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Saturday, April 23, 2016

फेसबुक पर हो सकता है आपके लाइक , कमेंट और शेयर का गलत इस्तेमाल !


                          "Your's Likes, Comments and Shares can be Misuse on Facebook"

वर्तमान  में शायद कोई ही इंटरनेट उपयोगकर्ता ऐसा हो जिसका की सोशल नेटवर्किंग साइट  फेसबुक  पर अकाउंट न हो और जो अपने प्रोफाइल में जुड़े मित्रो के प्रोफाइल पर, ग्रुप एवं कम्युनिटी पोस्ट पर लिखे या कमेंट न करता है। फेसबुक पर लाइक  एवं कमेंट करना एक सामान्य आदत है।   क्यों कि  फेसबुक अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का एक एक  ऐसा माध्यम है, जिस पर  'लाइक' और 'कमेंट' के माध्यम से उस प्रोफाइल  व्यक्तियों की प्रतिक्रियाओं के बारे में पता चल जाता है । लेकिन क्या यह जानते हैं  है कि आपकी इन प्रतिक्रियाओं का कितना गलत इस्तेमाल हो रहा है? हाल  ही में जारी एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर किए जा रहे आपके 'लाइक' और 'कमेंट' अब गड़बड़ घोटाले की चपेट  में हैं।



हाल ही में समाचार पत्र 'द इंडीपेंडेंट' में प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक का 'लाइक' विकल्प किसी भी तस्वीर या जानकारी की प्रशंसा और अपने विचार व्यक्त करने का एक आसान और सुरक्षित तरीका है। लेकिन कुछ फेसबुक घपलेबाज आपके द्वारा 'लाइक' की गई आकर्षक और भावनात्मक पोस्ट (लेखों) को एडिट  कर उसमें ऐसी सामग्री डाल देते हैं, जो न सिर्फ निंदनीय हो सकती बल्कि आपको मुस्किल में भी डाल  सकती है।

फेसबुक पर किसी  भी पोस्ट को पॉपुलर करने में  सामान्यता 'लाइक', 'कमेंट' और 'शेयर' विकल्प का बड़ा महत्व होता है । इसलिए लोकप्रिय पोस्ट प्रमुखता के साथ दिखाई देते हैं।अक्सर  यह पाया गया है कि घोटालेबाज पहले किसी दुर्भावना रहित लेख को पोस्ट करते हैं, जिसके लोकप्रिय होने और पसंद किए जाने की संभावना अधिक होती है। इसके बाद जब ये पोस्ट अधिक संख्या में 'लाइक' और 'शेयर' कर दिए जाते हैं, तब घोटालेबाज इन पोस्ट को एडिट करके इसके भीतर की सामग्री को बदलकर उसमें दुर्भावनापूर्ण बातें लिख देते हैं।




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केवल इतना ही नहीं आज कल  यह घोटालेबाज फेसबुक पर धोखाधड़ी करने के लिए कई उत्पादों के नकली फेसबुक पेज बनाकर उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं, जिनमें फंसकर कई लोग अपनी क्रेडिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर देते हैं।  खासकर की ग्रुप और कम्युनिटी पर उपलब्ध पोस्ट को सोच समझकर ही लाइक  कमेंट और शेयर  करें।  


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Monday, April 18, 2016

अब आनंद लीजिए पेपरलेस पासपोर्ट का !

जहां वर्तमान में   जहां हर काम डिजिटल तकनीक की मदद से हो रहा है ऐसे में भला पासपोर्ट भी डिजिटल होने से कैसे बच सकता था। बहुत जल्द पासपोर्ट भी डिजिटल हो सकता है ? मतलब अब आपको विदेश जाते समय पासपोर्ट को अपने साथ ले जाने की जरूरत नहीं होगी।  सोचो अगर आप  एयरपोर्ट पहुंचने वाले हैं और अपना पासपोर्ट  घर पर ही  भूल गए हैं? तो  अब चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि एक कंपनी स्मार्टफोन में ही पासपोर्ट उपलब्ध कराने पर  काम कर रही है।

