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Saturday, December 31, 2016

जिंदगी में जरूर अपनाये ये तीन नियम ! - Three Rule of Life



Three Tip for Life

जिंदगी में हम अक्सर देखते हैं कि  दूर से सुन्दर दिखाई देने वाली चीज़े अक्सर पास  से देखने पर वैसी नही रह जाती हैं।  कोई भी व्यक्ति , वस्तु अथवा घटना करीब आते आते अलग दिखाई देने लगते हैं।  खूबियों के साथ साथ खामियां भी  नज़र आने  लगती हैं।  और साथ ही साथ मेहनत भी नज़र आने लगती है।


           


आपकी जिंदगी में कुछ लोग अक्सर ऐसे होंगे जो आपको केवल काम पड़ने पर ही याद करते होंगे।  कभी कभी तो ऐसा भी होता है की उनकी जरूररत पूरी होने  के बाद आप उनसे धन्यवाद भी न  पाये। आपकी ये इच्छा भी अधूरी रह जाए।  ऐसे में आपको गुस्सा तो आता होगा लेकिन आपको इसमें गुस्सा नही बल्कि गर्व करने की जरूरत है की लोग आपको जरूरत  पड़ने पर याद  करते हैं।  क्यों कि आप उनके लिए उस रौशनी की तरह हैं जिसकी याद अँधेरे में आती है।

दूसरो से ज्यादा हमको अपने  जीवन को देखना चाहिए की हमारी जिंदगी कहा जा रही है ?  हम इससे बेखबर रहते हैं।  दूसरो के  जीवन  में ही आनद लेते रहते हैं।  उनकी जिंदगी के सितारे  गिनने में लगे रहते हैं , उन  पर हैरत करते हैं, ईर्ष्या करते हैं जबकि हमे ये ध्यान नही रहता की हमारी खुद की जिंदगी  रौशनी खो रहा है।




Monday, December 26, 2016

दंगल - गाँव की मिटटी से सिनेमा हॉल के पर्दे तक !


अभी हाल ही में सिनेमा घरो में आयी फिल्म दंगल असली जिंदगी  प्रेरित है।  यह फिल्म  हरयाणा के पहलवान एवम एक आदर्श पिता श्री महावीर सिंह फोगाट  एवम उनकी दो लडकियां गीत और बबीता के जीवन पर आधारित है।  महावीर जी  का सपना था कि वो पहलवानी में देश के लिए गोल्ड मैडल जीत कर लाये।  लेकिन  देश के लिए रेसलिंग में गोल्ड मेडल लाने के अपने अधूरे सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी बेटियों, गीता  और बबिता  को पहलवानी सिखाने की ठानी। और आखिर २०१० के ओलंपिक में उनकी बेटी गीता फोगाट गोल्ड मैडल जीत कर न  के अधूरे सपने को पूरा किया बल्कि देश में अपने गांव जिले एवम हरयाणा  का  नाम भी रोशन किया।  

गांव वालो एवम समाज के तानों , जली कटी सुनने की परवाह किये बिना  किस तरह महावीर जी ने  अपनी बेटियों को रेसलिंग की दुनिया का चैंपियन बना दिया। उनके इस संघर्ष की कहानी  का नाम ही दंगल है।
उनके इस संघर्ष को फिल्म में बखूबी दर्शाया गया है। साथ ही साथ फिल्म के कुछ द्र्श्यो में यहाँ भी बताने का प्रयास किया गया है की फेडरेशन वालो का सपोर्ट खिलाड़ी को जितना  मिलना चाहिए उतना मिल ही नहीं पाता इस पर फिल्म में दर्शाये गए कुछ  वाक्य  बिलकुल सटीक बैठे हैं  -


  • अरे जब थाली में रोटी न होगी तो मैडल खावेगा के ? कोई न  पूछता तेरी इस पहलवानी को ? जब नौकरी मिल रही है तो कर ले। 
  • भाई पहलवानी में इज्जत कमाई, सोहरत कमाई बस पैसे नही कमा पाया। इसलिए पहलवानी छोड़ दी और नौकरी कर ली। 
  • हर पहलवान अखाड़े में यो  सोच  क उतरता है की वह देश के लिए मैडल लावेगा पर जब  देश ही पहलवान के लिए  कुछ न करे तो पहलवान बेचारा के करेगा। 
  • इंडिया मैडल इसलिए नही जीत पाता है क्यों की कुर्सी पर भिरष्ट अफसर  बैठे हैं।  दीमक पाल राखी है फेडरेशन ने , खोखला कर राखिया है स्पोर्ट को। मैडल लाने के लिए सपोर्ट कोई  न मिलै लेकिन जब मैडल न मिलै तो गाली सब देते  हैं। अरे मेडलिस्ट पेड़ पर नही उगते ऊनै  बनाना पड़ता है मेहनत  से , लगन से ,  हिम्मत से यहाँ के पैसे देने में माँ मर रहे है सालो की। 
                                     

ये फिल्म में दर्शायी गयी इन सभी बाते एक स्पोर्टमैन की दशा को व्यक्त करती हैं।  फिल्म बहुत ही  प्रेरणादायक है।  आमिर खान जी को शायद मिस्टर परफेक्टनिस्ट इसलये ही कहा जाता  है कि  वो अपने किरदार को सजीव  बनाने में जी जान लगा देते हैं।   साक्षी तंवर फिल्म में आमिर साहब की पत्नी के किरदार में नज़र आती हैं।  उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है।  फिल्म में अनेक सीन्स भले ही कम हों, लेकिन वह जिस दृश्य  में भी नज़र आयी हैं, उसमें आमिर की मौजूदगी के बावजूद भी वह अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहती हैं।   फिल्म की असली जान हैं फातिमा सना शेख  जोकि आमिर की बेटी गीता के किरदार में देखी जा सकती हैं।  उन्होंने अपने किरदार में जान डालने के लिए कितनी मेहनत की है इसका अंदाज़ा आप फिल्म देखे बिना नहीं लगा सकते। आमिर के बाद अगर किसी और कलाकार ने फिल्म के लिए सबसे ज्यादा मेहनत की होगी तो वह फातिमा ही हैं. सान्या मल्होत्रा भी बबिता के किरदार में जान फूंकने में सफल रहती हैं। 

कुल मिलाकर फिल्म बहुत ही उम्दा है। 




   

Sunday, October 23, 2016

Tips for Happy Mood


आज की इस टेंशन भरी जिंदगी में खुश कौन नहीं रहना चाहता , पर किस कीमत पर। दिन में अक्सर कोई न कोई बात ऐसी हो ही जाती है जो हमारा मूड ख़राब कर देती  है। कई ऐसा लगता है कि  हमने बिना बात ही अपना मूड खराब कर लिया।  ऐसे में आखिर कैसे अपने मूड को संतुलन बनाये रखे ?


