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Thursday, February 16, 2017

Internet of Things - A Network of Physical Objects



What is Internet of Things ?



"इन्टरनेट ऑफ़  थिंग्स" मतलब "Network of Physical Objects ( Things, Devices) "। वर्तमान में "इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स" बेहद ही  रोचक विषय बना हुआ है।  यह एक आधुनिक शोध का क्षेत्र है।

इस क्षेत्र में हो रहे  शोध आने वाले समय में हमारी जीवन शैली को बिल्कुल ही बदल देगे। जरा सोचिये कि जब आप अपने ऑफिस के रूम में या घर पर अपने रूम में जाते हो और लाइट,एयर  कंडीशनिंग स्वयम से एडजस्ट हो जाये।  यह एक छोटा सा उदाहरण था।  असल में इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स विभिन्न प्रकार की फिजिकल  डिवाइस, ऑब्जेक्ट्स आदि का एक ऐसा नेटवर्क है  जिसकी मदद से इस नेटवर्क में  जुडी डिवाइस अपने  डाटा को  डिजिटल रूप में परिवर्तित परिवर्तित करके एक दुसरे के साथ आपस में कम्यूनिकेट कर सकती हैं और इनको इन्टरनेट से जोड़ा जा सकता है । 

कहने को तो इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स एक नया क्षेत्र है लेकिन इसकी शुरुवात RFID के समय से ही हो चुकी है। यदि हम अपने घरो में प्रयोग होने वाली मशीनों जैसे A C., वाशिंग मशीन , T.V,फ्रीज़ , आदि को एक यूनिक एड्रेस दे दे तो हम इनको सेंसर  टेक्नोलॉजी एवम वायरलेस नेटवर्क की मदद से आपस में कनेक्ट कर सकते हैं। एवं इन सभी मशीनों को कंप्यूटर की मदद से ऑपरेट कर सकते हैं।  बस यही से कुछ शुरुवात हुयी इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स की।  

जब भी को नया आविष्कार होता है या कोई नयी तकनीक प्रयोग में आती है तो उसके पीछे एक सोच होती है , वो तकनीक जिसे अब लाखो करोडो लोग इस्तेमाल कर रहे हैं , कभी न कभी  किसी का सिर्फ एक आईडिया मात्र थी। साथ ही साथ उस सोच के साथ होते हैं मानव मष्तिष्क में उमड़ते अनगिनत सवाल।  ऐसा  ही कुछ इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स के साथ है। जहा एक सोच है कि अगर हम अपने दैनिक जीवन में उपयोग में आने वाली मशीनों को कनेक्ट कर सकते हैं ? यदि हाँ तो कैसे ? किस प्रकार का वायरलेस नेटवर्क बनाये जिसमे इनको जोड़ा जा सकते और इनके बीच कम्युनिकेशन हो सके ? वर्तमान में इन्टरनेट का जो ढांचा , जो इंफ्रास्ट्रक्चर है उसमे  किस तरह से सुधार किये जाये कि  इन सभी मशीनों को इन्टरनेट से जोड़ा जा सके ?  इन सभी मशीनों को वायरलेस एनवायरनमेंट में पावर सप्लाई कैसे दी जा सके ? इस तकनीक को कॉस्ट इफेक्टिव कैसे बनाया जा सके ?

internetofthings


इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स  के विकास के लिए इस प्रकार के सवालो को हल करना , उनका उपाय ढूँढना उस उपाय को वात्सव में इम्पलीमेंट करना बेहद जरूरी है।  काफी सवालो का हल मिल चूका है , कुछ का अभी बाकी हैं। वर्तमान में हम जो इन्टरनेट प्रयोग करते हैं उसमे जुड़े सभी कंप्यूटर को 32 Bits का एक यूनिक  Internet Protocol (IP)  एड्रेस दिया जाता है। जो  IPV4 ( Internet Protocol Version 4 ) प्रोटोकॉल की संरंचना के अनुरूप है।  वर्तमान में इन्टरनेट के बढ़ते उपयोग के कारण समस्या यह आ रही है कि IP Address सिमित हो चुके हैं। उनकी उपलब्धता कम होती जा रही है।  ऐसे में हमको Internet Protocol Version 6 (IPV6) यह सुविधा प्रदान करता है कि इसमें  IP Address 128 Bits का होता है, इसका मतलब है कि 2 128    IP Address. 


यानी कि हम कई लाखो करोडो मशीनों को एक यूनिक इन्टरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस असाइन  कर सकते हैं । वर्तमान में काफी इलेक्ट्रॉनिक कंपनी वाई फाई एवम सेंसर टेक्नोलॉजी की मदद से मशीनों को, डिवाइस को आपस में कनेक्ट कर रही  हैं। मोबाइल डाटा कवरेज को हाई इन्टरनेट स्पीड की मदद से सुधारा  गया है। वायरलेस एनवायरनमेंट में पावर सप्लाई की समस्या से निपटने के लिए बैटरी टेक्नोलॉजी  में सुधार किये गए हैं और इन मशीनों में पावर सप्लाई के लिए  सोलर सिस्टम को इनबिल्ड किया गया है।   

आने वाले कुछ सालो इन हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली अधिकतर मशीनों को, फिजिकल ऑब्जेक्ट्स को  इन्टरनेट से जोड़ा जा सकेगा , CISCO's Internet of Things Group ( IOTG) के अनुसार सं 2020 तक 50 Billion Physical Objects को आपस में जोड़ा जा सकेगा। 


Keywords: Internet , Things, Physical objects, Network, Iotg, Ipv6


  
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