डेलारू नाम की ब्रिटेन की यह कंपनी  पासपोर्ट की प्रिटिंग करती है। यह पेपरलेस पासपोर्ट तकनीक पर काम कर रही है जिसे स्मार्टफोन में ही स्टोर किया जा सकेगा। अगर ऐसा संभव  तो अब आपको विदेश जाते समय अपने साथ सामान्य  पासपोर्ट  को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  




हाल  ही  में ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार, 'द टेलीग्राफ' में यह खबर प्रकाशित हुयी है जिसके अनुसार इस तकनीक की मदद से मुसाफिर बिना बुकलेट वाली पासपोर्ट के सफर कर सकेंगे। यह बिल्कुल मोबाइल बोर्डिंग कार्ड की तरह काम करता है ।

इसके फायदे के साथ  कुछ नुक्सान भी हो सकते हैं , अगर किसी का फोन चोरी हो जाए तो ऐसे में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। सुरक्षा कंपनी प्रुफप्वाइंट के डेविड जेवान्स का कहना है, फोन में डिजिटल पासपोर्ट रखने के लिए नए हार्डवेयर की जरूरत होगी, ताकि इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट को सुरक्षित ढंग से रखा जा सके ताकि इसे फोन से कॉपी न किया जा सके।

कंपनी के अनुसार पेपरलेस पासपोर्ट को  पासपोर्ट रीडर के साथ वायरलेस तरीके से जुडऩे में सक्षम होना चाहिए। क्योंकि एयरलाइन के तरीके से क्यूआर कोड के माध्यम से इसे रीडर के साथ जोडऩे पर कॉपी करने या धोखाधड़ी का खतरा बना रहेगा। फिलहाल पेपरलेस पार्सपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है।


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Reference - Paperless Passport TechnologyNews

Objective Questions from Non-Conventional Energy Resources

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Wednesday, April 13, 2016

"थ्री डी प्रिंटिंग" तकनीक से समाप्त होगा वायु प्रदूषण !

वर्तमान में वायु प्रदुषण  एक विकट समस्या बानी हुयी है। इस समस्या से निपटने के लिए वर्तमान में एक नई तकनीक सामने आई है।  असल में यह तकनीक तो पुरानी है लेकिन इसका प्रयोग वायु प्रदूषण की रोकथाम  के लिए पहली बार होने जा रहा है। "थ्री - डी  प्रिंटिंग " का नाम तो आपने सुना ही होगा। 

हाल ही में कुछ अमरीकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने 'थ्री-डी प्रिंटिंग' तकनीक के माध्यम से हथेली में व्याप्त जाने वाली एक 'स्पॉन्ज' जैसी संरचना तैयार की है, जो प्रदूषण को कम करने में मददगार  साबित हो सकती है। अमरीकन यूनिवर्सिटी के रसायनशास्त्र के प्रोफेसर मैथ्यू हार्टिंग्स की टीम  में शामिल  शोधकर्ताओं ने यह बताया कि   कैसे सक्रिय रसायन विज्ञान के साथ वाणिज्यिक थ्री-डी प्रिंटर का उपयोग कर एक संरचना बनाई जा सकती है।


शोधकर्ताओं की टीम ने 'थ्री-डी प्रिंटिंग' प्रक्रिया के दौरान रासायनिक सक्रिय टाइटेनियम डाइऑक्साइड TIO2 के नैनो कणों को मिलाकर एक 'स्पॉन्ज' के समान एक प्लास्टिक सांचे का निर्माण किया और उन्होंने ने पाया कि प्रकाश के TIO2 के संपर्क में आने के बाद किस तरह प्रदूषण छंट जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिली कि इस प्रक्रिया में पानी, वायु और कृषि स्रोतों से प्रदूषण को समाप्त करने की क्षमता है।




