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Friday, July 31, 2015

क्या मिशन "स्किल इंडिया" काफी है जॉब दिलाने के लिए ?

 केंद्र में भारी बहुमतो  से जीत के साथ साथ भाजपा सरकार का एक सौभाग्य यह भी रहा है ,कि वर्तमान जो  योजनाये केंद्र में  भाजपा की सरकार ला रही है।  उनमे से कुछ योजनाओ का आईडिया उनको केंद्र में पिछली कांग्रेस  सरकार की देन है।  अगर वर्तमान की बात करे तो  "स्किल इंडिया" योजना का सपना पूर्व प्रधानमन्त्री माननीय मनमोहन सिंह जी ने देखा था। वह  कांग्रेस सरकार के समय पर इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए प्रारूप  तैयार कर रहे थे , लेकिन चुनाव में कांग्रेस को हार मिली। 


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चलो कोई नहीं, अगर योजना सही है, देश हित में है तो उसको जरूर आगे बढ़ाना  चाहिए। अगर भाजपा ने इस योजना का श्रेय अपने सर ले लिए तो क्या हुआ कम से कम यह योजना वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के निर्देशन में योजना साकार तो हो गयी।  इसी तरह अगर हम उस समय की बात करें जब पी.वी.नर सिंघा  राव जी प्रधानमंत्री थे ,तो उन्होने अपने कार्यकाल में परमाणु परीक्षण के लिए वैज्ञानिको से सारी  तयारी करवा ली थी , वो चाहते थे कि यह परीक्षण हो तभी चुनाव आ गए और वह चुनाव हार गए।  पूर्व में भाजपा सरकार के वित्त मंत्री रहे माननीय श्री जसवंत सिंह के अनुसार जिस समय पी.वी.नर सिंह राव की सरकार के बाद माननीय श्री  अटल बिहारी वाजपयी जी प्रधानमंत्री पद की सपथ ले रहे थे। तब वहा मौजूद पी.वी. नर सिंह राव जी ने परमाणु परीक्षण के संदर्भ में अटल जी से कहा था  कि "मैं  ने सारी तैयारिया कर दी हैं, लेकिन मैं कर नही पाया अब आप इसे पूरा कर देना"। उस समय सिर्फ 14  दिन में भजापा के सरकार गिर गयी इसलिए अटल जी तब पूरा नही कर पाये लेकिन जैसे ही वह 1998  में फिर से प्रधानमंत्री बने तब उन्होने यह परमाणु परीक्षण  योजना को गंभीरता से लिया और इसे पूरा किया।


                                           "मिशन स्किल इंडिया और इसके पहलु "


खैर मिटटी डालो इन पुरानी बातो पर ,अब बात करते हैं वर्तमान के मिशन " स्किल इंडिया" की। अभी हाल ही में 15 जुलाई 2015 को के मौके पर पर हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने स्किल इंडिया मिशन के तहत "Ministry of Skill Development and Entrepreneurship" की चार योजनाओ का शुभारम्भ किया जिनके नाम क्रमश National Skill Development Mission, National Policy for Skill Development and Entrepreneurship 2015 , Pradhanmantri Kaushal Vikas Yojna (PMKVY), और Skill Loan Scheme हैं।  इस मौके पर प्रधानमंत्री  जी ने स्किल इंडिया मिशन की विशेषताओ के बारे में बताया। उन्होने सभी सरकारी संस्थाओ ,प्राइवेट संस्थाओ और देश के युवाओ से इस मिशन को कामयाब बनाने की बात पर जोर  दिया।  

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना(PMKVY) के अंतर्गत अगले  एक वर्ष  में भारत में 24 लाख युवाओ को स्किल ट्रेनिंग देने , किसी  विशेष समय पर तुरंत  जरूरत पड़ने पर ट्रेनिंग देने जैसे मुद्दो को शामिल किया गया है।  साथ ही साथ भारत में ऐसे लोग जो किसी क्षेत्र विशेष में काम करना तो जानते हैं, पर उनके पास उस क्षेत्र  में काम के लिए कोई शैक्षिक् प्रमाण पत्र नही  है।  ऐसे 10 लाख लोगो को योजना के अंतर्गत उनके काम में निपुणता के आधार  पर प्रमाण पत्र देने का प्रावधान है। 


स्किल लोन स्कीम के अंतर्गत विभिन्न क्षेत्रो में  स्किल डेवलमेंट प्रोग्राम को अटेंड करने के लिए अगले 5  वर्षो में 34  लाख लोगो को 5000 से 1.5 लाख रूपये  तक का ऋण देना शामिल किया गया है।  15  जुलाई को पप्रधानमंत्री  जी ने कुछ ऐसे व्यक्तियों को स्किल कार्ड और स्किल सर्टिफिकेट  भी वितरित किये ,जो जिन्होंने मई 2015  में की PMKVY  योजना  के  स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम में अपना रजिस्ट्रेशन कराकर ट्रैनिंग ली है।  

इस के अंतर्गत अभी तक ट्रेनिंग लिए गए जिन लोगो को स्किल कार्ड और स्किल सर्टिफिकेट वितरित किये गए हैं उन  पर Quick Response Code(QR CODE)  अंकित है। जिसको मोबाइल डिवाइस पर QR कोड रीडर की मदद से पढ़ा जा सकता है। जिसकी मदद से  जरूरत पड़ने पर जॉब सर्च के दौरान कंपनी में अपने स्किल  सर्टिफिकेट और  स्किल कार्ड को कंपनी के डिपार्टमेंट के लोगो के साथ आसानी से और कम समय में साथ शेयर किया जा सकता है। 

स्किल इंडिया मिशन सच में काबिले  तारीफ़ है। किन्तु  किसी भी क्षेत्र में काम कर रहे लोगो को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट  देने के साथ ही साथ यह अत्यंत   महत्वपूर्ण   है कि  उस क्षेत्र में रोजगार  के  अवसर भी बढाए जाए। क्यों की आज के समय में बहुत से युवा ऐसे हैं जिनके पास डिग्री , सर्टिफिकेट और काबलियत भी है लेकिन फिर भी वह सीटें कम होने के कारण  या रोजगार के अवसर कम होने के कारण  बेरोजगार  हैं। जब तक स्किल इंडिया मिशन के साथ साथ विभिन्न क्षेत्रो में रोजगार अवसर नही बढ़ेंगे , सीटें नहीं बढ़ेगी तब तक स्किल सिखने के बाद भी जॉब पाना आसान नही होगा, इसके बिना अधूरा है मिशन स्किल इंडिया।  



                                                                                                      

Tuesday, July 28, 2015

विलक्षण प्रतिभा के धनी महान वैज्ञानिक डॉ ए. पी.जे.अब्दुल कलाम जी को शत शत नमन !

