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Tuesday, June 13, 2017

UGC , AICTE आप लोग यह क्या कर रहे भाई ?

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आपको लेख के विषय से यह समझ आ गया होगा कि  इस लेख में हम किस बारे में बात करने जा रहे हैं।  आज से लगभग 20 वर्ष पहले  हमारे देश में केवल सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज हुआ करते थे। उस समय में इंजीनियरिंग शिक्षा में जो गुणवत्ता थी वो आज के समय में नहीं रही ,जबकि उस समय साधन भी इतने पर्याप्त नहीं थे , न ही इंटरनेट था कि  वहा  से कोई मदद मिल सके।  जब से इंजीनियरिंग शिक्षा प्राइवेट क्षेत्र में आयी है तब से लगतार इंजीनियरिंग का स्तर दिन प्रति दिन गिरता जा रहा है।  

ठीक है मानते हैं कि  इंजीनियरिंग शिक्षा के विकास के लिए देश के राज्यों में नए नए इंजीनियरिंग कॉलेज के खोले जाने की जरूरत थी, पर इतनी अधिक संख्या में नहीं।  इंजीनियरिंग करने वाले एक औसत 'छात्र की हालत आज यह है कि वह 8000  रूपये सैलरी वाली नौकरी के लिए भी मोहताज है। आज देश के हर जिले में आपको कम  से कम 4-5 इंजीनियरिंग कॉलेज  तो मिल ही जायगे और अगर  हम उत्तरी भारत और दक्षिण भारत की बात करे तो शायद यह संख्या और भी अधिक हो। 

सोचने वाली बात यह है  ऐ. आयी .सी .टी. ई. नें खुद अपने सारे मानकों   की  धज्जिया उड़ाते हुए ऐसे ऐसे कॉलेज को मान्यता दी है जो की सारे मानकों  के 10 %   मानकों  की   कसौटी पर भी खरा   नहीं उतरते। उससे भी अधिक चिंता की बात यह की  यह सब खेल केंद्र सरकार की आँखों के सामने होता है जिसकी सरकार कोकोई फ़िक्र नहीं। 

यू. जी. सी. ने तो और  भी हद कर दी। आज  हालत यह है कि अब देश के  जिले जिले में  प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनती जा रही  है।  सुबह सवेरे जब अखबार के पन्ने पलटता हु , तो  यूनिवर्सिटी के ही विज्ञापन नज़र आते हैं। क्या ये शिक्षा का विकास है  ? 

यदि आज हम अंको  की बात करे तो दसवीं , बारहवीं और प्राइवेट कॉलेजो और युनिवर्सीटी में ग्रेजुएशन में  70 % नंबर लाना आज कोई बड़ी बात नहीं रही।   लेकिन जब  इन 70  से 80 %  छात्रों में से अधिकतर का इंटरव्यू  होता है तो लगता है कि ये 55 % लाने के लायक भी नहीं।  

सरकार  को कॉपियोंके मूल्यांकन की गुणवत्ता पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है,पर सरकार इस और कोई ध्यान नहीं देती , आँखे मूंदे\हुए है।  लगता  है कि सरकार भी यही चाहती है की साक्षर सभी बने , भले ही गुणवत्ता हो या नहीं।  

मैं इस  लेख में लिखी गयी बातो के माध्यम से  इन सभी बातो की और  सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए यह बताना चाहता हु , कि  हमे शिक्षा के क्षेत्र में विकास चाहिए, पर विकास के नाम पर विनाश हमे कतई मंजूर नहीं।    
यह बेहद ही जरूरी है  छात्रों के पास अच्छे मार्क्स से डिग्री होने के साथ एम्प्लॉयमेंट  सिकल्स का होना भी बेहद जरूरी है। कोर्स के सिलेबस को थोड़ा रिवाइज करने की जरूरत है उसे इंडस्ट्री में जॉब के अनुसार बदलने की जरूरत है।  

1 comment:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरूवार (15-06-2017) को
    "असुरक्षा और आतंक की ज़मीन" (चर्चा अंक-2645)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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