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Friday, May 29, 2015

"भारतीय रेल के कुछ रोचक तथ्य" !!

भारतीय रेल अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती है। अक्सर  ये चर्चा का विषय इसकी कमियो  के कारन  बनती  है।  लेकिन इस पोस्ट में हमारा उदेश्य इसकी खामियों को गिनाना नहीं बल्कि इसके कुछ तथ्यों के बारे में बताने से है   क्या आप भारतीय रेल के इन रोचक तथ्यों के बारे में जानते हो ?  ये तथ्य इस प्रकार हैं : -


  • "नई दिल्ली - भोपाल " शताब्दी एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज चलने वाली रेल है जिसकी एवरेज स्पीड 91 Kmph है जबकि इसकी अधिकतम स्पीड 150 kmph हो जो की दिल्ली से आगरा के बीच रहती है . इसके विपरीत भारत की सबसे धीमे चलने वाली रेल नीलगिरि एक्सप्रेस है जिसकी एवरेज स्पीड 10 Kmph है। 
  • भारत में सबसे लम्बा रेल  रूट विवेक एक्सप्रेस का है जो डिब्रुगढ़ से कन्याकुमारी के बीच चलती है जिसकी लम्बाई 4273 km  है और सबसे छोटा रूट नागपुर से अजनी के बीच 3 km का है !
  • सबसे अधिक लम्बाई का नॉन स्टॉप रन त्रिवेंद्रम - निज़ामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस का है जो की कोटा से वड़ोदरा बीच का रन है जिसकी लम्बाई 528 km है।   इसके   विपरीत हावड़ा अमृतसर एक्सप्रेस के सबसे अधिक स्टॉपेज हैं जिनकी संख्या 115 है। 
  • एक ही लोकेशन पर दो रेलवे स्टेशन श्रीरामपुर और बेलापुर हैं जो की महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में हैं . ये दोनों स्टेशन ट्रैक के विपरीत दिशाओं में हैं अगल बगल। 
  • सबसे अधिक देरी से चलने वाली रेल गुवाहाटी त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस है जो की औसत रूप से 10 से 12 घंटे लेट रहती है।  
  • सबसे अधिक लंबा नाम का स्टेशन "वेंकटनरसिम्हाराजुवारिपेटा" है और सबसे कम लंबाई का नाम के स्टेशन "लब " और "ओड"  हैं जो की क्रमश ओडिशा और गुजरात में हैं। 
  • भारत में सबसे लंबा  रेल टनल "पीर पंजाल "  है।  जिसकी लम्बाई 11.215 km  है जो की जम्मू एंड कश्मीर में है। 
  • रेल में टॉयलेट सुविधा सन 1909 में शुरू हुयी। 
  • सबसे लंबा रेलवे प्लेटफार्म  गोरखपुर में है जिसकी लम्बाई 1.35 km  है। 

नोट : मेरा आर्टिकल  "मोबाइल ऍप्स का बढ़ता क्रेज" पढ़ने  के लिए यहाँ क्लिक करें :  

Friday, May 22, 2015

यह कैसा अंधविश्वास ?


जहा आज के समय में हम एक और मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया में नयी नयी तकनीको को अपनी जीवन शैली में अपनाते हुए जीवन यापन कर रहे हैं।  वही दूसरी और हमारे देश की  जनसंख्या एक बहुत बड़ा हिस्सा अंधविश्वास में  डूबा हुआ है ।   कल ऐसी ही दिल दहला देने वाली एक खबर  मुझे टी.वी. पर देखने को मिली।  जिसमे वाक्यदा उन औरतो से बात की गयी जिन्होंने अंधविस्वास में मग्न होकर अपने 2  साल से 15  साल तक के बच्चो के साथ ये कारनामा किया।  

दरअसल ये घटना उत्तर प्रदेश के जिला रायबरेली के एक गाव  की है जहा  पर इस समय  अधिकतर छोटे बच्चे बीमार पड़  रहे हैं।  खबर  के अनुसार इन बच्चो को उल्टी ,दस्त, बुखार जैसी बीमारिया हो रही है। अब आप ही बताये की आखिर इन बीमारी का क्या कारन हो सकता है ? हो सकता है आपका जवाब हो की गर्मी का मौसम है तो सही से खाने पीने का ध्यान या शरीर का सही ध्यान  न रखने के कारन  इस वजह से ये बीमारी हो रही हो। लेकिन इस गाव की औरतो का मानना है की उनके गाव में इन दिनों  एक ऐसे राक्षस   का साया मंडरा रहा है जो छोटे छोटे बच्चो को बीमार कर रहा है।  इस राक्षस के साये से अपने  बच्चो को बचाने के लिए गाव की औरतो  ने अपने बच्चो के हाथ की सबसे छोटी ऊँगली के  आगे के हिस्स्से को  आग से जला  दिया है।  ऐसा करने से उनके बच्चो पर राक्षस का साया नही पड़ेगा उपरोक्त खबर का सम्पूर्ण विवरण का इंडिया न्यूज़ चैनेल  पर में वीडियो के माध्यम से लाइव दिखाया  गया। 