"हमारे  देश के महान वैज्ञानिक , मिसाईल मैन एवं हमारे देश के  पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न  डॉ ए. पी.जे. अब्दुल कलाम (अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम) अब हमारे बीच नहीं रहे। डॉ कलाम 83 वर्ष के थे। वह  कल 27 जुलाई 2015 को  शाम करीब साढ़े छह बजे भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में एक व्याख्यान के दौरान गिर पड़े और फिर उन्हें मेघालय  राजधानी शिलांग में नानग्रिम हिल्स में बेथनी अस्पताल में भर्ती जहां उन्हें सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में भर्ती किया गया।जहा उनका निधन हो गया। "


डॉ कलाम जी की इस कमी को भारत में आने वाले कई वर्षो तक कोई भी पूरा नहीं कर पायेगा।  वह न केवल एक महान वैज्ञनैक बल्कि एक महान इंसान, एक अच्छे व्यक्तिव भी थे। उनकी  उपलब्धियों को , उनके विचारो को , देश के प्रति उनके प्रेम को हम कभी नहीं भूल सकते। उनके सरल स्वभाव और उनकी अच्छी सख्सियत होने का पता इस बात से चलता है कि  वह सभी धर्मो का सम्मान करते थे।  वह गीता और कुरआन दोनों पढ़ते  थे।  सुबह सुबह वह आसन भी करते थे। 
                        

उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। लेकिन जीवन के कठिन मौके पर भी उन्होने कभी हार नहीं मानी और सफलताओ को हासिल किया।  उनके अच्छे व्यक्तित्व और संघर्षपूर्ण जीवन का आज हर कोई कायल है। हर आयु के व्यक्ति उनका सम्मान करते हैं। वह युवा वर्ग के लिए एक प्रेरणा श्रोत हैं। उनका जीवन छात्रों को हमेशा मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है।  छात्रों को हमेशा सपने देखने और उन  सपनो को पूरा करने के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित करता है। 



उनकी जीवन से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें एवं  पर उनकी उपलब्धियां जो हमको हमेशा प्रेरित करती रहेगी ,जो हमेशा हमारे साथ रहेगी इस प्रकार हैं :-



  • 15 अक्टूबर 1931 को धनुषकोडी गांव (रामेश्वरम, तमिलनाडु) में एक मध्यमवर्ग मुस्लिम परिवार में डॉ अब्दुल कलाम जी का जन्म हुआ था। उनके पिता जैनुलाब्दीन न तो ज़्यादा पढ़े-लिखे थे, न ही पैसे वाले थे। अब्दुल कलाम साहब  सयुंक्त परिवार में रहते थे।  
  • अपने बचपन के दिनों में कलाम साहब को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए अखबार भी बेचना पड़ा सुबह की नवाज़ पढ़ने के बाद वह सुबह ८ बजे तक अखबार बेचते थे और फिर स्कूल चले जाते थे। 
  • रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद कलम साहब ने श्वार्ट्ज हाईस्कूल, रामनाथपुरम में प्रवेश लिया।
  •  उन्होंने 1950 में सेंट जोसेफ कॉलेज, त्रिची में दाखिला लिया। जहा  से उन्होंने भौतिकी और गणित विषयों के साथ बी.एस-सी. की डिग्री प्राप्त की।
  • उन्होंने मद्रास इंस्टीयट्यूट ऑफ टेक्ना्लॉजी (एम.आई.टी.), चेन्नई से अंतरिक्ष विज्ञान में डिग्री हासिल की। 
  • डॉ0 कलाम साहब 1962 में 'भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन' (ISRO) से जुड़े। यहाँ पर उन्होंने अनेक  पदों पर कार्य किया। 
  • डॉ कलाम साहब ने ISRO में  आम आदमी से लेकर सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरूआत की। 
  • परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी3 के निर्माण में उन्होने  महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  •  उनके निर्देशन में जुलाई 1980 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया।  
  • डॉक्टर कलाम साहब ने  अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया ।
  • डॉक्टर कलाम साहब  जुलाई 1992 से दिसम्बर 1999 तक रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार तथा "सुरक्षा शोध और विकास विभाग" (DRDO ) के सचिव भी रहे । 
  • उन्होंने पोखरण  में दूसरी बार न्यूक्लियर विस्फोट , परमाणु परीक्षण में अहम भूमिका निभायी । यह उन्हीं की देन है कि आज भारत ने परमाणु हथियार के निर्माण की क्षमता प्राप्त करने में जो इतनी सफलता प्राप्त की ।  उन्होंने भारत को ‘सुपर पॉवर’ बनाने के लिए 11 मई और 13 मई 1998 को सफल परमाणु परीक्षण किया। 
  • डॉ0 कलाम साहब नवम्बर 1999 में भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार रहे। इस दौरान उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया। 
  • डॉक्टर कलाम साहब ने  इस देश के बच्चों और युवाओं को जागरूक करने का हर सम्भव प्रयास किया । इसके लिए  उन्होंने प्रण  किया कि वे एक लाख विद्यार्थियों से मिलेंगे और उन्हें देश सेवा के लिए प्रेरित करने का कार्य करेंगे।
  • डॉ कलाम साहब को भारत के सर्वोच्च सम्मान "भारत रत्न" से भी नवाजा गया। 
  • डॉ0 कलाम 25 जुलाई 2002 को भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए। वह  25 जुलाई 2007 तक इस पद पर रहे। 
  • डॉ कलाम साहब  अपने देश भारत को एक विकसित एवं महाशक्तिशाली राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं। उन्होने अपनी  पुस्तक 'इण्डिया 2020' में देश के विकास हेतु अपनी सोच एवं कार्य योजना को बताया है । 
  • डॉ कलाम साहब हमेशा कहते थे कि  भारत को कृषि एवं खाद्य प्रसंस्ककरण, ऊर्जा, शिक्षा व स्वास्‍थ्‍य, सूचना प्रौद्योगिकी, परमाणु, अंतरिक्ष और रक्षा प्रौद्योगिकी के विकास पर ध्यान देना होगा। 

अभी  कुछ  दिन पहले  22 जुलाई 2015 को  ही झारखंड की शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने हजारीबाग के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर स्कूल में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित कर दी। उस समय कलाम साहब जीवित थे। कहा जाता है कि किसी जीवित व्यक्ति की तस्वीर पर फूल नहीं चढ़ाए जाते। वह  22  जुलाई 2015 का दिन था जब यह घटना हुयी और कल 27 जुलाई  2015 के दिन उनका निधन हो गया। 

 डॉ ए. पी.जे. अब्दुल कलाम (अवुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम) जी की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता।  डॉक्टर जी के लिए यह पंक्तियाँ कहना बिल्कुल उचित होगा कि -

                                    "हज़ारो साल लग जाते हैं , बड़ी मुश्किल से होती  है चमन में ऐसी सख्सियत  पैदा "

                                               डॉ ए. पी.जे. अब्दुल कलाम  जी को शत शत नमन एवं विन्रम श्रधांजलि !
                                                                                                                          मनोज कुमार 



