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Friday, December 25, 2015

क्या मनुष्य की यादो का प्रत्यारोपण संभव हो पायेगा ?

                   "Memory Transplantation"

अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत  रहो  की नाय ?

का चचा का भयो ?

अरे हम सुनत रहे कि आने वाले समय में एक मनुष्य के दिमागों  में बसी यादो  को दुसरे मनुष्य के दिमाग में डाला जा सकता है!

चचा अगर ऐसा हुआ तो किसी विषय विशेष में  तेज और अधिक जानकारी रखने वाले लोगो की यादो को उस विषय में कमजोर लोगो के दिमाग  में डालकर उनको भी तेज बनाया जा सकेगा। 

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हाँ शायद  ऐसा ही होगा !

क्या है याददाश्त शेयरिंग का यह  शोध ?


जी हाँ यदि  आने वाले समय में एक व्यक्ति की याददाश्त को दुसरे व्यक्ति के दिमाग में प्रत्यारोपित किया जा सकता है तो इसमें आश्चर्य मत करना। इस विषय पर दक्षिणी कलिफ़ोर्निया एवं पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के न्यूरो साइंटिस्ट की टीम  शोध कर रही है।  उन्होने यह शोध अभी चूहों  और बंदरो पर किया है।  साथ ही साथ भविष्य में  मानव पर भी इस शोध के सफल होने के संकेत दिए हैं।  यहाँ आपको बता दे कि  यह विशेष शोध अमेरिकी रक्षा  मंत्रायल के अनुरोध पर किया जा रहा है क्यों कि  क्यों उनका प्रयास है जो सैन्य कर्मचारी किसी वजह से चीज़ो को भूल जाते हैं उनको किसी तरह से वापस लाना।  


सबसे पहले आपको बता दे कि मनुष्य के  सिर के पिछले हिस्से में एक जगह होती है जिसका  वैज्ञानिक नाम हिप्पोकैंपस हैं। इस जगह के एक हिस्से को  सीए1 और दूसरे को सीए3 नाम से जाना जाता  है। मानव मष्तिष्क में सूचनाएं इससे होकर ही गुजरती हैं।  इनमें से ही कुछ सूचनाएं इस हिप्पोकैंपस में एकत्रित रहकर लंबे समय तक याद रह जाती हैं। यदि यह हिस्सा  क्षतिग्रस्त हो जाये तो  आदमी को चीजें कम याद रहती हैं।  धीरे धीरे वह चीजों को बिल्कुल भूल जाता है। 

यदि इस शोध के बारे में शुरुवाती अधयन्न की बात करे तो बता दे कि वैज्ञानिको ने अभी यह प्रयोग चूहों और बंदरों पर करने  के बाद चित्र दिखाकर मिर्गी के मरीजों के दिमाग के इस हिस्से की गतिविधियों पर भी किया है। बाद में कुछ विशेष प्रकार के इलेक्ट्रोड की मदद से  इन सूचनाओं को गुजारकर देखा और पाया की यदि उसे चूहों और बंदरों में प्रत्यारोपित किया जाए तो क्या सूचनाएं देर तक दर्ज रह जाती हैं ? इसमें उन्हें सफलता मिली है

इस शोध हेतु आगे की योजना !


यादाश्त के प्रत्यारोपण का यह प्रयोग अभी मनुष्यो पर नही  किया गया है। इस दिशा में आगे बढ़ते हुए साउथ कैलिफोर्नया विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. टेम बर्जर के अनुसार, इन प्रयोगों के जरिये उन्हें दिमाग के याददाश्त वाले हिस्से को बेहतर कर सकने के काम में भी सफलता मिली है। पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता का कहना है कि सिर में हिप्पोकैंपस के आसपास के इलाकों में याददाश्त को लेकर भी कुछ प्रयोग सफल रहे हैं और अगर इसी दिशा में काम बढ़ा तो दिमाग के ज्यादा बड़े हिस्से के उपयोग की जानकारी भी मिलेगी।


