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Tuesday, March 31, 2015

फैक्ट्रियों में इंसानो की जगह बायोनिक चीटियाँ करेगी काम ! A Research Report on Bionic Aunts


                                 "बायोनिक चीटीँयो और तितलियों ने की शुरुवात "

अरे ओ छोटू। 

हाँ चाचा। 

कछु सुनत रहो की नाय ?

का चाचा ? का भयो ?

अरे हम सुनत रहे की आने वाले समय में फैक्ट्रियो में इंसानो की जगह चीटियाँ काम किया  करेगी। 

Research report on Bionic aunts in hindi, Bionic aunts will work in factory,definition of bionic aunts, introduction to swarm intelligence in hindi
चाचा ये तो होना ही था क्यों कि  काम करने के मामले में  चीिटयां इंसान से कहीं ज्यादा समझदार और मेहनती होती हैं।  उनको टीम में काम करना अच्छे से आता है। जबकि इंसान  अपनी टीम के सदस्यों कि ही टाँगे खीचने में लगे रहते हैं तो रिजल्ट कहा से देंगे  ?

हाँ शायद ऐसा ही होगा। 

दोस्तों ऊपर लिखी लाइन को पढ़कर  चौकना मत क्यों कि आने वाले समय में फैक्ट्रियो में काम करने वाले  इंसान की  जगह चीटियाँ  लेने वाली हैं। बस अंतर इतना है कि ये चीटियाँ मानव द्वारा निर्मित रोबोट्स  हैं। जिनको बायोनिक चीटियाँ भी कहते हैं। आपने अपने अपने घरो में अक्सर चीटीँयो  की कतरो को देखा होगा उनको गौर से देखने पर आप पायेगे कि चीटीँयो को टीम में काम करने कि कला बहुत अच्छे से आती है।  जिसकी वजह से चीटियाँ अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेती हैं।  चीटियों के इसी गुण से प्रेरित होकर अंट कॉलोनी (  सुवारम् इंटेलिजेंस  तकनीक जिसका उपयोग साइंटिस्ट कई क्षेत्रो में गुणवत्ता लाने के लिए नए प्रोटोकॉल और ऍप्लिकेशन्स बनाने के लिए कर रहे हैं )  तकनीक का प्रयोग करके रोबोट बनाने वाली एक जर्मन इंजीनियर्स कंपनी फेस्टो ने आकार में  आदमी के हाथ के बराबर जितने रोबोट  बनाये हैं। जो बहुत ही तेजी से काम करते हैं। 


शोधकर्ताओं का कहना है ये काम करते समय ये रोबोट अपने अपने दवरा किये गए कार्यो के बारे में एक दुसरे को सुचना आदान प्रदान करते हैं और फिर  इन सूचनाओ के आधार  पर ही कोई निर्णय लेते हैं और  अपने काम को आगे बढ़ाते हैं ताकि  ये एक निर्धारित लक्ष्य  को पूरा कर सके।  इस प्रकार  ये रोबोट टीम भावना से काम करते हैं। ये रोबोट्स दिखने में बिलकुल चीटियों की तरह हैं। जिनमे कुछ इलेक्ट्रिक  सर्किट  और रेडियो मॉडूयल  लगे हुए हैं जिनकी वजह से ये एक दुसरे को सूचना का आदान प्रदान कर सकते हैं।  इनके सिर में 3D स्टीरियां कैमरा फिट है जो उन्हें दूसरी चींटियों को देखने तथा अपने लक्ष्य को पहचानने में इनकी मदद करता है। इनमें लगे सेंसर्स इन्हें आसपास के कीड़ों को पहचानने में मदद करते हैं। इस प्रकार इनमे  वायरलेस प्रणाली की मदद से क्रियाएं संचालित होती हैं। निचे  दिए लिंक पर क्लिक करके आप यू ट्यूब  पर इनके वीडियो को देख सकते हैं। 




इसी तरह इस कंपनी के  शोधकर्ताओं  ने कुछ रोबोटिक तितलियों को भी  बनाया  है । यह एक छोटे पैमाने पर किया गया प्रयोग था। अभी फैक्ट्रियो में इंसानो की जगह लेने में बायोनिक   चीटियों और तितलियों  को  बहुत वक़्त (कई वर्ष  ) लगेगा। 

Keywords: Bionic Ants, Swarm Intelligence, Ant Colony , Festo

Sunday, March 29, 2015

रेल विभाग ने तो हद ही कर दी !


