Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Friday, May 1, 2015

नहीं मुझे स्वीकार तुम्हारी ये करनी !

SHARE
मुझे केंद्र  सरकार के कामकाज से कोई ऐसी शिकायत नहीं है।  कुछ कार्य  जरूर प्रसंशा करने योग्य हैं  । किन्तु मैं किसी भी हाल में नए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का समर्थन नही करुगा।  ये सब एक छल है और कुछ नहीं।

आज मजदूर दिवस के अवसर पर गरीब मजदूर एवं  किसान भाईयो की आवाज़  बनती ये कविता  कुछ कहती है सरकार से। यह कहती है प्लीज हमसे हमारी रही सही सम्पत्ति हमारी जमीन जिससे हम अपना पेट पालते हैं खेत में म्हणत मजदूरी करके उसको हमसे मत छीनो . सत्ता के नशे में चूर होकर ऐसा मत करो इनके साथ घमंड का क्या है रावण का हो या आपका आखिर टूटता  जरूर है   ऐसा मत करो इनके  साथ मत करो  ! भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर  ये व्यंग्य कविता -

 इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है! 
किसान भाईओ हम सब पर क्यों कर रही  अत्याचार है !!

बड़े घरानो से पैसे लेकर 6  हज़ार करोड़ रूपये  चुनाव में लगाये हैं !
इन अहसानो की खातिर नया भूमि अधिग्रहण अध्यदेश लाये हैं !!

ये भी खुश हैं वो भी खुश हैं , बस हम पर पड़  रही  मार है !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है !!

रोजगार और विकास का झांसा देकर जमीन हड़पने आये हैं !
करोड़ो अरबो की जमीन, हज़ारो  लाखो में हमसे लेने आये हैं  !!

क्यों उद्योगपतियों के हाथ की ये कठपुतली बनने को तैयार है !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है !!

चलो मान लिया की ये  उद्योग लगाकर विकास करना चाहते है !
 भूमाफिया ,नेताओ की फर्जी जमीन का अधिग्रहण क्यों नही कराते हैं !!
उनको कुछ नहीं कहते , बस हमारा कर रहे बंटाधार हैं !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है !!

किसान की आत्महत्या देखकर भी क्यों शर्म इन्हे नही आती है !
अपनी धून में मस्त होकर बस नया अध्यादेश लाना चाहती  है !! 

हम करे तो आखिर क्या करे ? इनकी वजह से हम मरने को लाचार हैं !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार  है !!

आज एक गजेन्द्र मरा  है, कल और  भी बहुत से मर जाएंगे !
पर ये निर्दयी निष्ठुर नेता फिर भी बाज ना आएंगे !!

हमारे पेट पर लात  मारकर, ये बढ़ा रहीं उनका व्यापार है !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है  !!


आज किसान हर तरफ से सदमे में है। एक तो मौसम की मार से बर्बाद हुयी किसान की फसल और ऊपर से ये सरकार इस कदर सितम ढा रही है की बेचारा किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। लेकिन देखा जाए तो ये आत्महत्या नही बल्कि किसानो का कत्ले आम है। क्या औधोगिक  विकास के लिए किसानो का कत्लेआम जरूरी है ?  सरकार अपनी जिद पर अड़ी रह कर क्यों एक नया जलियावाला बाग़  कांड  खड़ा करना  चाहती है ?

7 comments:

  1. किसान जो रीड़ हैं देश की आज उनके हालात पर कोई भी सुनना नहीं चाहता .. शर्म की बात है ...
    बहुत ही लाजवाब व्यंग है किसान, मजदूर का दर्द समेटे ...

    ReplyDelete
  2. आपका कथन बिल्‍कुल सही है। हमें परेशान किसानों के साथ खड़े होना ही चाहिए।
    http://ourayurvedicmedicine.blogspot.com

    ReplyDelete
  3. आपका कथन बिल्‍कुल सही है। हमें परेशान किसानों के साथ खड़े होना ही चाहिए।
    http://ourayurvedicmedicine.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. बहुत सार्थक और सटीक प्रस्तुति...

    ReplyDelete
  5. मनोज आपने तो मोदी सरकार को आईना एकदम साफ करके दिखा दिया। आपकी भावनाएं बहुत ही प्रसँसनीय हैं।

    ReplyDelete
  6. सब दिखेगा अभी तो पर्दा खिसकना शुरु हुआ है
    नाटक शुरु होने से पहले ही निपटना शुरु हुआ है ।

    बहुत सुंदर ।

    ReplyDelete
  7. सभी पाठकगणो का शुक्रिया !

    ReplyDelete

अगर आपको पोस्ट पसंद आये तो कृपया ब्लॉग का अनुसरण करें और पोस्ट पर टिप्पणी के रूप में अपने सुझाव दे !

Recent Posts