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Thursday, June 25, 2015

माइंड तो बच्चा है जी / How to Guide Our Mind ?

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हमारा माइंड एक बच्चे की तरह है। आप इसे जैसा सिखाओगे ये वैसा ही सिखने लगेगा , जैसे विचारो का भोजन इसे दोगे वैसे ही इसकी सेहत बनने लगेगी। यह उस छोटे बच्चे की तरह है ,जिसका भविष्य उन पर निर्भर करता है , जो उसका पालन पोषण करते हैं ,जो उसका ध्यान रखते हैं।  जिस तरह हम एक छोटे बच्चे को को गाइड करते हैं उसी तरह हमको अपने माइंड को भी सही चीज़ो की तरफ गाइड  करना चाहिए। 

यहाँ ध्यान देने वाली एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर आप खुद कंफ्यूज हो, तो ऐसे में आप  अपने माइंड को सही दिशा में सकारात्मक दिशा में गाइड नही कर पाओगे। ऐसे में आपका माइंड आपके साथ नही चलता और फिर वह नकारात्मक दिशा में चला जाता है।  जब आपके माइंड को यह पता होगा की किस दिशा  में जाना है तो आपके माइंड में उस दिशा में ही सकारात्मक विचार आयेगे।  

अब बात आती है कि  किस दिशा में आपका माइंड जाएगा और क्यों ? तो इसका सीधा सा जवाब है "जैसा खाओगे वैसी सेहत  पाओगे"।  अगर आपको सफलता की तरफ जाना है तो अपने दिमाग को पॉजिटिव विचार देने होगे।    नकारात्मक विचारो के साथ कभी आप अच्छा रिजल्ट नही पा सकते।  

जिस तरह हम अपने बच्चो को बुरी बातो से दूर रखते हैं ताकि उन  पर उसका असर न पड़े। उसी प्रकार हमको अपने माइंड को उन विचारो से , उन लोगो से दूर रखना होगा जो हमारी काबलियत पर शक करते हैं। हमे अपने को उनसे दूर रखना होगा ताकि उनकी बातो का असर हमारे माइंड पर न पड़े। याद रखो "जब माइंड  हो साथ , तो बन जाये  बात"



" Be Inspired, Be Positive and Move Ahead"


5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (26-06-2015) को "यही छटा है जीवन की...पहली बरसात में" {चर्चा अंक - 2018} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    1. इस हेतु आपका बहुत बहुत आभार !

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  2. सीखने का बहुत अच्छा एक तरीका होता है। जिसे हर एक बच्चा और वैज्ञानिक मनोवृत्ति का मनुष्य अपने दैनिक जीवन में इसका उपयोग करता है।

    इस क्रम पर गौर कीजियेगा।
    माना >> जाना >> और फिर समझा >> पुनः माना >>

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  3. इस विषय पर हमने एक लेख भी लिखा है।

    "हम सोचते कैसे हैं ?" www.basicuniverse.org/2015/01/Hum-Sochte-Kaise-Hain.html

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  4. I hope this post is read widely and provokes consciousness. There is too much outward focus. While that is important to understand the external world we live in, equal attention needs to be paid to the internal world we singly occupy!

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