दोस्तों मैं ऐसी पोस्ट लिखने का आदि नही हुँ जिसमे मैं किसी व्यक्ति विशेष , विभाग, सरकार या किसी पार्टी के प्रति रोष व्यक्त करू। लेकिन जब ऐसी खबरे सुनने में आती है जिनसे आम आदमी को, गरीब आदमी को न सिर्फ परेशानी होती है बल्कि उसके गरीबी के जख्म हरे हो उठते हैं , तो दिल एक आघात लगता है , एक पीड़ा उठती है और गुस्सा भी आता है। ऐसे में शब्दों को लिखने से रोक नही पता कल एक खबर पढ़कर बहुत पीड़ा हुयी जो इस पोस्ट में शब्द बनकर फूटी है।पर क्या कर सकते हैं कुछ नही जिसकी लाठी उसकी भैंस। हम लोगो बचपन से झेलने कि आदत पड़ गयी है , अभी भी झेल रहे हैं और आगे भी झेलेंगे लेकिन आखिर कब तक जब तक हम इन सबके खिलाफ आवाज़ नही उठायेगे तब तक ये हमको ऐसे ही सताते रहेंगे ! 


मैं ने भी मोदी जी को यही सोचकर वोट दिया था की शायद इनकी सरकार आने पर महंगाई कम होगी , आम आदमी को राहत मिलेगी लेकिन सरकार बने 1 साल होने को जा रहा है। इस सरकार के अभी तक कार्य और वर्ताव को देखकर मैं यही कह सकता हूँ की ये सरकार पूंजीपतियों को मालामाल और गरीबो को बेहाल करने वाली सरकार है। एक ओर जहा नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लेकर इस सरकार ने किसानो के पेट पर लात मारने की ठान रखी है। वही दूसरी और रेलवे ने आम आदमी का इतना सता रखा है की मत पूछिये पिछले 10 महीनो में रेलवे ने जितना किराया बढ़ाया है उतनी महंगाई ओर किस ने नही बड़ाई। जहा एक तरफ रेलवे विभाग ट्रेनों में बढ़ती लूट मार को रोकने में बुरी तरफ असफल है। वही दूसरी ओर ट्रेनों में खाने पीने की चीज़ो के दाम आसमान छु रहे हैं।
                      

कल दैंनिक जागरण में एक पोस्ट पढ़ी तो सुनकर धक्का लगा , गुस्सा तो बहुत आया , दुःख भी बहुत हुआ पर कुछ नही कर सकते हम जैसे आम आदमी बस इस महगाई को झेलने के अलावा। कल खबर पढ़ी की "भारतीय रेल अब सभी मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में प्रीमियम टिकट की तरह ही डायनमिक किराया सिस्टम लागू करने कह तैयारी कर रही है। मोहम्मद जमशेद की अध्यक्षता वाली समिति ने रेलवे से यह सिफारिश की है। अगर यह सिफारिश लागू हो गई तो हवाई जहाज की तरह सभी मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों का किराया बुकिंग के साथ बढ़ता जाएगा, यानी जितनी सीटें कम होती जाएंगी, किराए में बढ़ोतरी होती जाएगी। गौरतलब है कि यह व्यवस्था कुछ ट्रेनों में पहले से ही लागू है।" 