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कल मैं , रोडवेज बस में सफर कर रहा था कि पास वाली शीट पर बैठी  एक लड़की  अपने बॉय फ्रंड से बाते कर रही थी।  बाते करते करते अचानक से वह झुंझलाकर  बोली तुम्हारा मूड हर  समय ख़राब रहता है। बाबु  पहले अपना मूड सही कर लो बाद में बात करना। इतना कहते ही उसने कॉल डिसकनेक्ट कर दी।  जब हम मूड की बात करते हैं  मूड न सिर्फ हमको डिस्टर्ब करता है बल्कि हमारे अपनों के मूड पर भी असर डालता है।



                                 

मूड बिगड़ते ही हम छोटी छोटी बात पर गुस्सा होंने लगते हैं।  हमारे  चेहरे से मुस्कान गायब हो जाती है।  मजाक भी हमे बुरा लगने लगता है ये सब छोटी छोटी बाबते हमारे सोचने समझने की क्षमता पर भी  असर   डालती हैं।
इस विषय में मनोवैज्ञानिको का कहना कि जब बात बात पर हमारा  मूड ख़राब होता है  तो यह इस बात का संकेत हैं कि यदि चीजे हमारे मन के अनुरूप न हो तो  तो हम झुंझलाने लगते हैं। हम उसे सम्भाल पाने में असक्षम होते जाते हैं।  इस सब चीज़ों  से निपटने के लिए  को सही बनाये रखने के लिए हमको कुछ बातो पर विशेष ध्यान देना होगा।

ख़राब मूड को सही करने के उपाय -


सबसे पहले हमको सही कारण का पता लगना होगा।  क्यों की कभी कभी हम मूड ख़राब होने  के कारण हम ऐसा बैठते है जो हमे नहीं करना चाहिए था।  अक्सर हमारी आदत  है की हम अपनी गलती नहीं  मानते  हैं।  कई बार ऐसी हालात\आते हैं की दुसरो को लेकर हमारे अपने  दर हम पर हावी होने लगते हैं। ख़राब  मूड को सही करने के लिए हमे इन  बातो  का विशेष  ध्यान रखना चाहिए। 


  • जब हमारा मूड ख़राब हो तो हमको अपना ध्यान किसी  लगा लेना चाहिए ना की बार बार उस बात के बारे में सोचे जिसके कारन मूड ख़राब हुआ है। 
  • मन न हो तो भी मुस्कुराये।
  • अपने लिए अच्छे शब्दो का प्रयोग करे। 
  • दूसरो की मदद करे और दूसरो का आभार व्यक्त करे। 
  • अच्छा सुने, अच्छा देखे और अच्छा बोले। 
  • अपने किसी शुभचिंतक से बात करे। 
  • अपने अच्छे पालो को याद करे। 



Tuesday, October 11, 2016

Mental Disorder Disease, It's Cause and Solution

वर्ल्ड मेन्टल हेल्थ डे - 10  अक्टूबर !

एक समय था जब बीमारियां लोगो कोसो दूर रहती थी क्यों कि उस समय में लोगो का खान पान बिलकुल शुद्ध था। उस समय  मानसिक बीमारी  जैसे शब्द  तो सुनने में आते  ही नहीं थे।  लोगो को मानसिक बीमारियां नहीं थी क्यों कि  अधिकतर लोग एक दुसरे से मिलजुलकर रहते थे, एक दुसरे से  प्रेम करते थे। उनके बीच अकेलेपन जैसी भावनाये नहीं थी।  

वही दूसरी और अगर हम  वर्तमान हालातो की बात करे तो हम लोग अपने सामाज में रह रहे अधिकतर लोगो  को चारो तरफ से शारीरिक एवम मानसिक बीमारियों से घिरा पाते हैं।  अभी कल 10  अक्टूबर को वर्ल्ड मेन्टल डे था।  
पिछले काफी सालो से  हर साल मानसिक बीमारी के अलग अलग थीं  पर ये दिन 10 अक्तूबर को ही मनाया जाता है। वर्तमान आकंड़ो पर नज़र डाले तो हम पाएंगे की आज के समय में लोगो को शारीरिक बीमारी से ज्यादा इन दिनों मानसिक बीमारियां मुख्य रूप से  प्रभावित कर रही हैं। आज व्यक्तियों मेंटल डिसऑर्डर धीरे धीरे एक  बड़ी बीमारी का रूप लेता जा रहा है और  गंभीर समस्या बनती जा रही है ।

क्या होती है मानसिक बीमारी ?

मानसिक बीमारी आखिर क्या है और कैसी होती है ? इस बारे में अभी  तक शोध चल रहा है। क्योंकि ये दिमाग से शुरू होकर यह नस नस में समां जाती है  जाती है। नींद ना आना, चिड़चिड़ापन, गुस्सा और डिप्रेशन में रहना, इस बीमारी के सबसे बड़े लक्षण हैं। दरअसल, आपको समझ ही बहुत देर से आता है कि आपको आखिर हुआ क्या है। इस बीमारी की कोई खास वजह नहीं होती, लेकिन धीरे-धीरे ये आपको इस तरह से अपने काबू में कर लेती है कि आपके हाथ में कुछ नहीं रह जाता है। अकेलापन, डिप्रेशन और गंभीर चिंतन आपको इस तरफ ढकेल देता है। कई बार लोग इंसोमनिया का शिकार होते हैं।

जब हम  बीमारी के शिकार होते हैं तो हमारे  परिवार वाले , दोस्त आदि भी हमको  समझ नहीं पाते और उन्हें मानिसक रूप से अक्षम बताने लगते हैं। ऐसे में  डॉक्टर, मनोवैज्ञानिक और काउंसिलर ही आपकी मदद कर सकते हैं। जब अपने आप घर में इसका कोई समाधान नजर ना आए तब आप डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं।  अभी पिछले कुछ वर्षो में हुयी अधिकतर आत्महत्याओ के आंकड़े बताते हैं यह कि सबसे ज्यादा आत्महत्याएं  स्ट्रेस या तनाव की वजह से हुई है और ये तनाव मानसिक होता है और इसका सीधा असर समाज या आपके घर पर होता है।

डॉक्टरों एवम विशेषज्ञओ का कहना है कि  इस बीमारी में दवा से ज्यादा पीएफए काम करता है। 


कुछ देर नजर डालते है  य़े पीएफए है क्या ?

 PFA आखिर है  क्या  ?

 आपको यह जानकर आश्चर्य होगा  कि भारत में 1 साल में 1 लाख से ज्यादा लोग मेंटल डिप्रेशन का शिकार होने के कारन  आत्महत्या करते हैं। लोगो में बढ़ता तनाव  इसका प्रमुख कारन है।  लोग स्ट्रेस इतना लेते हैं कि खुद से कभी बात नही कर पाते।  हर समय उलझनों में घिरे रहते हैं। एक तरफ अपनी जॉब , बिज़नस की उलझने तो दूसरी और पारिवारिक उलझने ऐसे में हम इमोशनल स्ट्रेस से ग्रषित होते जा रहे हैं।  डॉक्टर और मनोवैज्ञानिक का यह मानना है कि दवा से ज्यादा पीएफए की जरूरत  होती है। पीएफए मतलब "साइकोलॉजिकल फर्स्ट एड"  जो आपको सबसे पहले अपने परिवार या घर के सदस्यो द्वारा  मिल सकता है। ये एक ऐसा  ट्रीटमेंट है, जो हमें तनाव कम करने में मदद करता है। जब हम तनाव से घिरे होते हैं तो ऐसे में हमको डॉक्टरी ईलाज से पहले  अपने परिवार की सलाह और काउंसिलिंग की जरूरत होती है। इसे कहते हैं पीएफए।

कैसे निपटे मानसिक बीमारी से ?  

इस बीमारी से निपटने के लिए हमको सबसे पहले अपने आपको मानसिक तौर पर मजबूत बनाना होगा साथ ही साथ अपने परिवार और दोस्तों से अपने संबंधों को बेहतर बनाना होगा ताकि उनके सहयोग प्रेम हमे मिलता रहे है। अगर वे आपको समझें और आपकी मानसिक स्थितिके साथ ताल मिलाकर चलें तो आप इस बीमारी से ठीक हो सकते हैं। दवा से ज्यादा आपकी सकारात्मक सोच और आपका आत्मविश्वास ही इस बीमारी से  आपकी मदद करेगा और आप एक  स्वस्थ्य जीवन  व्यतीत कर पाएंगे । 


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     $$ सभी पाठकगणो को दशहरा की हार्दिक शुभकामनायें $$

Tuesday, October 4, 2016

SmartGPA Mobile App

अक्सर कुछ लोग अपना भविष्य जानने  के लिए ज्योतिष के पास जाते हैं,तो कुछ यह पता करने के लिए की आज  का दिन शुभ  होगा या अशुभ  यह जानने के लिए  रोज सुबह सुबह टी.वी. खोलकर बैठ जाते हैं। आज मीडिया मीडिया ने  एक सबसे बड़ी गलती   हमारे देश के साथ  यह की है कि लोगो को सुबह सुबह उनका राशिफल दिखाने लगते हैं। बेचारे कुछ तो वैसे ही डर जाते हैं, परेशान रहते हैं ,नतीजन टेंसन की वजह से काम को पूरी क्षमता की साथ नही कर पाते ,खैर क्या करे मीडिया वालो को अपनी कमाई जो करनी है। 

