ऊशका इतना शोषण करते है कि वो बेचारा खुद ही नौकरी छोड़कर चला ज़ाता है. कुछ लोग तो क्लास में भी स्टुडेंट को पढाने में भी इंटरेस्ट नहीं  लेते और उनको इन्टरनल मार्क्स देकर खुश कर देते है जिससे कि स्टुडेंट कोई शिकायत ना करे . या जब कोई स्टुडेंट शिकायत करता है तो इन्टरनल मार्क्स कि धमकी देते है. कुछ लोग चापलूसी वाला माहोल बना देते , वो अपना काम सही से ना करके , कोलिज डाईरेक्टर या हेड कि चापलूसी करते है और दूसरो कि चुगली करते है ताकि  वो खुद कि जॉब बचा सके.ये तो थी बात इन कोलिजो के माहोल क़ी.
                                         अब बात करते है कि क़ी किस तरह से इनमे डाइरेक्टर और चेयरमन पोस्ट के लोग कर्मचारियों  क़ा शोषण करते है , जैसे क़ी इन कोलिजो में देखा ज़ाता है क़ी जैसे कमर्चारी के सेलरी इन्क्रीमेंट क़ी बात आती है ये उसको भरा क़ा रास्ता दिखा देते है या फिर उतना मेंटली हरास्स्मेंट करते है क़ी वो खुद जॉब छोड़कर चला जाये. जब कोई कर्मचारी अपनी कोई समस्या लेकर इन लोगो के पास जाता है तो ये कहते है क़ी आप कही और जॉब देख लीजये . सबसे बड़ी बात आती है सेलरी क़ी जहा तक मरी जानकारी है क़ी नियम के अनुसार किसी भी कर्मचारी महीने  क़ी सेलरी अगले महीने क़ी १० तारीख तक हर हाल में उसको मिल जानी चाहिए .पर ये लोग अगले महीने क़ी २५ तारीख के बाद ही देते है. उस पर भी वियाज खाते है.   

                                         अब बात करते करते है इन  कोलिजो में जमकर हो रहे फर्जीवाड़े क़ी , जैसे क़ी देखा ज़ाता है कि इन कोलिजो को ऐ.आई.सी.टी और सम्बंधित यूनिवर्सिटी के नियमो क़ा पलान करना होता है पर ये इन नियमो कि भी जमकर धज्जिया उडाते है .  जैसे कि ऐ.आई. सी.टी ने हर कोलिज के लिए स्टुडेंट और टीचर क़ा रेसियो निर्धारित कर रखा है और टीचर के सेलरी भी उसकी पोस्ट के अनुसार निर्धारित है ,ये उससे काफी कम सेलरी देते है पर सिग्नेचर उतनी ही सेलरी पर करवाते है जितनी ऐ.आई.सी.टी. के नियम के अनुसार है , कर्मचारी कि मजबूरी है जॉब करना घर जो पलना है बेचारे को, अब देखिये ये लोग क्या करते है ये फर्जी बायोडाटा , और कागज दिखाकर ऐ. आई .से.टी कि आँखों में धुल झोखते है . ऐसे कर्मचारियों  क़ा बायोडाटा और कागज दिखाते है जो इनके यहाँ जॉब करता ही नहीं, अब आप कहोगे ये कागज कहा से आते है तो श्रीमान जी जब ये लोग अपने यहाँ टीचर क़ा रिक्रूटमेंट  करते है और जब उनका साक्षात्कार के लिए बुलाते है तो तो उन्ही में से बायोडाटा और कागजो कि फोटोकॉपी मगाते है  साक्षात्कार के समय पर . अब जिनको  ये सेलेक्ट करते है उनको तो जॉब देते है अपने या और जिनको नहीं करते उनका बायोडाटा और कागज रख लेते है और उनसे कहते है कि बही आप वेटिंग में हो . अबस फिर क्या जब कभी चेकिंग क़ा समय होता है तो उन्ही बायोडाटा या कागजो को दिखा देते है . , इसी तरह क़ा कुछ काम ये लोग स्टुडेंट कि इस्कोलर शिप में से पैसा बचा कर भी करते है . 