ये सब क्या हो रहा है ? क्यों बना वजह पैसे बड़ा रहे हो ? रेलवे विभाग बिलकुल बनियागिरी पर उत्तर आया है . आये दिन किसी न किसी चीज़ के बहाने जनता को सताने में लगा हुआ है। जबकि सुरक्षा के नाम पर "निल बटे सन्नाटा" . चुप्पी साध लेता है। कोई पुख्ता कदम नही न ही कोई पुख्ता इंतज़ाम .ये कहा का इन्साफ है कि अगर सीटें कम हुयी तो आप किराया ज्यादा लोगे। तत्काल टिकट के बहाने बड़े हुए 100 रूपये लेते तो हो , प्रीमियम टिकट के बहाने के कामयी आपने शुरू कर ही दी है। अब ये एक कमी ओर बची थी कि सीटें कम हो तो किराया भी ज्यादा लगेगा ये भी पूरी कर दी। सच कहूँ तो बिलकुल अंधाराज चला रखा है। सभी सरकारी संस्थाओ और विभागों में म्ख्यता शुल्क दर कम ही रखी जाती है जिससे जनता को दिक्कत न हो , ये विभाग जनता कि सुविधा देख रेख के लिए बने हैं।  पर अब तोहद मचाकर रखी है। मैं ने एक डायलॉग सुना था की "आम आदमी सोता हुआ शेर है ऊँगली मत कर , वरना चीर फ़ाड़ देगा " मैं ने गलत सुना था आम आदमी सोया ही रहेगा चाहे सरकार कितने भी जुल्म कर ले। 

Friday, March 27, 2015

जैविक खेती - भाग 2 !

दोस्तों जैविक खेती के भाग एक में हमने बाते कि थी कुछ जरूरी चीजो  कि जो जैविक खेती के लिए आवश्यक है , जैसे कि  भूमि प्रबंधन ,जल प्रबंधन ,खाद ,कीट नियंत्रण ,खरपतवार नियंत्रण कटाई , गहाई  और भंडार।  

जैविक खेती के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए हम जैविक खेती के इस भाग में जानेंगे जैविक पद्धति के प्रमुख सिद्धांत और पौ सुरक्षा की जैविक विधियों के बारे में। जैविक पढ़ती फसल चक्र , फसल अवशेष , हरी खाद , कार्बनिक खाद , गोबर खाद , यांत्रिक खेती और जैविक कीटनाशको के उपयोग पर निर्भर करती है।  जिनमे भूमि कि उत्पादकता और उर्वरता लम्बे समय तक बानी रहती है और साथ ही साथ इसमें खाद्य  पदार्थ विषरहित रखकर अधिक सुपाच्य , स्वादिष्ट और गणकारी होते हैं। 

जैविक पद्धति के प्रमुख सिद्धांत - जैविक खेती के प्रमुख सिद्दांत हैं ,खेती के लिए प्राकृतिक संसाधनो का उपयोग , भूमि का आवश्यक और जीवंत उपयोग , प्राकृतिक समझ बूझ पर आधारित कृषि क्रियाए,जैविक प्रणाली पर आधरित फसल सुरक्षा एवं पोषण , भूमि में टिकाऊ उर्वरता , उचित पोषित खाद्य  उत्पादन    एवं पर्यावरणीय मित्रवत तकनीको का प्रयोग। 




फसल सुरक्षा हेतु जैविक विधियां :- जैविक खेती  में फसल कि सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है।  जैविक खेती में फसल की  सुरक्षा के लिए अनेक विधियों का उपयोग किया जाता है। इस पोस्ट में यहाँ हम पढ़ेंगे फसल सुरक्षा के कुछ मूल बिंदड़ो के बारे में जो इस प्रकार हैं -

  • फसल चक्र का उपयोग करके कीटो , रोगो का शस्य क्रिया दवरा नियंत्रण। 
  • फसल अवशेषों को नष्ट करना ताकि पिछले फसल के कीट और रोगो के करक भी नष्ट हो जाए। 
  • सही समय पर निराई गुड़ाई , रोगग्रष्त पौधों कि कटाई चटाई और खेत के आस पास की सफाई जिसमे रोग कीटो के वैकल्पिक पौधे नष्ट हो जाए गर्मी में गहरी जुताई करके कीटो एवं रोगो के कारको को गर्मी से नष्ट करना। 
  • उपयुक्त एवं स्वस्थ बीज का चुनाव। 
  • कीटभक्षी पक्षीयो के लिए डंडा लगाना। 


जैविक खेती के अगले भाग में हम पढ़ेंगे , फ़सल सुरक्षा के लिए जैविक खेती में प्रयोग होने वाले कुछ उत्पादों क बारे में। 