इस ऍप्स के सही कार्य करने  की जांच करने के  लिए "Dartmouth College " के 30  स्टूडेंट्स  के स्मार्टफोन में  यह मोबाइल ऍप्स इनस्टॉल किया गया और 10  सप्ताह  तक उनकी पढ़ाई सम्बंधित गतिविधियों को मॉनिटर किया गया। शोधकर्ताओं ने इस ऍप्स के परिणामो को सकारात्मक बताया है। तकनीकी तौर पर इस मोबाइल  ऍप्स को बनाने के लिए  डेटा सेंसिंग , क्लाउड  कंप्यूटिंग  एवं मशीन लर्निंग अल्गोरिथम  का   प्रयोग किया गया है।


अब कुछ नयी बात करते हैं। असल में बात यह है कि  जब से मार्केट में स्मार्टफोन , एंड्रॉयड एवं आईफोन  का चलन बढ़ा  है तब से मोबाइल ऍप्स का क्रेज कुछ ज्यादा ही बढ़ता जा रहा है।  नए नए एप्लीकेशन के लिए रोज नए नए मोबाइल ऍप्स बन रहे हैं।  ऐसा ही एक मोबाइल ऍप्स वैज्ञानिको ने बनाया है जो कि कॉलेज स्टूडेंट का उसकी  परीक्षा  में ग्रेड और उसके पास और फेल होने  का पता लगा सकता है।  यह ऍप्स स्टूडेंट की पढ़ाई से सम्बंधित क्रिया कलापो के आधार पर उसके एग्जाम ग्रेड के बारे में जानकारी देता  है। इस मोबाइल ऍप्स को बनाने वाले शोधकर्ताओं का कहना है  की यह ऍप्स स्टूडेंट की परफॉरमेंस को बेहतर बनाये रखने के उदेश्य से बनाया गया है।  ताकि  स्टूडेंट पढ़ाई के प्रति गंभीर  बने , और मन लगाकर पढ़ाई करे।


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यह ऍप्स स्टूडेंट के दिन भर के क्रिया कलाप जैसे  सोना ,पढ़ना  ,पार्टी  मनाना  ,एक्सरसाइज करना , खेलना आदि को  दिए गए समय के एवं अन्य जानकारियो के आधार पर कार्य करता है। इस मोबाइल ऍप्स का नाम SmartGPA है। जिसको  "Dartmouth College " कॉलेज के शोधकर्ताओं ने बनाया है।  "Darmouth College " के " Computer Science Department "  के प्रोफेसर Andrew Campbell का कहना है की कई प्रकार के व्यवहारिक और वातावरणीय कारको का कॉलेज के दौरान  स्टूडेंट की  पढ़ाई पर विशेष प्रभाव पड़ता है। यह ऍप्स न केवल स्टूडेंट के एग्जाम में परफॉरमेंस के बारे में जानकारी देता है बल्कि उसकी मेन्टल हेल्थ और उसके व्यवहार सम्बंधित बातो के बारे में भी बताता है ताकि वह उनमे सुधार कर सके।   यह ऍप्स स्टूडेंट की कॉलेज अटेंडेंस   , स्लीपिंग एक्टिविटी आदि  के बारे  भी जानकारी देता  है।  


To watch a small video you can click on this Youtube Video Link.

Small Youtube Video for SmartGPA App

Reference : www.bgr.in

Sunday, September 25, 2016

1 T.B. Storage SDXC Memory Card first time in the World


डिजिटल स्टोरेज डिवाइस  बनाने वाली कंपनी सैनडिस्क का नाम तो आपने सुना ही होगा। अक्सर हम सैनडिस्क कंपनी द्वारा निर्मित "पेन ड्राइव" इस्तेमाल करते ही हैं।  पेन ड्राइव के साथ साथ सैनडिस्क मेमोरी कार्ड को भी बनाती है।  आपको बता दें कि  अभी हाल ही में कंपनी ने 1  T. B.  ( एक  टेराबाइट )  की स्टोरेज क्षमता वाले एस डी एक्स सी मेमोरी कार्ड का प्रोटोटाइप बना लिया है  और बहुत जल्द ही वह इस कार्ड को बनाकर मार्केट  में लांच करने में भी सफलता हासिल कर लेगे। 

अगर ऐसा होता है तो यह दुनिया का पहला 1  TB स्टोरेज क्षमता वाला पहला SDXC मेमोरी कार्ड होगा और सैनडिस्क इसे बंनाने वाली पहली कंपनी। कंपनी ने इस मेमोरी कार्ड के प्रोटोटाइप का अनावरण जर्मनी में "फोटोकीना २०१६" में किया। इससे पहले वर्ष 2014 में भी सैनडिस्क कंपनी (512  G.B के मेमोरी कार्ड) 512 G.B. SDXC MEMORY CARD को बाज़ार में लांच   चुकी है। उस समय उसकी कीमत $800 थी। उस समय  भी यह दुनिया में पहली बार हुआ। 



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 अब आपको बता दे कि 1 T.B.वाला यह नया मेमोरी कार्ड नई नई तकनीको से पूर्ण है।  यह मेमोरी कार्ड मुख्यत अल्ट्रा हाई रेसोलुशन फोटोज ,वर्चुअल रियलिटी, 4 K , 8K विडियो ,360 डिग्री विडियो एंड विडियो सर्विलांस  करेगा। यह कार्ड मार्किट के कितना सफल हो पता है यह इसकी कीमतों पर भी निर्भर करता है।  इस मेमोरी कार्ड में कई हज़ारो की संख्या में   फोटोज को सेव किया जा सकता है। 

अब से 16 वर्ष पहले SanDisk कंपनी  ने   पहला 64 M.B. की स्टोरेज क्षमता वाला मेमोरी कार्ड बनाया था। 

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Reference - https://www.sandisk.com/about/media-center/press-releases/2016/western-digital-demonstrates-prototype-of-the-worlds-first-1terabyte-SDXC-card

Tuesday, September 20, 2016

Pink Movie - A Review

अभी हल ही रिलीज  हुयी फिल्म " पिंक "इन दिनों काफी चर्चा में है।  कुछ लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं तो कुछ  इसको भारतीय सिनेमा की एक बहुत ही उम्दा फ्लिम बता रहे हैं।  आलोचना करने वालो में कुछ जाने माने फिल्म समीक्षक भी है। कल मैं  भी यह फिल्म देखकर आया। 
   
फिल्म ने  समय समय पर भावुक कर दिया। यह फिल्म  हमारे भारतीय समाज में  लड़कियों के प्रति अधिकतर जनता का क्या दृष्टिकोण रहता है उसको उजागर करती है।  यह फिल्म ऐसे  हालात को सामने रखती है - ताकि आप उन तमाम हिस्सों में दिखाई गई बातों को अपने सामाजिक जीवन से जोड़ सकें। समाज में स्त्रियों को कैसे कैसे तंज , टोंट और सवालो को सुनना पड़ता है, झेलना पड़ता है , उनका सामना करना पड़ता है इन इन सभी बातो को बहुत सजीव  दर्शया गया है। 

इस फिल्म में  कोर्ट में केस की सुनवाई  के दौरान उन लड़कियों को वेश्या सिद्ध करने की कोशिश में जो तर्क दिए गए वो हमे न सिर्फ सोचने पर मजबूर करते हैं बल्कि जो समाज की कुण्डित सोच को भी दर्शाते है , यहाँ  मैं  केस के दौरान पूछे गए एक ऐसे  ही सवाल का जिक्र करता हु।  






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केस दौरान फिल्म के पात्र राजवीर  तर्क देता है कि   "ये हमें हिंट दे रहीं थीं।"

जवाब में लॉयर सहगल ( अमिताभ जी ) पूछते हैं  "कैसे?"