इस शोध के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बर्जर को पूर्ण विश्वास है कि आगे के प्रयोगों में सफलता मिलने पर आने वाले दिनों में याददाश्त की शेयरिंग भी संभव होगी, मतलब एक की याददाश्त को दूसरे में प्रत्यारोपित भी किया जा सकेगा। ऐसा हो पाया, तब ही अमेरिकी रक्षा मंत्रालय सैन्य सेवा के क्षेत्र में अपने सपने को पूरा कर सकेगा। 

Saturday, December 19, 2015

" इन टिप्स को अपनाये और स्मार्ट फ़ोन हैंग होने से बचाये "

"Tips to prevent your smart phone from hanging"


आज कल जिस तरह से स्मार्ट फ़ोन का उपयोग दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है , उसको देखकर लगता है कि यदि हमारे पास स्मार्ट फ़ोन न हो तो हमारा दिन  कितना नीरस और बोरिंग हो जाएगा। जैसे कि  कभी कभी जब हमारा स्मार्ट फ़ोन अक्सर हैंग होने लगता है और सही से काम नही करता तो हमको बेहद बुरा बुरा सा महसूस होता है।  ऐसा लगता है जैसे स्मार्ट फ़ोन नहीं बल्कि हमारे शरीर के किसी हिस्से ने काम करना बंद कर दिया हो। 

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स्मार्ट फ़ोन के हैंग होने की समस्याए अक्सर हमारे सामने आती रहती हैं.स्मार्ट फ़ोन का हैंग होना हमारी गलतियों का भी नतीजा है।  आइये जानते हैं कुछ ऐसी बातो को जिनको ध्यान में रखते हुए हम अपने स्मार्ट फ़ोन को हैंग होने से बचा सकते हैं।  





  • सबसे पहले हमको अपने स्मार्ट फ़ोन की इंटरनल मेमोरी का उपयोग सावधानीपूर्वक करना होगा इसके लिए हम कुछ ऐसी फाइल और फोल्डर जिनका उपयोग हम  कम करते हैं या नही करते  उन्हें क्लाउड पर स्टोर कर सकते हैं। ताकि हमारे फ़ोन की इंटरनल  इंटरनल मेमोरी व्यर्थ न जाए।  क्लाउड पर स्टोर की बात करे तो  क्लाउड स्टोरेज का उपयोग  करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन का होना आवश्यक  है। क्लाउड स्टोरेज एक आभाषी  ड्राइव की तरह होता है जहां उपयोगकर्ता  अपना अकाउंट बनाकर डाटा सेव कर सकते हैं। गूगल ड्राइव, वन ड्राइव और ड्रॉप बॉक्स क्लाउड स्टोरेज के ही एप्लिकेशन हैं। यहां से जरूरत पड़ने पर कभी भी संरक्षित किये गए  डाटा का बैकअप हम आसानी से ले सकते हैं ।
  • फोन के हैंग होने में  इंटरनल मेमोरी भी एक प्रमुख कारण  है। जब भी फोन की इंटरनल मेमोरी या जिसे हम रैम के रूप  में भी जानते हैं वह  कम हो जाती है तब अक्सर हमारा स्मार्ट  फोन हैंग होने लगता है।  इसलिए इंटरनल मेमोरी के सही उपयोग के लिए आप ऊपर बताये गए टिप्स के अलावा  अपने  स्मार्टफोन में उपलब्ध एक्सपैंडल मेमोरी विकल्प पर जाकर फाइलें, वीडियो, पिक्चर आदि को  स्टोर कर सकते हैं । 
  • जो एप्स जयदा उपयोग के नहीं हैं या आपके लिए आनेवाश्यक है  , आप उनको डाउनलोड न करे कभी कभी  ज्यादातर एप्स के डाउनलोड होने से भी फोन हैंग होने लगता है।
  • आपने अक्सर देखा होगा की अधिकतर  स्मार्टफोन में फैक्ट्री डाटा रिसेट नाम से एक विकल्प होता है । फैक्ट्री डाटा रिसेट करने से फोन हैंगिंग की समस्या काफी सीमा तक काम किया जा सकता है । लेकिन ऐसा करने से पहले आप अपने  फोन के डाटा का बैकअप लेना न भूले ।
  • स्मार्ट फोन की सेटिंग्स विकल्प में जाकर  स्टोरेज पर टच करे  ऐसा करने पर आपको  नीचे कैश डाटा (Cache data)  विकल्प दिखाई देगा , उसको  भी साफ  कर दें। आजकल गूगल प्ले स्टोर पर कुछ  ऐसे एप्स उपलब्ध है जिन्हें डाउनलोड कर और उसका सही  समय पर उपयोग करने  से आप इस समस्या से हमेशा के लिए भी निजात पा सकते है। 
  • इस टिप्स पर जरूर गौर फरमाये  कभी सांग वीडियो पिक्चर आदि अपने स्मार्ट फ़ोन की इंटरनल मेमोआर्य में ही  हैं हमको ऐसा नहीं करना है हमको अपने स्मार्ट   फोन में गाने, वीडियो, तस्वीरें और बाकी डाटा एक्सटर्नल मेमोरी ( मेमोरी कार्ड ) में ही संरक्षित करने चाहिए । 