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Tuesday, March 24, 2015

दिमाग में बड़ी चीज़ो को दे जगह / Keep First Big in Your mind

दोस्तों पोस्ट लिखने से पहले यहाँ आपको ये बता दू  कि  इस पोस्ट का उदेश्य एक ऐसी सोच को विकसित करना है जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे , मन में कोई गलत सोच बनाना नहीं।   दुसरे इस पोस्ट के विचार  आदरणीय श्री संदीप माहेश्वरी जी ( Well Known Motivator) के "आसान है " नामक  सेमीनार से प्रेरित हैं और संदीप जी को ही समर्पित है। मैं बस यहाँ आप लोगो के साथ इन अच्छे  विचारो को साझा कर रहा हूँ। 

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दोस्तों आज की इस पोस्ट में आपका एक बहुत बड़ा विश्वास  टूटने वाला हैं जो आप बचपन से हर जगह सुनते अाये हो। 



(1) सबसे पहले एक प्रयोग करके देखते हैं। यही प्रयोग हमारी असल जिंदगी में भी लागू होता है।  दोस्तों आपको चित्र में एक खाली डब्बा दिखाई दे रहा होगा।  . 

    
                                 
               


अब आप कुछ पत्थर लो या गेंदे लो और इस डब्बे को इन  गेंदों और पत्थरो से पूरा भर दो।  अब सोचो की क्या इस डब्बे में कुछ और आ सकता  है , सोचो , दिमाग लगाओ . तो बहुत जवाब मिलेंगे जैसे हाँ इसमें अभी छोटे छोटे बीज आ सकते हैं. फिर इन  बीजो को लो और इस डब्बे में भर दो। अब फिर सोचो की या इसमें कुछ और आ सकता है , सोचो थोड़ा और सोचो तो आपको लगेगा हाँ अभी भी इसमें नमक या बालू आ सकता है तो नमक लो और भर दो।  अब आपके डब्बे में पत्थर या गेंदे, बीज और नमक या बालू ये तीन चीज़े आ गयी हैं।  अब थोड़ा और दिमाग लगाओ की क्या अभी इसमें और भी कुछ आ सकता है  तो आप जवाब पाओगे की अभी इसमें पानी आ सकता है तो इस दाबे को पानी से भर दो। अब आप पाओगे की अब शायद इसमें और कुछ नही आ सकता। 

लेकिन अब आप जरा सोचो की अगर आपने इस डिब्बे को  सबसे पहले बीज या नमक से भरा होता तो क्या इसमें गेंदे या पत्थर आ सकते थे ? आपको जवाब मिलेगा नही। तो इस प्रयोग का हम कुछ ऐसा समझ सकते हैं की हमारी जिंदगी ये डिब्बा है जिसको अगर हम शुरू में ही  छोटी छोटी चीज़ो से भर  देंगे तो उसमे बड़ी चीज़े आने के लिए जगह ही नही बचेगी , और अगर आप इसे बड़ी बड़ी चीज़ो से भरोगे तो छोटी छोटी चीज़े आने के लिए जगह बानी रहती है।  



(2 ) "बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो ,बुरा मत बोलो" का नया तरीका । 



ऊपर वाली लाइन ग़ांधी जी ने कही थी , गांधी जी  मैं बहुत  इज्जत करता हूँ उन्होने सही कहा था। लेकिन जब हम इस लाइन को जिंदगी में प्रयोग के तौर पर देखे तो हमे इससे भी अच्छी एक नयी लाइन मिलेगी।  मान लो की मैं ने या संदीप जी ने आपसे कहा  " पिज़्ज़े  के बारे में मत सोचो " तो जैसे ही आपने ये लाइन सुनी तो आपके दिमाग में क्या आया पिज़्ज़े की तस्वीर आयी , मतलब की जिस चीज़ के बारे में सोचने के लिए हम आपको मना  कर रहे हैं वही चीज़ आती है है दिमाग में इसलिए ये  बुरा बुरा बार बार हमको  परेसान कर रहा है। बुरा ही दिमाग में आ रहा है।     इसलिए एक नयी लाइन लो "अच्छा सुनो , अच्छा बोलो, अच्छा  देखो"  अब आपके दिमाग में अच्छा शब्द मतलब एक पॉजिटिव विचार आया। 


क्या कभी ऐसा सोचा है के अगले भाग में फिर हाजिर होगे कुछ अच्छे विचारो को लेकर। 

"Be Motivated, Be Inspired"


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Friday, March 20, 2015

जैविक खेती - भाग एक !