Saturday, July 25, 2015

अब अपनी हथेली को बनाये वर्चुअल कीबोर्ड


एक समय था जब हम अधिकतर  इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस  को चालु करने के लिए उनको एक दुसरे से जोड़ने के लिए  तारो  की जरूरत पड़ती थी , अभी भी पड़ती है। धीरे धीरे हम वायरलेस यंत्रो के उपयोग  पर आ पहुंचे।  फिर टेक्नोलॉजी के बदलते स्वरुप ने  हमको बटन दबाने से लेकर टच स्क्रीन तक पंहुचा दिया। परन्तु इतना ही काफी नही था आज के समय में धीरे धीरे तकनीक हमे वर्चुअल ( आभासी ) माहौल में लेकर जा रही है जहा पर संसाधनो के स्थायी रूप से न होने पर भी हम उनकी सेवाओ का उपयोग कर सकते हैं। उन्हे उस स्थान से जहा पर स्थायी रूप में मौजदूद हैं ,वहा  से उनकी सेवाओ को अपने स्थान पर उपयोग कर सकते हैं। वर्चुअल माहौल में कुछ ऐसा ही होता है क्लाउड कंप्यूटिंग तकनीक इसका प्रमुख उदाहरण है। वर्चुअल संसाधनो का उपयोग अभी जनता के बीच प्रचलित नहीं है। लेकिन धीरे धीरे हम लोगो के बीच यह तकनीक पहुंच जायेगी फिलहाल अभी इसका उपयोग बड़े स्तर के  इंजीनियरिंग कॉलेज ,यूनिवर्सिटी में, कम्पनियो में  एवं वैज्ञानिक स्तर पर रिसर्च में किया जाता है।  




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"The patent (pictured) was filed in June 2012 and awarded earlier this week. It details a headset that projects a virtual keyboard onto a person's skin and this can be beamed onto their hands, their arm or onto another person. A camera then tracks the fingers to see which keys are being pressed"


                                  ( Image reference : www.dailymail.co.uk)


अभी हाल ही में वर्चुअल  तकनीक  के क्षेत्र में गूगल कंपनी ने एक ऐसा गैजट बनाया है जिसकी मदद से आप अपने हथेली को वर्चुअल  कीबौर्ड की तरह उपयोग कर सकोगे । गूगल  कंपनी के पास एक ऐसे ही  गैजट का पेटेंट मौजूद है, जो आपकी हथेली की त्वचा को वर्चुअल की-बोर्ड में बदल देगा। यह पेटेंट गूगल कंपनी ने  जून 2012 में फाइल किया गया था और इसका श्रेय गूगल कंपनी को मिला । यह गैजट गूगल ग्लास जैसा हेडसेट है, जो Interactive Virtual Keyboard को सीधे एक व्यक्ति की हथेली पर प्रदर्शित कर  देता है। इस हेडसेट में मौजूद एक कैमरा अंगुलियों की  मूवमेंट को ट्रैक करता है। जिसकी मदद से यह पता चलता है कि  वेबसाइट या एप में जानकारी  फीड करने से पहले   कौन-सी की दबाई  गई हैं।  मौजूदा ऎप्लीकेशन वर्चुअल इनपुट डिवाइस के सिस्टम्स और तरीकों का खुलासा करती है।वर्चुअल इनपुट डिवाइस में छोटा प्रोजेक्टर और एक कैमरा मौजूद है। वर्चुअल की-बोर्ड में पहली अंगुली नंबर्स के लिए और बीच की सिंबल्स के लिए असाइन की जा सकती है।

Reference : www.dailymail.co.uk

Friday, July 17, 2015

हडूप टेक्नोलॉजी :Hadoop Technology a Solution for Big Data


 " आज के समय में विभिन्न साइट्स जैसे फेसबुक, ट्विटर,याहू आदि  पर डाटा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अपने ग्राहकों का  विश्वास   बनाये रखने एवं उनको संतुष्ट बनाये रखने के  लिए ये कंपनिया नयी नयी टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही हैं जिनकी मदद से करोडो और अरबो ग्राहकों एवं प्रयोगकर्ताओं की डेटा को सही से व्यवस्थ्तित किया जा सके। ऐसे में अब तक  डेटा माइनिंग , डेटा वेयरहाउस जैसी तकनीको का उपयोग करके अक्सर बिग डेटा को हैंडल किया जाता रहा है किन्तु वर्तमान समय में अपनी गुणवत्ता के कारण हडूप टेक्नोलॉजी भी बिग डेटा को हैंडल करने के लिए प्रयोग होने लगी है।  "


वर्तमान समय में डिस्टीब्यूटेड डेटा को सही तरीके से स्टोर करना एवं प्रयोगकर्ता या ग्राहक  की आवश्यकता की अनुसार उसको उपलब्ध कराना कम्पनियो के लिए  बहुत जरूरी बन गया है।  बैंक द्वारा ए.टी.एम मशीन की माध्यम से ग्राहक को किसी भी समय , किसी भी लोकेशन से  धन उपब्ध करना , खाते से सम्बंधित सेवा उपलब्ध करना डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम  का  एक उदाहरण   है। इसके अन्य उदाहरण सोशल नेटवर्किंग साइट द्वारा प्रयोगकर्ता को  उपलब्ध करने वाली सेवाएं हैं।




हडूप  परिचय 

हडूप एक ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर फ्रेमवर्क है, जिसको JAVA प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में बनाया  गया है।  हडूप अलग अलग स्थानो  पर मौजूद कंप्यूटर पर एवं कंप्यूटर के समहुओ  पर मौजूद बड़े  डेटा को डिस्ट्रिब्यूटेड तरीके से स्टोर करने और  प्रोसेसिंग करने की लिए  प्रयोग किया जाता है।  यह फाइल सिस्टम पर आधारित है।  जिसकी मदद से डेटा के कुछ मुख्य पैरामीटर के आधार पर  डेटा की जांच ,उसकी एनालिसिस  की  क्रिया को  तेज और उत्तम बनाया  जाता है।  इसकी  मदद से  बिग डाटा को डिसिजन मेकिंग के लिए किसी ग्राफ एवं चार्ट के रूप में आसानी से दिखाया  जा सकता है।   यह मुख्यत उन वेब साइट्स के द्वारा डेटा को सही तरीके से व्यवस्थित करने के लिए प्रयोग किया जाता है जिनका डेटाबेस काफी बड़ा होता है।

हडूप  फ्रेमवर्क

हडूप  फ्रेमवर्क में मुख्यता निम्नन भाग होते हैं

Hadoop Distributed File System : यह डेटा को कंप्यूटर और उनके समहू पर  कुशलतापूर्वक स्टोर करता है।  साथ ही साथ प्रयोगकर्ता की जरूरत के समय  इस डेटा का प्रयोगकर्ता को कम  समय में उपलब्ध भी कराता  है। 

Hadoop MapReduce : यह एक प्रोग्रामिंग मॉड्यूल  है , जो की मुख्यता डेटा के बड़े बड़े सेट की पैरेलल प्रोसेसिंग के लिए प्रयोग होता है। 

 Hadoop YARN: यह मुख्यता : हडूप फ्रेमवर्क में उपस्थित सभी साधनो , सभी टूल्स को आवश्यकता अनुसार व्यवस्तित करता है उनका प्रबंधन करता है। यह फ्रेमवर्क में मौजूद  साधनो और टूल्स की मदद से डेटा सेट और कंप्यूटर के समहुओ  का प्रबंधन भी करता है और कब किस प्रयोगकर्ता को , किस कंप्यूटर समहू का कौन सा डेटा उपलब्ध कराना  है उसकी सूची (Scheduling ) तैयार करता है। 