राजवीर - "हँस कर और छू कर बात कर रही थीं।"

यह जवाब सुनकर में अमिताभ जी की आँखें का जो हाव भाव मुझे देखने को मिला ,वही  विडम्बना  हर पुरुष की आँखें में होनी चाहिए। फिल्म में  इस  जवाब के माध्यम से यह व्यक्त किया गया है की हम यह  क्यों मान लेते हैं कि हँसती हुई लड़कियाँ सहजता से 'उपलब्धहोती हैं। क्यों समझ लेते हैं कि  जो लड़की हंस हंस कर बात करती है वह हमबिस्तर भी हो सकती है  आखिर क्यों ? यह एक कुंठित सोच नहीं है तो और क्या है ? 

फिल्म में लड़कियों से जुड़े कुछ अन्य सवालो को भी उजागर किया गया है जैसे कि यदि अकेले रहने वाली तीन लड़कियाँ देर रात रॉक शो जातीं हैं ,'उसतरह के कपड़े पहने, लड़कों से घुल मिल कर बात करती हैं , न सिर्फ बाते करती हैं बल्कि उनके साथ जाकर कमरे में शराब भी पीती हैं तो उनके इस व्यवहार से यह क्यों मान लिया जाता  वो  'सेक्समें इंट्रेस्टेड हैं ? क्या यह कुंठित सोच नहीं है ?

हमारे समाज में आख़िरकार लड़कियों को यह सब करने का अधिकार जो नहीं है। यह सब तो अधिकार  लड़कों का एक जन्मसिद्ध अधिकार के तरह प्राप्त  है और फिल्म में दर्शाया गया है कि  अगर लडकियां ऐसा करेगी तो लड़के उसे 'सबक़सिखाएँगे। यह सबक़ सिखाने वाली प्रवृत्ति भी पुरूषों को जन्म से ही मिली है  फिल्म के पात्र  राजवीर और उसके दोस्त भी यही 'ट्रेडिशनफ़ॉलो कर रहे हैं। 

फिल्म के अंत में अमिताभ जी ने जो वाक्य बोला वही इस फिल्म का सन्देश है जिसे समाज को समझना होगा , उस पर अमल करना होगा। " नो मीन्स नो ", उसको बोलने वाली लड़की चाहे कोई परिचित हो , अपरिचित हो , फ्रंड हो , ग्रिल फ्रंड हो ,सेक्स   वर्कर हो या फिर खुद की पत्नी क्यों न  हो।






Wednesday, August 24, 2016

Tips for Students to make life better

आदरणीय रतन टाटा  जी के विचार जो उन्होने विद्यार्थियों के साथ साझा किये ! 


  •  लोग तुम्हारे स्वाभिमान की परवाह नहीं करते इसलिए पहले खुद को साबित करके दिखाओ !
  •  कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद 5 आंकड़े वाली पगार की मत सोचो, एक रात में कोई वाइस प्रेसिडेंट नहीं बनता. इसके लिए अपार मेहनत पड़ती है.
  •  अभी आपको अपने शिक्षक सख्त और डरावने लगते होंगे क्योंकि अभी तक आपके जीवन में बॉस नामक प्राणी से पाला नहीं पड़ा.
  •  तुम्हारी गलती सिर्फ तुम्हारी है तुम्हारी पराजय सिर्फ तुम्हारी है किसी को दोष मत दो इस गलती से सीखो और आगे बढ़ो.
  •  तुम्हारे माता पिता तुम्हारे जन्म से पहले इतने निरस और ऊबाऊ नही थे जितना तुम्हें अभी लग रहा है तुम्हारे पालन पोषण करने में उन्होंने इतना कष्ट उठाया कि उनका स्वभाव बदल गया.
  • सांत्वना पुरस्कार सिर्फ स्कूल में देखने मिलता है. कुछ स्कूलों में तो पास होने तक परीक्षा दी जा सकती है लेकिन बाहर की दुनिया के नियम अलग हैं वहां हारने वाले को मौका नहीं मिलता.
  •  जीवन के स्कूल में कक्षाएं और वर्ग नहीं होते और वहां महीने भर की छुट्टी नहीं मिलती. आपको सिखाने के लिए कोई समय नहीं देता. यह सब आपको खुद करना होता है.
  •  TV का जीवन सही नहीं होता और जीवन tv के सीरियल नहीं होते. सही जीवन में आराम नहीं होता सिर्फ काम और सिर्फ काम होता है .
  •  लगातार पढ़ाई करने वाले और कड़ी मेहनत करने वाले अपने मित्रों को कभी मत चिढ़ाओ. एक समय ऐसा आएगा कि तुम्हें उसके नीचे काम करना पड़ेगा.
  • "विश्वास " किसी पर इतना करो कि वो तुम्हे फंसाते समय खुद को दोषी समझें 
  • 🍁
  • " प्रेम " किसी से इतना करो कि उसके मन में तुम्हें खोने का डर बना रहे

Wednesday, July 13, 2016

Never Search These Information on Google


वर्तमान में शायद ही कोई ऐसा इंटरनेट उपयोगकर्ता हो   जो की गूगल सर्च इंजन का उपयोग  न करता हो। लेकिन आपको बता दे की कुछ विशेष प्रकार की जानकारी  सर्च करना  आपको महंगा  पड़ सकता है। जिनको सर्च करने से आप किसी मुसीबत में फस सकते हैं। ऐसे  में हमे यह पता होना जरूरी है कि किन चीजों के बारे में हमे गूगल पर  सर्च करना नुकसानदायक हो सकता हो सकता है। 

गूगल पर कभी भी संदिग्ध एवं सनदेह जनक चीज़े सर्च न करें। ऐसा इसलिए क्यों कि  साइबर पुलिस अक्सर ऐसे लोगो पर नज़र रखती है।  यह सत्य है  की जब हम इंटरनेट प्रयोग करते हैं तो हम खुद को चाहकर भी छिपा नहीं सकते। अगर आप कोई संदिग्ध   वेब साइट या वेब पेज सर्च करते हैं या उस पर  उपलब्ध जानकारी का प्रयोग करते हैं तो आप किसी क़ानूनी मसले में फस  सकते हैं या यूँ कहे कि ऐसा करने पर  खुद को किसी  मुसीबत में फस्ने  आमंत्रित कर रहे हैं। 






वर्तमान समय में "गूगल सर्च इंजन  " सबसे एडवांस एवं सबसे अधिक प्रयोग किये जाना वाला सर्च इंजन है जो कि ऐसी  तकनीकों से लैस है कि वह आपकी सर्च के अनुसार आपकी पहचान बता सकता है। यकीन मानिए कि गूगल के  पास आपकी सारी  सर्च का डाटाबेस उपलब्ध होता है। ऐसे में कई बार अक्सर प्राइवेट जानकारी लीक होने का खतरा बन रहता है।  

एक शोध के मुताबिक यहाँ पता चला है की अक्सर जब हम गूगल पर किसी मेडिसिन या बिमारी के बारे में सर्च करते हैं तो  यह डेटा किसी थर्ड पार्टी को  कर दिया जाता है। ऐसा करने पर उस बिमारी  से'सम्बंधित विज्ञापन आपको दिखाये जाते हैं इसके बाद यह जानकरी क्रिमिनल वेब साइट को भी भेजी जाती है यह प्रिक्रिया अक्सर साइबर वर्ल्ड में मेडिकल फ्रॉड के नाम से जानी जाती है। 


Wednesday, June 29, 2016

Data Backup - Some Important Tips



क्या है डेटा बैकअप ?