 समझ में नही आता कि  आखिर क्यों ऐसी नौबत आती है। गाव हो या शहर आज के समय में हर जगह की जनता समझदार हो चुकी है फिर भी ऐसी घटनाएं क्यों सुनने में आती हैं।आने वाली पीढ़ी की सोच पर , उसके भविष्य पर घर परिवार के माहौल का काफी  असर पड़ता है।  अगर इन लोगो ने अभी भी अंधविश्वास में डूबकर  ऐसी घटनाओ को जारी रखा तो ऐसा करके ये अपनी आने वाली पीढ़ी को मानसिक, आर्थिक और सामर्थिक रूप से  कमजोर बनाने की ही तैयारी कर रहे हैं। 

नोट : "क्लाउड कंप्यूटिंग " पर मेरा   लेख पढ़ने के लिए  निचे  दिए गए लिंक पर क्लिक करे। 



Wednesday, May 20, 2015

तो यह है एलियन का साइज (Aliens are the Size of Bears)

 जैसे ही हम एलियन का नाम सुनते हैं ,हमारे दिमाग में एक अजीब तस्वीर बनने   लगती है।  टी.वी. या इंटरनेट  पर देखा  हुआ  एलियन का   कोई चित्र हमारे दिमाग में दौड़ने लगता  है और हम एका एक एलियन की  रोचक दुनिया में खो जाते है।  जिस चीज़  को हमने वास्तव में नही देखा क्या आप उसके बारे में कुछ सही सही अनुमान लगा सकते हैं ? शयद नही। पर जब हम  कभी कभी ऐसी अजीब  और गरीब रिसर्च  के बार में पढ़ने  को मिलता है तो हम सोच में पड  जाते हैं। अब ऐसी ही एक रिसर्च "University of Barcelon " के साइंटिस्ट  "Fergus Simpson " ने एलियन के बारे में की है।  उनका कहना है कि अगर एलियन वास्तव में इस बिरह्मांड  में हैं तो  एलियन का साइज भालू के जितना हैं और उनका वजन लगभग 300  किलो ग्राम है।  Fergus Simpson एक कॉस्मोलॉजिस्ट हैं  और " University of Barcelon " के "इंस्टिट्यूट ऑफ़ कॉस्मो साइंस" में  कार्य  करते हैं।  उनके अनुसार इस बिरहमांड में जो रहने योग्य परिग्रह हैं उन  पर करीब 50  मिलियन  एलियन हो सकते हैं। 
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सिम्पसन जी कि इस रिसर्च का आधार , गणित कि प्रमुख थियोराम "Bayes Theorem  " है  जो की गणित की  शाखा  " Bayesian Statistics " का एक भाग है।  सिम्पसन जी  ने एक रिसर्च  के दौरान यह निष्कर्ष निकाला  कि धरती पर पाये  पजीवो  संख्या और  साइज में  विशेष संबंध होता है।  जिन जीवो  का साइज बहुत छोटा होता है  उनकी   संख्या मुख्यत : अधिक है। 

Note : To read more about this research you can click on the following link.


Tuesday, May 5, 2015

इंजीनियर की सिगरेट और चाय !


ये पंकजवा यार  ई चाय और सिगरेट का एक साथ पिने का का कनेक्शन है बे ? और मजे कि बात देखत रहे आज कल के ये इंजीनियरिंग करने वाले छोकरे जब चाय पिने आवत है चच्चू की शॉप पर ,तो पहले एक घुट चाय का और फिर एक कश सिगरेट, फिर घुट चाय का और एक कश सिगरेट  का लगाते हैं ससुरे। ऐसा लागत है  कि जैसे सिगरेट पिए बिना इन लोगन कि इंजीनियरिंग पूरी होगी ही नहीं।  इंजीनियरिंग  करने के लिए सिगरेट पीना जरूरी है का बे ? अबे हम भी शुरू करे का बे ई सब ? शायद हमको भी तनिक फायदा मिल जाई।  सिगरेट और चाय पिने  की तो ऐसे 100  % अटेंडेंस लगाने आते हैं जैसे ई अटेंडेंस से ही इनको नम्बर मिलित रहे ।  पूरा पूरा ध्यान रखते हैं कि कही ई में बैक ना आ जाई।    कॉलेज में क्लास में 65 % अटेंडेंस भी नही होती हैं इन लोगन कि वहा  तो बस मौज मस्ती के लिए जाए रहत ई लोग। 