Thursday, December 17, 2015

Now Purchase a Bottle of Fresh Mountain Air ( Cost $27.99 )


बढ़ते  हुए  वायु  प्रदुषण  ने आज मनुष्य  को इस मोड़ पर लाकर  खड़ा कर दिया है कि मनुष्य को जीने के लिए सांस  लेने  के  लिए  भी   अब स्वच्छ हवा  की बोतलों   को खरीदना पड  रहा है।  जी हाँ  हाल ही में चीन में जिस तरह से बढ़ते वायु प्रदुषण की समस्या पर अमल करते हुए  पिछले दिनों चीन की राजधानी बेजिंग में अलर्ट  जारी किया गया , उसको ध्यान में रखते हुए वहा  के लोगो ने अब सांस लेने के लिए पहाड़ो की स्वछ हवा से भरी बोतले को खरीदना शुरू कर दिया है। 

अब तक पानी के लिए कहा जाता था कि  पानी भी इंसान को बोतल में खरीदकर पीना पड़ता है , लेकिन अब तो नौबत यहाँ तक आ पहुंची है कि दूषित हवा से बचने के लिए सांस लेने के लिए भी स्वच्छ  हवा की  बोतलों का सहारा मानव को लेना पड़ रहा है।  बेजिंग में बढ़ते वायु प्रदुषण को ध्यान में रखते हुए चीन की सरकार ने पिछले दिनों वहा  शहर के सभी स्कूलों  को बंद  करने  एवं साथ ही साथ शहर में  इमारतों के निर्माण पर भी कुछ दिनों  रोक लगाने का फैसला लिया  है। 

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चीन में  बढ़ते वायु प्रदुषण   की  समस्या को देखते हुए कनाडा की एक कम्पनी ने  पहाड़ो की  स्वच्छ  हवा की  बोतलों को चीन में वायु प्रदुषण की समस्या को झेल रहे प्रमुख शहरो  में बेचना शुरू कर दिया है। कंपनी   ने एक  Vitality Air की बोतल की कीमत 27.99  डॉलर रखी  है।  चीन के शहर संघाई  में वहा के वायुमंडल में पिछले साल जनवरी से ही धुएं की  काफी बढ़ोतरी  हुयी है। ऐसे में वहा  लोगो ने इस बोतल को खरीदना शुरू कर दिया है।  जिसको बेजिंग एवं संघाई शहर के लोगो  ने चीन में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए प्रयोग होने वाली  वेबसाइट Taobao पर ऑनलाइन मांगना शुरू कर दिया है। अब तक  वहा  ऐसी 500  बोतल बेचीं जा चुकी हैं और 700  बोतल का ऑनलाइन  आर्डर और भेजा जा चूका है।  

