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Tuesday, July 14, 2015

सबसे छोटा सुपर कन्डक्टर

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  "Smallest Super Conductor "


" वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा सुपरकंडक्टर विकसित किया है। इसमें अणुओं के चार जोड़े हैं और यह एक नैनोमीटर (एक मीटर में एक अरब नैनोमीटर होते हैं) से भी छोटा है। ओहियो विश्वविद्यालय (ओयू) में हुए अध्ययन में पता चला है कि इस सूक्ष्म सुपरकंडक्टर का उपयोग बेहद सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऊर्जा प्रदान करने वाले यंत्र बनाए जा सकते हैं। "

क्या होता है सुपर कंडक्टर ? 


वैज्ञानिको ने छोटे से छोटे सुपर कन्डक्टर बनाने में भी सफलता हासिल कर ली है । आओ सबसे पहले जानते है कुछ सुपर कन्डक्टर के बारे में क्या होता है सुपर कन्डक्टर । "सुपर कन्डक्टर को अतिचालक पधार्थ भी कह जाता है ये वो पद्राथ होते है जो पदार्थ अत्यन्त कम ताप पर पूर्णतः शून्य प्रतिरोधकता प्रदर्शित करते हैं। उनके इस गुण को अतिचालकता (Superconductivity) कहते हैं। शून्य प्रतिरोधकता के अलावा अतिचालकता की दशा में पदार्थ के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र भी शून्य हो जाता है जिसे मेसनर प्रभाव (Meissner Effect) के नाम से जाना जाता है"


छोटे सुपर कंडक्टर  का महत्व 



वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा सुपरकंडक्टर विकसित किया है। इसमें अणुओं के चार जोड़े हैं और यह एक नैनोमीटर (एक मीटर में एक अरब नैनोमीटर होते हैं) से भी छोटा है। ओहियो विश्वविद्यालय (ओयू) में हुए अध्ययन में पता चला है कि इस सूक्ष्म सुपरकंडक्टर का उपयोग बेहद सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऊर्जा प्रदान करने वाले यंत्र बनाए जा सकते हैं। इस अध्ययन की अगुवाई करने वाले भौतिकी के प्रोफेसर साव-वाय हला ने कहा कि "शोधकर्ता मानते रहे हैं कि धातु चालकों का प्रयोग करके बहुत सूक्ष्म यंत्र बनाना लगभग असंभव है क्योंकि तार का आकार बहुत छोटा होने के कारण प्रतिरोध बढ़ता है। साव के अनुसार "बहुत सूक्ष्म तार बहुत जल्द गर्म हो जाते हैं और ये पिघलकर नष्ट हो सकते हैं। यह समस्या सूक्ष्म यंत्र बनाने में सबसे बड़ी बाधा है।" दरअसल सुपरकंडक्टर वाले पदार्थ ज्यादा विद्युत प्रवाहित करने में सक्षम होते हैं और इसमें बिजली की कमी और गर्म होने का भी खतरा नहीं रहता। इस समय इनका उपयोग सुपर कंप्यूटर से लेकर ब्रेन इमेजिंग उपकरणों में हो रहा है।

सुपर कंडक्टर ( अतिचालक पदार्थो )  की विशेषतायें 


अतिचालकों में ताप के साथ प्रतिरोधकता का परिवर्तन से ये पता लगता है  कि धात्विक चालकों की प्रतिरोधकता उनका ताप घटाने पर घटती जाती है। किन्तु सामान्य चालकों जैसे ताँबा और चाँदी आदि में, अशुद्धियों और दूसरे अपूर्णताओं (defects) के कारण एक सीमा के बाद प्रतिरोधकता में कमी नहीं होती। यहाँ तक कि ताँबा (कॉपर) परम शून्य ताप पर भी अशून्य प्रतिरोधकता प्रदर्शित करता है। इसके विपरीत, अतिचालक पदार्थ का ताप क्रान्तिक ताप से नीचे ले जाने पर, इसकी प्रतिरोधकता तेजी से शून्य हो जाती है। अतिचालक तार से बने हुए किसी बंद परिपथ की विद्युत धारा किसी विद्युत स्रोत के बिना सदा के लिए स्थिर रह सकती है।

अतिचालकता एक प्रमात्रा-यांत्रिक दृग्विषय (Quantum Mechanical Phenomenon.) है। अतिचालक पदार्थ चुंबकीय परिलक्षण का भी प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। इन सबका ताप-वैद्युत-बल शून्य होता है और टामसन-गुणांक बराबर होता है। संक्रमण ताप पर इनकी विशिष्ट उष्मा में भी अकस्मात् परिवर्तन हो जाता है।यह विशेष उल्लेखनीय है कि जिन परमाणुओं में बाह्य इलेक्ट्रॉनों की संख्या 5 अथवा 7 है उनमें संक्रमण ताप उच्चतम होता है और अतिचालकता का गुण भी उत्कृष्ट होता है।

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2 comments:

  1. बहुत उपयोगी जानकारी प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

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