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Sunday, October 23, 2016

Tips for Happy Mood


आज की इस टेंशन भरी जिंदगी में खुश कौन नहीं रहना चाहता , पर किस कीमत पर। दिन में अक्सर कोई न कोई बात ऐसी हो ही जाती है जो हमारा मूड ख़राब कर देती  है। कई ऐसा लगता है कि  हमने बिना बात ही अपना मूड खराब कर लिया।  ऐसे में आखिर कैसे अपने मूड को संतुलन बनाये रखे ?


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कल मैं , रोडवेज बस में सफर कर रहा था कि पास वाली शीट पर बैठी  एक लड़की  अपने बॉय फ्रंड से बाते कर रही थी।  बाते करते करते अचानक से वह झुंझलाकर  बोली तुम्हारा मूड हर  समय ख़राब रहता है। बाबु  पहले अपना मूड सही कर लो बाद में बात करना। इतना कहते ही उसने कॉल डिसकनेक्ट कर दी।  जब हम मूड की बात करते हैं  मूड न सिर्फ हमको डिस्टर्ब करता है बल्कि हमारे अपनों के मूड पर भी असर डालता है।



                                 

मूड बिगड़ते ही हम छोटी छोटी बात पर गुस्सा होंने लगते हैं।  हमारे  चेहरे से मुस्कान गायब हो जाती है।  मजाक भी हमे बुरा लगने लगता है ये सब छोटी छोटी बाबते हमारे सोचने समझने की क्षमता पर भी  असर   डालती हैं।
इस विषय में मनोवैज्ञानिको का कहना कि जब बात बात पर हमारा  मूड ख़राब होता है  तो यह इस बात का संकेत हैं कि यदि चीजे हमारे मन के अनुरूप न हो तो  तो हम झुंझलाने लगते हैं। हम उसे सम्भाल पाने में असक्षम होते जाते हैं।  इस सब चीज़ों  से निपटने के लिए  को सही बनाये रखने के लिए हमको कुछ बातो पर विशेष ध्यान देना होगा।

ख़राब मूड को सही करने के उपाय -


सबसे पहले हमको सही कारण का पता लगना होगा।  क्यों की कभी कभी हम मूड ख़राब होने  के कारण हम ऐसा बैठते है जो हमे नहीं करना चाहिए था।  अक्सर हमारी आदत  है की हम अपनी गलती नहीं  मानते  हैं।  कई बार ऐसी हालात\आते हैं की दुसरो को लेकर हमारे अपने  दर हम पर हावी होने लगते हैं। ख़राब  मूड को सही करने के लिए हमे इन  बातो  का विशेष  ध्यान रखना चाहिए। 


  • जब हमारा मूड ख़राब हो तो हमको अपना ध्यान किसी  लगा लेना चाहिए ना की बार बार उस बात के बारे में सोचे जिसके कारन मूड ख़राब हुआ है। 
  • मन न हो तो भी मुस्कुराये।
  • अपने लिए अच्छे शब्दो का प्रयोग करे। 
  • दूसरो की मदद करे और दूसरो का आभार व्यक्त करे। 
  • अच्छा सुने, अच्छा देखे और अच्छा बोले। 
  • अपने किसी शुभचिंतक से बात करे। 
  • अपने अच्छे पालो को याद करे। 



Tuesday, October 11, 2016

Mental Disorder Disease, It's Cause and Solution

वर्ल्ड मेन्टल हेल्थ डे - 10  अक्टूबर !

एक समय था जब बीमारियां लोगो कोसो दूर रहती थी क्यों कि उस समय में लोगो का खान पान बिलकुल शुद्ध था। उस समय  मानसिक बीमारी  जैसे शब्द  तो सुनने में आते  ही नहीं थे।  लोगो को मानसिक बीमारियां नहीं थी क्यों कि  अधिकतर लोग एक दुसरे से मिलजुलकर रहते थे, एक दुसरे से  प्रेम करते थे। उनके बीच अकेलेपन जैसी भावनाये नहीं थी।  

वही दूसरी और अगर हम  वर्तमान हालातो की बात करे तो हम लोग अपने सामाज में रह रहे अधिकतर लोगो  को चारो तरफ से शारीरिक एवम मानसिक बीमारियों से घिरा पाते हैं।  अभी कल 10  अक्टूबर को वर्ल्ड मेन्टल डे था।  
पिछले काफी सालो से  हर साल मानसिक बीमारी के अलग अलग थीं  पर ये दिन 10 अक्तूबर को ही मनाया जाता है। वर्तमान आकंड़ो पर नज़र डाले तो हम पाएंगे की आज के समय में लोगो को शारीरिक बीमारी से ज्यादा इन दिनों मानसिक बीमारियां मुख्य रूप से  प्रभावित कर रही हैं। आज व्यक्तियों मेंटल डिसऑर्डर धीरे धीरे एक  बड़ी बीमारी का रूप लेता जा रहा है और  गंभीर समस्या बनती जा रही है ।

क्या होती है मानसिक बीमारी ?

