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Tuesday, March 8, 2016

जय गंगाजल - एक सीख !

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पिछले   कुछ  सालो  से जिस  तरह से देश में जिस तरह की  घटनाएं हुयी हैं,  जैसे कि  मुजफरनगर के हुयी दुखद घटनाएं ,  कांठ  की हिन्दू मुस्लिम घटना , व्यापम  घोटाले में हुयी दुखद मौते , सहारनपुर की घटना ,आगरा में धर्म परिवर्तन की घटना, दादरी में मुस्लिम व्यक्ति  की  मौत  की  घटना, ललित मोदी की मदद और  बचाव,हाल ही में हुयी में हरियाणा के  दंगे एवं दिल्ली में कन्हैया  कुमार  का केस। 

इन्हीं घटनाओ में से एक दुखद और मार्मिक घटना थी किसानो द्वारा की जाने वाली आत्म हत्याए , चाहे वो महाराष्ट्र  हो , बुंदेलखंड हो या फिर राजस्थन या फिर किसानो के हित  के लिए जान देने वाले  शहीद  महेंद्र के आत्महत्या के घटना  हो , किसानो दवरा की गयी आत्म हत्याओ के ये घटनाएं बहुत ही दुखद थी।  जहा एक और हमारे देश में किसान आत्महत्या कर रहा था।  वही दूसरी और हमारे देश के प्रधानमंत्री जी विदेश यात्राओ में व्यस्त थे।  देश के विकास के नाम पर केंद्र सरकार ने किसान की  अनुमति के बिना सस्ते दामो में  किसानो की जमीन हड़पकर पूंजीपतियों को महंगे दामो में देने के लिए नया भूमि अधिग्रहण लाने के लिए जी तोड़ कोशिश की।     

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उनके पास उन क्षेत्रो में  किसानो से मिलने का , उनकी समस्या सुनने का भी वक़्त नहीं था।   आखिर क्यों  ? जो लोग देश के विकास के नाम पर किसानो की बिना अनुमति के उनकी भूमि अधिग्रहण को सपोर्ट करते हैं ऐसे  लोगो  से कहुगा कि वह "जय गंगाजल"   फिल्म  जरूर देखे  और उस से सीख  ले।  प्रकाश झा जी ने बहुत  ही कुशलता के साथ भूमि अधिग्रह् के मुद्दे को दर्शाया है।  किस तरह से  क्षेत्र के विकास के नाम पर  पावर प्लांट लगाने के लिए  जमीन हड़पी  गयी , जिस पर किसान लोग  सब्जी बेचकर बाजार लगा कर अपनी रोजी रोटी चलाते  थे और किस तरह से एक किसान और उसकी बेटी को जमीन बेचने के लिए मजबूर  की जाने की कोशिश  की गयी ,   उनको तरह तरह के लालच दिए गए , जिसमे  उस किसान ने आत्महत्या के और उसकी बेटी को भी मार दिया गया। बहुत अच्छा प्रयास  प्रकाश जी !

अभी हाल ही में सुनने में आया था की हमारे देश के  वित्त मंत्री साहब " कर्मचारी भविष्य निधि " से मिलने वाली रकम  पर भी टैक्स लगाने जा रहे थे।  क्या गजब के विचार आते हैं ! हर  तरफ से जनता  की जेब   ढीली कर  सरकारी खजाना भरना चाहते हो , अरे कम से कम इतना तो सोचा होता कि  कर्मचारी भविष्य निधि " से मिलने वाली रकम , उस कर्मचारी के के रिटायरमेंट के बाद उसके बुडापे का सहारा होती है , उसी  रकम  से  की मदद से वह अपनी बिटिया की शादी करता  है ,  यह रकम उसकी दुःख  तख़लीफ़  सहारा  होती है।  पर आपने तो हद ही कर दी  !

पूंजीपतियों के हज़ारो करोड़ का लोन माफ़ कर दिया जाता है पर किसान द्वारा  एक लाख का लोन भी न चूका पाने पर उसकी  दस लाख की  जमीन नीलाम  कर दी जाती है। अंत में प्रधनमंत्री जी को "किसान फसल बीमा योजना" लागू करने के लिए बधाई . कम  से कम कुछ  तो किसान के लिए किया अब देखते हैं यह योजना किसान के लिए कितनी हितकारी है   

2 comments:

  1. A very good article, Thanks Manoj

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (09-03-2016) को "आठ मार्च-महिला दिवस" (चर्चा अंक-2276) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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