वर्तमान में चीन ही नहीं बल्कि विश्व के अधिकतर देश वायु प्रदुषण  कि समस्या से झूझ  रहे हैं।  जिसमे हमारे देश भारत का नाम भी टॉप लिस्ट में है।  दिल्ली में वायु प्रदुषण कि समस्या से निपटने के लिए जो कदम हाल ही में दिल्ली सरकार और सुप्रीम कोर्ट द्वारा  उठाये गए हैं ,उनके बारे में तो आप जान ही चुके हैं। ऐसे  में सवाल यह है की अगर वायु प्रदुषण इस कदर ही बढ़ता रहा तो क्या  भारत में भी लोगो को इस प्रकार की बोतल का सहारा लेना पड़ेगा  ?  अगर ऐसा हुआ तो यह धीरे धीरे पानी कि बोतलों कि तरह मानव जीवन यापन  में एक चलन बन जाएगा। 

Sunday, December 6, 2015

सावधान,वायुमंडल में घट रहा है ऑक्सीजन का स्तर !


आज सारा विश्व बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग की समस्या का सामना कर रहा है। हाल ही में पेरिस में जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भाग लेने वाले अधिकतर देशो के वरिष्ठ नेताओ ने इस हेतु ग्रीन हाउस गसो के ऊत्सर्जन को कम करने की दिशा में प्रयास करने हेतु कुछ विशेष समझोते किये।  डीजल पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियों से निकलने वाले धुएं,कारखानो की चिमनी से  निकलने वाले  धुएं एवं जहरीली गैसो  ने  वातावरण की वायु को दूषित कर दिया है। हाल ही में इसका एक उदाहरण हमे चीन की राजधानी बेजिंग में देखने को मिला जब बेजिंग शहर  की वायु के अत्यधिक दूषित  होने पर वह कुछ दिनों के लिए अलर्ट घोषित कर दिया गया। 

हाल ही में हमारे देश की अरजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदुषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण उठाया है जिसके तहत देश की  राजधनी  दिल्ली में 1  जनवरी 2016  से  एक दिन सम  और एक दिन विषम अंको वाली गाड़िया चलेगी। अब देखते हैं की यह नियम वायु के बढ़ते प्रदूषण को रोकने में कितना सहायक साबित होता है। 

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प्रकृति के के साथ बढ़ती मानव छेड़छाड़ ने आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को अत्यधिक गंभीर बना दिया है। हाल ही में  चेन्नई में आई बाढ़  भी प्रकृति के साथ मानव की छेड़छाड़ का ही नतीजा है।  चेन्नई  में ईमारतों को बनाते समय , कालोनियों को बनाते समय इस बात की अनदेखी की गयी।वहा  पर मौजद तालाबों और झीलों को मिटा दीया गया , जिसका खामियाजा आज जनता को इस विकराल बाढ़  के रूप में देखने को मिला है।




हाल ही में वैज्ञानिकों ने अपने शोध के परिणामो  को ध्यान में रखते हुए सावधान  किया है कि समुद्री की गहराई में पानी  का तापमान बढ़ने के कारण पृथ्वी के ऑक्सीजन स्तर में लगातार गिरावट हो सकती है। जिसका असर आने वालो  सालों में इंसान और जानवर की मृत्यु दर में व्यापक तौर पर वृद्धि के रूप में हमको देखने को मिल सकता  है।


यदि हम शोध के अनुसार कुछ महासागरों की बात करे तो दुनिया के महासागरों के तापमान में 6 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि देखी गई है। जिसको ध्यान में रखते हुए  वैज्ञानिकों ने भविष्यवाणी की है कि साल 2100 तक ऑक्सीजन का उत्पादन रूक सकता है क्योंकि समुद्री तापमान बढ़ने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में रुकावट  आ सकती है। प्रकाश संश्लेषण द्वारा फाइटोप्लैंकटन (पादप प्लवक) कार्बन डाइऑक्साइड का उपभोग और ऑक्सीजन का उत्पादन (निस्तारण) करते हैं।

फाइटो प्लैंकटन को एक सूक्ष्म शैवाल (माइक्रो एल्गी) और सूक्ष्म जीव के तौर पर जाना जाता है। यह मीठे और खारे पानी के लगभग सभी स्रोतों में पाये जाते  हैं। इंग्लैड की लिसेस्टर यूनिवर्सिटी के मुख्य शोधविज्ञानी सर्गेई पेट्रोवस्की के अनुसार, यह समुद्री फाइटोप्लैंकटन पृथ्वी की लगभग दो-तिहाई ऑक्सीजन का निर्माण करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। समुद्र के पानी के बढ़ते तापमान के कारन इनके खत्म होने का खतरा है। इनके खत्म होने के कारन  हमारे सामने वैश्विक स्तर पर वायुमंडलीय ऑक्सीजन की कमी का संकट ख़डा हो जाएगा।

