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Wednesday, January 2, 2013

फूलो को खिलने दो

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खिलते हुए फूलो का अभी और खिलना बाकी है !
इनके रंगों की सुन्दरता का अभी और चमकना बाकी है !!
इनकी लहलहाती हुई बहारो का अभी और निकलना बाकी है !
मत तोड़ो इनके सपनो को , इनकी हसरतो का अभी और महकना बाकी है !!
आओ मिलकर सहयोग करे इनके सपनो को पूरा करने में !
इनके सपनो को अभी ऊचाईओ को छूना बाकी है !!
गौर से देखो इनकी नयी नयी उमंगो को ,ये कहती है मुझे खिलने दो क्यों की
मेरे साथ कुछ बूढी आखों का सपना बाकी है !
ये कहती है अभी हमको बुद्धि और ज्ञान का दीप जलाना है !
खुशहाली हो सदा यहाँ पर , हमे जंगलराज को मिटाना है !!
न रहे कोई दानव यहाँ पर हर तरफ रौशनी हो शिष्टाचार और स्वाभिमान की !
आओ हम सब दुआ करे इसके लिए , अभी चमन में इन्ही उम्मीदों को पूरा होना बाकी है !!
फूलो को खिलने दो अभी इनका और खिलना बाकी है !!

                                            ------ इनकी खुशियों के नाल मनोज

8 comments:

  1. आशा जगाती हुई रचना बधाई

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  2. सार्थक अभिव्यक्ति व् सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

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  3. शायद इसी एक उम्मीद पर दुनिया कायम है।

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  4. सुनील जी , शालिनी जी ,शिखा जी, पल्लवी जी बहुत बहुत आभार आप सभी का !काश हमारे देश के कुछ लोग इस बात पर अमल कर
    पाते तो भ्रूण हत्या , रेप जैसे अपराध नहीं होते !

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  5. प्रासंगिक संवेदनाओं से जुड़े भावों अनुभावों की सहज अभिव्यक्ति हुई है रचना में .

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  6. इस प्यार को नया आयाम देती आपकी ये बहुत उम्दा रचना ..भाव पूर्ण रचना .. बहुत खूब अच्छी रचना इस के लिए आपको बहुत - बहुत बधाई

    मेरी नई रचना

    खुशबू
    प्रेमविरह

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  7. सभी पाठकगणो का शुक्रिया !

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