Hadoop Common : यह उन सभी फाइल्स एवं  यूटिलिटीज को उपलब्ध करता है जो फ्रेमवर्क में एक दुसरे को सपोर्ट करती हैं।  जिनकी जरूरत डेटा की प्रोसेसिंग की दौरान पड़ती है।  

हडूप फ्रेमवर्क सॉफ्टवेयर कंपनी अपाचे  (Apache Software Foundation ) द्वारा तैयार किया गया है।  बड़े डेटा बेस वाली  वेबसाइट  वाली कंपनी जहा पर की करोडो  और अरबो प्रयोगकर्ताओं का डेटा स्टोर होता है , वह वर्तमान समय में हडूप  टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही हैं जिनमे फेसबुक एवं याहू जैसी बड़ी कंपनिया भी शामिल हैं। हडूप  फ्रेमवर्क को सबसे पहले  दिसंबर 2011  में मार्केट  में उतारा गया।  हाल ही में 21  अप्रैल 2015  को इसका नया वर्जन  रिलीज़ हुआ है। 

Thursday, July 16, 2015

इलेक्ट्रिक करंट बनाएगा आपके गणित को बेहतर



अगर आप मैथ मे कमजोर है तो घबराईये मत क्यों की अब इलेक्ट्रिक कर्रेंट अब आपके मैथ के स्किल्स को इम्प्रूव करेगा . इस तकनीक के द्वारा जिन स्टुडेंट की मैथ कमजोर है वो भी अपनी मैथ को सही कर पायेंगे. ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी के वैज्ञानिको ने इस रीसर्च पर सफलता हासिल की है उन्होने एक ऐसे व्यक्ति पर जिसकी मैथ कमजोर थी इस प्रयोग को 6 महीने तक किया और 6  महीने बाद उन्होने पाया कि अब उसके मैथ्स में पहले से कही जायदा इम्प्रूवेमेंट हुआ है . 

अभी भी दुनिया कि 20 % जनसँख्या ऐसी ही जो कि मैथ्स में बहुत कमजोर है ऐसे में हो सकता है कि ये तकनीक उनके किसी काम आये और स्टुडेंट्स के भी . "मै व्यक्तिगत रूप से किसी भी व्यक्ति या स्टुडेंट को मैथ्स स्किल्स को इम्प्रूव करने के लिए इलेक्ट्रिक शोट के लिए नहीं कहूँगा " ऐसा खुद ऑक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी के वैज्ञानिक "रोई कोहेन कडोश" ने कहा है जिन्होंने ये रिसर्च की है . पर वो अपनी इस रीसर्च पर खुश है . यू के. के वैज्ञानिको ने एक मेथड जिसको टी.डी.सी.एस. (transcranial direct current stimulation ) को प्रयोग किया जिसमे एक बहुत ही कम मात्रा के इलेक्ट्रिक करेंट को 15 मिनट तक अपनी बॉडी में पास कराया और ये पाया कि ये हमारे शरीर में नयूरोंस कि एक्टिविटी को बढाने और घटाने में सहायक है . और ब्रेन कि क्षमता पर भी असर डालता है . इसी प्रयोग को उन्होने मैथ्स स्किल्स को इम्प्रूव करने के लिए भी किया और सफलता हासिल की !


ये केवल आपकी जाकारी के लिए है । अभी मै इसे किसी को प्रयोग करने के लिए नहीं कहूँगा !


"Electrical stimulation will most likely not turn you into Albert Einstein," said Kadosh, "but if we're successful it might be able to help some people to cope better with math."

Tuesday, July 14, 2015

सबसे छोटा सुपर कन्डक्टर

  "Smallest Super Conductor "


" वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा सुपरकंडक्टर विकसित किया है। इसमें अणुओं के चार जोड़े हैं और यह एक नैनोमीटर (एक मीटर में एक अरब नैनोमीटर होते हैं) से भी छोटा है। ओहियो विश्वविद्यालय (ओयू) में हुए अध्ययन में पता चला है कि इस सूक्ष्म सुपरकंडक्टर का उपयोग बेहद सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऊर्जा प्रदान करने वाले यंत्र बनाए जा सकते हैं। "

क्या होता है सुपर कंडक्टर ? 


वैज्ञानिको ने छोटे से छोटे सुपर कन्डक्टर बनाने में भी सफलता हासिल कर ली है । आओ सबसे पहले जानते है कुछ सुपर कन्डक्टर के बारे में क्या होता है सुपर कन्डक्टर । "सुपर कन्डक्टर को अतिचालक पधार्थ भी कह जाता है ये वो पद्राथ होते है जो पदार्थ अत्यन्त कम ताप पर पूर्णतः शून्य प्रतिरोधकता प्रदर्शित करते हैं। उनके इस गुण को अतिचालकता (Superconductivity) कहते हैं। शून्य प्रतिरोधकता के अलावा अतिचालकता की दशा में पदार्थ के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र भी शून्य हो जाता है जिसे मेसनर प्रभाव (Meissner Effect) के नाम से जाना जाता है"


छोटे सुपर कंडक्टर  का महत्व 



वैज्ञानिकों ने दुनिया का सबसे छोटा सुपरकंडक्टर विकसित किया है। इसमें अणुओं के चार जोड़े हैं और यह एक नैनोमीटर (एक मीटर में एक अरब नैनोमीटर होते हैं) से भी छोटा है। ओहियो विश्वविद्यालय (ओयू) में हुए अध्ययन में पता चला है कि इस सूक्ष्म सुपरकंडक्टर का उपयोग बेहद सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ऊर्जा प्रदान करने वाले यंत्र बनाए जा सकते हैं। इस अध्ययन की अगुवाई करने वाले भौतिकी के प्रोफेसर साव-वाय हला ने कहा कि "शोधकर्ता मानते रहे हैं कि धातु चालकों का प्रयोग करके बहुत सूक्ष्म यंत्र बनाना लगभग असंभव है क्योंकि तार का आकार बहुत छोटा होने के कारण प्रतिरोध बढ़ता है। साव के अनुसार "बहुत सूक्ष्म तार बहुत जल्द गर्म हो जाते हैं और ये पिघलकर नष्ट हो सकते हैं। यह समस्या सूक्ष्म यंत्र बनाने में सबसे बड़ी बाधा है।" दरअसल सुपरकंडक्टर वाले पदार्थ ज्यादा विद्युत प्रवाहित करने में सक्षम होते हैं और इसमें बिजली की कमी और गर्म होने का भी खतरा नहीं रहता। इस समय इनका उपयोग सुपर कंप्यूटर से लेकर ब्रेन इमेजिंग उपकरणों में हो रहा है।

सुपर कंडक्टर ( अतिचालक पदार्थो )  की विशेषतायें 


अतिचालकों में ताप के साथ प्रतिरोधकता का परिवर्तन से ये पता लगता है  कि धात्विक चालकों की प्रतिरोधकता उनका ताप घटाने पर घटती जाती है। किन्तु सामान्य चालकों जैसे ताँबा और चाँदी आदि में, अशुद्धियों और दूसरे अपूर्णताओं (defects) के कारण एक सीमा के बाद प्रतिरोधकता में कमी नहीं होती। यहाँ तक कि ताँबा (कॉपर) परम शून्य ताप पर भी अशून्य प्रतिरोधकता प्रदर्शित करता है। इसके विपरीत, अतिचालक पदार्थ का ताप क्रान्तिक ताप से नीचे ले जाने पर, इसकी प्रतिरोधकता तेजी से शून्य हो जाती है। अतिचालक तार से बने हुए किसी बंद परिपथ की विद्युत धारा किसी विद्युत स्रोत के बिना सदा के लिए स्थिर रह सकती है।

अतिचालकता एक प्रमात्रा-यांत्रिक दृग्विषय (Quantum Mechanical Phenomenon.) है। अतिचालक पदार्थ चुंबकीय परिलक्षण का भी प्रभाव प्रदर्शित करते हैं। इन सबका ताप-वैद्युत-बल शून्य होता है और टामसन-गुणांक बराबर होता है। संक्रमण ताप पर इनकी विशिष्ट उष्मा में भी अकस्मात् परिवर्तन हो जाता है।यह विशेष उल्लेखनीय है कि जिन परमाणुओं में बाह्य इलेक्ट्रॉनों की संख्या 5 अथवा 7 है उनमें संक्रमण ताप उच्चतम होता है और अतिचालकता का गुण भी उत्कृष्ट होता है।

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Sunday, July 12, 2015

किडनी के लिए स्वच्छ पानी का महत्व !

                   " Importance of Water to Keep Kidney Healthy" 


" दोस्तों मानव शरीर के लगभग 65  से 70 %  भाग में  पानी ही समावेश है। धरती पर  भी  लगभग 71 से 72 % भाग  पर  पानी ही पानी है।  मानव शरीर के लिए सबसे आवश्यक चीज़  पानी ही है। किडनी मानव शरीर का एक ऐसा महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसको पानी की बहुत शख्त जरूरत होती है। हम अक्सर अपने दिल , फेफड़ो पर जयादा ध्यान देते हैं। किडनी की याद हमे तब आती है जब यह काम करना बंद कर देती है।  हमे शुरू से ही अपनी  किडनी की सेहत  का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। यह हमारे शरीर के अधिकतर कार्य करती है और हमारे सेहत  को स्वस्थ बनाये रखती है। अब किडनी के लिए पानी का क्या महत्व है और कितना महत्व है वह हम इस पोस्ट में जानेंगे। "

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मानव शरीर में किडनी का कार्य 


सबसे पहले  हम बात करेंगे की आखिर किडनी क्या क्या महत्व है ? किडनी क्या कार्य करती हैं ? हमारे शरीर में दो  किडनी होती हैं। जिनका आकार बीन ( सेम की फली या लोबिया ) जैसा होता है और जो मेरुदण्ड के दोनों  ओर होती हैं। हमारे शरीर के द्वारा किये गए दैनिक कार्यो में किडनी का विशेष महत्व है। यदि  मानव  शरीर की किडनियां काम करना बंद कर दे तो कुछ ही दिनों में मौत की चपेट में आ जाता है।  


किडनी का मुख्या कार्य शरीर से अपशिष्ट एवं तरल पदार्थो को यूरीन के माध्यम से मानव शरीर से बहार निकलना है। इसके अतिरिक्त किडनी मानव शरीर में साल्ट, पोटेशियम एवं एसिड की मात्र को भी नियंत्रित करती है। साथ ही साथ किडनी से वह  हार्मोन भी  निकलते हैं जो हमारे शरीर के अन्य अंगो को कार्य करने   के लिए जरूरी हैं। अक्सर हम हम कुछ खाते या पीते हैं तो हमारे शरीर के रक्तप्रवाह  में कुछ पोषक तव एवं खनिज  भी शामिल  हो जाते हैं जिनसे हमारे शरीर को ऊर्जा मिलती है , शरीर का विकास होता है। जब यह रक्त किडनी से होकर गुजरता है तो किडनी में यह रक्त फ़िल्टर होता है। जिससे खनिज की अधिकता न हो हमारे शरीर में . इसलिए  किडनी रक्त को फ़िल्टर करके ये खनिज की अधिकता  को मूत्राशय को भेज देती  है। जहां  से वह यूरीन दवरा शरीर से बहार निकल जाता है। 

यदि हमारे शरीर में किडनी काम करना बंद कर दे तो शरीर में अपशिष्ट पदार्थो , खनिजों एवं तरल पदार्थो की मात्रा बहुत बढ़ जायेगी ,जिसके कारण  सारे शरीर में इन्फेक्शन फैलने ओर किडनी में पत्थर बनने के चांस काफी बढ़ जाते है। 


किडनी  को स्वस्थ रखने में पानी महत्व 


  "Urinary Tract Infection " शरीर में दूसरा मुख्या रूप से फैलने वाला इन्फेक्शन है, जो की मुख्यत  किडनी  में ही पनपता है और धीरे धीरे सारे शरीर को अपनी चपेट में ले लेता है।  उचित मात्रा  में पानी पीने  से शरीर में होने वाले इस इन्फेक्शन को रोका जा सकता है। 


किडनी में पत्थर के होने से यह  इन्फेक्शन ओर भी अधिक बड़ा जाता है जो  किडनी के लिए कठिनाई उतपन्न करता है।  किडनी में पत्थर बनने का मुख्या कारण  सही मात्रा में में पानी का न पीना है।  इसके अतिरिक्त किडनी में पत्थर बनने से किडनी की बीमारी बढ़ने के चांस रहते हैं। जैसा की हम जानते ही हैं कि डिहाईड्रेशन पानी  की कमी के कारण  होता है। जिसकी  वजह से मानव शरीर में इलेक्ट्रोलाइट जैसे पोटेशियम , सोडियम एवं फॉस्फेट आदि का संतुलन बिगड़ जाता है।  जिनको फ़िल्टर करने का काम किडनी ही करती है। अत: ऐसे में इनका संतुलन बिगड़ जाने पर किडनी सही से इनको फिल्टर नहीं कर पाती , जिसके कारण  किडनी फेल  हो सकती है। अत: किडनी के सही रूप से कार्य करने के लिए सही मात्रा में पानी पीना बहुत जरूरी है।  

शरीर  की अधिकतर बीमारियां पानी के कारन ही होती हैं। कुछ दूषित पानी पीने  के कारण  तो कुछ सही मात्र में पानी न पिने के कारण।  इसलिए सही मात्रा  में स्वछ पानी ही पिये और  स्वस्थ रहे। 

                                                                                                                               प्रस्तुती : मनोज कुमार



Wednesday, July 8, 2015

बुरी आदतो को कैसे बदले ? उनसे कैसे निपटे ?