इन शोधार्थियों के एक समूह ने समुद्र में ऑक्सीजन उत्पादन के लिए एक नया मॉडल विकसित किया है। यह मॉडल  प्लैंकटन समुदाय की ऑक्सीजन उपभोग और निस्तारण जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं की गणना करने में सखम है । इस शोध के प्रमुख सर्गेई पेट्रोवस्की का कहना है कि , पिछले दो दशकों में ग्लोबल वार्मिग ने विज्ञान और राजनीति का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।  इससे होने वाले परिणामों के बारे में दुनिया को टी वे चैलनो के माध्यम से बहुत कुछ बताया जा चुका है। साथ ही साथ उन्होने यह भी कहा  कि अंटार्टिका में बर्फ के पिघलने से एक विनाशकारी वैश्विक बाढ़ आ सकती है।

इसलिए हमको आने वाली पीडियो के अस्तित्व के लिए ऑक्सीजन के बचाव हेतु अभी से ध्यान देना होगा और व्यक्ति स्तर पर , समहू स्तर पर , राज्यीय , राष्ट्रीय एवं अंराष्ट्रीय स्तर पर इस हेतु अपना सहयोग करना होगा। 





Thursday, December 3, 2015

माता पिता द्वारा बच्चियों की हत्या आखिर क्यों ?

जैसा कि विगत कुछ वर्षो  में देखने में आया है कि माता पिता द्वारा बच्चियों की हत्या करने में काफी बढोतरी  हुयी है।  लेकिन आखिर क्या कारण है कि हमारे देश में आये दिन ऐसे केश होते रहते है।  अगर इस समस्या को लेकर भारत में एक सर्वे कराया जाये तो इस सम्बन्ध में  विभिन्न लोगो के विभिन्न मत हो सकते है।  मगर मेरे विचार से केवल इतना कह देना कि मात पिता बेटे कि चाह के  लिए  या   केवल  आर्थिक विवशता के कारण ऐसा करते है पर्याप्त नहीं है।  क्यों कि हमारे देश में काफी समय पहले से ही बेटियों के पैदा होने पर परिवार में वो खुशी नहीं छाती है जो एक लड़का होने पर छाती है इसके लिए जो उतरदायी है वो है हम लोगो कि सोच और हमारे देश क़ा माहौल और अज्ञानता और गाँव में शिक्षा की  कमी  , खासकर गाँव में पहले से ही लडकियों को पपढाया  लिखाया नहीं ज़ाता था और उनकी कम ऊम्र में शादी कर दी जाती थी।   इतना ही नहीं जब शादी के बाद अगर लड़का नहीं होता तो उसमे भी ताने लड़की ( बहु ) को ही सुनने पड़ते थे। .इसमे कोई शक नहीं कि  आज भारत के हालत काफी हद तक बदल चुके है है आज कल लडकियों कि पढ़ाई  पर काफी ध्यान दिया जाता है और वह  केवल घरेलु कामो तक सिमित ना रहकर सरकारी और प्राइवेट नौकरी भी कर  रही है और हर क्षेत्र में सफलता के नये आयामों को छु रही है।  फिर भी  काफी जगह पर लडकियों को लेकर अभी भी वही स्थति बनी हुयी है जो काफी समय पहले थे उनकी सोच अभी भी वही है।  


                                       

आईये अब जरा नज़र डालते  है कुछ  अन्य और महत्वपूरण बिन्दुओ पर जिनके कारण कही ना कही हर माँ बाप लड़की होने पर डरता है या उनको जायदा चिंता  होने लगती है और इतनी ख़ुशी नहीं होती है जितनी कि लड़का होने पर होती है  जो इस प्रकार है --