डेटा बैकअप एक ऐसी प्रक्रिया है  जिसके दौरान हम  अपने कंप्यूटर पर मौजूद उपयोगी डेटा की कंप्यूटर में  हार्ड डिस्क पर किसी अन्य स्थान पर दुसरे फोल्डर में एक एक्स्ट्रा कॉपी संरक्षित  रखते हैं जरूरी नहीं कि डेटा  की यह दूसरी कॉपी हार्ड डिस्क  में ही संरक्षित  करे  इसे हम किसी अन्य स्टोरेज डिवाइस जैसे पेन ड्राइव ,कपक्ट डिस्क , डी  वी डी , एक्सटर्नल हार्ड डिस्क या फिर ऑनलाइन स्टोरेज जैसे ड्राप बॉक्स आदि  में संरक्षित कर  सकते हैं। 

क्यों जरूरी है डेटा बैकअप ?


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अक्सर कभी कभी कई कारणों की वजह से कंप्यूटर पर संरक्षित हमारे डेटा को नुक्सान पहुंच सकता है ये कारण  वायरस के कारण डेटा  का नष्ट  होना , प्राकृर्तिक आपदा के कारण डेटा नष्ट होना या फिर हमारी ही गलती से भूलवश डेटा डिलीट हो जाना आदि हो सकते हैं। इसलिए ऐसे में यह बेहद ही जरूरी है की हम अपने उपयोगी महत्वपूर्ण डेटा के एक्स्ट्रा कॉपी जरूर रखे। इसलिए दता बैक उप एक जरूरी प्रिक्रिया है। 



डेटा बैकअप करते समय  जरूरी बाते।  

  • डेटा  बैकअप करते समय स्टोरेज डिवाइस की क्षमता एवं उसकी गुणवत्ता का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। 
  • डेटा   को सुरक्षित   संरक्षित  करने के लिए अपने कंप्यूटर एंटी वायरस सॉफ्टवेयर इनस्टॉल करे। 
  • डेटा के  महत्व ,उसकी उपयोगिता के आधार पर पर ही उसका बैकअप  करे जो डेटा महत्वपूर्ण न हो उसके लिए डेटा बैकअप में स्टोरेज स्थान व्यर्थ न करें। 

  • डेटा बैकअप करने से पहले कंप्यूटर पर मौजूद डेटा को उसकी महत्ता के आधार पर उसे क्लास्सिफाई जरूर कर ले। 








Wednesday, June 22, 2016

Yoga's Importance for Everyone


कल सारे देश में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। कहते हैं कि  योग  करने से शरीर, मन और मष्तिष्क स्वस्थ रहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या  योग करना हर किसी  के लिए फायदेमंद है ? या कुछ यू कहे की कौन सा योग किस के लिए सही है और कौन सा गलत? इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।  आइये  थोड़ा इस बारे में। 

योग करने के बारे में डॉक्टरो का मत है कि दिल के रोगी एवं हाई ब्लड प्रेशर  की शिकायत रहने वालो व्यक्तियों को केवल कुछ प्रकार के योग ही करने चाहिए।  इसी प्रकार गठिया की बीमारी वाले व्यक्ति सभी प्रकरर के योग नहीं कर  सकते। खासकर की जिनके पेट का ऑपरेशन हुआ है ऐसे लोग ऑपरेशन के कम से कम 6  महीने बाद ही योग करें। 

वर्तमान में प्राणायाम , कपाल भाति का बहुत प्रचलन हैं।  भारत में घर घर में ये दोनों ही प्रकार  के योग सामान्य रूप से  किये जाते है।  लेकिन आपको बता दे कि दिल के बीमार एवं हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्तिओ के लिए ये दोनों ही योग नुक्सानदायक  हैं।  इनको करने से ब्लड प्रेशर बढ़ने की सम्भावना रहती है। ऐसे व्यक्ति अनुलोम विलोम कर सकते हैं। 


                                             

  
दिल के रोगी एवं हाई ब्लड प्रेशर  की शिकायत रहने वालो व्यक्तियों को योग बहुत ही सोच समझकर एवं सावधानी पूर्वक करना चाहिए। आइये अब नज़र डालते हैं कुछ विशेष प्रकार के आसनो पर ।  

  • वज्रासन  - जो लोग घुटने की समस्या से पीड़ित है, वह इस योग को न करे ना करें। पेट की समस्या वाले लोगो के लिए फायदेमंद है। 
  • गौमुख आसन - गठिया के रोगी , जिनके पेट का ऑपरेशन हुआ हो एवं हिर्दय रोगी इसे  न करें। 
  • मकरासन - कमर दर्द की शिकायत रखने वाले एवं दिल के रोगी न  करें।  
  • भुजंगासन - जिनके कंधे में जयदा दर्द रहता हो या जिनके  हुआ हो वह इस आसन को न करें। 
  • धनुरासन - दिल के रोगी ,  हाई ब्लड प्रेशर एवं   पेट के ऑपरेशन वाले  व्यक्ति इस योग को न करें। 
  • मत्स्यासन - दिल के रोगी ,  हाई ब्लड प्रेशर एवं   पेट के ऑपरेशन वाले  व्यक्ति इस योग को न करें। 
  • हलासन - दिल के रोगी , कमर दर्द एवं पेट के ऑपरेशन वाले व्यक्ति इस आसन को न करें।  
  • चक्रासन - दिल के रोगी , हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति इस आसन को न करें।  




Friday, June 17, 2016

Gases Harmful for Environment



वर्तमान में दिन  प्रतिदिन हमारी धरती गर्म होती जा रही है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ती जा रही है। धरती पर पाये जाने वाली जहरीली गैस  इस दशा के लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। धरती को बचाने के लिए नए नए प्रयास किये जा रहे हैं।  इन प्रयासों में से एक प्रयास ऐसा भी है जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जायेगे। तो आये जानते हैं इस प्रयोग के बारे में।  

वैज्ञानिकों का कहना है की कार्बन डाई ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसे इसके लिए जिममेदार हैं।  हाल ही में वैज्ञानिकों ने धरती को इन जहरीली गैसों  के प्रकोप बचाने बचाने के लिए एक नया तरीका ढूंढ  निकाला है।  यह ट्रिक और कुछ नहीं बल्कि  वैज्ञानिकों द्वारा  कार्बन ढाई ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों को अब बर्फीली चटटान के रूप में बदलने का तरीका खोज लेना  है।




आइसलैंड में वैज्ञानिकों ने अपने इस शोध को अंजाम दिया है।  इस शोध को साउथ पैटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जुएर्ग  मैटर  एवं उनकी टीम ने अंजाम दिया है। उनके द्वारा इजाद किये गए इस नए तरीके से अब धरती पर सभी जहरीली और हानिकारक गैसों को पथ्थरो और चट्टानों  में बदला जा सकता है।  अपनी इस शोध में इन्होने 95 % कार्बन डाई ऑक्साइड को चट्टान  में बदलने में सफलता हासिल की है। 

इनके द्वारा किये गए इस शोध को कार्बफिक्स परियोजना का नाम  दिया गया है।  इस शोध के  प्रमुख श्री जुएर्ग मैटर'जी का कहना है की इस शोध की मदद से ग्लोबल वार्मिंग के समस्या से काफी हद तक निपटा जा सकता है।  

कार्बन डाई ऑक्साइड को चट्टान में परिवर्तित करने की प्रकिर्या के बारे में आपको बता दे की इसके दौरान सबसे पहले धरती की सतह  से लगभग 550  मीटर की गहराई कठोर में कार्बन डाई  ऑक्साइड   एवं  पानी दोनों को पहुंचाया  जाता है जहां पर यह एसिड मिश्रण चट्टानों को घुला देती है जिसमे कैल्सियम एवं मैगनीशियम  पायी  जाती है। फिर इस घुली हुयी चट्टान की कैल्सियम  चुना पथ्थर में तब्दील हो जाती है।  इस प्रकार से करबओं ढाई ऑक्साइड एक बर्फीले पथ्थर में बदल जाती है।  

Wednesday, June 1, 2016

Security from Email Virus


ईमेल वायरस वर्तमान में प्रयोग किये जाने वाल सबसे अधिक असरदार वायरस है.जिसको कि ईमेल में डॉक्यूमेंट अटेच के रूप में आपको भेजा  जाता है। आपको पता भी नहीं होता कि  जिस डॉक्यूमेंट  या फाइल को अटेच करके आपकी मेल आईडी पर भेजा गया है ,उसमे वायरस हैऔर जैसे ही आप इस डॉक्यूमेंट को ओपन करते हो या डाउनलोड करते हो यह वायरस एक्टिव हो जाता है एवं आप इसके शिकार बन जाते हैं। 