मानसिक बीमारी आखिर क्या है और कैसी होती है ? इस बारे में अभी  तक शोध चल रहा है। क्योंकि ये दिमाग से शुरू होकर यह नस नस में समां जाती है  जाती है। नींद ना आना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और डिप्रेशन में रहना, इस बीमारी के सबसे बड़े लक्षण हैं। दरअसल, आपको समझ ही बहुत देर से आता है कि आपको आखिर हुआ क्या है। इस बीमारी की कोई खास वजह नहीं होती, लेकिन धीरे-धीरे ये आपको इस तरह से अपने काबू में कर लेती है कि आपके हाथ में कुछ नहीं रह जाता है। अकेलापन, डिप्रेशन और गंभीर चिंतन आपको इस तरफ ढकेल देता है। कई बार लोग इंसोमनिया का शिकार होते हैं।

जब हम  बीमारी के शिकार होते हैं तो हमारे  परिवार वाले , दोस्त आदि भी हमको  समझ नहीं पाते और उन्हें मानिसक रूप से अक्षम बताने लगते हैं। ऐसे में  डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक और काउंसिलर ही आपकी मदद कर सकते हैं। जब अपने आप घर में इसका कोई समाधान नजर ना आए तब आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।  अभी पिछले कुछ वर्षो में हुयी अधिकतर आत्महत्याओ के आंकड़े बताते हैं यह कि सबसे ज्यादा आत्महत्याएं  स्ट्रेस या तनाव की वजह से हुई है और ये तनाव मानसिक होता है और इसका सीधा असर समाज या आपके घर पर होता है।

डॉक्टरों एवम विशेषज्ञओ का कहना है कि  इस बीमारी में दवा से ज्यादा पीएफए काम करता है। 


कुछ देर नजर डालते है  य़े पीएफए है क्या ?

 PFA आखिर है  क्या  ?

 आपको यह जानकर आश्चर्य होगा  कि भारत में 1 साल में 1 लाख से ज्यादा लोग मेंटल डिप्रेशन का शिकार होने के कारन  आत्महत्या करते हैं। लोगो में बढ़ता तनाव  इसका प्रमुख कारन है।  लोग स्ट्रेस इतना लेते हैं कि खुद से कभी बात नही कर पाते।  हर समय उलझनों में घिरे रहते हैं। एक तरफ अपनी जॉब , बिज़नस की उलझने तो दूसरी और पारिवारिक उलझने ऐसे में हम इमोशनल स्ट्रेस से ग्रषित होते जा रहे हैं।  डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक का यह मानना है कि दवा से ज्यादा पीएफए की जरूरत  होती है। पीएफए मतलब "साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड"  जो आपको सबसे पहले अपने परिवार या घर के सदस्यो द्वारा  मिल सकता है। ये एक ऐसा  ट्रीटमेंट है, जो हमें तनाव कम करने में मदद करता है। जब हम तनाव से घिरे होते हैं तो ऐसे में हमको डॉक्टरी ईलाज से पहले  अपने परिवार की सलाह और काउंसिलिंग की जरूरत होती है। इसे कहते हैं पीएफए।

कैसे निपटे मानसिक बीमारी से ?  