हीर्टिंग्स के अनुसार , यह केवल प्रदूषण के बारे में नहीं है, लेकिन इसमें कई अन्य प्रकार की रासायनिक प्रक्रियाएं हैं, जिनमें लोगों की रुचि हो सकती है। प्रदूषण उपशमन को प्रदर्शित करने के लिए शोधकर्ताओं ने 'स्पॉन्ज' के समान तैयार प्लास्टिक के सांचे को पानी में डाला और इसमें एक जैविक अणु (प्रदूषक) भी मिलाया, जिसमें प्रदूषक नष्ट हो गया।

थ्री-डी प्रिंटिंग की शक्ति का उपयोग करने के लिए शोधकर्ताओं ने पहले से ही इस पर काम करना शुरू कर दिया है, जिससे यह समझ आ सके कि कैसे मुद्रित संरचना रसायनिक प्रतिकार को पर प्रभाव डालती है। 

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Reference - http://gadgets.ndtv.com

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Sunday, April 10, 2016

अब ख़राब हुये टमाटर बिजली बनायेगे !

दोस्तों वर्तमान समय में ऊर्जा मानव जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक हैं। आज लगभग लगभग हर मशिनिरी काम में  बिजली  की जरूरत पड़ती है।  बिजली प्राप्त करने के कई साधन हैं। जिनमे से नदयिो पर बाँध बनाकर , सौर ऊर्जा , पवन चक्की (वायु ऊर्जा ),  ईंधन आदि हैं।  लेकिन क्या कभी हम कल्पना  कर सकते हैं की बेकार सड़े हुए टमाटरों से भी बिजली बनायीं जा सकती है।  लेकिन  ऐसा संभव है। 

अक्सर देखने में आता है कि  बेचने  के लिए रखे गए टमाटर  ज्यादा दिनों तक रखे रहने पर  अक्सर खराब हो जाते हैं और उनको फेंक दिया जाता  है। लेकिन, इससे बिजली भी बनाई जा सकती है। अभी हाल ही में  एक शोध में यह जानकारी सामने आई है जिसमें भारतीय मूल के कुछ वैज्ञानिक भी शामिल हैं।



                                                 




"Dr. Venkataramana Gadhamshetty discusses his successful conversion of tomato waste into electricity at a news conference hosted by the American Chemical Society."




 साउथ डेकोटा स्कूल ऑफ माइन्स एंड टेक्नॉलजी की नमिता श्रेष्ठ ने कहा, 'हमने बेकार हो चुके टमाटरों से बिजली पैदा करने का तरीका खोज निकाला है। श्रेष्ठ ने इस  शोध पर  साउथ डेकोटा के अस्टिटेंट प्रोफेसर वेंकटरामन्ना गधामशेट्टी और प्रिंसटन विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र के अंडरगेजुएट छात्र एलेक्स फोग के साथ मिलकर कार्य किया है। गधामशेट्टी का कहना है, इस परियोजना पर हमने दो साल पहले काम शुरू किया था जब एलेक्स ने मेरे प्रयोगशाला का दौरा किया था। वह एक स्थानीय समस्या पर शोध का इच्छुक था क्योंकि हमारे राज्य में काफी टमाटर उगाया जाता है जिसका एक बड़ा हिस्सा बेकार हो जाता है जिसे  फेंकना अपने आप में एक  एक बड़ी समस्या है।


Keywords:Research Report on Electricity generation from tamato waste, ख़राब टमाटरों से बिजली उत्पादन पर शोध रिपोर्ट,electricity frm waste tamato,south decoto research

ख़राब हुए टमाटर द्वारा बिजली बनाने की इस विधि में वैज्ञानिकों द्वारा इलेक्ट्रोकेमिकल यन्त्र का प्रयोग किया गया है। यह  यन्त्र ख़राब हुये टमाटरों को विघटित करके उनसे  से इलेक्ट्रान को एक्सट्रेक्ट करके बिजली का उत्पादन करता है।  इस यन्त्र के द्वारा ख़राब टमाटर को विघटित करने के बाद  उसके10    मिलीग्राम से। 0.3 वाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।   इसमें   और सुधार  भी किया जा सकता है।

For more information about this research please click the link given in Reference


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