ईमेल वायरस से होने वाली हानियाँ -


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ईमेल वायरस  एक्टिव होते ही यह कई प्रकार से आपको हानि पहुंचा सकता है।  यह नुक्सान उस वायरस में की गयी   कोडिंग  पर निर्भर करता है कि  इससे किस तरह का नुक्सान होने वाला है। इससे होने वाली हानिया इस प्रकार हैं -

  • जैसे कि जिस भी डिवाइस कंप्यूटर , लैपटॉप ,टेबलेट या मोबाइल जिसमे भी आप यह ईमेल ओपन करते हो उस डिवाइस पर स्टोर आपके डेटा को क्षति पहुंचाता है उसे करप्ट कर सकता है। 
  • जैसे ही  ईमेल वायरस एक्टिव होता  है यह आपके ईमेल अकाउंट से आपकी  कुछ प्राइवेट इनफार्मेशन जैसे एड्रेस या कांटेक्ट नंबर एवं  अन्य जानकारी ऑटोमेटिकली उस व्यक्ति के ईमेल एड्रेस पर भेज देता है जिसने आपको ईमेल वायरस भेजा है।   
  • तीसरा सबसे भयंकर प्रकार की हानि यह है कि जैसे ही यह ईमेल वायरस एक्टिव होता है, यह ऑटोमेटिकली आपके  अकाउंट में कांटेक्ट ऑप्शन में मौजूद आपके सभी मित्रगणों की ईमेल आईडी पर भी आपकी आईडी से भेज दिया जाता है। 




ईमेल वायरस से खुद को कैसे सुरक्षित रखे ?

ईमेल वायरस से खुद को सुरक्षित रखने के लिए इन बाते का ध्यान रखे -

  • यदि आप ईमेल सेन्डर से बिलकुल  अंजान हो तो कभी भी उसके द्वारा  आपकी  ईमेल  पर अटेच के रूप में  मिलने वाले डॉक्यूमेंट या फाइल को  ओपन न करें। 
  • अपने कंप्यूटर , लैपटॉप , मोबाइल या जिस डिवाइस पर आप ईमेल चेक करते हो उस पर अपडेटेड एंटीवायरस, एंटी  स्पायवेयर सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करें ताकि'वह आपको  वाले डॉक्यूमेंट को  सम्बंधित जानकरी के लिए  स्कैन कर सके। यदि के बाद कोई वायरस सम्बंधित मेसेज आपको डिस्प्ले  होता है तो अटैचमेंट को ओपन न करें। 

Tuesday, May 17, 2016

Patato Research at CPRI India


अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत रहो की नाय ?

का चाचा ? का भयो ?

अरे हम सुनत रहे कि अब आलू  को सड़ने से बचाया जा सकता है !


चाचा अगर सच में आलू कि खेती करने वाले किसान भाई इस तकनीक का उपयोग कर पाये तो हो सकता है यह उनके  लिए सोने पर  सुहागा साबित हो या फिर आलू के ग्राहक के लिए !

हाँ शायद ऐसा ही होगा !


अक्सर जब आप बाज़ार से आलू लाते हो तो कुछ दिन  बाद ही घर में रखे रखे उन में से  पानी छूटने लगता है और वो  सड़ने  लगते  हैं।  इससे न केवल आपका नुक्सान होता है बल्कि उस किसान  का भी  नुक्सान भी होता है जो  बड़ी संख्या  में आलू का उत्पादन करते हैं। एक बड़ी मात्रा में उनका आलू सड़ने की वझे से ख़राब हो जाता है।  आलू को सड़ने से बचाने के लिए भारत के जालंधर स्थित  "केंद्रीय आलू शोध संस्थान" ने एक ऐसी तकनीक इजाद की है जिसकी मदद से आलू को सड़ने से बचाया जा सकता है और आप उसको लम्बे  समय तक सुरक्षित रख सकते हैं। " केंद्रीय आलू शोध संस्थान " , "भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद"  के आधीन काम करने वाली एक संस्था है।  


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इस संस्था में आलू को सड़ने से बचाने वाली तकनीक को संस्था के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशिव मेहता ने बनाया है।  जिसके दवरा आलू को 8  महीने तक सही सलामत रखा जा सकता है।  डॉ अशिव मेहता के अनुसार आलू में 80  % मात्रा  पानी की होती है जिसके कारन मिटटी से निकलते ही कुछ दिन बाद आलू ख़राब हो जाता है।  अगर आलू से पानी की इस मात्रा को निकाल दिया जाए तो आलू को काफी महीनो तक सुरक्षित रखा जा सकता है।  डॉ अशिव मेहता की इस तकनीक का नाम "डीहाइड्रेशन ऑफ़ पटैटो" है एवं यह पर्यावरण के अनुकूल भी है। 

आलू  में भारी मात्र में न्यूट्रीशन  मौजदू होते हैं इसलिए इसको स्कूल में बच्चो को भी "मिड डे मील" के रूप में दिया जा सकता है।

 Post from Computer Science


Saturday, April 23, 2016

फेसबुक पर हो सकता है आपके लाइक , कमेंट और शेयर का गलत इस्तेमाल !


                          "Your's Likes, Comments and Shares can be Misuse on Facebook"

वर्तमान  में शायद कोई ही इंटरनेट उपयोगकर्ता ऐसा हो जिसका की सोशल नेटवर्किंग साइट  फेसबुक  पर अकाउंट न हो और जो अपने प्रोफाइल में जुड़े मित्रो के प्रोफाइल पर, ग्रुप एवं कम्युनिटी पोस्ट पर लिखे या कमेंट न करता है। फेसबुक पर लाइक  एवं कमेंट करना एक सामान्य आदत है।   क्यों कि  फेसबुक अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का एक एक  ऐसा माध्यम है, जिस पर  'लाइक' और 'कमेंट' के माध्यम से उस प्रोफाइल  व्यक्तियों की प्रतिक्रियाओं के बारे में पता चल जाता है । लेकिन क्या यह जानते हैं  है कि आपकी इन प्रतिक्रियाओं का कितना गलत इस्तेमाल हो रहा है? हाल  ही में जारी एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर किए जा रहे आपके 'लाइक' और 'कमेंट' अब गड़बड़ घोटाले की चपेट  में हैं।



हाल ही में समाचार पत्र 'द इंडीपेंडेंट' में प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक का 'लाइक' विकल्प किसी भी तस्वीर या जानकारी की प्रशंसा और अपने विचार व्यक्त करने का एक आसान और सुरक्षित तरीका है। लेकिन कुछ फेसबुक घपलेबाज आपके द्वारा 'लाइक' की गई आकर्षक और भावनात्मक पोस्ट (लेखों) को एडिट  कर उसमें ऐसी सामग्री डाल देते हैं, जो न सिर्फ निंदनीय हो सकती बल्कि आपको मुस्किल में भी डाल  सकती है।

फेसबुक पर किसी  भी पोस्ट को पॉपुलर करने में  सामान्यता 'लाइक', 'कमेंट' और 'शेयर' विकल्प का बड़ा महत्व होता है । इसलिए लोकप्रिय पोस्ट प्रमुखता के साथ दिखाई देते हैं।अक्सर  यह पाया गया है कि घोटालेबाज पहले किसी दुर्भावना रहित लेख को पोस्ट करते हैं, जिसके लोकप्रिय होने और पसंद किए जाने की संभावना अधिक होती है। इसके बाद जब ये पोस्ट अधिक संख्या में 'लाइक' और 'शेयर' कर दिए जाते हैं, तब घोटालेबाज इन पोस्ट को एडिट करके इसके भीतर की सामग्री को बदलकर उसमें दुर्भावनापूर्ण बातें लिख देते हैं।




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केवल इतना ही नहीं आज कल  यह घोटालेबाज फेसबुक पर धोखाधड़ी करने के लिए कई उत्पादों के नकली फेसबुक पेज बनाकर उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं, जिनमें फंसकर कई लोग अपनी क्रेडिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर देते हैं।  खासकर की ग्रुप और कम्युनिटी पर उपलब्ध पोस्ट को सोच समझकर ही लाइक  कमेंट और शेयर  करें।  


Objective Questions in Operating System

MCQ in Operating System



Monday, April 18, 2016

अब आनंद लीजिए पेपरलेस पासपोर्ट का !