             
 "जैसा की हम सब जानते हैं कि अधिकतर व्यक्तियों में दोनों तरह की आदते होती हैं , बुरी आदते  और अच्छी आदते। अच्छी आदते हमको अक्सर सफलता की ओर  लेकर जाती हैं और बुरी आदते  हमको पीछे धकेल देती हैं।  आपको अपनी मंजिल भी पता है और आपको अपना  रास्ता भी।  अगर आपको आपकी आदते मंजिल की  और सही रास्ते से लेकर जा रही हैं तो आपको उनको  बदलने कि जरूरत नही है।  लेकिन अगर आपको आपकी आदते  मंजिल कि ओर नहीं ले जा रही ओर रास्ता भी सही नही है तो आपको अपनी आदते बदलनी होगी। आज आप जो भी हो, जहा भी हो, अपनी आदतो की वजह से हो। "

कुछ आदते ऐसी होती हैं जिनके कारण हमको नुक्सान उठाना पड़ता है तो कुछ आदते ऐसी भी होती जिनके कारण कभी कभी  हमको अक्सर दूसरो के सामने हसी का पात्र बनना पड़ता है।  स्मोकिंग, ड्रिंकिंग ,पढ़ाई न करने की आदत , लड़ाई करने की आदत, गलत संगत  में रहने की आदत ये ऐसी आदते हैं जिनके  कारण हमारा अपना खुद का नुक्सान होता है किसी दुसरे का नही।  इनकी वजह से हमारी खुद की लाइफ ख़राब होती है।  

 वही कुछ आदते ऐसी भी होती हैं जिनके कारण हमारा इतना ज्यादा  तो नही होता पर हाँ दुसरो के सामने हम उनकी वजहसे हसी का पात्र बनना पड़ता है।  जिनमे मख्या रूप से नाख़ून चबाने कि आदत ,  बार बार  थूकने की आदत , दूसरो से बात करते ज्यादा बोलने की आदत , झूठ  बोलकर पलटने की आदत। 

 कभी कभी हम खुद अपनी बुरी आदतो से छुटकारा पाना चाहते हैं, लेकिन सही तरीके को नही अपना पाते ओर जो अपना लेते हैं वो अपनी इन आदतो से छुटकारा पा लेते हैं।  कभी कभी कुछ दुसरे भी हमारी मदद करते हैं जिनकी वजह से हम इन ख़राब आदतो से छुटकारा पा सकते है।  





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किस ख़राब आदत से  कैसे पाये छुटकारा ?

यहाँ हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं। जिनको अपनाकर आप ख़राब आदतो से छुटकारा पा सकते हैं ,अगर सच में पाना चाहते हैं तो -

  • अधिकतर एक्सपर्ट मानते हैं कि किसी भी ख़राब आदत से छुटकारा पाने के लिए हमे एक नयी अच्छी आदत डालनी होगी मतलब कि अगर हम अपनी किसी ख़राब आदत से बहुत परेसान हैं ,जो हमको सफल होने से रोक रही है तो हमको उस आदत को कैसे रोकने या उस आदत से होने वाले नुकसानों से ज्यादा ,एक ऐसी नई अच्छी आदत अपनानी होगी एक ऐसी अच्छी नए आदत के फायदों के बारे में सोचना होगी जो हमे सफलता कि ओर ले जा सके। यदि हम ऐसी आदत अपना लेते हैं हैं तो हमारे ये अच्छी आदत उस बुरी आदत से रिप्लेस  हो जाती है उसकी जग ले लेती है। 


  • अगर हम अपनी कई बुरी आदतो से परेसान हैं तो कोशिश करे कि एक समय में एक ही बुरी आदत को ऊपर बताये गए  के तरीके के अनुसार किसी  अच्छी आदत से बदले। 

नाख़ून चबाने  से कैसे बचे ?

अगर आपको नाख़ून चाबाने की आदत  है ,तो यह भी सामजिक रूप से माननीय नही है , हमको दुसरो के सामने हसी का पात्र बनना पड़ता है। ऐसे में  आपको  कुछ ऐसा करना है कि जब भी आप नाख़ून चबाने जाओ आप अपने हाथो को को पॉकेट में रख लो , या हाथ बांधकर खड़े हो जाओ।  कोशिश  करो कि आपके हाथ मूह की तरफ कम  जाए। 

भूंलने की आदत से कैसे निपटे ? 



अगर आपको  लेकर बार बार भूल जाने  की  आदत है तो कुछ उसके  लिए आप मोबाइल में अलार्म के साथ रिमाइंडर लगा सकते हो , या अपनी जेब में रखे रुमाल में गाँठ बाँध सकते हो जैसे ही आप अपना रुमाल अपनी जेब से निकलोगे तो आपको वो काम याद आ जाएगा। 



ड्रग्स और स्मोकिंग की आदत से कैसे छुटकारा पाये ?

अगर आपके अंदर ड्रग्स स्मोकिंग की आदत है तो आपको इस आदत से छुटकारा पाने के लिए थोड़ी मेहनत करनी होगी पर इसे बदलना जरूर क्यों कि अपनी इसी आदत की वजह से आप अपनी फैमिली से बाहर  हो सकते हो, जेल जा सकते हो, शरीर ओर करियर ख़राब कर लेते हो।  इस आदत से परेसान अधिकतर लोग इसे  छोड़ना  चाहते हैं। सबसे पहले आप उन  लोगो को पहचानो जो आपको ड्रिंकिंग स्मोकिंग या ड्रग्स ऑफर  करते हैं मतलब जिनकी कंपनी में आप ये सब करते हो , तो जैसे ही उनका फ़ोन  ड्रिंकिंग  या स्मोकिंग के लिए आये  तो आप उन्हे मना  कर सकते हो भले ही आपको छोटा झूठ  क्यों न बोलना पड़े।  आप उन  रास्तो से न गुजरे जिन पर शराब , बीयर और  स्मोकिंग कि दुकाने जयदा हो। 

 जब भी आपका मन शराब या ड्रग्स लेने का करे उस समय अपने मन में अपने बच्चो की फोटो को देखो। अपनी पत्नी जो आपको खाना बनाकर देती है उसकी फोटो को देखो ,अपने माता पिता जिनका  आप एक मात्र सहारा हो उनको देखो।  इस आदत को बदलने के लिए दिन के जिस समय में ये काम करते हो उस समय कोई नया अच्छा काम भी कर सकते हो जैसे कोई कोई गेम ज्वाइन करना , कोई पसंद का टी वी सीरियल देखना या कुछ और। 

जब भी टी. वी या  रास्ते में लगे किसी होर्डिंग को देखकर आपका मन आपको स्मोकिंग या ड्रिंकिंग के लिए प्रेरित करे ,तो उस समय सोचो कि जो लोग जो फिल्म स्टार जो मॉडल इसका प्रचार करते हैं क्या वो सच में इसी पीते  हैं।  आपको जवाब मिलेगा नहीवो ऐसा बिलकुल नही करते बस वो लक्खो और करोडो कमाने के लिए इसका प्रचार कर रहे हैं। 

अपनी इस आदत को छोड़ने के लिए आप अपने फैमिली डॉक्टर से सुझाव ले।  

पढ़ाई में मन न लगने की आदत से कैसे निपटे की पढ़ाई में मन लगे !


