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Sunday, April 10, 2016

अब ख़राब हुये टमाटर बिजली बनायेगे !

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दोस्तों वर्तमान समय में ऊर्जा मानव जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक हैं। आज लगभग लगभग हर मशिनिरी काम में  बिजली  की जरूरत पड़ती है।  बिजली प्राप्त करने के कई साधन हैं। जिनमे से नदयिो पर बाँध बनाकर , सौर ऊर्जा , पवन चक्की (वायु ऊर्जा ),  ईंधन आदि हैं।  लेकिन क्या कभी हम कल्पना  कर सकते हैं की बेकार सड़े हुए टमाटरों से भी बिजली बनायीं जा सकती है।  लेकिन  ऐसा संभव है। 

अक्सर देखने में आता है कि  बेचने  के लिए रखे गए टमाटर  ज्यादा दिनों तक रखे रहने पर  अक्सर खराब हो जाते हैं और उनको फेंक दिया जाता  है। लेकिन, इससे बिजली भी बनाई जा सकती है। अभी हाल ही में  एक शोध में यह जानकारी सामने आई है जिसमें भारतीय मूल के कुछ वैज्ञानिक भी शामिल हैं।



                                                 




"Dr. Venkataramana Gadhamshetty discusses his successful conversion of tomato waste into electricity at a news conference hosted by the American Chemical Society."




 साउथ डेकोटा स्कूल ऑफ माइन्स एंड टेक्नॉलजी की नमिता श्रेष्ठ ने कहा, 'हमने बेकार हो चुके टमाटरों से बिजली पैदा करने का तरीका खोज निकाला है। श्रेष्ठ ने इस  शोध पर  साउथ डेकोटा के अस्टिटेंट प्रोफेसर वेंकटरामन्ना गधामशेट्टी और प्रिंसटन विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र के अंडरगेजुएट छात्र एलेक्स फोग के साथ मिलकर कार्य किया है। गधामशेट्टी का कहना है, इस परियोजना पर हमने दो साल पहले काम शुरू किया था जब एलेक्स ने मेरे प्रयोगशाला का दौरा किया था। वह एक स्थानीय समस्या पर शोध का इच्छुक था क्योंकि हमारे राज्य में काफी टमाटर उगाया जाता है जिसका एक बड़ा हिस्सा बेकार हो जाता है जिसे  फेंकना अपने आप में एक  एक बड़ी समस्या है।


Keywords:Research Report on Electricity generation from tamato waste, ख़राब टमाटरों से बिजली उत्पादन पर शोध रिपोर्ट,electricity frm waste tamato,south decoto research

ख़राब हुए टमाटर द्वारा बिजली बनाने की इस विधि में वैज्ञानिकों द्वारा इलेक्ट्रोकेमिकल यन्त्र का प्रयोग किया गया है। यह  यन्त्र ख़राब हुये टमाटरों को विघटित करके उनसे  से इलेक्ट्रान को एक्सट्रेक्ट करके बिजली का उत्पादन करता है।  इस यन्त्र के द्वारा ख़राब टमाटर को विघटित करने के बाद  उसके10    मिलीग्राम से। 0.3 वाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।   इसमें   और सुधार  भी किया जा सकता है।

For more information about this research please click the link given in Reference


2 comments:

  1. काश,इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग हो। अच्छी जानकारी।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (11-04-2016) को

    Monday, April 11, 2016

    "मयंक की पुस्तकों का विमोचन-खटीमा में हुआ राष्ट्रीय दोहाकारों का समागम और सम्मान" "चर्चा अंक 2309"

    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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