दोस्तों आज की इस पोस्ट में हम बात करेंगे  कृषि विज्ञान से सम्बंधित जैविक खेती की।  जिस तरह से आज के समय में बढ़ते टेक्नोलॉजी के प्रयोग ने मानव जीवन को एडवांस बनाया है।  उसी तरह से कृषि में नये नये तरीके दिन प्रति दिन कृषि वैज्ञानिको दवरा खोजे जा रहे हैं, ताकि कृषि क्षेत्र को और बेहतर  बनाया जा सके। जैविक खेती , खेती करने का एक ऐसा  ही आधुनिक रूप है।  जैविक पद्धति से खेती में रासायनिक कीटनाशियों , करपतवारो और उर्वरको के उपयोग की जगह गोबर की खाद , कम्पोस्ट , वर्मी कम्पोस्ट , हरी खाद , जीवाणु कल्चर , राइजोरियम इत्यादि पोषक तत्वों के रूप  में प्रयोग किये जाते है. एवं हानिकारक जीवो के नियंत्रण करने के लिए भी जैव नाशियो जैसे की ट्राईडरमा , नीम , धतूरा , गौमूत्र जैसी चीज़ो का प्रयोग किया जाता है।  इनको प्रयोग करने के दो बड़े फायदे यह हैं की ऐसा करने से भूमि की ऊर्वर शक्ति भी बानी रहती है और पर्यावरण भी परसदूषित नही होता साथ ही साथ उत्पादन के गुणवत्ता भी बनी रहती है  । 



                          



जैविक खेती के लिए जरूरी कुछ बाते निम्न हैं जिनको ध्यान में रखना जरूरी है -

भूमि प्रबंधन - भूमि प्रबंधन के लिए मुख्यता सड़ी  हुयी गोबर की खाद , कम्पोस्ट खाद का उपयोग किया जाना फायदेमंद है भूमि प्रबंधन ककए लिए दलहनी फसलो को महत्व देना फायदेमंद हैं। 

जल प्रबंधन - जैविक खेती के लिए भूमिगत जल का उपयोग करना बेहतर होता है। 

बीजोपचार - जैविक खेती में बीजो को ऊचारित कर बोना जरूरी है। इसके लिए गोबर , गौमूत्र का प्रयोग किया जाता है इससे बीजो में फफूंद का नियंत्रण होता है। 

खाद - जैविक खेती हेतु गोबर की पाकी हुयी कम्पोस्ट खाद, हरी खाद का उपयोग किया जाना चाहिए।  इसके अलावा पी.सी.बी नीलरहित शैवाल और राइजोवियम का उपयोग भी करना चाहिए ऐसा करने से नाइट्रोजन की पूर्ती होती है। 

कीट नियंत्रण - कीटो के नियंत्रण हेतु गौमूत्र , नीम , छाज, लहसुन , मिर्च और तम्बाकू का काढ़ा बनाकर छिड़काव करने से बीमारियो पर नियंत्रण पाया जा सकता है। 

खरपतवार नियंत्रण - जैविक खेती में खरपतवार नियंत्रण के लिए प्रति तीन वर्ष बाद खेत जी गहरी जुताई करना जरूरी है और फसलो में कतारो में   हाथ से खुल्फा चलकर  नीलाई करना भी बहुत जरूरी है।  

कटाई , गहाई  और भंडारण - जैविक खेतीमे कटाई , गहाई को साधारण तारीकी से की जा सकती है ,लेकिन भण्डारण से पहले बीजो को अच्छी तरह से सुखाकर सफाई करे और नीम की पट्टी का उपयोग कर भण्डारण करे।  

