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Monday, November 30, 2015

क्या वर्ष 2016 भी ऐसे ही जलायेगा धरती को ?

"ग्लोबल वार्मिंग " शब्द से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण और इससे होने वाले नुकसानों के बारे में भी हम सब जानते ही  हैं।  लेकिन फिर भी हम इसके प्रति सचेत  नहीं हैं।  जिस तरह से लगातार  धरती का वातावरण बदलता जा रहा है, उसको देखकर कही एक दिन हम ऐसे मोड़ पर ना आ जाए कि जिस प्रकार से आज हमको स्वछ  पानी पिने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते हैं उसी तरह कही  सांस लेने के लिए भी हमको ऑक्सीजन को भी खरीदना पड़े। 
   

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की  मौसम एजेंसी के प्रमुख मिशेल जराऊड   ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए बदलते हुए मौसम पर चिंता व्यक्त की है। इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 वैश्विक स्तर  अब तक का सबसे गर्म वर्ष रहा है और साथ ही साथ यह भी संकेत दिए हैं  आने वाला  वर्ष 2016 ओर भी अधिक गर्म रहेगा। 



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आज से  पेरिस में जलवायु सम्मेलन का आयोजन भी शुरू हो रहा है।  जिसमे अनेके देशो के नेता बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग पर विचार विमर्श करगे ओर साथ ही साथ इससे निपटने के लिए कारगर उपायो  के बारे में भी चर्चा करगे।  विश्व मौसम संगठन के प्रमुख ने  कहा है कि यह पृथ्वी वासियो  के लिए बहुत ही बुरी खबर है 2015 वर्ष के शुरुवाती 10  महीनो की मौसम  सम्बंधित जानकारियो के  अनुसार इन  10  महीने में मापे गए तापमान पिछले सभी वर्षो कि तुलना में सबसे उच्तम स्तर पर थे। 

पेरिस में होने वाले इस जलवायु सम्मलेन में भाग लेने वाले सभी देशो नेता एक विशेष समझोता करेंगे जिसका प्रमुख उदेश्य  ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख कारणों में से एक  ग्रीन हाउस गैसो के बढ़ते उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। ग्लोबल वार्मिंग का असर समुद्री जल में भी देखने को मिला है। समुद्री जल के तापमान से सम्बंधित एक शोध के अनुसार पिछले साल समुद्री जल के तापमान में भी काफी वृद्धि पायी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव जनित ग्रीन हौसे गैसो का अधिकतर भाग  समुद्र सोख रहे हैं  जिसके कारण समुदर की गहराई में भी पानी का तापमान काफी बढ़  रहा है। 

वर्तमान में अनेक  प्रकार के केमिकल के बढ़ते प्रयोग , उद्योग की चिमनियों  वाले धुएं एवं जहरीली गैसो से , वृक्षों का अंधाधुंध  कटना, इन सब के कारण वातावरण में ग्रीन हाउस गैसो की मात्रा   बढ़ती  जा रही है।   ऐसे में हमारा ये दायित्व है की हम वृक्षों को लगाये ताकि ऑक्सीजन अधिक से अधिक मात्र में वायुमंडल  में बनी  रहे   साथ ही साथ ओधोग मालिको और प्रबंधन को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए की वो ऐसे पदार्थो और प्रिकिर्याओ का उपयोग न करे जिससे ग्रीन हौसे गैसो के उत्सर्जन में बढ़ोत्तरी हो । दोस्तों हमारे पास एक ही तो पृथ्वी है ,अत : हमको इस पृथ्वी पर जीव जन्तुओ के अस्तित्व हेतु प्रकृती के साथ खिलवाड़ बंद करना होगा नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब मानव भी विलुप्त हो जायेगा ।  

Friday, November 20, 2015

इसलिए पीजिये ब्लैक कॉफी !


             "Advantages of  Drinking Black Coffee Every Day"

क्या आप ब्लैक  कॉफी पीते है ? यदि नहीं तो आप अपने बजट को ध्यान में रखकर इसको पीना शुरू कर सकते हैं। लेकिन साथ ही यदि आपको कोई गंभीर बिमारी है तो इसके सेवन से पहले डॉकटर से अवश्य कंसल्ट करे।   किन्तु यदि हमे कोई बीमारी नहीं है तो हम ब्लैक कॉफी के सेवन से इससे होने वाले फायदों का लुत्फ़ उठा सकते  है। प्रतिदिन ब्लैक कॉफी पीने के कुछ प्रमुख फायदे जिनको वैज्ञानिक रूप से सिद्ध किया गया है इस प्रकार हैं -