                                            अब देखते  है कि ये लोग स्टुडेंट क़ा किस तरह से पागल बनाते है , सबसे पहले तो स्टुडेंट क़ा पागल बनाते है , प्रवेश के  समय पर अपने कोलिजो में ऐसी शुविधाये दिखाते है विज्ञापन में  जो इन कोलिजो में कभी होती ही नहीं है. , फिर स्टुडेंट क़ा पागल बनाते है प्लेसमेंट के समय पर कुछ कोलिज तो फर्जी कंपनी बुलाकर फर्जी प्लेसमेंट करवा देते है स्टुडेंट कि तसल्ली के लिए , जिससे  उसे ये ना लगे कि कोलिज में कंपनी नहीं आई लेकिन जब इनकी जुवायिनिंग क़ा समय  आता है तब स्टुडेंट को असलियत क़ा अहसास होता है  और तब तक वो कोलिज से पास हो चूका होता है . अब कहा गये ऐ.आई .सी.टी. के नियम और कानून कभी कभी तो लगता कि हर कोई एक दुसरे से मिला हुआ है और सब एक दुसरे को सपोर्ट करते है , भले ही उस  से   स्टुडेंट क़ा करियर  ख़राब हो या फिर कर्मचारी कि नौकरी  जाये. इन्हें बस अपने मुनाफे से मतलब है .

नोट  :- पाठकगण कृपया ध्यान दे कि ये बात सभी इंजीनियरिंग कोलिजो पर लागू नहीं होती. कुछ कोलीज ऐसे भी है जहा क़ा माहोल अच्छा है और वो बास्तव में स्टुडेंट क़ा प्लेसमेंट भी कराते है और कर्मचारी को भी अच्छी सुविधाए  देते है . ये लेख मेरी अपनी  धारणा है इन शोषण कर रहे इंजिनीयरिंग कोलिज के बारे में . कुछ कोलिजो के बारे में ऐसा बहुत सुनने में भी आता है और वास्तव में ऐसा है भी . हो सकता है  कि पढने वाला इसको सही ना समझे इसलिए मेरा निवेदन है कि जो कुछ भी मै ने लिखा है उसको विवाद क़ा विषय ना बनाए .













Monday, November 14, 2011

बाल दिवस पर विशेष





हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया ज़ाता है . हमारे देश कि सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि यहाँ नियम क़ानून तो हर चीज़ के लिए बने है पर उनको फोलो करने वाले बहुत ही कम है और कितना फोलो किया ज़ाता है ये तो आप जानते ही हो . जब सुबह सुबह मै कॉलेज की बस में ज़ाता हूँ तो देखता हू कि कुछ लोग कितने गलत तरीके से गाडी को ओवरटेक करते है और रेड लाइट होने पर भी गाडी को निकाल ले जाते है. यातायात पुलिश क़ा चौराहे पर खड़ा एक अकेला कर्मचारी अब रोके भी तो किस किस को रोके. कभी कभी जब दीवान जी भी उसके साथ होते है तो जरूर चालान कट ज़ाता है. यही है भारत के अधिकतर लोगो ई सोच वो अपनी मन मर्जी करते है सारे नियमो को ताख पर रख कर .

इसी तरह के कुछ नियम क़ानून यहाँ पर बाल मजदूरी को लेकर भी बनाए गये है. 15 साल की ऊम्र से कम बच्चे के द्वारा मजदूरी करवाना कानून अपराध है. लेकिन आप किसी भी हलवाई , चाय वाले, होटल, ढाबे पर चले जाये वहा पर अक्सर बाल मजदूर आपको देखने के लिए मिल ही जाते है .हम लोग भी जो बाल मजदूरी के खिलाफ है जब हम चाय वाले की दूकान पर जाते है तो कहते है "ओये छोटू दो चाय ला ".जब हम लोग इन दुकानों के मालिको से मालुम करते है कि बच्चो से क्यों काम करवाते हो तो उनका कहना होता है कि इनके माता पिता ही इनको हमारे पास छोड़कर जाते है. और उनका ये कहना काफी सही भी है. चाहे छोटा सहर हो या बड़ा बाल मजदूर आपको हर जगह देखने को मिलते है. मै अक्सर कूड़े के ढेर से छोटे छोटे बचो को प्लास्टिक की चीज़े और पन्नी या पोलिथीन छांटते हुए देखता हू ओन्नके पैरो में ना तो चप्पले होती है और ना ही वो गंदगी की परवाह करते बस अपने काम में लग जाते है . इसी तरह से आपको बसों में छोटे छोटे बच्चे , पानी की बोटेल, मूंगफली, खीर , गोला, दाल आदि बेचते हुए भी दिखाई देते होंगे. कुछ बच्चे तो बसों में गाना गाकर पैसे लेते है .ये सब उनकी मजबूरी है साहब . सोचता हू की क्या इन बच्चो को और बच्चो की तरह खेलने और अपने बचपन को जीने क़ा हक़ नहीं ? क्या इनको स्कूल जाने क़ा हक़ नहीं? जब हम इन सब सवालों क़ा जवाबा इनके माता पिता से मागते है तो उनकी आँखों में आसू आ जाते है वो कहते है की साहब हम गरीब लोग है अगर इनको काम पर ना भजे तो हम पेट कैसे भरेंगे?