तो  भाईओ ये थी जैविक खेती से जुडी कुछ प्रमुख बाते। जैविक खेती के अगले भाग  में फिर  हाजिर  होगे  कुछ महत्वपूर्ण बातो  के साथ। 

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Tuesday, March 17, 2015

क्या कभी ऐसा सोचा है ? भाग 1



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दोस्तों पोस्ट लिखने से पहले यहाँ आपको ये बता दू  कि  इस पोस्ट का उदेश्य एक ऐसी सोच को विकसित करना है जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करे , मन में कोई गलत सोच बनाना नहीं।   दुसरे इस पोस्ट के विचार  आदरणीय श्री संदीप माहेश्वरी जी ( Well Known Motivator) के "आसान है " नामक  सेमीनार से प्रेरित हैं। 

आज की इस पोस्ट में आपके दो बहुत बड़े भरम टूटने वाले हैं जिनको आप बचपन से अपने दिलो दिमाग में बैठाये हुए हो बस जरूरत है आपको कुछ इस तरह सोचने की। 

क्या कभी ऐसा  सोचा है ? कि -


पैसे पेड़ पर लगते हैं। 

 अक्सर हमने अपने घर में मम्मी पापा को यह कहते हुए सुना होगा  कि बेटा  पैसे पेड़ पर नही लगते कि जितनी मर्जी उतने ले लो।  लेकिन यह सही नही है पैसे पेड़ पर ही लगते है बस थोड़ा ध्यान देने कि जरूरत है।  मान लो कि आपके हाथ में सेब के १०० बीज हैं और आप इन बीजो को बोना चाहते हो तो क्या ये सौ के सौ बीज पेड़ बन सकते हैं ? हाँ अगर हम संभावना कि बात करें  तो शायद  100 के 100 बीज पेड़ बन सकते हैं लेकिन बनते कितने हैं केवल कुछ ही। अब जरा गौर कीजियेगा कि जो बीज पेड़ बनते हैं ये वो बीज होते हैं जिनको पेड़ बनने के लिए जरूरी माहौल मिला, इनको एक उपजाऊ भूमि मिली . यही पेड़ बड़ा  होकर पैसो का पेड़ बन जाता है। 
इसलिए पैसे पेड़ पर ही लगते हैं बस जरूरत है पेड़ बनने के लिए जरूरत  मंद चीज़ो की। 




अगर आप मेहनत कर रहे हो तो आप असफलता की और बढ़ रहे हो। 

अक्सर आपने घर में मम्मी पापा को , अपने रिस्तेदारो को या दोस्तों को अक्सर ये कहते सुना होगा  बेटा सफल होने के लिए, पैसे कमाने के लिए  बहुत मेहनत करनी पड़ती है , बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं।  तुम्हे नही पता हमने कितने पापड़ बेले हैं।  अब यह सच है झूठ ? आओ इसको झूठ के तरीके से सोचते हैं . आपने कभी सोच है की सबसे जयदा मेहनत कौन करता है ? एक मजदूर आदमी , एक साइकिल रिक्सा वाला लेकिन वही क्या वो सबसे जयदा पैसे कमा पाते हैं जवाब है नही। 

अब मैं  कह रहा हु अगर आप "मेहनत कर रहे हो तो आप असलता की और बढ़ रहे हो " रुको रुको गुस्सा मत हो पहले वाकया का मतलब को इस तरह से सोचो कि  जब आप किसी ऐसे काम को करते हो जिसमे आपका मन लगता है , जिसको आप बिना थके 24 में से 8 या 10 घंटे आराम से कर सकते हैं तो भाई जिस काम  को आप इच्छा के साथ करते हैं मजे से करते हैं तो क्या आपको उस काम को करने के लिए कोई मेहनत करनी पड़ी क्या ? जवाब है नही बस उस काम को आपने उसमे रुचि लेकर किया।  मेहनत किस काम में करनी पड़ती है जिसमे आप रुचि लेकर नही करते , जिसमे आप थकावट महसूस करते हो जो आपके लिए बौर हो तो अगर आप ऐसे काम करोगे तो असफलता ही हाथ लगेगी न है की नहीं। 

