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Saturday, October 31, 2015

क्या कहती है विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह रिपोर्ट ?


अभी हाल में विश्व स्वास्थय संगठन द्वारा  "Global Tuberculosis Report 2015 "  को   जारी किया गया  है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की इस रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014  में टी.बी . की बीमारी के कारण 15  लाख लोगो की मृत्यु हुयी है। इस रिपोर्ट के अनुसार  वैश्विक स्तर पर 2014  भारत, इंडोनेशिया और चीन में टीबी के सबसे ज्यादा मामले सामने आए जो कि क्रमश: 23 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 10 प्रतिशत हैं। पिछले साल नाइजीरिया, पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में भी टीबी के मामलों की संख्या ज्यादा रही है।  हमारे देश यानी की भारत में गत वर्ष टी.बी.  के सबसे अधिक मामले सामने आये हैं।  रिपोर्ट के अनुसार  भारत और नाइजीरिया में टीबी से होने वाली मौतें वैश्विक तौर पर इस बीमारी से होने वाली मौतों का एक तिहाई है।

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वाशिंगटन में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की गयी इस  रिपोर्ट में बताया गया है सं  2000 से 2015 के बीच टी.बी. के द्वारा  मरने वाले मरीजों की संख्या पर काफी हद तक काबू पा  लिया गया था  सं 2000 में इस हेतु की स्थापना की गयी थी जिसके कारण इस हेतु चलाये गए जागृति अभियान एवं   सही उपचार , दवाइयों आदि के कारण  सारे विश्व में 430 लाख लोगो की जिंदगियो को बचाया गया था। साथ ही साथ इस रिपोर्ट में यहाँ भी बताया गया है 2014 में टी.बी की वझे से जिन 15 लाख लोगो की जाने गयी हैं उनमे से 4 लाख HIV से भी ग्रस्त थे। 



विश्व स्वास्थ्य संगठन   के Global TB Programme के निर्देशक Dr Mario Raviglione के अनुसार सन  2000 से अब तक  प्रत्येक  वर्ष टी.बी से मरने वाले लोगो की संख्या में 1.5 % की गिरावट आई है।  लेकिन उन्होने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की की जहा एक ओर वर्तमान समय में हर प्रकार की दवाये एवं  बेहतर   उपचार  भी उपलब्ध है फिर भी   हर दिन  4400  लोग टी. बी के कारण अपनी जाने गवा रहे हैं। इसलिए   अभी इस हेतु हमे और अधिक प्रयास करने की जरूरत है ताकि टी.बी से होने वाली  मौतों पर काबू पाया जा सके। 

इस रिपोर्ट की अधिक जानकारी के लिए आप रिफरेन्स में दिए गए लिंक पर क्लिक कर सकते हैं। 




Sunday, October 25, 2015

अब तारो के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का पता लगाना हुआ आसान !


हाल ही में वैज्ञानिको ने तारो के अधयन्न से सम्बंधित एक नयी  रिसर्च में सफलता हासिल की है।  वैज्ञानिकों ने पहली मरतबा  एक ऐसी  तकनीक को बनाने में सफलता प्राप्त की है जिसकी मदद से कंपायमान बड़े बड़े  तारों के भीतर चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति  के बारे में पता लगाया जा सकता है।  इस तकनीक की ख़ास बात यह है कि यह तकनीक मेडिकल अल्ट्रासाउंड से काफी मिलती जुलती है। इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक तारो की उन  आंतरिक विशेषताओ  के  बारे में पता लगा सकते हैं जो अब तक छिपी हुयी थी।

यदि हम तारो के सन्दर्भ में चुम्बकीय क्षेत्र की बात करे तो  किसी भी  तारे के निर्माण से लेकर इसके समाप्त होने तक उसके विकास  के सभी स्थितिओ  में चुंबकीय क्षेत्र  का अपना विशेष  महत्व होता  है। इस शोध से जुड़े शोधकर्ताओं ने तारों के भीतर के गुण धर्मो  का पता लगाने हेतु  उनसे होकर गुजरने वाली तरंगों को पकड़ने के लिए तारकीय भूकंप विज्ञान का प्रयोग  किया है ।
इस शोध में शामिल  वैज्ञानिक  "University of California Santa Barbara" के  "Kavli Institute for Theoretical Physics (KITP) " में कार्यरत हैं। शोध से जुड़े हुए एक प्रमुख वैज्ञानिक  Matteo Cantiello ने इस शोध के सम्बंध् में  कहा है कि , ‘अब हम तारे के उन क्षेत्रों की जांच कर सकते हैं जो पहले छिपे हुए थे।  यह तकनीक मेडिकल अल्ट्रासाउंड के समान है जिसमें मानव शरीर के दिखाई न देने वाले हिस्सों की तस्वीर उतारने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है।’

इस तकनीक के प्रयोग के दौरान शोधकर्ताओं  ने पाया की  जब किसी तारे के भीतर अधिक चुम्बकीय क्षेत्र उपस्थित होता है तो यह चुम्बकीय क्षेत्र  गुरत्वीय  तरंगो की गति को रोक   देता है जिसके कारण  तरंगो की ऊर्जा  क्षय होने लगती है  और ये तरंगे तारे के भीतरी क्षेत्र में ट्रैप हो जाती हैं जिनके अध्ययन से तारे की  आंतरिक विशेषताओ का पता लगाया जा सकता है।  शोधकर्ताओं ने इस क्रिया को "Magnetic Greenhouse Effect" नाम दिया है । 

हम  आशा करते हैं कि भविष्य में इस  तकनीक के प्रयोग से तारो से सम्बंधित अध्यन्न के बारे में नयी नयी विशेषताओ  और बातो के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी। 



Tuesday, October 13, 2015

देर रात तक जागने वाले टीन एजर हो रहे मोटापे के शिकार !


वर्तमान समय में विद्यार्थी वर्ग में अधिकतर छात्र ऐसे हैं जो रात में देर रात तक जागते रहते हैं अब देर रात तक जागने का   कारण पढ़ाई करना भी हो सकता है या फिर अपने दोस्तों से मोबाइल सोशल मीडिया साइट्स पर या व्हाटप्प्स पर चैट  करना भी हो सकता है .आजकल इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और मोबाइल डिवाइस पर   बच्चों का रातभर व्यस्त रहना एक मामूली बात  हो गई है। इनके माता पिता भी इस और कोई अधिक ध्यान नही देते , जिस कारण  से बच्चो की हिम्मत और बढ़ जाती है।  परन्तु  इससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा  असर पड़ता है, इसका बात का खुलासा  एक ताजा शोध में हुआ है।


हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार जो बच्चे देर रात तक जगे रहते हैं उनको  पांच सालों के अंदर मोटापे का शिकार होने की संभवाना  बढ़ जाती है। इस शोध के अनुसार  जल्दी सोने वाले बच्चों की तुलना में देर रात तक जागने वाले वयस्क अथवा बच्चों का वजन बढ़ने की संभावना अधिक  होती है। इसलिए अगर टीनएजर बच्चा रातभर जागता है, तो उसके माता पिता या बड़े भाई बहन  उसे जल्द यह आदत छोड़ने के लिए जरूर कहे। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया बर्कले में बाल-विशेषज्ञ लॉरेन असरनाउ  के निर्देशन  में यह शोध किया  गया। इस शोध  में  लगभग पांच सालों तक 3,300 से भी ज्यादा टीनएजर और एडल्ट्स को इस रिसर्च में शामिल किया गया। हाल ही में इस शोध के बारे में   'स्लीप' नाम की मैगजीन में विस्तार से छपा है।

लॉरेन असरनाउ ने कहा  कि किसी नतीजे पर पहुचने से पहले इस  शोध  के दौरान टीन एज से लेकर उनके एडल्ट होने तक उनमें होने वाले शारीरिक परिवर्तन का बड़ी सूक्ष्मता से  अध्ययन किया गया है । इस दौरान उन्होंने कितने घंटे की नींद ली, ये सारे आंकड़े जुटाए गए। शोधकर्ताओं  ने पाया कि इस शोध में शामिल जिन टीन  एजर्स ने रात के दौरान  एक घंटे की नींद नहीं ली तो उनका बॉडी मास इन्डेक्स (बीएमआई) 2.1 प्वॉइंट बढ़ गया। इस तरह पांच साल के अंदर उनका मोटापा और भी बढ़ता गया।
 जो  में जो परिणाम सामने  आए हैं उसके मुताबिक, ज्यादातर टीन एजर रात में नौ घंटे की नॉर्मल नींद भी नहीं लेते हैं। इस वजह से उन्हें स्कूल में जगे रहने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। रिसर्च के मुताबिक, वक्त पर सोने वाले टीनएजर जैसे जैसे बड़े होते हैं, उनका मोटापा नहीं बढ़ता। साथ ही साथ  उनकी बॉडी शेप में बनी रहती है। 

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