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Tuesday, May 16, 2017

किशोरावस्था में अच्छे दोस्त बनाना है सेहत के लिए भी फायदेमंद !

                                   "Benefits of making friends in teen age"

शायद इस पोस्ट का षीर्शक आपको थोड़ा  अजीब  लगे, किन्तु इस नतीजे  तक पहुचने के लिए वैज्ञानिको द्वारा एक विशेष शोध किया गया है।  जिसमे यह पाया गया है कि  यदि किशोर अवस्था में कुछ अच्छे दोस्त बन जाए तो इस दोस्ती का असर भविष्य में हमारी सेहत को स्वस्थ बनाता  है।  जो किशोर लड़के एवं लडकियां अपने दोस्तों के साथ हसते, खेलते, पढ़ते  एवं अधिक समय व्यतीत करते हैं, भविष्य  में उनकी हेल्थ अच्छी  बनी  रहती है।  


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जबकि जो किशोर अकेले ही अकेले रहते हैं , जिनके दोस्त नहीं हैं या जो दोस्तों के साथ समय व्यतीत नहीं करते हैं उनके साथ सही से व्यवहार नहीं करते हैं , वह अधिकतर बीमार रहते हैं। University of Virginia in Charlottesville के मनोचिक्त्सिक Joseph Allen ने अपने कुछ साथियो के साथ मिलकर किशोर युवको के व्यवहार पर यह  शोध किया। उनको यह संदेह था कि  किशोर अवस्था में हम अपने दोस्तों के साथ  जो कुछ और जैसा अनुभव  हैं उसका असर आने वाले वर्षो  में  हमारी  सेहत  पर पड़ता है।  अपने इसी संदेह को दूर करने के लिए वह इस शोध की दिशा में आगे बढे  और यह निष्कर्ष दिया।

अपने इस शोध में उन्होने  171  किशोर लड़के एवं लड़कियों को उनके  दोस्तों के साथ उनके व्यवहार आदि को अध्यन्न करने के लिए   उस समय शामिल किया जब उनकी  उम्र 13  वर्ष  थी और अगले पांच सालो तक उनके व्यवहार और सेहत सम्बंधित तथ्यों के बारे में अध्यन्न किया ,जिसके लिए वह इस शोध में शमिल प्रत्येक  किशोर से हर एक एक साल के अंतराल बाद मिले और उसका इंटरव्यू लिया। इन किशोरों के व्यवहार पर लगातार पांच साल के अध्ययन के बाद शोधकर्ताओं ने यह पाया  कि  इनमे से जिन किशोरों के अपने दोस्तों के साथ अच्छे सम्बन्ध थे उनकी सेहत अन्य की अपेक्षा काफी अच्छी थी।  

इतना ही नहीं बल्कि इस शोध के सही परिणाम तक पहुचने के लिए  Joseph Allen ने अपनी टीम के साथ इस शोध में शामिल किशोरों के सभी अच्छे  दोस्तों का भी इंटरव्यू लिया।  इन लोगो से उनकी दोस्ती के सभी बाते  जैसे सकारात्मक बाते और नकारात्मक बातो के बारें में पुछा गया ,साथ ही साथ उनसे यह भी पूछ गया कि  इस शोध में शामिल आपका दोस्त अन्य लोगो के साथ किस तरह से वयवहार करता है और वह दोस्तों सके साथ काम करना अधिक पसंद करता है या अकेले ही अपने काम को पूरा करना पसंद करता है।  इन दोस्तों ने इस शोध में शामिल अपने दोस्तों के व्यवहार के बारे में शोधकर्ताओं को सभी  बाते बताई।   

ठीक इसी प्रकार से  शोधकर्ताओं ने इस शोध  के लिए 171  ऐसे युवको पर अध्यन्न किया जिनकी आयु 25 , 26 और 27  वर्ष थी। जब शोधकर्ताओं ने इन युवको का इंटरव्यू लिया तो शोधकर्ताओं ने इन  25  , 26  और 27  वर्ष की आयु वाले युवको की इस समय की सेहत और जब इनकी आयु 13  से 18  के बीच थी ,उस समय इनके दोस्तों के साथ व्यवहार के बीच एक विशेष प्रकार का सम्बन्ध पाया। इनमे से जिन्होंने अपनी किशोरावस्था में अपने दोस्तों के साथ अधिक समय व्यतीत किया उनसे अपनी अच्छी दोस्ती को बनाये रखा उनकी सेहत अन्य की अपेक्षा काफी अच्छी पायी गयी। 

Sunday, May 7, 2017

क्यों जरूरी है दूसरो की मदद करना ?

शाम के समय चाय वाले के दूकान पर मैं अपने एक मित्र एक साथ चाय पी रहा था। तभी मैं ने देखा वहां से एक भिखारी गुजरा जो की फटे हुए कपडे  पहने हुआ था , थोड़ा आगे चलकर उस भिखारी ने एक घर का दरवाजा खटखटाया। दरवाजे से एक महिला बाहर आयी , भिखारी  कुछ खाने  के लिए मांगा।  थोड़ी देर बाद मै ने देखा कि वह   महिला उस एक प्लेट में उस व्यक्ति के लिए खाना लेकर आती है और खाने के बाद उससे एक पुराने पेण्ट शर्ट देती है।  वह व्यक्ति उसका धन्यवाद करके  वहा चला जाता है। 



इस दृश्य के बाद मैं ने अपने दोस्त से कहा हमे भी इस महिला की तरह असहाय एवं  जरूरतमंद लोगो की मदद  चाहिए। यह सुनकर मेरे दोस्त ने कहा क्यों करूँ दूसरो की मदद ?  मुझे क्या  मिलेगा ?मै  किसी का ठेका थोड़ी न लिया है। उसकी इन बातो को सुनकर मुझे बुरा लगा , समय मई ने उसे कोई जवाब नहीं दिया। मैं  घर पर आया और उसके सवाल का सटीक जवाब ढूंढ़ने में लगा गया।  तभी नेट पर सर्च किया तो एक रोचक तथ्य सामने आया। वो यहाँ था की जब महान मुक्केबाज मोहम्मद अली से किसी ने पुछा की हमे दूसरो की मदद क्यों करनी चाहिए ?  तब उन्होने कहा "दूसरो  की मदद करना धरती पर आपके कमरे के किराए की तरह है ,  जो आपको देना ही चाहिए।  





जवाब सच में रोचक है और सटीक भी। मकान में रहना  है तो किराया तो होगा। हालांकि यह धरती हमारी बनाई दुनिया की तरह मिटटी , पानी ,धुप और  हवा का हिसाब नहीं रखती। न ही कभी यह पूछती की आप क्या   है ? और इस धरती पर क्यों है ? सच कहु तो दूसरो की मदद  करना  कोई पाप - पुण्य , प्रसंशा और धार्मिक उपदेश की बात नहीं है यह हमारे अपने अस्तित्व को बनाये रखने की शर्त है। हम अक्सर भूल जाते हैं कि यह और कुछ  नहीं , इस धरती को अपने और दूसरो के रहने के लिए बेहतर बनाने की दिशा में बढ़ाये गए कदम हैं।     

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