तो इसलिए अगर आप पैसे कामना चाहते हो , सफल होना चाहते हो तो दो विकल्प हैं आपके पास

पहला यह की जो काम आप अपनी जिंदगी चलाने के लिए कर रहे हो जो आपकी जॉब है उस काम को रुचि लेकर उसको मजे के साथ करना शुरू कर दो जिससे वो आपको मेहनत न लगे। 

दूसरा विकल्प यह है की यदि आपको लगता है की जो काम आप कर रहे हो वो बहुत बोरिंग है उसमे  आप मेहनत करके भी निराश हो कुछ हाथ नही लगा रहा तो कोई ऐसा काम करना शुरू कर दो जिसमे आपकी रुचि हो। 

अगर आप इन दोनों विकल्पों में से कोई भी नही चुनते हो तो आप असफलता की और बड़ा रहे हो जबकि आपको पता है की आप मेहनत कर रहे हो फिर भी। "क्या कभी ऐसे सोचा  है ? " के अगले भाग में फिर कुछ ऐसे ही नये विचार  लेकर आयेगे आपके लिए।  
                                                                                                          
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Thursday, March 12, 2015

ऊर्जा संरक्षण टिप्स : एक कदम ऊर्जा संरक्षण की ओर !


दोस्तों आज के समय में  ऊर्जा के बढ़ती  खपत को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा का संरक्षण बहुत ही जरूरी है .जैसा की हम जानते हैं की ऊर्जा की खपत मुख्यत : दो जगहों पर होती है।  एक तो हम सबके घरो में ओर दुसरे उधोगो में .तीसरे  शहरी क्षेत्रो में रात के समय में सड़को पर रौशनी करने में भी इसकी खपत होती है।  ऐसे में हम ऊर्जा संक्षरण के छोटे छोटे आसान उपयो को अपनाकर ऊर्जा संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं।  आज हम इस लेख में इन आसान उपायो के बारे में जानेंगे जिनको अपने व्यवहार ओर आदत में शामिल कर हुमा अपने घरो में और  उधोगो में ऊर्जा बचा सकते है। 

घरो में ऊर्जा संक्षरण के कुछ आसान उपाय  


ऊर्जा बचत का सीधा मतलब है पैसे की बचत। कभी कभी जब हमारा बिजली का बिल ज्यादा आता है तो हम मन ही मन उसको देखकर सोच रहे होते हैं की काश थोड़ी सी सावधानी बरती होती तो कुछ कम पैसों का बिल आता। लेकिन ये बात तब तक ही हमारे और आपके दिमाग में रहती है जब तक वो बिल हमारे हाथ में होता है। उसके बाद वही पुरानी आदतें, तो बिजली बचाने की नयी आदतों को अपनाकर आप   और  हम ,अपने आने वाले बिजली के बिल को हल्का कर सकते हैं।  



आइए जानते हैं कुछ ऐसी बातों को जिनको ध्यान में रखकर हम बिजली बचाकर पैसे की बचत कर सकते हैं।

1. एक बत्ती यहाँ फालतू जल रही है, उधर पंखा घूम रहा है लेकिन आदमी कोई नहीं है अगर आपको अपने घर में कहीं ऐसा नजारा दिखाइए दे तो इनके स्विच को तुरंत बंद कर दें। 

2. पुराने अधिक बिजली खाने वाले बल्बों की जगह पतली आधुनिक टियूब लाइट लगाएं, यहाँ  थोड़ा ध्यान दे
कि  36  वाट  की स्लिम टियूब लाइट 100  वाट के बल्ब से दोगुनी रौशनी देती है और इस बल्ब के मुकाबले 50 प्रतिशत से ज्यादा बिजली की बचत करती है। 

3. एक बात यह भी ध्यान रखने वाली है की अगर आपके कमरों का रंग हल्का है तो कम वाट की टियूब लाइट या बल्ब से भी आपको कमरे में काफी रौशनी दिखाई देगी। 