जहां वर्तमान में   जहां हर काम डिजिटल तकनीक की मदद से हो रहा है ऐसे में भला पासपोर्ट भी डिजिटल होने से कैसे बच सकता था। बहुत जल्द पासपोर्ट भी डिजिटल हो सकता है ? मतलब अब आपको विदेश जाते समय पासपोर्ट को अपने साथ ले जाने की जरूरत नहीं होगी।  सोचो अगर आप  एयरपोर्ट पहुंचने वाले हैं और अपना पासपोर्ट  घर पर ही  भूल गए हैं? तो  अब चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि एक कंपनी स्मार्टफोन में ही पासपोर्ट उपलब्ध कराने पर  काम कर रही है।

डेलारू नाम की ब्रिटेन की यह कंपनी  पासपोर्ट की प्रिटिंग करती है। यह पेपरलेस पासपोर्ट तकनीक पर काम कर रही है जिसे स्मार्टफोन में ही स्टोर किया जा सकेगा। अगर ऐसा संभव  तो अब आपको विदेश जाते समय अपने साथ सामान्य  पासपोर्ट  को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।  




हाल  ही  में ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार, 'द टेलीग्राफ' में यह खबर प्रकाशित हुयी है जिसके अनुसार इस तकनीक की मदद से मुसाफिर बिना बुकलेट वाली पासपोर्ट के सफर कर सकेंगे। यह बिल्कुल मोबाइल बोर्डिंग कार्ड की तरह काम करता है ।

इसके फायदे के साथ  कुछ नुक्सान भी हो सकते हैं , अगर किसी का फोन चोरी हो जाए तो ऐसे में सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। सुरक्षा कंपनी प्रुफप्वाइंट के डेविड जेवान्स का कहना है, फोन में डिजिटल पासपोर्ट रखने के लिए नए हार्डवेयर की जरूरत होगी, ताकि इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट को सुरक्षित ढंग से रखा जा सके ताकि इसे फोन से कॉपी न किया जा सके।

कंपनी के अनुसार पेपरलेस पासपोर्ट को  पासपोर्ट रीडर के साथ वायरलेस तरीके से जुडऩे में सक्षम होना चाहिए। क्योंकि एयरलाइन के तरीके से क्यूआर कोड के माध्यम से इसे रीडर के साथ जोडऩे पर कॉपी करने या धोखाधड़ी का खतरा बना रहेगा। फिलहाल पेपरलेस पार्सपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है।


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Reference - Paperless Passport TechnologyNews

Objective Questions from Non-Conventional Energy Resources

MCQ in Non Conventional Energy Resources


Wednesday, April 13, 2016

"थ्री डी प्रिंटिंग" तकनीक से समाप्त होगा वायु प्रदूषण !

वर्तमान में वायु प्रदुषण  एक विकट समस्या बानी हुयी है। इस समस्या से निपटने के लिए वर्तमान में एक नई तकनीक सामने आई है।  असल में यह तकनीक तो पुरानी है लेकिन इसका प्रयोग वायु प्रदूषण की रोकथाम  के लिए पहली बार होने जा रहा है। "थ्री - डी  प्रिंटिंग " का नाम तो आपने सुना ही होगा। 

हाल ही में कुछ अमरीकी शोधकर्ताओं की एक टीम ने 'थ्री-डी प्रिंटिंग' तकनीक के माध्यम से हथेली में व्याप्त जाने वाली एक 'स्पॉन्ज' जैसी संरचना तैयार की है, जो प्रदूषण को कम करने में मददगार  साबित हो सकती है। अमरीकन यूनिवर्सिटी के रसायनशास्त्र के प्रोफेसर मैथ्यू हार्टिंग्स की टीम  में शामिल  शोधकर्ताओं ने यह बताया कि   कैसे सक्रिय रसायन विज्ञान के साथ वाणिज्यिक थ्री-डी प्रिंटर का उपयोग कर एक संरचना बनाई जा सकती है।


शोधकर्ताओं की टीम ने 'थ्री-डी प्रिंटिंग' प्रक्रिया के दौरान रासायनिक सक्रिय टाइटेनियम डाइऑक्साइड TIO2 के नैनो कणों को मिलाकर एक 'स्पॉन्ज' के समान एक प्लास्टिक सांचे का निर्माण किया और उन्होंने ने पाया कि प्रकाश के TIO2 के संपर्क में आने के बाद किस तरह प्रदूषण छंट जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिली कि इस प्रक्रिया में पानी, वायु और कृषि स्रोतों से प्रदूषण को समाप्त करने की क्षमता है।




हीर्टिंग्स के अनुसार , यह केवल प्रदूषण के बारे में नहीं है, लेकिन इसमें कई अन्य प्रकार की रासायनिक प्रक्रियाएं हैं, जिनमें लोगों की रुचि हो सकती है। प्रदूषण उपशमन को प्रदर्शित करने के लिए शोधकर्ताओं ने 'स्पॉन्ज' के समान तैयार प्लास्टिक के सांचे को पानी में डाला और इसमें एक जैविक अणु (प्रदूषक) भी मिलाया, जिसमें प्रदूषक नष्ट हो गया।

थ्री-डी प्रिंटिंग की शक्ति का उपयोग करने के लिए शोधकर्ताओं ने पहले से ही इस पर काम करना शुरू कर दिया है, जिससे यह समझ आ सके कि कैसे मुद्रित संरचना रसायनिक प्रतिकार को पर प्रभाव डालती है। 

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Reference - http://gadgets.ndtv.com

TCS Vita Code Test

TCS Vita Code Test Informatin

Sunday, April 10, 2016

अब ख़राब हुये टमाटर बिजली बनायेगे !

दोस्तों वर्तमान समय में ऊर्जा मानव जीवन की महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक हैं। आज लगभग लगभग हर मशिनिरी काम में  बिजली  की जरूरत पड़ती है।  बिजली प्राप्त करने के कई साधन हैं। जिनमे से नदयिो पर बाँध बनाकर , सौर ऊर्जा , पवन चक्की (वायु ऊर्जा ),  ईंधन आदि हैं।  लेकिन क्या कभी हम कल्पना  कर सकते हैं की बेकार सड़े हुए टमाटरों से भी बिजली बनायीं जा सकती है।  लेकिन  ऐसा संभव है। 

अक्सर देखने में आता है कि  बेचने  के लिए रखे गए टमाटर  ज्यादा दिनों तक रखे रहने पर  अक्सर खराब हो जाते हैं और उनको फेंक दिया जाता  है। लेकिन, इससे बिजली भी बनाई जा सकती है। अभी हाल ही में  एक शोध में यह जानकारी सामने आई है जिसमें भारतीय मूल के कुछ वैज्ञानिक भी शामिल हैं।



                                                 




"Dr. Venkataramana Gadhamshetty discusses his successful conversion of tomato waste into electricity at a news conference hosted by the American Chemical Society."