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  • वैज्ञानिक शोध के आधार पर यह पाया गया है कि प्रतिदिन ब्लैक कॉफी का सेवन लिवर को स्वस्थ बनाये रखने में सहायक है। इसका  सेवन  "लिवर कैंसर" रोग को रोकने में फायदेमंद है। 
  • जब हम कॉफी पीते  हैं, तो कॉफी में पाये जाने वाला  कॉफिन तत्व  हमारे पाचन तंत्र तक पहुचता है, जहा से वह   रक्त धारा के माध्यम से हमारे दिमाग तक पहुचता है। जिसका  फायदा यह है कि यह हमारी एनर्जी , स्मरणशक्ति , बातो एवं समस्याओ के प्रति रेस्पोंस करने की  क्षमता एवं ज्ञान सम्बन्धी चीज़ो के सुधार में सहायक है। 
  • यदि आप अपना वजन काम करना चाहते हैं या फिर अपने आप को अधिक एक्टिव बनाना चाहते  हैं तो कॉफी पिए। कॉफी में मौजूद कॉफिन तत्व मोटापा घटाने में सहायक है।  इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि आप वजन घटाने के लिए बस कॉफी ही पीते रहे ,इसके लिए आपको व्यायाम भी करना भी जरूरी है। 
  • कॉफी को शरीर के लिए आवश्यक नुट्रिशन के रूप में भी देखा जाता है क्यों कि इसमें विटामिन B2 , B3  B5  एवं  मैग्नीशियम आदि तत्व पाये जाते हैं। 
  • कॉफी का सेवन डिप्रेशन की समस्या को कम  करने में सहायक सिद्ध हुआ है।  वैज्ञानिक शोधो  के अनुसार कॉफी पिने से मष्तिष्क में  डोपामाइन ( Dopamine ) की  मात्र बढ़ती है। यहाँ आपको बता दे कि   डोपामाइन को  Pleasure Chemical  के रूप में भी जाना जाता है।    
  • कॉफी का सेवन दिल से सम्बंधित रोगो से लड़ने में सहायक है। विज्ञान के अनुसार कॉफी को Cardiovascular Health  के लिए अच्छा माना गया है।  

Wednesday, November 18, 2015

Word of The Year 2015


विश्व में सबसे अधिक प्रयोग में होने वाली  ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी ने वर्ष 2015  के लिए एक पिक्टोग्राफ  को   "Word of The Year" के खिताब से नवाजा है .इस पिक्टोग्राफ़ (चित्रलिपि ) का मतलब है "Face with  tears of Joy " . इस पिक्टोग्राफ को emoji  शब्द के रूप में भी  जाना जाता है. यह पिक्टोग्राफ  स्व्भाव , मनोदशा एवं चिंता आदि को सही रूप से दर्शाता है . 

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वैसे तो पिक्टग्राफ और emoji सन  1997 से ही पहचान में आ गए थे . लेकिन सन 2015  में पिटोग्राफ एवं emoji शब्द का प्रयोग  सबसे अधिक किया गया . इस वर्ष ऑक्सफ़ोर्ड यूनीवर्सिटी  प्रेस ने मोबाइल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र की  कम्पनी  SwiftKey के साथ मिलकर विश्व में सबसे अधिक प्रयोग होने वाले पिक्टोग्राफ का पता लगाने के लिए एक अधयन्न  किया किया और जिसमे उन्होने पाया कि वैश्विक स्तर पर वर्ष 2015 में को सबसे अधिक प्रयोग किया गया हैं .

SwiftKey कम्पनी ने अपने अध्यन्न में पाया कि इंग्लैंड  में वर्ष 2015 में उपयोग होनी वाले सभी पिक्टोग्राफ की संख्या का 20%  हिस्सा केवल अकेले का था . जबकि अमेरिका में इसका हिस्सा सभी प्रयोग होने वाले पिक्टोग्राफ की संख्या का  17 % था . जबकि यह प्रतिशत वर्ष 2014 में इंग्लैंड में में मात्र 4 % और अमेरिका में  9%  था . 

emoji एक छोटा डिजिटल चित्र और आइकॉन है, जो किसी विचार या भावना  को  इलेक्ट्रॉिनक्स तरीके से सुचना एवं  संवाद  के क्षेत्र में व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है . emoji शब्द  जापान की भाषा से  लिया गया है . अब तक के इतिहास  में ऐसा पहली बार हुआ है कि ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में किसी पिक्टोग्राफ ( चित्रलिपि ) को "Word of the Year"  के खिताब से नवाजा हो . 