पढ़ाई में मन लगाने के लिए सबसे जरूरी है कि आप जिस कमरे में जिस जगह बैठकर पढ़ाई कर रहे हो उस जगह को साफ़ रखो , पढ़ते  समय मोबाइल स्विच ऑफ या साइलेंट पर रख दो , आप पढ़ते समय अपनी पसंद का पेन , अपनी पसंद का बुक कवर भी इस्तेमाल कर सकते हो। ताकी  आपका मन लगे। जैसे ही आपको थोड़ी बोरियत महसूस हो आप  5  मिनट का रेस्ट ले सकते हैं। पढ़ाई में मन लगाने के लिए जरूरी है कि आप पढ़ाई अपने उस समय में करे जिस समय आप अपने को अधिक रिलैक्स और ऊर्जावान महसूस  करते हों। 


अगर आपके अंदर कोई ऐसी ख़राब आदत है जो आप उस समय जयदा करते हो जबआप घर पर रहते हो तो अपने घर के सदस्यों से कह  दो कि जैसे आप मुझे इस आदत को करते देखो तुरंत मन करो ताकि आपको याद आ जाए कि वो आपको नही करना  है। 

बेन्ज़िलमन फ्रेंकलिन कहते हैं कि जब आप अपने अंदर से बुरी आदतो को निकाल देते हो तो बाकी जो इंसान बचता है वही आपकी ओर से इस दुनिया के लिए  सम्पत्ति होती है।  इसलिए याद रखो कि सफल आपको होना है इसलिए आज से ही अपनी बुरी आदतो को अच्छी आदतो से बदल डालो ,बदल डालो ,बदल डालो। अपने लिए न सही कम  से कम   उसके लिए ही बदल डालो जिसे आप सबसे जयदा प्यार करते हो उसकी ख़ुशी के लिए ही बुरी आदते छोड़ दो कोई तो होगा आपका अपना जिसको दुखी देखकर आपका मन भर आता हो आपकी आँखे नम हो जाती हो तो उसके  लिए ही बदल डालो।  


                                                                                                               -------------  मनोज  कुमार 

Monday, July 6, 2015

सफल रहा मानव दिल का "50 cc कृत्रिम दिल " से प्रत्यारोपण !



"Successful Heart Transplant with "50 cc Total Artificial Heart"

" इस लेख के प्रारम्भ में यहाँ पहले  आपको यह बात स्पष्ट  कर दे कि  किसी मानव  के दिल का दुसरे मानव के दिल से सफल प्रत्यारोपण सन 1967 में Dr. Christian Barnard, (Groote Schur Hospital, Cape town, South Africa)  ने किया था।  मानव दिल का आर्टिफिशियल दिल से प्रथम प्रत्यरोपण  भी सन  2013 में फ़्रांस में हो गया  था, लेकिन यह एक "70 cc Artificial Heart" था। जिसको छोटे मरीजों को  लगाना पूर्ण रूप से उचित नहीं था। इसलिए चिकित्सा वैज्ञानिको ने छोटे मरीजों के लिए एक "50 cc Artificial Heart "  को बनाया लेकिन इसका सभी सफल प्रत्यरोपण का प्रयोग बाकी था ,जो अभी हाल ही में सफल हो गया  है। "    



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आज के समय में चिकत्सा के क्षेत्र में ट्रांसप्लांट तकनीक का अपना विशेष महत्व है। ट्रांसप्लांट तकनीक की  मदद से  आज शरीर के  विशेष  अंगो का प्रतिरोपण  संभव हो पाया है।  इस तकनीक में एक व्यक्ति के शरीर के अंगो को दुसरे  व्यक्ति को लगाकर उपचार किया जाता है। कुछ ऐसे व्यक्ति जिनके शरीर के कुछ अंग काम नही कर पाते थे आज वही  व्यक्ति इस तकनीक की मदद से फिर से सही से अपने दैनिक कार्यो को कर पा  रहे हैं।



हाल ही में  " यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया " के "रोनाल्ड  रीगल मेडिकल सेंटर ", लॉस एंजलिस  में एक 44 वर्ष की महिला के दिल का  "50 cc Total Artificial Heart " से प्रत्यारोपण  किया गया जो की पूर्ण रूप से एक सफल प्रयोग रहा।  यह आर्टिफिशियल दिल छोटे मरीजों के लिए बनाकर  तैयार किया गया है।  यह  महिला कैलिफोर्निया में "50 cc Total Artificial Heart " से प्रत्यारोपण प्राप्त करने वाली प्रथम महिला बन गयी हैं।  

"50 cc SynCardia Total Artificial Heart " जो कि  "70  cc SynCardia Total Artificial Heart "का छोटा रूप है , मुख्यता छोटे मरीजों के लिए बनाया  गया है। जिनमे महिलाये , किशोरों जिनकी आयु 13  से 19  वर्ष के बीच है  आदि शामिल हैं।  इसको मुख्यता उन  मरीजों के लिए उपयोग किया जाता है जिनके दिल की दोनों साइड ख़राब हो चुकी होती हैं और वह शरीर में रक्त भेजने (PUMP ) में  असमर्थ हो जाती हैं। 

Mrs.Nemah Kahala , एक बहुत ही छोटी कद काठी वाली स्त्री हैं। जो कि  पांच बच्चो की माँ भी हैं। वह काफी समय से दिल की बिमारी से परेशान  चल रही थी।  अंत में हालत अधिक ख़राब हो जाने पर उनको में एडमिट किया गया। जहा पर चिकित्सको ने पाया की उनका दिल पूर्ण  रूप से बेकार हो चूका है।  जिसको की नार्मल सर्जरी चिकित्सा या अन्य यंत्रो की मदद  से सही कर पाना मुश्किल है। ऐसे में डॉक्टरों ने उनके दिल को आर्टिफीसियल  दिल से ट्रांसप्लांट करने का सुझाव दिया।  लेकिन  "70 cc SynCardia Total Artificial Heart " उनकी छोटे कद काठी वाले शरीर में लगाना संभव नही था। ऐसे में डॉक्टर ने "50 cc SynCardia Total Artificial Heart "से  प्रत्यरोपण करना  सही समझा लेकिन किसी महिला  को लगाना एक प्रथम प्रयोग था जो की सफल रहा। 

Mrs.Nemah Kahala  अब स्वस्थ हैं और आगे भी हम इनके स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं।   

Saturday, July 4, 2015

अपने अकेलेपन में ऐसे पाये सफलता !


                                  "Turn your loneliness into a way for success" 
"अक्सर हमारी जिंदगी में ऐसे पड़ाव भी आते हैं, जब हम  खुद को बहुत अकेला महसूस करते हैं।  ऐसे हालात  के आने का कोई समय या कोई उम्र नही होती। ये उम्र के किसी भी पड़ाव पर आ सकते हैं। अब हम इन हालातो से कैसे निपटते  हैं? इन पर विजय पाकर आगे बढ़ते हैं या फिर इन हालातो में खुद को कमजोर महसूस करके असफल हो जाते हैं। यह हमारी इच्छा शक्ति पर निर्भर करता है।  हमारे आत्मविश्वास  पर निर्भर करता है। "

बचपन में कुछ छात्र ऐसे होते जिनको अच्छे दोस्त नही मिल पाते , वो क्लास में खुद को अकेला महसूस करते हैं।  जिसका असर उनकी पढ़ाई पर भी पड़ता है और भविष्य पर भी तो ऐसे बच्चो के  माता पिता को इनका विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।  इनके प्रति सहानुभूति बरतने हर कदम पर इनका हौसला बढ़ाने की जरूरत होती है। ताकि वो  अपने इस अकेलेपन में पड़कर अपने लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग पर चलने से डरे नहीं। 