1  देश में बढती  हुयी  बलात्कार कि घटनाएं  और लडकियों क़ा उत्पीडन . आये दिन ऐसे खबरे सुनने और पदने को मिल जाती है।  इसकी रोक थाम के लिए सरकार ने काफी नियम , क़ानून बनाये है जिनको कुछ हद तक फोलो भी किया ज़ाता है पर फिर भी ये घटनाएं रोकने क़ा नाम नहीं ले रही है।   

2 . आज के समय में दहेज क़ा काफी प्रचलन है। लड़की के पैदा होते ही माँ बाप को ये चिंता सताने लगती है कि उसकी शादी में दहेज क़ा इंतजाम कहा से होगा और   उसकी शादी एक अच्छे परिवार में हो उसको अच्छे  सास ससुर और पति मिले .कही ऐसा ना हो कि दहेज के लालच में आकर उसके सा ससुर और पति उनकी बेटी को परेशान  करे और अगर शादी के बाद उसके भी लड़की हुयी तो फिर तो और भी जायदा ताने सुनने पड़ेगे।  दहेज के करान या फिर सास ससुर के परेसान करने के कारण भी इस  देश की काफी बहूओ  खुदखुशी कि है या फिर उनको मार दिया गया है।  

3. कभी कभी लड़के लड़की द्वारा किया गया प्यार भी  समाज में माँ बाप कि बदनामगी क़ा कारण बन ज़ाता है।   अक्सर प्यार के कारण लड़के लडकियों को जान देनी पड़ जाती है या फिर उनको घर से निकाल दिया ज़ाता है या फिर ऐसी घटनाये सुनने में आती है कि लड़का लड़की एक दुसरे के साथ भाग जाते है।  
                                                           


 उपरोक्त बिन्दुओ  पर नज़र डाली जाये तो अधिकतर माँ बाप चाहेंगे कि उनके बेटी ना हो. मगर इसके लिए उतरदायी है हमारी सोच हमारे देश क़ा माहौल।   हमको अपने माहौल को , अपनी सोच को सुधारना  होगा. जो कि बहुत ही मुस्किल काम है भारत में . मगर इन सबका मतलब ये नहीं है कि अगर लड़की पैदा होती है तो उसकी हत्या कर दी जाये।  बल्कि माँ बाप को उसको भी ख़ुशी ख़ुशी अपनाना चाहिए और उसके लिए भी वो सब करना चाहिए जो लड़के  के लिए करते है और ऐसा हो भी रहा है।  अगर भविष्य में कभी कोई समस्या आती है तो समझदारी   के साथ  उसका  हल निकालना चाहिए ना कि उसके लिए लडकियों को दोषी ठहराया  जाये औरअंत में इतना और कहुगा कि लडकियों को भी अपनी समझदारी  क़ा परिचय देना चाहिए और अपने दायित्वों को सही से निभाना चाहिए ऐसा मै इसलिए कहा रहा हू क्यों कि  आगे चलकर  लड़की ही माँ और  सास बनती है।  अगर मै सच कहू तो इन अपराधिक घटनाओं को काफी हद तक  केवल लड़की ही रोक सकती है।

आज सुबह ही एक खबर सुनने को मिली कि विश्व में सबसे अधिक प्रयोग होने वाली सोशल मीडिया साइट फेसबुक के सी.ई.ओ मार्क जुकरबर्ग पिता बन गए हैं।  उनके  घर एक छोटी बच्ची ने जन्म लिया है और उन्होने इस ख़ुशी के मौके पर विश्व में समाज सेवा हेतु  फेसबुक में अपने 99 % शेयर (लगभग 3 लाख करोड़ रूपये) दान करने का फैसला लिया है। इन पैसो को मुख्यता विश्व में शिक्षा , स्वास्थ्य सेवाओ के लिए खर्च किया जाएगा। 

हर दम्पत्ति को बेटियो को ख़ुशी ख़ुशी अपनाना  चाहिए और उनको भी लड़को के सामान अधिकार देने चाहिए। 

" बेटी बचाओ , बेटी पढ़ाओ "  ताकि वह भी सम्मान सहित अपना जीवन जी सके। 

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