चलते चलते आपको बता दे कि इससे पहले वर्ष 2014 , 2013 एवं 2012 में क्रमशः "Vape" , "Selfie", "Omnishambles" शब्दों  को ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी द्वारा " Word of The Year" के खिताब   नवाजा जा चूका है .

Sunday, November 15, 2015

एक लैबोरेटरी ऐसी भी !



दोस्तों जिस तरह से स्टूडेंट लोग के स्कूल और कॉलेज में एक लैब होती है। जिसमे वह  क्लास में पढाये गए थियोरिटिकल सिद्धांतो के लिए एक्सपेरिमेंट  करते हैं , उनके परिणामो को ऑब्जर्ब  करते हैं  , जिससे विषय के प्रति उनकी समझ और अच्छी होती है और साथ ही साथ इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।  ऐसी ही एक लेबोरेटरी हम सब के आस पास भी है। चाहे  हम जहा भी रहे, जहा भी काम करे  हर जगह  हमारे आस पास  एल लेबोरेटरी होती है। बस कमी  यह है कि  हम कभी इस लेबोरेटरी को ऑब्जर्ब नहीं करते। अंतर इतना है कॉलेज या स्कूल की लैब के तरह  हमारे आस पास की आस पास की इस लबोरटरी में हमको यंत्रो या औजारो की कोई जरूरत नै है। तो फिर हम एक्सपेरिमेंट कैसे करेंगे ? दरसल हमारे आस  पास की इस लेबोरेटरी में कई तरह के लोग है।  हमे उनको ऑब्जर्ब करना है . उनके जीवन की सफलताओ और असफलताओ को ऑब्जर्ब करना है। 


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अपने आस पास के इन लोगो के जीवन से जुडी घटनाओ ,उनकी कमियां एवं उनकी विशेषताओ का अधयन्न  करके ,  हम काफी कुछ सिख सकते हैं।  अगर हमारे आस  पास की इस लेबोरेटरी में कोई सफल व्यक्ति है तो हमको उसके  पास जाकर  कुछ बात चीत  करनी  चाहिए हमे पता लगाना चाहये की वह व्यक्ति कठिन परिस्थितयो में किस प्रकार  से उनका सामना करता है। अगर इस लेबोरेटरी में किसी व्यक्ति को सब लोग पसनद करते हैं , उसकी सबसे  बनती  हैं तो हमे उस व्यक्ति की उन  सभी खूबियों को  ऑब्जर्ब करना होगा , उनको स्टडी करना होगा।  

 इसी प्रकार से हम अपने आस  पास की इस लेबोरेटरी में सफल ही नहीं बल्कि एक  असफल  व्यक्ति से भी काफी कुछ सीख सकते हैं।  अगर कोई असफल है तो हमको उसकी उन  सभी गलतियों को ऑब्जर्ब करना है जो उसने की हैं ताकि हम  उन गलतियों  को अपने जीवन में न  दोहराये  और यदि हमारे सामने  भी इस तरह की परिस्थति आती   हैं तो हमको उनका समाधान किस तरह से करना है  यह भी हम सीख पायेगे। 

तो फिर देर किस बात की है। अपनी   इस लेबोरेटरी में  आस पास के सभी सफल और असफल व्यक्तियों  के जीवन बातो को ऑब्जर्ब करना , लाइफ  में उनके इम्प्लीमेंटेश करने के नतीजे को स्टडी करना , यदि फायदेमंद हो तो उनको खुद की लाइफ में भी  इम्प्लीमेंट करना  शुरू कर दीजिये।  



Wednesday, November 11, 2015

अच्छाई को खोने ना दे !


दोस्तों आज दीपावली का त्यौहार है। दीपावली बुराई पर अच्छाई की जीत का त्यौहार है। आज के माहौल में अच्छाई कही खो सी गयी है।  बुराई से मेरी मुलाकात अक्सर रोज होती है, एक नहीं कई बार होती है , लेकिन अच्छाई से बहुत कम  होती  है।  लोगो को छोटी छोटी बातो पर लड़ते झगड़ते हुए , गाली गलौच करते हुए रोज देखना होता है। न्यूज़ चैनल पर एक पार्टी के नेताओ को दूसरी पार्टी के नेताओ पर जहर उगलते हुए , अमर्यादित  भाषा का इतेमाल करते हुए  रोज देखना  एवं  सुनना  होता  है। चोरी ,लूटपाट , हत्या ,बलात्कार, नशाखोरी आदि की घटनाओ को भी रोज देखने सुनने को मिलता है। परन्तु न्यूज़ चैनलों पर या अखबारों में समाज में अच्छाई का  सन्देश देने वाली जीवित  घटनाओ का होना ऐसे  उदाहरण बहुत काम देखने और सुनने को मिलते हैं।   यही बात हम अपने आस  पास , गली, मौहल्ले या गाव, शहर  में देखने को मिलती है।  आखिर ऐसा क्यों ? ऐसा इसलिए क्यों कि  हम अपने नैतिक मूल्यों की अहमियत को भूलते जा रहे हैं। 