 जब हम पर घर परिवार वाले हो जाते हैं , घर गृस्थि की जिम्मेदारियां आ जाती हैं तब भी कभी कभी हमको अकेलपन का सामना करना पड़ता है। ये अकेलापन कुछ दुसरे प्रकार का होता है। इन हालातो में हमारे साथ हमारे बीवी बच्चे तो होते हैं पर जब ऐसे में जब हम किसी आपत्ति या बेटे की बड़ी  पढ़ाई , बिटिया की शादी या फिर घर सम्बंधित आर्थिक संकट से जूझ  रहे  हों तो ,हमारे सगे  सम्बन्धी मित्रगण भी अक्सर हमको अकेला छोड़ देते हैं। 

जब घर परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वाह कर चुके होते हैं और वृद्धा अवस्था में आ जाते हैं ,तो बेटा और बहू अकेला छोड़ देते हैं। वो माँ बाप को घर छोड़कर  नौकरी करने दुसरे शहर चले जाते हैं तो अकेलापन और भी रुलाने  लगता है और बेटे अपने साथ रखते हैं ,तो उनके पास अपने माता पिता से सही से बात करने का समय भी नही होता। आजकल तो वैसे भी नियुक्लर  फैमिली का चलन बढ़ता जा रहा है। 

कुल मिलकर यह अकेलापन हमारी जिंदगी का एक हिस्सा है जो हमको कुछ दुखद अहसास करता है। तो क्या हम इस अकेलेपन से दुखी होते रहे ? क्या हम यह सोचना शुरू कर दे  कि मैं बहुत अकेला पड़ गया हु अब मैं जो करना चाहता था वो नही कर पाउगा ? और हालत से हार मानकर बैठ जाए।  नही हमे ऐसा बिलकुल नही करना है चाहे अकेलापन हमारी जिंदगी के पढ़ाई के दिनों आये या नौकरी और बिजनिस या खेती बाड़ी  के दिनों में आये या फिर वृद्धा अवस्था में आये हमको हार नहीं माननी है। 

हमको अपने इस अकेलेपन को ही अपनी शक्ति बनाकर खुद को सफल बनाना होगा। हम अपने अकेलेपन को अपनी सफलता का कारण कुछ इस तरह की सोच विकसित कर  बना सकते हैं , जैसा की निम्नन बिन्दुओ में बताया गया है। 

  • आप अपने अकेलेपन को नकारात्मक  तरीके में न ले। अकेलापन आपके अनदर छिपी हुयी शक्तियों को विकसित करने का एक मौका है। 
  • ऐसे बहुत से उदाहरण  हैं जिसमे आप पाओगे की कई  अकेले व्यक्तियों ने अपने दम  पर बड़े  बड़े  महान कार्य  किये  हैं और सफलताओ  को हासिल   किया  है। 
  •  शरीर को चिंता में मत डुबाकर बरबाद  मत करो।  जब  आपको अपने हाथ पैर ,अपने दिमाग और दिल पर भरोसा हो जाएगा उस दिन आपके अनदर एक आवाज़ जरूर  निकलेगी जो आपको प्रेरित करेगी और आपसे हसकर कहेगी इन बाधाओं  को कुचलकर तू  अकेला चल अकेला। 
  • हमेशा दुसरे से उम्मीद के सहारे अपनी आशाओ के महल खड़े मत करो ऐसा करके आप अपने साहस को कमजोर बना देते हो और खुद को अपंग। 
  • जो व्यक्ति दूसरो के सहारे यात्रा करता है वह उतनी ही जल्दी अकेला भी हो जाता है। 
  • दुसरो के सहारे अपनी जिंदगी की नाव को मत चलने दो क्यों की आपको दूसरो के ज्ञान और अज्ञान का सही सही अंदजा नही हो सकता।   
  • अकेलेपन  को सफलता का कारण बनाने के लिए सबसे जरूरी है की आप खुद को प्यार करने लगो। 
अंत में इस गीत की कुछ पंक्तियों के साथ विदा लेता हु दोस्तों  " रुक जाना नहीं तू कही हार के , कांटो पर चलके  मिलेंगे साये बहार के " .................ओ राही चल, ओ राही चल।  

                                                                                                                                       आपका अपना 
                                                                                                                                            मनोज 

Thursday, July 2, 2015

रूसी अंतरिक्ष यात्री GENNADY IVANOVICH PADALKA ने बनाया यह रिकॉर्ड !

 "रूसी अंतरिक्ष यात्री Gennady Ivanovich Padalka जो की वर्तमान में इंटरनेशनल  स्पेस स्टेशन  के कमांडर भी हैं ने अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय तक रहने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। सोमवार, 29  जून 2015  उनका  अंतरिक्ष में 804  वा दिन था" 



                                             
यहाँ आपको बता दे कि इससे पहले  अंतरिक्ष में सबसे लम्बे समय तक रहने का रिकॉर्ड एक अन्य रूसी अंतरिक्ष यात्री के Sergei Krikalev के  नाम था।  जो कि अंतरिक्ष में पूरे 803  दिन , 9 घंटे और 41  मिनट तक रहे। लेकिन इस सोमवार 29  जून 2015  को रूसी अंतरिक्ष यात्री  Gennady Ivanovich Padalka ने अंतरिक्ष में अपना 804 वा दिन बिताकर उनके  इस  रिकॉर्ड   को पीछे छोड़ दिया। अंतरिक्ष यात्री Gennady Ivanovich Padalka का 11  सितम्बर 2015 को पृथ्वी पर वापस  आने का प्लान है। इस नज़र से देखा जाए तो 11 सितम्बर 2015 तक वो अंतरिक्ष में 878 दिन गुजार लेंगे। उन्होने अपना 57 वा जन्मदिन भी 21 जून 2015 को अंतरिक्ष में ही मनाया। 


यदि हम महिलाओ में सबसे लम्बे समय तक अंतरिक्ष में समय बिताने की बात करे तो यह रिकॉर्ड अभी तक अमेरिका की महिला अंतरिक्ष यात्री Peggy Wishton  के नाम है। जिन्होंने अंतरिक्ष में 376 दिन 17 घंटे और 22 मिनट का समय बिताया। दुसरे नंबर पर भारतीय मूल कि अंतरिक्ष महिला सुनीता विलियम्स हैं जिन्होंने 321 दिन 17 घंटे और 15 मिनट का समय अंतरिक्ष में बिताया।



एक अन्य अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री  John Herschel Glenn ने यह साबित कर दिखाया था कि  उम्र इस काम के बाधक नही है ,क्यों की जब 29 अक्टूबर 1998 में उन्हे स्पेस शटल डिस्कवरी मिशन पर भेजा गया था, तब वह 77 वर्ष के थे। सन 1998 से पहले उन्हे सन  1962 में अंतरिक्ष में भेजा गया था। अमेरिका में अंतरिक्ष क्षेत्र में उनका विशेष योगदान रहा है। इस क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान हेतु उनको अब तक कई श्रेष्ठ सम्मानो से नवाजा जा चूका है वर्तमान में उनकी उम्र 94 वर्ष है। 

Keyword: Recod of Gennady Ivanovich Padalka  in Hindi

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