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Tuesday, June 23, 2015

लो जी बन गया पानी से चलने वाला इंजन - Water Engine !

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अरे ओ छोटू। 

हाँ चाचा। 

कछु सुनत रहो की नाय ?

का चाचा का भयो ?

अरे हम सुनत रहे कि वैज्ञानिको ने अब पानी से चलने वाला इंजन भी बना लिया है। 

चाचा अगर सच में ऐसा है तो फिर तो  पानी से चलने वाले वाहन  भी सड़क पर दौड़ते  नज़र आयेगे लेकिन जब तक ऐसे वाहन भारतीय बाज़ार में आयेगे तब तक फिलहाल यही कह सकते है कि "कब मरेगी सासु और कब निकलेगे आसूं"। 

हां शायद ऐसा ही होगा। 


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आज हम जो कल्पना करते हैं अब से कुछ सालो बाद वो सच हो जाता है। जिसको सच करता है विज्ञान। समय के साथ साथ विज्ञान के  कारण हर असंभव  काम संभव सा होता नज़ारा आ रहा है।  चाहे वो कम्प्यूटर और सुचना संचार के क्षेत्र में हो  या चिक्तसा के क्षेत्र में या ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में या फिर शिक्षा के क्षेत्र में।  आज   हम एक कल्पना करते हैं और डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों  को देखकर कहते हैं की काश  वाहन भी पानी से चला करते।  क्या ऐसा हो सकता है ? भविष्य में ऐसा हो सकता है या नही ये तो अभी नही कहा जा सकता लेकिन कुछ हद तक  वैज्ञानिक अपने इस प्रयास के काफी करीब पहुंच गये  हैं।  


 अभी हाल ही  में कोलंबिया  यूनीवर्सिटी के इंजीनियर्स  ने  एक ऐसा ही अनोखा इंजन बनाया है जो की पानी और बैक्टीरिया की मदद  से चलता  है।  इस इंजन को चलाने के लिए ऊर्जा बैक्टीरिया  से मिलती है।   जब इंजन में भरे पानी के तापमान में बदलाव आता है तो उससे वाष्प बनने लगती  है और इस  वाष्पीकरण के कारण बैक्टीरिया  के साइज में बदलाव  आने  लगता   है।  इस इंजन को बनाने वाली   टीम  के हेड  और कोलंबिया यूनीवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर Ozgur Sahin के अनुसार बैक्टीरिया पर वर्षो की रिसर्च के बाद उन्होने यह पाया की बैक्टीरिया आद्रता के प्रति संवेदनशील होते  हैं।  आद्रता कम  होने    पर बैक्टीरिया सिकुड़ने  लगते  हैं जबकि  आद्रता बढ़ने पर इनका   आकार  भी बढ़ने  लगता है।  पानी के वाष्पीकरण के कारण  बैक्टीरिया के आकार  में  होने  वाले परिवर्तन   से ऊर्जा उतपन्न  की जा सकती   है।  इसी  सिद्धांत  पर वैज्ञानिको  ने इस इंजन को बनाया है।  

Ozgur Sahin ने इस प्रकार का अभी एक छोटा सा इंजन बनाया हैं जो की चित्र में दिखाया गया है इसकी लम्बाई लगभग 5 इंच है और इससे 1.8 माइक्रोवॉट की ऊर्जा उतपन्न की जा सकती है। Ozgur Sahin  का कहना है  की भविष्य में इस इंजन की क्षमता को बढ़ाकर इसका  उपयोग बड़े वाहनो को चलाने और इलेक्ट्रॉनिक यंत्रो को चलाने के लिए ऊर्जा उतपन्न करने में भी किया जा सकता है।  इनका यह शोध कार्य " Nature Communication Journal" में हाल ही में प्रकाशित हुआ है।  इस इंजन की एक छोटी सी वीडियो आप निचे  गये  लिंक  पर क्लिक करके भी देख सकते हो। 


Reference : www.nature.com

Paper Titile : " Scaling up nanoscale water-driven energy conversion into evaporation-driven engines and generators"

6 comments:

  1. चलिये पानी से पानी लेकर पानी में चलेगी नाव :)

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  2. अगर यह योजना मूर्तरूप ले पाई तो मानवता के लिए वरदान साबित हो सकती है!

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  3. अभी हाल ही में कोलंबिया यूनीवर्सिटी के इंजीनियर्स ने एक ऐसा ही अनोखा इंजन बनाया है जो की पानी और बैक्टीरिया की मदद से चलता है। इस इंजन को चलाने के लिए ऊर्जा बैक्टीरिया से मिलती है। जब इंजन में भरे पानी के तापमान में बदलाव आता है तो उससे वाष्प बनने लगती है और इस वाष्पीकरण के कारण बैक्टीरिया के साइज में बदलाव आने लगता है। इस इंजन को बनाने वाली टीम के हेड और कोलंबिया यूनीवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर Ozgur Sahin के अनुसार बैक्टीरिया पर वर्षो की रिसर्च के बाद उन्होने यह पाया की बैक्टीरिया आद्रता के प्रति संवेदनशील होते हैं। आद्रता कम होने पर बैक्टीरिया सिकुड़ने लगते हैं जबकि आद्रता बढ़ने पर इनका आकार भी बढ़ने लगता है। पानी के वाष्पीकरण के कारण बैक्टीरिया के आकार में होने वाले परिवर्तन से ऊर्जा उतपन्न की जा सकती है। इसी सिद्धांत पर वैज्ञानिको ने इस इंजन को बनाया है।
    बेहतर जानकारी

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  4. कवि की कल्पना और विज्ञान मिल जाये तो क्या बात है

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  5. सभी पाठकगणों का शुक्रिया

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  6. इसका मानव जाती को बहुत उपयोग होगा।

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