4. वॉशिंग मशीन को सही लोड पर ही चलायें, मिक्सी का रोज-रोज इस्तेमाल न करें। हो सके तो जरूरत के सभी मसालों को एक बार मिक्सी शुरू करने के बाद ही कूटें। अलग-अलग मसालों के लिए हर दिन बार बार मिक्सी को चालू और बंद न करे। 

5. यदि आप ए.सी. का उपयोग करते हैं तो इसे रोजाना एक दो घंटा कम चलायें, समय से एक घंटा पहले बंद कर दें, स्विच बंद करने के बाद कमरे की खिड़कियों को कुछ देर तक बंद रखे ताकि कमरे की ठंडक कुछ देर तक बनी रहे इससे बिजली में काफी बचत होगी।  

6. समय समय पर फ्रिज की सी और गैसकेट लाइन चेक करें, फ्रिज को बार बार न खोलें, फ्रिज के थर्मोसेट को मौसम के हिसाब से सेट करें। 

7. कूलर, ए.सी., पम्प, प्रेस और बिजली के अन्य उपकरणों को खरीदते समय "आई.एस.आई" और  "बी.ई.ई." का लेबल जरूर देख लें। इस लेबल का मतलब है की ये लेबल वाले उपकरण प्रयोग के लिए सही हैं और बिजली बचत के मापकों को ध्यान में रखकर बनाये गए हैं। 

8. बजली के भारी और अधिक खपत वाले उपकरण शाम को 6  से 9 बजे के बीच प्रयोग न करें क्योंकि इस समय के दौरान बिजली की मांग बहुत ज्यादा रहती है। 

9. अपने घर के फर्नीचर और अन्य सामान को इस तरह व्यवस्तिथ करें ताकि पढ़ने लिखने, खाना खाने, सिलाई कड़ाई जैसी जगहों पर रौशनी सही से पड़े। जबकि टी.वी. देखने, बातचीत करने जैसी जगहों पर कम रौशनी मतलब कम वाट की लाइट से भी काम चलाया जा सकता है।

10.सौर ऊर्जा से संचालित यंत्रो को अपनाकर भी हम ऊर्जा संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं। 


उधोगो  के लिए ऊर्जा संरक्षण के आसान उपाय 



हमारे देश में बनने वाली कुल  बिजली का एक बहुत बड़ा हिस्सा उधोगो में खर्च होता है।  ऐसे में उधोग मालिक

 और उधोग प्रबंधन कर्ताओ को ऊर्जा संक्षरण हेतु ध्यान देना जरूरी है।  


                             



उधोगो में ऊर्जा संक्षरण के कुछ आसान उपाय इस प्रकार हैं -

  • समय समय पर औधोगिक परिसर में प्रचलित यंत्रो की ऊर्जा खपत , उनके परिणाम का विश्लेषण करे। 

  • तिमाही , छमाही और वार्षिक स्तर पर ऊर्जा बचत का एक लक्ष्य निर्धारित करे और इस हेतु नियम बनाये। 

  • मोटर ऊर्जा की काफी खपत करती हैं इसलिए सही आकर की आई .एस.आई. लेबल वाली मोटर ही प्रयोग करे। 

  • औधोगिक परिसर में बल्बो की जगह ऊर्जा दक्ष लाइटों का उपयोग करे। 

  • सौर ऊर्जा पर आधारित सयन्त्रों का उपयोग करे। 

  • कार्य के सामने समय के बाद अनावश्यक लाइट्स , कंप्यूटर, पंखे इत्यादि बंद रखे। 

  • बिजली की खपत को मॉनिटर करने के लिए नियंत्रक लगाए। 

  • किसी कर्मचारी को ऊर्जा प्रबंधक के रूप में नियक्त करे।  

  • ऊर्जा प्रबंधक प्रायोगिक प्रशिक्षण व्यस्था करे। 

  • ऊर्जा प्रबंधक एक विस्तृत मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग प्रारूप बनाये जिसके आधार  पर ये सुनिश्चित किया जा सके की ऊर्जा की कहप्त न्यूनतम स्तर पर हो रही है या नही। 

 याद रखे बिजली की बचत ही बिजली का उत्पादन है। ये लेख  "राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण  अभियान" से प्रेरित है। 

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