 साउथ डेकोटा स्कूल ऑफ माइन्स एंड टेक्नॉलजी की नमिता श्रेष्ठ ने कहा, 'हमने बेकार हो चुके टमाटरों से बिजली पैदा करने का तरीका खोज निकाला है। श्रेष्ठ ने इस  शोध पर  साउथ डेकोटा के अस्टिटेंट प्रोफेसर वेंकटरामन्ना गधामशेट्टी और प्रिंसटन विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र के अंडरगेजुएट छात्र एलेक्स फोग के साथ मिलकर कार्य किया है। गधामशेट्टी का कहना है, इस परियोजना पर हमने दो साल पहले काम शुरू किया था जब एलेक्स ने मेरे प्रयोगशाला का दौरा किया था। वह एक स्थानीय समस्या पर शोध का इच्छुक था क्योंकि हमारे राज्य में काफी टमाटर उगाया जाता है जिसका एक बड़ा हिस्सा बेकार हो जाता है जिसे  फेंकना अपने आप में एक  एक बड़ी समस्या है।


Keywords:Research Report on Electricity generation from tamato waste, ख़राब टमाटरों से बिजली उत्पादन पर शोध रिपोर्ट,electricity frm waste tamato,south decoto research

ख़राब हुए टमाटर द्वारा बिजली बनाने की इस विधि में वैज्ञानिकों द्वारा इलेक्ट्रोकेमिकल यन्त्र का प्रयोग किया गया है। यह  यन्त्र ख़राब हुये टमाटरों को विघटित करके उनसे  से इलेक्ट्रान को एक्सट्रेक्ट करके बिजली का उत्पादन करता है।  इस यन्त्र के द्वारा ख़राब टमाटर को विघटित करने के बाद  उसके10    मिलीग्राम से। 0.3 वाट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है।   इसमें   और सुधार  भी किया जा सकता है।

For more information about this research please click the link given in Reference


Wednesday, March 30, 2016

बिल गेट्स के प्रेरणादायक विचार !


सर बिल गेट्स आज किसी  परिचय के मोहताज नहीं हैं।  वह केवल  विश्व  के एक सफलतम बिजनैसमैन ही नहीं  हैं बल्कि आज के युवाओं   के लिए प्रेरणाश्रोत भी हैं।  आइये जानते हैं उनके कुछ प्रेरणाप्रद विचार।   

$ चाहे आपमें कितनी भी योग्यता क्यों न हो, केवल एकाग्रचित्त होकर ही आप महान कार्य कर सकते हैं।

$ आपके सबसे असंतुष्ट ग्राहक आपके सीखने का सबसे बड़ा स्त्रोत हैं।

 $ सफलता एक घटिया शिक्षक है। यह लोगों में यह सोच विकसित कर देता है कि वो असफल नहीं हो सकते।

$ अपने आप की तुलना किसी से मत करो, यदि आप ऐसा कर रहे है तो आप स्वयं अपनी बेइज़्ज़ती कर रहे है।

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$ जब आपके हाथ में पैसा होता है तो केवल आप भूलते है की आप कौन है लेकिन जब आपके हाथ खाली होते है तो सम्पूर्ण संसार भूल जाता है की आप कौन है।

 $ सफलता की खुशियां मनाना ठीक है लेकिन असफलताओं से सबक सीखना अधिक महत्वपूर्ण है।

 $ हमें अपने पैर पर खड़े रहने के लिए गूगल बिंग जैसे ब्रांड से प्रेरणा लेते हैं।

$ यदि आप गरीब जन्मे है तो यह आपकी गलती नहीं है लेकिन यदि आप गरीब मरते है तो यह आपकी गलती है।

 $ यह सही हैं की सफलता का जश्न आप मनाये पर अपने पुराने बुरे समय को याद रखते हुए।

$  जीवन न्याययुक्त नहीं है, इसकी आदत डाल लीजिये।

 $ मैं एक कठिन काम को करने के लिए एक आलसी इंसान को चुनुंगा क्योकि आलसी इंसान उस काम को करने का एक आसान तरीका खोज लेगा।

 $ अगर मैं पहले से कोई अंतिम लक्ष्य बना के चलता तो क्या आपको नहीं लगता है कि मैं उसे सालों पहले पूरा कर चुका होता।





 $ अगर हम अगली सदी की तरफ देखें तो लीडर वो होंगे जो दूसरों को शशक्त बना सकें।

$ एक अच्छा पेशेवर इंजीनियर बनने के लिए आपको अपनी परीक्षा की तैयारी हमेशा देर से शुरू करनी चाहिए क्योंकि यह आपको समय को मैनेज करना और इमरजेंसी को हैंडल करना सिखाएगा।

$ मेरा विश्वास है की यदि आप लोगो को समस्याएं दिखाओंगे और उनका हल सुझाओगे तो लोग उसको अपनाने के लिए आकर्षित होंगे।

 $ बेवकूफ बनकरखुश रहिये और इसकी पूरी उम्मीद हैं की आप अंत में सफलता प्राप्त करेंगे।

$ निसंदेह मेरे बच्चों के पास कम्प्यूटर होगा लेकिन पहली चीज़ जो वो प्राप्त करेंगे वो बुक्स (पुस्तकें) होगी।

 $ जीवन सेमेस्टर में विभाजित नहीं है। आपको गर्मियों में छुट्टी नहीं मिलती है और कुछ नियोक्ता आपको अपने आप को खोजने में मदद करने में रुचि रखते हैं।

$ अगर आप अच्छा नहीं बना सकते तो कम- से- कम ऐसा तो कीजिए कि वह अच्छा दिखे।

Thursday, March 24, 2016

लीवर फैट - एक रिस्क जिंदगी के लिए !

आज कल दिन प्रतिदिन नयी नयी बीमारियां लांच हो रही है।  पिछले कुछ सालो में ऐसी ऐसी बीमारियो के नाम सुनने में आये हैं जिनका कभी कोई पता ही नहीं था , लेकिन आजकल ये बीमारियां   अनजान गलियों से निकलकर मानव जीवन में आ गई हैं। 

Keywords:Fatty Liver Disease , Liver disease,
ऐसी ही एक बीमारी का नाम है - स्टिओटोसिस  जो की  लीवर में फैट जमने को कारण होती  है। लीवर में थोड़ी बहुत फैट का बनना एक  सामान्य बात है, लेकिन अधिक फैटी लीवर होने पर लीवर के वजन का 5 से 10% हिस्सा फैट होता है। अभी हाल ही में  हेपाटॉलॉजी के शोध पत्र में प्रकाशित डॉ योनोसी और साथियों की ताजा शोध के मुताबिक दुनिया भर में लगभग लगभग 25.24% लोगों में फैटी लीवर की समस्या पाई गई है। 
खाड़ी के देशों और दक्षिण अमेरिका में यह सबसे ज्यादा है, जबकि अफ्रीका में यह सबसे कम है। भारत में भी  30 से 40 प्रतिशत भारतीय  बीमारी के शिकार  हैं।  इस बिमारी से निपटने के लिए हमको अपनी कुछ आदतों में बदलाव करना होगा। अपनी खान पीन सम्बंधित आदतों में बदलाव करके बदला जा सकता है। सामान्यतः इसके लक्षण दिखाई नहीं देते और इससे कोई स्थायी क्षति नहीं होती । 

इस बिमारी के  बारे में जानकारी देते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के मानद महासचिव डॉ. के.के. अग्रवाल  ने कहा है की कि मोटापा सबसे बड़ी समस्या है और इसके साथ एनएएफएलडी और पाचन तंत्र की गड़बड़ी का खतरा जुड़ा होता  है। 5% भी वजन कम करना काफी है, लेकिन हमें 10% कम करने का लक्ष्य रखना चाहिए ताकि मेटाबॉलिक सिंड्रोम के खतरे को टाला जा सके और फैटी लीवर की समस्या से बचा जा सके।  
चलते चलते बता दे की वैसे तो सामान्य फैटी लीवर से जीवन को इतना बड़ा खतरा नहीं होता, लेकिन इस पर  सूजन और लीवर पर रगड़ लगने का खतरा हो सकता है। चूंकि यह  बिमारी  मोटापे से जुड़ी है, इस वजह से लोगों को स्ट्रोक या हार्ट अटैक हो सकता है, जिन्हें एनएएसएच है उन्हें   खतरा ज्यादा है। 

                *******************  " होली  की हार्दिक शुभकामनाएं " **********************


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