                             

हम अपने नैतिक कर्तव्यो का निर्वाह सही से नहीं कर रहे हैं। नैतिक मूल्यों की अहमियत को भूलते जा रहे हैं। बस केवल अपने स्वार्थ अपनी इच्छाओ को पूरा करने में लगे हैं। अपनी इच्छाओ को पूरा करना कोई गुनाह नहीं है, लेकिन हम किस रास्ते पर चलकर उसको पूरा करते हैं। यह जरूर सोचनीय है। जीत हासिल करने का या अधिक  अमीर बन जाने का मतलब यह समझ लेना नहीं की बस अब तो हम ही हम है। दिवाली के इस त्यौहार पर बस यही कहुगा की हमको अपने अंदर अच्छाई का दीप जलाये रखना है। यह अच्छाई किसी भी रूप में हो सकती है दूसरो के साथ व्यवहार में प्रेमभाव बरतना , बच्चो को अच्छे संस्कार देना , दूसरो के दुःख में उनका साथ देना , बीमार ,असमर्थ और  असहाय लोगो की अपनी सामर्थ्य की अनुसार मदद करना, इन भावनाओ एव आशाओ की साथ सभी पाठकगणों एवं देशवासियो को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !


Monday, November 9, 2015

तेज दिमाग चाहिए,तो इन आदतो को अपनाइये !


दोस्तों कहते हैं कि मानव शरीर को स्वस्थ रखने में  शारीरिक व्यायाम का अपना विशेष महत्व है।  शरीर के प्रत्येक अंग के लिए अलग अलग प्रकार  के व्यायाम और योग आदि क्रियाएं हैं।  दिमाग मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण  हिस्सा है, लेकिन इसके लिए व्यायाम  करना हम अक्सर भूल जाते हैं। 

आज के समय में किसी भी क्षेत्र में जिंदगी में कुछ हासिल करने के लिए तेज दिमाग का होना बहुत आवश्यक  है।  तेज दिमाग हमारी स्मरण शक्ति को सही बनाये रखता है, हमारे सोचने , हमारे दैनिक कार्यो को करने के तरीके , हमारे व्यवहार , हमारी  कार्यकुशलता जैसी सभी महत्वपूर्ण बातो के लिए भी काफी फायदेमंद है। क्या आप भी अपने मष्तिष्क को तेज बनाना चाहते हैं  ? यदि हाँ तो आपको अपनी दिनचर्या में निम्नन अादतो को शामिल करना होगा। 



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1. Improve Your Reading Skills

आपको अपने मष्तिष्क को तेज बनाने के लिए पढ़ने की आदत को अपनी दिनचर्या में शामिल करना है। अपने खाली समय में  आप कोई उपयोगी किताब , न्यूज़ पेपर  या कोई नोवल आदि पढ़ सकते हैं।   वैज्ञानिको का मत है कि पढ़ाई करने की  हैबिट से  मष्तिष्क की ब्रेन की क्रियाए  बढ़ती हैं।  पढ़ने  की आदत दिमाग के उन सभी हिस्सों को स्वस्थ बनाये रखती है जो प्रॉब्लम सॉल्विंग में मदद करते  है और साथ ही साथ मेमोरी को भी तंदरुस्त बनाये रखती है। 

2. Exercise on Regular Basis

वैज्ञानिको के मत के अनुसार शारीरिक व्यायाम करने से हमारे शरीर में खून में BDNF  नाम का प्रोटीन बनता है। जब यह खून मष्तिष्क तक पहुचता है तो ब्रेन इसको अवशोषित करती हैं जिसके कारण याददाश्त और एकाग्रता दोनों ही बढ़ती है। 

3. Learn New Language

वैज्ञनिको द्वारा किये गए शोध में यह पाया गया है कि किसी नयी भाषा को सिखने  का हमारे मष्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव  पड़ता है।  इसलिए हमे किसी नयी भाषा के शब्दों को लिखना ,पढ़ना , उनके अर्थो को समझना जैसी क्रियाओ पर ध्यान देना चाहिए। 