तो कुल मिलाकर अंत में बात आती है गरीबी पर ये अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है जिसका जायदा जिकर मै यहाँ नहीं करूंगा पर इतना जरूर कहूँगा की जब तक हमारे देश में ये गरीबी रहेगी तब तक ये बच्चे एक खुशाल बचपन नहीं जी पायेंगे और ना ही पढ़ लिख पायेंगे सही से. गरीब माँ बाप भी अपने बच्चो के लिए कहते है कि
" मेरे बच्चे भी अपनी गरीबी की समझ रखते है , तभी तो घर के वर्तनो को ही अपना खिलौना बना लेते है ".
---मनोज बिजनौरी

Wednesday, November 9, 2011

ऊर्जा बचाने में अब ये चिप आपकी मदद करेगी


ऊर्जा का बढता प्रयोग आज हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा बन गया है . हमारे दैनिक जीवन के अधिकतर काम आज के समय में बिजली से चलने वाले यंत्रो की मदद से किये जाते है.इसलिए ऊर्जा का अपना एक विशेष महत्व है . जिसको बनाने के लिए तरह तरह के साधन और तकनीको को विकसित किया जा रहा है. जिनमे बड़े स्तर नदियों पर बाँध बनाकर बिजली उत्पन्न करना तो पहले से ही है .

इसके अतिरिक्त बड़े स्तर पर नाभिकीय रिएक्टर बनाकार परमाणु ऊर्जा के द्वारा बिजली उत्पन्न करना भी एक अहम् कदम है . अगर हम छोटे स्तर पर बात करे तो , बिजली बनाने के लिए डीजल इंजन , पेट्रोल इंजन आदि भी बनाए गये. और साथ ही साथ सेल बेटरी बनाकर रासायनिक क्रिया द्वारा बिजली बनाना भी आम तौर पर प्रयोग होता है.

धीरे धीरे फिर बारी आई सौर ऊर्जा की मानव ने सूरज की रौशनी क़ा प्रयोग करके भी बिजली बना डाली . इतने सब आविष्कार किये गये बिजली को बनाने के लिए फिर भी आज इसकी कमी महसूस होती है . कितना अच्छा होगा कि हम आज के समय में ऊर्जा के बड़ते उपयोग को देखकर ऐसी तकनीको को प्रयोग करे जो कि ऊर्जा को बनाने में हमारी मदद करे. इस दिशा में एक ऐसी चिप बनायी है

भारतीय मूल के एक अमेरिकी वैज्ञानिक राज दत्त जी ने , जो न सिर्फ ऊर्जा बचाएगी, बल्कि उपलब्ध चिप्स की तुलना में सस्ती भी पड़ेगी.इस चिप की खासियत को ऐसे समझा जा सकता है कि इसकी मदद से प्रोसेसर 90 फीसदी कम ऊर्जा खर्च करेंगे.साथ ही उनकी रफ्तार में 60 परसेंट कि तीव्रता आ जायेगी .

इस तकनीक की खास बात यह है कि सेमीकंडक्टर चिप पर सूचनाओं का ट्रांसफर फोटांस के जरिए होगा.अभी तो इस काम को करने के लिए इलेक्ट्रांस का प्रयोग हो रहा है. पावर कंजंप्शन के नजरिये से तो यह बहुत उपयोगी है ,फोटॉन से सूचनाओं के आदान प्रदान से इतनी हीट उत्पन्न नहीं होती इस कारण प्रोसेसर को ठंडा बनाए रखने के लिए ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ेगी. और इस तरह यह ऊर्जा कि खपत में कटौती करके ऊर्जा बचाएगी . इलेक्ट्रॉन केंद्रित तकनीक में पुर्जो को ठंडा बनाए रखना जरूरी होता है

.इसके साथ ही एक चिप में ट्रांजिस्टर्स की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. पर इसका असर इसकी स्पीड पर पास सकता है .यह चिप अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान पेंटागन को उपयोगी लगी है और वो जल्द ही इसका इस्तेमाल अगली पीढ़ी के ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर विमान एफ-35 में करने जा रहे है. राज दत्त जी अब पेंटागन से करार करने के बाद इसे सामान्य उपयोग के लिए भी इस चिप को उपलब्ध कराने की सोच रहे हैं. अब देखना है कि कब तक मार्केट में आने वाले यंत्रो में इस चिप क़ा प्रयोग होता है .और कब हम ऊर्जा बचा पते हैं.

Wednesday, October 26, 2011

शुभ दीपावली !!

सभी पाठकगणों और भारतवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !!