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Friday, August 28, 2015

सफल रहा GSLV-D6 की मदद से उपग्रह GSAT-6 का प्रक्षेपण !


" 27 अगस्त 2015 को शाम  4 बजकर 52 मिनट पर  भारत ने श्रीहरि कोटा  स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नयी सफलता को हासिल किया है। यह निश्चित रूप से ही भारत के लिए सफलता का दिन है। भारत  ने अपने नये उपग्रह जी सेट 6  का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। अंतरिक्ष वैज्ञानिको ने इसके सफल प्रक्षेपण के  कारण संचार सेवाओ  में  सुधार होनी की आशा व्यक्त की है।  "


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इस नए भारतीय उपग्रह GSAT 6  को GSLV-D6 रॉकेट की मदद से अंतरिक्ष में  प्रक्षेपित  किया गया है। GSLV-D6 की ख़ास  बात  यह है कि  इसके इंजन को  क्रायोजेनिक तकनीक की मदद से बनाया गया है।  इसलिए यह सफल प्रक्षेपण भारत के और भी महत्वपूर्ण है क्यों कि   भारत ने अपने दम पर  क्रायोजनिक इंजन बनाया है। अपनी इस सफलता की वजह से भारत की इसरो (ISRO) अंतरिक्ष संस्था  आज  अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसियों के बाद ऐसी छठी अंतरिक्ष एजेंसी है ,जिसने स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक  का सफलतापूर्वक प्रयोग  किया है।  

यह  भारत के लिए क्रायोजेनिक तकनीक के प्रयोग का दूसरा अवसर है। इससे पहले 5  जनवरी 2014  को भारत ने क्रायोजेनिक तकनीक से बने इंजन का   इस्तेमाल  GSLV-D5 के प्रक्षेपण में भी किया था। जो की सफल रहा था।  सफलता की यह राह इतनी आसान नही थी पिछले कुछ  वर्षो में भारत   ने इस हेतु  काफी  प्रयास  किये  थे  परन्तु  सफलता नही मिल  पायी  थी जैसे की इस हेतु भारत ने 15 अप्रैल 2010 में  प्रक्षेपण किया था परन्तु वह सफल नही रहा था। 

इस सफल प्रक्षेपण को मिशन के निदेशक ने आर. उमा महेश्वरन जी  ने ‘ओणम का तोहफा’ बतया है।  उन्होने कहा कि  यह भारत में ही विकसित क्रायोजेनिक इंजन  से युक्त  एक भरोसेमंद प्रक्षेपण है , जो की 2-2.5 टन श्रेणी के उपग्रहों का प्रक्षेपण कर सकता है। यहाँआपको बता दे की अक्सर 2  टन  से अधिक भार वाले उपग्रहो के प्रक्षेपण के लिए उन  रॉकेट को सफल माना  जाता है जिनका इंजन आधुनिक क्रायोजेनिक तकनीक से बना होता है। 

क्रायोजेनिक इंजन वाले इस राकेट की मदद से जिस उपग्रह GSAT 6 को प्रक्षेपित किया गया है।  इस उपग्रह से जुड़े  कुछ महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं -
    
  • GSAT-6 इसरो द्वारा निर्मित 25 वां भू-स्थतिक संचार उपग्रह है। 
  •  GSAT श्रृंखला में यह 12वां उपग्रह है। 
  •  यह उपग्रह एस-बैंड में पांच स्पॉट बीम और सी-बैंड में एक राष्ट्रीय बीम से युक्त  है। 
  • GSAT 6 उपग्रह का लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 2,117 किलोग्राम है। प्रणोदकों का वजन 1,132 किलोग्राम और उपग्रह का शुष्क द्रव्यमान 985 किलोग्राम है।
  • GSAT-6 उपग्रह का एक अत्याधुनिक पहलू इसका एस-बैंड का खुलने लायक एंटिना है जिसका व्यास छह मीटर  है। इसरो की ओर से तैयार किया गया यह सबसे बड़ा उपग्रह एंटिना है। 
  • GSLV D6 की ओर से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा में स्थापित किए जाने के बाद GSAT-6 का नियंत्रण इसरो की मास्टर कंट्रोल फेसिलिटी के हाथों में चला गया है।
अंत में भारत की अंतरिक्ष संस्था ISRO  की टीम को  बहुत बहुत बधाई।  हम आशा करते हैं की यह सफलता भारत के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। 


Wednesday, August 26, 2015

Global Hawk विमान जुटायेगा तूफ़ान सम्बंधित सही सही जानकारी



" Misson SHOUT "
"नासा के कुछ वैज्ञानिक ने हाल ही में एक  SHOUT नामक मिशन पर कार्य  कर रहे हैं। इस मिशन का उदेश्य विमान की मदद से समुद्री क्षेत्रो पर नजर बनाये रखना है, जिससे मौसम से सम्बधित जानकारियो का सही सही अनुमान लगाया जा सके।  इस मिशन का मकसद  विमान की मदद से  तूफ़ान, सुनामी आदि  के मार्ग का पता लगाकर उनसे सम्बंधित भविष्यवाणियों में सुधार लाना है। इस मिशन के तहत समुंद्री क्षेत्रो पर नजर रखने के लिए नासा  आधुनिक उपकरणों से परिपूर्ण "ग्लोबल हॉक " नाम का विमान का इस्तेमाल  करेगा। जो इस सप्ताह  से अपनी उड़ाने शुरू करेगा।"
NOAA यानी की "National Oceans Atmospheric Administrations" ने हाल ही में नासा के साथ मिलकर   "Sensing Hazards with Operational Unmanned Technology" (SHOUT) मिशन पर काम करने  की  प्लानिंग  की है।  यदि  हम इस प्रोजेक्ट की बात करे तो यह प्रोजेक्ट नासा द्वारा तुफानो पर किये जा चुके  शोध कार्यो पर आधारित है।  जिसमे "ग्लोबल हॉक" विमान का उपयोग किया जाएगा। 





Image : Global Hawk Aircraft


समुंदरी क्षेत्रो के वातावरण , मौसम आदि से सम्बंधित जानकारियो को सेन्स करने के लिए इस विमान में जो प्रमुख उपकरण प्रयोग किये गए हैं वह इस प्रकार है। 

1) NOAA: AVAPS ( Advanced Vertical Atmospheric Profiling System ) यह उपकरण इन क्षेत्रो में  तापमान , दवाब , आद्रता एवं हवा की दिशा आदि के बारे में जानकरी देगा। 

2) NASA: HIWRAP (High-Altitude Imaging Wind and Rain Airborne Profiler ) यह एक प्रकार की राडार है, जो की तूफ़ान की तीव्रता से सम्बंधित कारको के बारे में जानकरी देगा जैसे इन तुफानो का बनंना एवं  इनकी संरचना आदि। 

3) NASA JPL: HAMSR ( High Altitude MMIC Sounding Radiometer)  यह माइक्रोवेव स्पेक्ट्रम एरिया में विमान के घूमने में मदद करेगा एवं इस क्षेत्र में   तापमान एवं आद्रता के बारे में जानकरी देगा। 

4) NASA GHRCLIP — CAMEX-4 ER-2 ( Lightning Instrument Package ) इस उपकरण में आठ डिजिटल   फील्ड  लगे   हैं। जिनकी  मदद से इलेक्ट्रिकल  फील्ड  के वेक्टर कम्पोनेंट  का पता लगाकर इलेक्ट्रिकल स्ट्रक्चर से सम्बंधित जानकरी में सुधार करना है। 


इस मिशन में मुख्या  भूमिका निभाने  वाले व्यक्ति इस प्रकार  हैं -

Principal Investigator: Robbie Hood, NOAA UAS Program Director 

Project Managers : Philip Kenul, TriVector Services •JC Coffey, Cherokee Nation Technologies 

Project Scientists : Michael Black, NOAA OAR AOML • Gary Wick, NOAA OAR ESRL • John Walker, Cherokee Nation Technologies 

NOAA द्वारा  नासा के साथ मिलकर शुरू किया गया यह मिशन प्राकृतिक आपदाओ जैसे तूफ़ान , बाढ़ ख़राब मौसम आदि के बारे में सही जानकारी देकर निश्च्य ही इन आपदाओ से होने वाले नुक्सान को कम   सहायक  साबित होगा। 

Reference: http://www.nasa.gov/centers/armstrong/features/shout_mission_begins.html

Sunday, August 23, 2015

सेल्फ़ी लेते समय शिष्टाचार एवं सभ्यता का रखे ध्यान !

" Why young generation is so hungry for selfi ? "

आज कल हम अपने आस पास के माहौल में अक्सर देखते हैं कि युवा वर्ग  में ( चाहे वो लड़के हो या लडकियां ) सभी में सेल्फ़ी लेने का क्रेज इस कदर बढ़ता जा रहा है कि अक्सर वो सेल्फ़ी लेते समय जगह और माहौल का भी ध्यान नहीं रखते।  सेल्फ़ी लेने के जनून  में इतने खो जाते हैं कि दूसरो कि भावनाओ का भी ध्यान नही रहता , बल्कि यह भी ध्यान नही देते कि कही हमारी सेल्फ़ी की वजह से पास वालो को तो कोई  समस्या नही हो रही है। 

छात्र वर्ग के लोगो में ही नही बल्कि 30  से 40  तक आयु वाले व्यक्ति भी सेल्फ़ी लेते समय इन बातो का ध्यान नही रखते। हमको अक्सर देखने को मिलता है कि जब हम किसी रेस्टोरेंट , कॉफी शॉप , पिज़्ज़ा   शॉप आदि में बैठकर में खा पी रहे होते हैं तो सेल्फ़ी लेने लगते हैं , यह भी ध्यान नही देते कि उस सेल्फ़ी के कारण कही हमारे आस पास  बैठे अन्य व्यक्ति खुद को असहज तो महसूस नहीं कर रहे। इसी तरह का माहौल हमको अक्सर  मॉल , पार्क आदि में दखते हैं। जहा देखो वह युवाओ में सल्फी लेने कर क्रेज बढ़ता ही जा रहा है ऐसे  में कभी कभी हम माहौल का ध्यान भी नही रखते। 

हाल ही में इसका एक उदाहरण  के जाने माने अभिनेता अमिताभ  बच्चन जी के साथ हुआ जिस पर उन्होने  कहा की जब मै  अपने एक मित्र के अंतिम संस्कार में पंहुचा तो वह खड़े कुछ लोग सेल्फ़ी लेने लगे। उन्होने इस बात पर शख्त नाराजगी जताई थी।  क्या  ये लोग इतने असंवेदनशील  हो गए हैं की माहौल  का भी ध्यान नहीं रखते की हम कहा खड़े हैं ? वहा  क्या हो रहा है ?

ऐसा ही एक दूसरा उदाहरण  मुझे खुद कुछ दिन पहले फेसबुक पर एक फोटो में दखने को मिला।  जब नयी दिल्ली  में जहा हमारे पूर्व राष्टपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ ए. पी .जी अब्दुल कलाम साहब का पार्थव शरीर को रखा गया था ,वहा खड़े एक युवक ने उनके पार्थिव शरीर  के साथ सेल्फ़ी ली जिसमे पीछे से एक युवक  हसता  हुआ उस  सेल्फ़ी में साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था।  अब आप बताये ये कहा की संवेदनशीलता है क्या ऐसे मौको पर भी ये लोग बिना सेल्फ़ी लिए नहीं रह सकते।  




मानव व्यवहार पर सेल्फ़ी लेने की आदत के  पड़ने वाले प्रभाव  के बारे  हाल ही में नयी दिल्ली के  बी.एल.के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के एक  वरिष्ठ मनोचिकित्सक एस. सुदर्शनन का कहना है कि शोकाकुल माहौल में सेल्फी लेना पूर्ण  रूप से असभ्यता का प्रतीक  है और इसे रोकने   की जरूरत है। यदि होम मानव व्यवहार के विशेषयज्ञो  की माने तो सेल्फ़ी  को आम तौर पर तीन प्रकार में  सकते हैं  । पहला वह जो दोस्तों  परिवार वालो  के साथ ली जाती है जैसे  रेस्टॉरेंट में ,कॉफी शॉप पर, कॉलेज में या किसी दार्शनिक स्थल पर  , दूसरी वह जो किसी समारोह के दौरान ली जाती है जैसे शादी , बर्थडे पार्टी आदि में  और तीसरी वह जिसका ध्यान भौतिक उपस्थिति पर होता है  जिसमे  बड़े बड़े जाने माने  लोगो के साथ सेल्फ़ी लेना भी शामिल है। 

ऐसे में युवा वर्ग खकसर छात्रों के लिए सेल्फी के इस्तेमाल पर रोक  लगाना संभव नही होगा  लग भी दी तो यह कुछ हालातो में सही भी नही होगा  । इसके लिए  जरूरी है कि माता पिता  और अध्यापक दोनों ही अपने स्तर पर युवाओं से सेल्फी लेने की आदत  और सामाजिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न तथ्यों पर बात करे । 

Friday, August 21, 2015

पर्वत पुरुष "दशरथ मांझी " : एक साहसी व्यक्तित्व

                          
"पर्वत पुरष स्वर्गीय श्री दशरथ मांझी जी का नाम  पिछले कुछ दिनों से चर्चाओ में हैं। जिसका  एक कारण  अभी हाल ही में 17 अगस्त को उनकी पुण्यतिथि का होना है और दूसरा कारण उनके  जीवन से प्रेरित  फिल्म  "Manjhi: The Mountain Man" का  आज 21 अगस्त  2015 को  रिलीज़ होना भी है।  जिसमे उनका किरदार जाने माने कलाकार नवाजुद्दीन सिद्द्की साहब  निभा रहे हैं और इस फिल्म का निर्देशन किया है केतन मेहता साहब ने। आइये  जानते  हैं स्वर्गीय श्री दशरथ  मांझी  जी के जीवन से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बाते। " 

जन्म  एवं  उनके जीवन के कुछ विशेष क्षण 


                                                        

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 स्वर्गीय श्री दशरथ मांझी जी का जन्म सन  1934 में बिहार राज्य में गया के समीप गेहलौर गाव में हुआ था। उनको पर्वत पुरुष के नाम से भी जाना जाता है।  अगर हम उनके जीवन को देखे तो हम पायेगे कि  उनका जीवन बहुत ही कष्टप्रद था। सन 1959 में समय पर चिकत्सा सेवा उपलब्ध न हो पाने के कारण उनकी पत्नी फागुनी देवी जी का देहांत हो गया क्यों कि उनके गाव से चिकत्सा केंद्र की दूरी 70 किलोमीटर दूर थी।  उनके गाव से चिकत्सा केंद्र  तक पहुचने के लिए एक गेहलौर नाम के पहाड़ को पूरा घूमकर जाना पड़ता था जिस कारण से उनके गाव से चिकत्सा केंद्र की दूरी  इतनी अधिक पड़ती थी।  इस  घटना से मांझी जी को बहुत आघात पंहुचा और उन्होने  मन ही मन इस पर्वत को तोड़कर रास्ता बनाने की ठान ली , ताकि इस दूरी को कम किया जा सके और गाव वालो को इसका  लाभ मिल सके एवं कम  समय में चिकत्सा केंद्र पहुंच  सके। 


 महत्वपूर्ण  कार्य 

दशरथ मांझी जी युवा अवस्था में ही अपने घर से भाग गए थे।  फिर उन्होने  धनबाद में कोयले की खान में काम  किया और कुछ समय बाद अपने गाव वापस  आ गए। जहा पर जब उनके साथ 1959 में पत्नी फागुनी देवी जी की  मृत्यु की यह दुखद घटना घटी तो उन्होने इस पहाड़ी को तोड़कर 360 फ़ीट लम्बा एवं 25 फ़ीट गहरा एवं 30 फ़ीट चौड़ा रास्ता तैयार किया। इस कार्य को करने के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कार्य उन्होने किसी  भारी भरकम औजार या मशीन से नहीं बल्कि मात्र एक हथौड़े और छैनी की मदद से किया था।  जब उन्होने हथौड़े और छैनी  की मदद से पहाड़ी तोड़कर रास्ता बनाना शुरू किया तो यह देखकर  उनके गाव वाले भी उन पर हसते थे। 

मांझी जी ने अपना साहस नही छोड़ा और धैर्य के साथ अपने कार्य को पूरा किया और 22 वर्षो (1960  -1982 ) के कठिन परिश्रम के बाद आखिरकार उन्होने मात्र एक हैथोड़े और छैनी की मदद से यह रास्ता बना दिया। उनके दवरा बनाये गए इस रास्ते के कारण बिहार के गया जिले के ब्लॉक अत्रि एवं वजीरगंज के बीच की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर मात्र 15 किलो मीटर रह गयी। उनके इस कठिन परिश्रम से गाव के लोगो को बहुत आसानी हुयी। इस कार्य के दौरान  मांझी जी ने कहा था कि  शुरुवात में गाव के  लोग उनका मजाक बनाते थे लेकिन धीरे धीरे गाव वालो ने उनके लिए भोजन  का एवं औजार खरीदने में उनकी मदद की।  

निधन 

17 अगस्त  सन 2007 को कैंसर के कारण नयी दिल्ली  के ऐम्स अस्पताल में इस साहसी पुरुष एवं सामंज सेवी  का निधन हो गया।  बिहार में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 



पहचान एवं सम्मान  

बिहार सरकार ने सन  2006  में उनका नाम समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए पदम श्री पुरूस्कार के लिए भी भेजा था। बिहार के मुख्यमंत्री माननीय नितीश कुमार जी ने उनके गाव में मांझी जी के नाम से एक सड़क एवं अस्पताल भी बनवाया।  जुलाई 2012 में  फिल्म निर्देशक केतन मेहता जी ने उनके जीवन पर एक फिल्म बनाने कि भी घोषणा की थी।  जिसको उन्होने पूरा किया।  आज 21 अगस्त  2015 को उनके जीवन से प्रेरित यह फ्लिम रीलिज होगी। 

इसके अतिरिक मार्च 2014 में  फिल्म कलाकार आमिर खान जी द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाला धारावाहिक "सतयमेव जयते " के दुसरे सत्र में एक भाग स्वर्गीय दशरथ  मांझी  जी को ही समर्पित था। 

मजदूरी कर अपना जीवन व्यतीत करने वाले स्वर्गीय श्री दशरथ मांझी जी सही मायनो  में एक साहसी एवं समाज सेवी  थे।  22 वर्षो तक उन्होने धैर्य के साथ अपने साहस को बनाये रखा एवं गाव वालो के हित  के लिए इतना कष्टपूर्ण लेकिन महान कार्य किया। 

स्वर्गीय श्री दशरथ मांझी जी को शत शत नमन !!



 Reference: Posts from Different English News Papers, Image Reference : Google Search

Wednesday, August 19, 2015

विंडोज 10 में प्रयोग होने वाली प्रमुख Shortcut Keys !


            "New Shortcut Keys in Windows 10" 

पिछले कुछ महीनो से विंडोज 10 को लेकर लोगो के बीच बहुत उत्साह नज़र आ रहा था।  बहुत सी चर्चाये इस के बारे में हो रही थी।  तो जो लोग विंडोज 10 पर काम करने को लेकर काफी  उत्सुक  थे उनका इंतज़ार अब समाप्त हो गया है।  विंडोज 10 अपने आप में एक कमाल का ऑपरेटिंग सिस्टम है।   सुनने में तो यह भी आया है कि विंडोज 10 अपग्रेड , एक साल तक उन  यूज़र्स क़े लिए फ्री रहेगा जो विंडोज 8 और विंडोज 7 प्रयोग कर रहे हैं।  इसके कुछ गुण धर्म जो इसको  इतना ख़ास बनाते हैं उनको जानने के लिए आप मेरे लेख के दिए गए  लिंक 

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सबसे पहले तो आपको यह बता दे की माइक्रोसॉफ्ट के अभी तक सभी ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे विंडोज 98 , विंडोज 2000 , विंडोज XP, विंडोज  7 , विंडोज 8 में एक जैसे ही  "शॉर्टकट की "(Shortcut  Keys  ) प्रयोग होते आये हैं। लेकिन अब  विंडोज 10  में ये बदल गए हैं  कुछ प्रमुख "शॉर्टकट की " इस प्रकार हैं -






(1) विंडोज स्नेप के लिए प्रयोग होने वाली Shortcut  Keys   

विंडोज 10 ऑपरेटिंग सिस्टम में विंडोज स्नेप के लिए प्रयोग होने वाली प्रमुख  " शॉर्टकट  की "  इस प्रकार हैं



  • विंडोज स्क्रीन को लेफ्ट स्नेप करने के लिए  -  Windows Key + Left
  • विंडोज स्क्रीन को राइट स्नेप करने के लिए -   Windows Key + Right
  • विंडोज को मिनीमाइज करने के लिए -       Windows Key + Down
  • विंडोज को मक्सिमाइज़ करने के लिए -     Windows Key + U 


(2 ) वर्चुअल  डेस्कटॉप में प्रयोग होने वाली  Shortcut  Keys  




विंडोज 10 ऑपरेटिंग सिस्टम में वर्चुअल डेस्कटॉप  के लिए प्रयोग होने वाली प्रमुख  " शॉर्टकट  की "  इस प्रकार हैं
  • नए वर्चुअल डेस्कटॉप को क्रिएट एवं स्विच  करने के लिए :  Windows Key + Ctrl + D 
  • वर्चुअल डेस्कटॉप को बंद करने के लिए : Windows Key + Ctrl + F4 
  • वर्चुअल डेस्कटॉप को लेफ्ट/ राइट स्विच करने के लिए : Windows Key + Ctrl + Left / Right
(3) कमांड प्रोम्प्ट से सम्बंधित  Shortcut  Keys  
यदि आप विंडोज 10 में कमांड प्रोम्प्ट पर काम करने जा रहे हैं तो आपको निम्न शॉर्टकट की को ध्यान में रखना होगा। 



  • Ctrl + V or Shift + Insert – कर्सर की  पोजीशन पर पेस्ट करने के लिए। 
  • Ctrl + C or Ctrl + Insert – सेलेक्ट किये हुए टेक्स्ट कॉपी  करने के  के लिए। 
  • Ctrl + A – कमांड प्रांप्ट में दी गयी करेंट लाइन के सारे टेक्स्ट को सेलेक्ट करने  के लिए। 
  • Shift + Left / Right / Up / Down : कर्सर को क्रमश :एक पोजीशन लेफ्ट , राइट , एक लाइन ऊपर और एक लाइन निचे लाने के लिए। 
  • Ctrl + Shift + Left / Right : कर्सर को क्रमश : एक शब्द लेफ्ट , राइट करने के लिए, वर्ड को सेलेक्ट करने के लिए। 
  • Shift + Home / End : कर्सर को लाइन के शुरू में और अंत  में लाने के लिए और उस  लाइन के  टेक्स्ट सलेक्ट करने के लिए। 
  • कर्सर को एक स्क्रीन  ऊपर और निचे लाने के लिए  :Shift + Page Up / Page Down 
  • कमांड प्रोम्प्ट हिस्ट्री में एक लाइन ऊपर एवं निचे जाने के लिए (कुछ  स्क्रोलबार की तरह ): Ctrl + Up / Down 
  • कमांड प्रोम्प्ट हिस्ट्री में एक पेज ऊपर और निचे जाने के लिए  : Ctrl + Page Up / Page Down 
  • Ctrl + M  : मार्क मोड में प्रवेश करने के लिए ताकि कमांड प्रोम्प्ट के टेक्स्ट को सेलेक्ट कर सके पिछले ऑपरेटिंग सिस्टम में इसका कोई की शॉटकट नही था इसके लिए कमांड प्रोम्प्ट  में राइट क्लिक करके  ही टेक्स्ट सेलेक्ट करना होता था 
  • कमांड प्रोम्प्ट के आउटपुट को प्राप्त  करने के हेतु सर्च डायलॉग बॉक्स को ओपन करने के लिए : Ctrl + F 
  • कमांड प्रोम्प्ट विंडो को बंद करने के लिए  : Alt + F4







Sunday, August 16, 2015

यह हो सकती है तारो के निर्माण की कहानी !

"आये दिन हम अन्तरिक्ष में होने वाले अनेक परीक्षणों के बारे में जानते रहते है पर कभी कभी हमारे दिमाग में एक सवाल उठने लगता है की आकाश में ये जो तारे हैं इनका निर्माण कैसे हुआ होगा ये अन्तरिक्ष की जानकारी भी बहुत रोचक है और इस अन्तरिक्ष को सही से जाननेके लिए हज़ारो वर्ष भी कम है।आओ जानते है तारो के निर्माण पर किये गए इस अध्यन केबारे में - नवनिर्मित आकाश गंगा में अरबों साल पहले किसी विध्वंसक घटना की वजह से तारों के निर्माण की प्रक्रिया रूक गई थी।"


ब्रिटेन में डरहम विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के नेतृत्व में वैज्ञानिकों के एक दल ने एक नए शोध में इस घटना के सबूत मिलने के बाद विश्वास व्यक्त किया है कि इससे मालूम हो सकता है कि हमारी आकाश गंगा के समान अन्य विशाल मंदाकिनियों का उनके निर्माण के बाद विस्तार क्यों नहीं होता रहा। वैज्ञानिकों ने आशा व्यक्त की है कि इस निष्कर्ष से आकाश गंगाओं के निर्माण और विकास के बारे में समझ और बढ़ सकती है।गैस से हुआ नए तारों का निर्माणवैज्ञानिकों का कहना है कि तीन अरब साल पहले "एसएमएम जे 1237 प्लस 6203" नामक इस विशाल आकाश गंगा का निर्माण महाविस्फोट के बाद हुआ। उस समय ब्रह्माण्ड की उम्र मौजूदा उम्र कीएक चौथाई थी। 


निष्कर्षो के अनुसार इस आकाश गंगा में कई विस्फोट हुए, जो किसी परमाणु बम से होने वाले विस्फोट से खरबों गुना ज्यादा शक्तिशाली थे। इस तरह के विस्फोट लाखों साल तक हर सेकेण्ड होते रहे, जिनसे निकली गैस से नए तारों का निर्माण हुआ।कहा जाता है सुपरनोवाइस गैस के कारण ये तारे आकाश गंगा की गुरूत्व शक्ति से बाहर हो गए, जिससे प्रभावी रूप से इनका विकास नियंत्रित हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि आकाश गंगा के ब्लैक होल से उत्पन्न मलबे से बाहर निकले प्रवाह या समाप्त हो रहे तारों से उत्पन्न शक्तिशाली हवाओं से भारी मात्रा में ऊर्जा का उत्सर्जन होता है, जिसे "सुपरनोवा" कहा जाता है।

 रॉयल सोसाइटी और रॉयल एस्ट्रोनोमिकल की आर्थिक सहायता से किया गया यह शोध रॉयल एस्ट्रोनोमिकल सोसाइटी के मासिक सूचना पत्र में प्रकाशित हुआ है।उर्सा मेजर तारामंडल के मार्ग निर्देशन में जेमिनी वैधशाला का इस्तेमाल करते हुए इस आकाश गंगा का निरीक्षण किया गया। विकासशोध दल के प्रमुख डॉ0 डेव अलेक्जेंडर का कहना है, अतीत में देखने पर हमें एक विध्वंसक घटना का पता लगा है, जिसने तारों का निर्माण और स्थानीय ब्रह्माण्ड में एक विशाल आकाश गंगा का विकास रोक दिया। 

यह आकाश गंगा नए तारों को बनने से रोककर अपने विकास को नियंत्रित कर रही है।वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस घटना के पीछे ऊर्जा का भारी उत्सर्जन है, लेकिन इसका पता उन्हें अब लग पाया है।उनका कहना है, इसी तरह के भारी ऊर्जा उत्सर्जन ने तारों के निर्माण के लिए जरूरी पदार्थो को उड़ाकर संभवत: प्रारंभिक ब्रह्मांड में अन्य आकाश गंगाओं के विकास को रोक दिया। शोध दल अब यह पता लगाने के लिए तारों का निर्माण करने वाली अन्य विशाल आकाश गंगाओं का अध्ययन करने की योजना बना रहा है कि अन्य आकाश गंगाओं में भी इसी तरह की घटना तो नहीं हुई है।

Saturday, August 15, 2015

प्यारा भारत, देश हमारा !

 सभी देशवाशियो को स्वंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाये !

15 अगस्त सन 1947 को हमारा देश आजाद हुआ। तब से अब तक इतने साल गुजर गए।  इन सालो में बढ़ते समय के साथ साथ जहा एक और हमने कला , विज्ञान , साहित्य ,  अंतरिक्ष , टेक्नोलॉजी ,चिकत्सा ,परमाणु शक्ति , सशक्त वायु , थल  और जल सेना बल , कृषि एवं अन्य उधोग के क्षेत्र में तरक्की तो की लेकिन वही दूसरी ओर हम अपने बढ़ते  स्वार्थ , इच्छाओ को पूरा करने के लिए,  अपनी मानवता एवं नैतिक मूल्यों  को खो बैठे हैं। 

लूट मार , चोरी , भ्रिस्टाचार का हर तरफ बोलबाला है। नेताओ ने भ्रिस्टाचार के  नए नए लीबाज पहन लिए हैं।   पहले जनता को झूठे झूठे वादे करके वोट लेकर सत्ता हासिल कर लेते हैं और  सत्ता में आने के बाद उन किये गए वादो को पूरा करने की जगह उनको जुमलों का नाम देकर जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। आज माहौल इतना ख़राब हो चूका है कि  हमारा सामाज भेडियो से भरा पड़ा है।  एक दुसरे की मदद की जगह एक दूसर से नफरत करने में लगे हैं। इंसान इंसान को काट रहा है।




देश को आजादी दिलाने की लिए जिन्होंने अपना बलिदान दिया अगर उनको पता होता की हम आगे चलकर ऐसा करेंगे , तो शायद हम आज भी अंग्रेजो की गुलाम होते। बापू के  त्याग को हमने भुला दिया , उनका मजाक बनाते हैं ओर बची हुयी  कसर  कुछ नेता पूरी कर रहे हैं  उस महान आत्मा स्वर्गीय मोहनदास कर्मचन्द गांधी को भारत की लोगो की दिलो से मिटाने के लिए। शायद  दोगले नेता भूल गए हैं कि अहिंसा की मूरत गांधी को लोगो के दिलो से कभी  नही मिटा पायेगे, भले ही आप कितने ही हिन्दू मुस्लिम दंगे क्यों न कर वा ले। 


बचपन में स्कूल में एक गीत गाते थे कितना प्यार गीत था वह -

यह देश हमारा है , हमको अति प्यारा  है !
इस धरती को हमने माँ कहकर पुकारा है !! 

ये ऊच नीच झगडे की दीवार तोड़ देंगे !
विपरीत वही जो धारा , वह धार मोड़ देंगे !!
लहू से शहीदो  ने सींचा  है सवारा  है !
यह देश हमारा है ,हमको अति प्यारा  है !!

हम सबको उठाएंगे , सीने से लगायेगे !
जो हमसे बिछड़े हैं , उनको अपनाएंगे !!
धरती का प्यार भर ले, वह अपना प्यारा है !
यह देश हमारा है, हमको अति प्यारा है !!
इस धरती को हमने माँ कहकर पुकारा है !!!


आज स्वन्त्रता दिवस के अवसर पर अपने देशवासियो से यही विनती करुगा कि  हम हिन्दू , मुस्लिम , सिख ईसाई बाद में हैं, पहले हम भारतवासी हैं।  इसलिए इन नेताओ के  चक्कर  में न पड़े ये अपनी राजनितिक रोटी सेकने कि लिए हमको लड़वाते आये हैं।  हमको लड़ना नही बल्कि सही कार्यो के लिए एक दुसरे की मदद करनी हैं ,एक दुसरे के दुःख  दर्द में काम आना है। अपने काम काज पर ध्यान देना है ईमानदारी से ,इन नेताओ की बातो में आओगे तो कभी कोई भलाई का काम कर ही नहीं सकते। इसलिए बेहतर है इनको महत्व न दे अपने अपने काम पर ध्यान दे ओर एक दुसरे के दुःख दर्द में काम आते हुए, नैतिक मूल्यों महत्व देते हुए  सुख  शान्ति कि साथ अपना जीवन यापन करे, देश हित में कार्य करे।  



अंत में सभी शहीदो को  शत शत नमन। 

जय हिन्द, जय भारत !!

Thursday, August 13, 2015

सावधान : क्या आप बहुत अधिक शरमाते हैं ?


"आपको यह जानकर हैरानी होगी कि एरिथ्रोफोबिया एक ऐसी बिमारी है जिसकी चपेट में बच्चो से लेकर बड़ो तक अधिकतर कुछ लोग  आ ही  जाते हैं और मजे की बात तो यह है कि हमको पता ही नही होता कि क्या हम किसी बीमारी के शिकार है ? आप इस बात को घंभीरता से लेते ही नही ,इसके प्रति सचेत ही नहीं होते और धीरे धीरे यह आपके  करियर , आपकी  जिंदगी पर ऐसा बुरा असर डालती है कि आप सफलता  की रेश  में काफी पीछे रह जाते हैं। अब आप सोच रहे हैं कि लिखता ही जा रहा लेकिन समझ में यह नहीं आ रहा कि आखिर ये ऐसी क्या बीमारी है। इस पोस्ट में हम इस बिमारी के बारे में बताने जा रहे हैं और साथ ही साथ यह भी बतायेगे कि आखिर इस पर कैसे काबू पाएं ?"

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दरसल एरिथ्रोफोबिया बीमारी और  कुछ नहीं बल्कि शर्माने की बिमारी है , मतलब की  जो लॉग बात बात पर शर्माने लगते हैं या जिनको शर्माने की आदत कुछ जाय्दा  ही है, तो वह सुन ले कि अधिक शरमाना एक बीमारी है। जिसका वैज्ञानिक नाम है एरिथ्रोफोबिया और आप इसे हलके में न ले क्यों कि शरमाने की बढ़ती आदत न सिर्फ आपको रोगी बनाते है बल्कि आपकी यह बढ़ती आदत आपके अंदर बात बात पर न बोल पाने की और झिझकने की  बीमारी पैदा कर देती है।  जिसके कारण आपका आत्मविश्वास कम  होता जाता है और इससे आपके सोचने की , तर्क करने के  क्षमता भी कम  होती जाती है और आपकी सारी पर्सनालिटी को भी प्रभावित करती है। 

आप बात बात में दुसरे के सहारे की तलाश में रहते हो।  आपको कोई छोटा सा काम करने में भी दुसरो के सहारे की जरूरत महसूस होने लगती है।  किसी से बात करने का हिम्मत नही जुटा पाते।  यहाँ छात्र लोग ध्यान दे कि आगरा आपमें बात बात में शर्माने कि आदत है तो आपको विशेष ध्यान देने की जरूरत है क्यों कि ऐसे छात्र प्रश्न पूछने में संकोच करते हैं और साथ ही साथ किसी प्रश्न का जवाब भी नही दे पाते ,भले ही उनको उसका जवाब पता हो। जहा भी नौकरी कि तलाश में इंटरव्यू देने जाते हैं उनको अधिकतर  असफलता ही हाथ लगती  है।   ऐसे छात्रों में इंटरव्यू के नाम से कम्पन्न होने लगता है।  वो डरने लगते हैं और जब केबिन में बैठे इंटरव्यू लेने वाले पैनल के सामने बैठते हैं तो संकोच के कारण  वह सही सही जवाब नही दे पाते या कुछ यूँ कहिये कि खुद को साबित नहीं कर पाते।  एक बात याद रखे कि शर्म से झिझक पैदा होती है और इस झिझक के कारण आप सही से अपनी बात को दूसरो के सामने नहीं रख  पाते भले ही आपको सही सही आता हो। ऐसे हालात आपके आत्मविश्वास को कम  करने वाले होते हैं और जब यह घटना आपके साथ साथ बार बार होती है तो फिर आत्मविश्वास जवाब दे जाता है और समाप्त हो जाता है। 

यह रोग केवल छात्रों के लिए  ही घम्भीर  नहीं , बल्कि उन सभी को इसमें सुधार कि जरूरत है जिनमे यह आदत अधिक है . क्यों यह बात सभी पर लागू होती है कि यदि आपमें शरमाने  की  आदत है तो आप अपनी बात को दूसरो के सामने सही से नही रखा पाते, नतीजन कोई आपकी बात को महत्व नही देता और आपको नुक्सान झेलना पड़ता है। 

एरिथ्रोफोबिया से कैसे पाये छुटकारा ?

एरिथ्रोफोबिया मतलब शरमाने  की इस बीमारी से कैसे छुटकारा पाये ? इसके लिए आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं शायद आपके लिए उपयोगी साबित हो। 


  • सबसे जरूरी बात जो आपको ध्यान रखनी है ,वह यह है कि इसका इलाज़ आपके अपने हाथो में है ,आपका अपना आत्मनियंत्रण आपने एक आत्मविस्वास पैदा करता है। 
  • शरमाना जरूरी है लेकिन जरूरत पड़ने पर ही , बात बात पर ,बार बार नही। 
  • अनजान  लोगो  से बेझिझक  मिले , बाते करे। 
  • दोस्तों के साथ समूह तर्क करने से घबराये नहीं बल्कि तर्क करे और खुद पूछे और दूसरो को भी बताये।
  • जैसी ही आपको शर्म का अहसास हो अपना ध्यान किसी दुसरे काम में लगाए। 
  • समय समय पर अपने आप कि जांच करे कि क्या आपकी इस आदत में कुछ सुधार हो रहा है या नहीं यदि हो रहा है तो यह आपके अंदर आत्मविश्वास  पैदा करता है। 
  • अपने साथ साथ दूसरो का भी ख्याल रखे यदि कोई आपके सामने शरमा  रहा है तो उसको तुरंत वही इस बात कि याद दिलाये यकीन मांए आपको अच्छा महसूस होगा। 

अगली पोस्ट में  एरिथ्रोफोबिया से  सम्बंधित  कुछ और अन्य जानकरी आपके सामने प्रस्तुत  करेंगे।  

Monday, August 10, 2015

KEPLER 452 B: एक कदम दूसरी पृथ्वी की ओर !

Introduction to Kepler 452 B

"अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम कर रहे नामी संस्थान नासा ने यूं तो अब तक काफी नए  ग्रहो का पता लगाया है। जिनमे से 12  ग्रहो को नासा ने जीवन के अनुकूल बताया है।  धरती के अतिरिक्त अन्य किसी ग्रह  पर जीवन ढूंढने के इसी क्रम  में आगे बढ़ते हुए , हाल ही में नासा ने एक बड़ी सफलता उस समय हासिल की ,जब नासा के वैज्ञानिको ने धरती के आकार से बड़े आकार के  एक नए ग्रह  की खोज की। जिसको उन्होने KEPLER 452 B  नाम  दिया  हैं  और  कुछ तथ्यों के आधार पर  इन वैज्ञानिको ने यह बताया की यह ग्रह निवास करने योग्य है। "

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इस ग्रह  को नासा ने केप्लर दूरबीन की  मदद से खोजा  है। सौर मंडल के बाहर पाया गया यह ग्रह G2 टाइप के एक तारे की परिक्रमा करता है।धरती के जैसा पाया गया यह नया ग्रह इस तारे के चक्कर लगता है यही  इसका सूरज है। 




यहाँ आपको बता दे कि  सभी तारो को उनके स्पेक्ट्रम के आधार  पर 7  श्रेणियों में बाटा  गया है।  जो  क्रमश O, B, A, F, G, K और  M. हैं। O और  B  श्रेणी के तारो पर पर हाइड्रोजन की मात्रा बहुत अधिक है।   जबकि अन्य पर हाइड्रोजन की मात्रा  कम है और G एवं K  श्रेणी के तारो पर   मैग्नीशियम और कैल्शियम अधिक मात्रा  में हैं।  इन श्रेणियों को तापमान के आधार पर भी देखा गया है। जैसे O श्रेणी  के  अधिक गर्म है।  जबकि M  श्रेणी के ठंडे  हैं। प्रत्येक  श्रेणी  को  फिर से 0 से 9  श्रंखलाओ में बाटा गया  है। जैसे सूर्य  G 2  श्रेणी से है। 

नासा के वैज्ञानिको का अनुमान  है कि  अगर इस नये ग्रह  पर पेड़ पौधों को भेजा  जाये तो ये पेड़ पौधे  वहा जीवित रह सकते हैं। नासा की इस सफलता के अवसर पर नासा के साइंस मिशन के डाइरेक्ट्रेट के सहायक अधिकारी जॉन ग्रस्फेल्ड ने खुशी जाहिर करते हुए कहा की इस नए ग्रह की  खोज ने हमें दूसरी धरती की खोज के बहुत करीब पंहुचा दिया है। उन्होने कहा कि  जिस  क्षेत्र में यह ग्रह  पाया गया है उसको गोल्डीलॉक्स कहते  हैं, जो की निवास करने योग्य , जीवन के अनुकूल वातावरण वाला क्षेत्र है। 

उनके अनुसार निवास करने योग्य क्षेत्र में पाये जाना वाला यह ग्रह  आकार में धरती से काफी बड़ा है। यह धरती से लगभग 60 % बड़ा है और जिस तरह धरती के वर्ष की लम्बाई 365  दिन है। उसी तरह इस ग्रह  के वर्ष की लंबाई 385 दिन है, जो की धरती के वर्ष से 5 % अधिक है।  नासा के  वैज्ञानिको के अनुसार इस ग्रह  के पर पानी मौजूद  है। 

दूसरी धरती की खोज में प्रयासरत नासा को आगे कितनी सफलताएं मिलती हैं या तो आने वाला वक़्त ही बताएगा फिलहाल नासा अपनी इस सफलता से काफी उत्सुक है और दूसरी धरती की खोज के लिए सकारात्मक है। 

Wednesday, August 5, 2015

Bloggers के लिए महत्वपूर्ण हैं Google + Collection का उपयोग !


" मैंने अपनी पिछली पोस्ट में बताया कि गूगल कंपनी ने गूगल + को परिवर्तित करके अब गूगल + कलेक्शन लांच किया है। आने वाले समय में गूगल कंपनी  गूगल + को बंद करके गूगल + कलेक्शन को ही अपना सोशल मीडिया प्लेटफार्म बनाने की  तैयारी में है। तो ऐसे में सभी ब्लोग्गेर्स के लिए गूगल प्लस कलेक्शन का उपयोग करना महत्वपूर्ण हो जाता है। ताकि  वह अपने ब्लॉग  की पोस्ट , वीडियो , लिंक , फोटो आदि  को अपने मनचाहे फॉलोवर के साथ साझा कर सके।   यहाँ इस पोस्ट में हम गूगल प्लस कलेक्शन  एवं इसको कैसे बनाये और कैसे पोस्ट शेयर करे इसके बारे में बता रहे हैं।"


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क्या है Google + Collection ?

गूगल प्लस में कुछ नए  फीचर्स  जोड़कर  गूगल प्लस कलेक्शन को बनाया  गया है।  गूगल प्लस कलेक्शन में आप अपनी पोस्ट , वीडियो , लिंक , फोटो आदि को ब्लॉक के रूप  में व्यवस्थित कर सकते हो, उनको उनकी श्रेणी के अनुसार व्यवस्थित कर सकते हो । कुछ इस तरह से समझो  जैसे आपके कंप्यूट में फोल्डर बनाकर डेटा को व्यवथिस्ट करते हो और साथ ही साथ किस फॉलोवर  को आपकी पोस्ट दिखनी  चाहिए और किसको नहीं इस फीचर्स को भी इसमें शामिल किया गया है। 



उदाहरण के लिए जैसा कि  चित्र में दिखाया है। इसमें चार ब्लॉक (कलेक्शन) हैं।  पहले कलेक्शन में आप विचारो से सम्बंधित पोस्ट,  वीडियो , लिंक , फोटो को रख    सकते हैं , दुसरे कलेक्शन में आप उन  पोस्ट, वीडियो , लिंक फोटो  को रख सकते हैं जो घर में  सामान आदि के बारे में हों। इसी प्रकार चौथे कलेक्शन में उन पोस्ट वीडियो आदि को रख सकते हो जो की खाने और रसोई घर से सम्बंधित हो।  ( चित्र गूगल से साभार )

Google + Collection के फायदे !

गूगल प्लस कलेक्शन  का उपयोग  के  कुछ फायदे निम्नं  फायदे हैं। 


  • अपने डेटा को श्रेणी  के अनुसार व्यवस्थित करने की सुविधा। 
  • अगर आप किसी के गूगल प्लस कलेक्शन प्रोफाइल को फॉलो कर रहे हो तो गूगल प्लस कलेक्शन आपको यह सुविधा देता है कि आप केवल अपने मनपसंद श्रेणी की पोस्ट को फॉलो करे अन्य को नहीं। 
  • आप अपनी कुछ बेहतर पोस्ट , वीडियो , लिंक , फोटो आदि को प्रमोट भी कर सकते हो , मनचाहे फॉलोवर  साथ  सकते हो। 
  • गूगल प्लस कलेक्शन एंड्रॉयड  और वेब दोनों को ध्यान में रखकर बने गया है। इसलिए एंड्रॉयड  फ़ोन पर भी आप उतनी ही फ़ास्ट और सुविधाजनक तरीक से इसको स्तेमाल कर सकते हो जैसे कि वेब पर। 
  • आप अपने द्वारा बनाये गए कलेक्शन को उसकी श्रेणी  के हिसाब उचित बैकग्राउंड इमेज ( Theme और wallpaper ) सेट कर सकते हो। 



कैसे  करे उपयोग ?

यदि आप  गूगल प्लस कलेक्शन को इस्तेमाल करना चाहते हो या इसके सबसे महत्व पूर्ण फीचर विभिन्न  पोस्टो को उनकी श्रेणी के अनुसार  व्यवस्थित करना चाहते हो तो आपको निम्नन स्टेप को फॉलो करना होगा 

कंप्यूटर पर 

  • Google + (http://plus.google.com) पर जाये एवं Home पर क्लिक करे। 
  • Collection विकल्प को चुने। 
  • Create Collection  पर क्लिक करे। 
  • अपने कलेक्शन को पोस्ट  के अनुसार नाम दे एवं उन फॉलोवर को चुने जिनको आप पोस्ट को दिखाना चाहते  हो। 



एंड्राइड पर 

  • Google + App ओपन करे। 
  • Home  को टच करें। 
  • Collection को टच करें। 
  • Create Collection को टच करें।
  • अपने कलेक्शन को पोस्ट  के अनुसार नाम दे एवं उन फॉलोवर को चुने जिनको आप पोस्ट को दिखाना चाहते  हो। 
आशा करते कि यह  पोस्ट पाठको के  लिए उपयोगी होगी।


Sunday, August 2, 2015

अब Google + छोड़ ,Google + Collection अपनाने के लिए हो जाओ तैयार !


"ब्लोग्गर्स के लिए यह एक दुखद खबर हो सकती है कि  जानी मानी सर्च इंजन कंपनी गूगल  ने अब अपने गूगल  प्लस  (Google + ) प्रोडक्ट  को बंद करने का फैसला लिया है। यही खबर पिछले कुछ दिनों से सुनने में आ रही थी।  जब शुरू में यह हैडलाइन देखि तो थोड़ा दुख हुआ कि अगर सच में ऐसा  हुआ तो करोडो ब्लोग्गर्स का दिल टूट जाएगा क्यों कि ब्लोग्गर्स लोग ,अपने ब्लॉग कि पोस्ट को गूगल प्लस के माध्यम से अपने गूगल  प्लस सर्किल से जुड़े मित्रो  के साथ साझा करते हैं। इंटरनेट पर काफी कुछ ढूंढने  के बाद सही सही पता लगा , घबराये नहीं आपको गूगल ने अब इसके लिए एक दूसरा विकल्प दिया है। जिसका नाम है गूगल + कलेक्शन ( Google + Collection ) "

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अब से चार वर्ष पहले 28 जून 2011 को गूगल कंपनी  ने फेसबुक को टक्कर देने के उदेश्य से गूगल प्लस लांच किया था। यह गूगल का चौथा सोशल नेटवर्किंग प्रोडक्ट था।  इससे पहले गूगल कंपनी ने तीन सोशल मीडिया प्रोडक्ट लांच  किये।  जिनमे गूगल को सफलता नही मिल पायी , इनमे  Google Buzz  (launched 2010, retired in 2011),Google Friend Connect (launched 2008, retired by March 1, 2012) and Orkut (launched in 2004, retired in September 2014)आदि हैं। इनमे ऑरकुट फिर भी लोकप्रिय सोशल मीडिया का जरिया रहा है। लेकिन फेसबुक कि बढ़ती धाक के सामने गूगल को पिछले साल इसको भी बंद करना पड़ा।  गूगल प्लस की  मदद से हम अपनी पोस्ट , अपने स्टेटस ,अपने फोटो , वीडियो आदि अपने गूगल प्लस प्रोफाइल से जुड़े मित्रो के साथ साझा कर सकते हैं।







सही कहे तो फेसबुक के सामने अपने के एक के बाद एक एक असफल हुए  सोशल मीडिया प्रोडक्ट को लेकर गूगल काफी परेशान है। गूगल समझ नहीं पा रहा कि आखिर किस तरह से वह अपने सोशल मीडिया प्रोडक्ट को  फेसबुक से इस मामले में कैसे बेहतर  जाए। 

गूगल कंपनी  पिछले कुछ महीने से गूगल प्लस के सबसे उपयोगी हिस्सों को अलग कर अलग सेवाएं बनाने पर काम कर रही  है। इस तरह से कंपनी गूगल से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए जरूरत पड़ने वाली गूगल प्लस की  भूमिका को खत्म करने की तैयारी कर रही है । गूगल कंपनी के वीडियो , फोटो  , लिंक, शेयरिंग आदि कामो के लिए बनने वाले  प्रोडक्ट  के वाइसप्रसिडेंट का कहना है की पिछले काफी समय से हमे गूगल प्लस प्रयोगकर्ताओं से यह शिकायत मिल रही थी की गूगल प्लस के अलावा गूगल कंपनी के अन्य  प्रोडक्ट को प्रयोग करने के लिए  गूगल प्लस प्रोफाइल को अपनी पहचान के रूप में प्रयोग करने का कोई उचित मतलब नहीं है . इसलिए अब  स्टैण्डर्ड गूगल अकाउंट से ही अपनी पोस्ट साझा कर सकते हो , अपने सर्किल के मित्रो से बात कर  सकते हो।


हाल ही में गूगल कंपनी ने गूगल प्लस को अलग अलग बांटने के साथ इस बारे में महत्वपूर्ण घोषणा की है । गूगल आने वाले दिनों में गूगल प्लस को दो पूरी तरह अलग प्रोडक्ट्स स्ट्रीम  व फोटो में बदल की योजना है । गूगल के इस नए प्रोडक्ट को  गूगल + कलेक्शन नाम दिया गया है। जिसकी मदद से आप वीडियो शेयरिंग ,पोस्ट शेयरिंग ,लिंक शेयरिंग , फोटोज शेयरिंग आदि सुविधाओ का लाभ उठा पाओगे। गूगल + कलेक्शन एक प्रिंटर सेट के तरह है जिसमे पोस्ट कार्ड के रूप में प्रदर्शित हुआ करेगी साथ ही साथ गूगल कलेक्शन में फेसबुक से मिलते जुलते कुछ अन्य सुविधाओ को भी शामिल  किया गया है।

अब देखना यह है की आने वाले वर्षो में गूगल + कलेक्शन प्रयोगकर्ताओं के बीच कितना  लोकप्रिय होता है और क्या यह फेसबुक का मुकाबला करने में सक्षम हो पायेगा ?


Reference : www.venturebeat.com

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