4. Solve Puzzles and Reasoning Problems

दिमाग को तेज बनाये रखने के लिए को  Puzzle Solving  Skills के रेगुलर  प्रैक्टिस करनी चाहिए।  जिसके लिए आप को बुक भी खरीद सकते हो साथ ही साथ Reasoning Ability से सम्बंधित सवालो को हल करने की प्रक्टिक्स करनी चाहिए। 

5. Meditation/Yoga

वैज्ञानिको ने Meditation को भी दिमाग के लिए काफी महत्वपूर्ण बताया है। Meditation  से  इन्द्रियों को कंट्रोल करने के शक्ति बढ़ती ही जिसके कारण एकाग्रता एवं मेमोरी भी बढ़ती है ,साथ ही साथ एक शोध में यह भी पाया गया है की जो छात्र Meditation /Yoga करते हैं वह टेस्ट में अच्छा परफॉर्म करते हैं। Meditation तनाव और उत्तेजना को भी नियंत्रित करता है। 

Saturday, November 7, 2015

ऑफिस में रखे इन बातो का ध्यान !

            
कभी कभी अपनी जॉब के दौरान अक्सर हमको ऐसे दिनों का सामना भी करना पड़ता है कि जब हम अपना कार्य पूरी मेहनत के साथ कर रहे होते हैं और अच्छा रिजल्ट भी  कम्पनी को देते हैं, लेकिन फिर भी हमारे द्वारा किये गए कार्य को नोटिस नहीं किया जाता है , उसको महत्व नहीं दिया जाता।  जरा सोचिये की कैसा महसूस करते हैं हम अपने इन क्षणों में ?


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यदि हमारे साथ ऐसा होता है तो यह हमारे करियर की प्रगति में  में अड़चन साबित हो  सकता है।  इसलिए जिस संस्थान में , जिस  कंपनी में हम जॉब करते हैं, वहा हमको जॉब करते समय स्पष्ट कम्युनिकेशन पर विशेष ध्यान देना होगा।  हमे कोशिश यह  कोशिश करनी होगी की हमारे दवरा किये कार्य और उसके अच्छे परिणाम को अनदेखा न किया जाये।  

प्रोफेशनल माहौल में काम करते समय हमको इस बात का विशेष ध्यान रखना चहिये कि दूसरो के साथ बात करते समय हमारे संवाद  में  विन्रमता  होनी चाहिए।  साथ ही साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारे संवाद से किसी की  भावनाओ को तो ठेश नहीं पहुंच रही है।  .


हमको अनावश्यक बातचीत में खुद को व्यस्त नहीं करना चाहिए हो सके तो इनको अनदेखा और अनसुना करना चाहिए। यदि  आपके पास कोई बेहतर आईडिया है जो आपकी कंपनी और आपकी पर्सनल ग्रोथ में सहायक हो लेकिन अगर आप आईडिया को लेकर  स्पष्ट संवाद नहीं कर सकते तो यह आपके करियर की प्रगति में एक अड़चन है इसलिए अपने आईडिया को कुशलतापपूर्वक म विन्रम रूप से पेश करे।  

कर्मचारियों के बीच स्पष्ट  और असरदार संवाद  कार्य  माहौल को विश्वसनीय एवं स्वस्थ बनाये रखता है। यदि कंपनी में  आपके साथ का कोई कर्मचारी आपसे मदद के लिए कहता है तो उसको मना न करे,  उसकी मदद  करे।  यदि  आप ऐसा करते हैं तो जल्द ही वही लोग जरूरत पड़ने पर आपकी भी मदद करेंगे।  

यदि आपको आपके कार्य के अच्छे परिणामो के कारण  भी अनदेखा किया जा रहा है और ऐसे कर्मचारियों को महत्व दिया जा रहा है जो आपकी अपेक्षा काम मेहनत  करते हैं या जिनका कार्य परिणाम सही नहीं है  तो आप अपनी बात को तर्क सहित , कुशलतापूर्पक ,विन्रम रूप से मैनेजमेंट के अधिकारियों के समक्ष रक सकते हो। लेकिन बेहतर होगा की ऐसा करते समय आप केवल अपने कार्य और उसके परिणामो को सामने रखे , दूसरो का जिकर न करे।  यदि आपका कार्य कठिन है या आप उसमे विफल हो तो निराश न हो फिर से कोशिश करें। 

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