इस बीमारी से निपटने के लिए हमको सबसे पहले अपने आपको मानसिक तौर पर मजबूत बनाना होगा साथ ही साथ अपने परिवार और दोस्तों से अपने संबंधों को बेहतर बनाना होगा ताकि उनके सहयोग प्रेम हमे मिलता रहे है। अगर वे आपको समझें और आपकी मानसिक स्थितिके साथ ताल मिलाकर चलें तो आप इस बीमारी से ठीक हो सकते हैं। दवा से ज्यादा आपकी सकारात्मक सोच और आपका आत्मविश्वास ही इस बीमारी से  आपकी मदद करेगा और आप एक  स्वस्थ्य जीवन  व्यतीत कर पाएंगे । 


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     $$ सभी पाठकगणो को दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें $$

Tuesday, October 4, 2016

SmartGPA Mobile App

अक्सर कुछ लोग अपना भविष्य जानने  के लिए ज्योतिष के पास जाते हैं,तो कुछ यह पता करने के लिए की आज  का दिन शुभ  होगा या अशुभ  यह जानने के लिए  रोज सुबह सुबह टी.वी. खोलकर बैठ जाते हैं। आज मीडिया मीडिया ने  एक सबसे बड़ी गलती   हमारे देश के साथ  यह की है कि लोगो को सुबह सुबह उनका राशिफल दिखाने लगते हैं। बेचारे कुछ तो वैसे ही डर जाते हैं, परेशान रहते हैं ,नतीजन टेंसन की वजह से काम को पूरी क्षमता की साथ नही कर पाते ,खैर क्या करे मीडिया वालो को अपनी कमाई जो करनी है। 

इस ऍप्स के सही कार्य करने  की जांच करने के  लिए "Dartmouth College " के 30  स्टूडेंट्स  के स्मार्टफोन में  यह मोबाइल ऍप्स इनस्टॉल किया गया और 10  सप्ताह  तक उनकी पढ़ाई सम्बंधित गतिविधियों को मॉनिटर किया गया। शोधकर्ताओं ने इस ऍप्स के परिणामो को सकारात्मक बताया है। तकनीकी तौर पर इस मोबाइल  ऍप्स को बनाने के लिए  डेटा सेंसिंग , क्लाउड  कंप्यूटिंग  एवं मशीन लर्निंग अल्गोरिथम  का   प्रयोग किया गया है।


अब कुछ नयी बात करते हैं। असल में बात यह है कि  जब से मार्केट में स्मार्टफोन , एंड्रॉयड एवं आईफोन  का चलन बढ़ा  है तब से मोबाइल ऍप्स का क्रेज कुछ ज्यादा ही बढ़ता जा रहा है।  नए नए एप्लीकेशन के लिए रोज नए नए मोबाइल ऍप्स बन रहे हैं।  ऐसा ही एक मोबाइल ऍप्स वैज्ञानिको ने बनाया है जो कि कॉलेज स्टूडेंट का उसकी  परीक्षा  में ग्रेड और उसके पास और फेल होने  का पता लगा सकता है।  यह ऍप्स स्टूडेंट की पढ़ाई से सम्बंधित क्रिया कलापो के आधार पर उसके एग्जाम ग्रेड के बारे में जानकारी देता  है। इस मोबाइल ऍप्स को बनाने वाले शोधकर्ताओं का कहना है  की यह ऍप्स स्टूडेंट की परफॉरमेंस को बेहतर बनाये रखने के उदेश्य से बनाया गया है।  ताकि  स्टूडेंट पढ़ाई के प्रति गंभीर  बने , और मन लगाकर पढ़ाई करे।


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यह ऍप्स स्टूडेंट के दिन भर के क्रिया कलाप जैसे  सोना ,पढ़ना  ,पार्टी  मनाना  ,एक्सरसाइज करना , खेलना आदि को  दिए गए समय के एवं अन्य जानकारियो के आधार पर कार्य करता है। इस मोबाइल ऍप्स का नाम SmartGPA है। जिसको  "Dartmouth College " कॉलेज के शोधकर्ताओं ने बनाया है।  "Darmouth College " के " Computer Science Department "  के प्रोफेसर Andrew Campbell का कहना है की कई प्रकार के व्यवहारिक और वातावरणीय कारको का कॉलेज के दौरान  स्टूडेंट की  पढ़ाई पर विशेष प्रभाव पड़ता है। यह ऍप्स न केवल स्टूडेंट के एग्जाम में परफॉरमेंस के बारे में जानकारी देता है बल्कि उसकी मेन्टल हेल्थ और उसके व्यवहार सम्बंधित बातो के बारे में भी बताता है ताकि वह उनमे सुधार कर सके।   यह ऍप्स स्टूडेंट की कॉलेज अटेंडेंस   , स्लीपिंग एक्टिविटी आदि  के बारे  भी जानकारी देता  है।  


To watch a small video you can click on this Youtube Video Link.

Small Youtube Video for SmartGPA App

Reference : www.bgr.in

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