ऐसे ही कुछ शब्द एक दिन मैं अपने मित्र से कह रहा था चच्चू कि शॉप पर।  दोस्तों दक्षिण भारत का तो मुझे पता नही पर उतरी भारत में उत्तर प्रदेश , हरयाणा , नयी दिल्ली , उत्तराखंड एवं मध्य भारत में मध्य प्रदेश के भोपाल में मैं ने यह खूब  देखा है यह।  आज के समय में यह एक फैशन सा चल गया है इंजीनियरिंग  करने वाले अधिकतर छात्रों में सिगरेट पिने की  ऐसी लत लग चुकी है कि मानो इंजीनियरिंग करने के लिए ये सबसे जरूरी चीज़ है।  इसको ये अपना करम और धरम  मानकर पूरी श्रद्धा के साथ इसे निभाते हैं।  चाय वालो कि दूकान  पर इन छात्रों के एक हाथ  में चाय का कप तो दुसरे हाथ में सिगरेट होती है, दोनों का एक साथ आनंद उठाते हैं।  मैं अक्सर जब चच्चू कि शॉप पर चाय पिने जाता हु तो ऐसा ही नजारा देखने को मिलता है। प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ने  वाले अधिकतर छात्र बस फर्स्ट ईयर  और सेकंड ईयर में क्लास में अपनी अटेंडेंस 75  % से अधिक  रखते हैं। थर्ड  ईयर में आते ही ऐसी हवा लगती है इन लोगो को कि क्लास में बंक लगाना शुरू 60  % तक अटेंडेंस भी नही ला पाते और अगर कॉलेज जाते भी हैं तो क्लास में कम , कैंटीन में जयदा नजर आते हैं।


ई सब उल्टा पुल्टा क्यों रहा है ? मुझसे रहा नही गया और एक दिन मैंने सोचा कुछ दिन तक  हर दिन एक नए छात्र से इसके बारे में  पूछुंगा।  जब मैंने  अलग अलग छात्रों से पुछा तो अलग अलग जवाब मुझे मिले।  कुछ जवाब जो मिले वो थे एक ने कहा  सर हम सिगरेट पिने से खुद को रेलक्स फील करते हैं।  एक ने कहा सर सच बताऊ तो ये मुझे भी पसंद नही पर मैं  अपनी फ़्रस्ट्रेशन दूर करने लिए पिता हु। एक ने कहा  सर दिल से सिगरेट पीना पसंद नही करता और अकेले कभी नही पिता  पर साथ के सभी दोस्त पीते हैं तो उनका साथ देने के लिए पी लेता हूँ।  एक ने कहा सर ये हमारे लाइफ स्टैंडर्ड हमारे स्टैट्स का हिस्सा है।  एक लड़के ने तो ऐसा जवाब दिया कि फिर मेरी किसी से पूछने कि हिम्मत ही नही हुयी उसने कहा मैं पीता हूँ आपको क्या मतलब ? मैं ने उसे सॉरी कहा और बापस आ गया 

तो कूल मिलकर यह सीन है हमारे इंजीनियरिंग के अधिकतर छात्रों का। आज भी जब कुछ जान पहचान के छात्रों को चाय और सिगरेट एक साथ पीते देखता हु तो मन ही मन में बुदबुदाता हु "लगे रहो बेटा   लगे रहो" तुम नही मानने वाले।  सिगरेट का के कश  का धुंआ जब ऊपर कि और उड़ाते  हैं तो इन इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए  मुझे देवानंद साहब पर फिल्माया हुआ  एक गीत याद आने लगता है "हर फ़िक्र को धुएं में उड़ता चला गया , मैं इंजीनियरिंग का साथ निभाता  चला गया"।  

नोट : धूम्रपान करना स्वास्थय के लिए हानिकारक है।  धूम्रपान करने से कर्क रोग होता है। 

छोटे बच्चो की आँख में पनपता कैंसर पर मेरे लेख पढ़ने  के लिए निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे  -


     

Sunday, May 3, 2015

असर तेरे इश्क़ का !



हवाओ में आज फिर उस खुसबू को ढूंढ़ता हूँ !
फिजाओ में आज फिर उस रंगत को ढूंढ़ता हूँ !!
खिलते थे कभी यहाँ प्यार के जो फूल अक्सर ! 
आज फिर उन  फूलो की बहार ढूंढ़ता हूँ !!




घटते हुए पशु पक्षियों की खुशहाली ढूंढ़ता हु !
बहती हुयी नदी की साफ़ धारा  को ढूंढ़ता हु !!
क्यों हमने अपने इन दोस्तों से आज दुश्मनी कर ली !
घर के आँगन में चिड़ियों की चहचाहट ढूंढ़ता हु !!


बढ़ते समय के साथ साथ इंसान कितना बदल गया है , पैसे से इश्क़ का  कुछ  ऐसा असर हुआ की आज तकनीकी  खिलौनों   से ही फुर्सत नहीं , असली दोस्तों से कट्टी करते जा रहे हैं !

नोट : "भारतीय मौसम विज्ञान विभाग " पर मेरा आर्टिकल  पढ़ने  के लिए नचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे

'भारत मौसम विज्ञान विभाग' का मौसमी सफर !

Friday, May 1, 2015

नहीं मुझे स्वीकार तुम्हारी ये करनी !

मुझे केंद्र  सरकार के कामकाज से कोई ऐसी शिकायत नहीं है।  कुछ कार्य  जरूर प्रसंशा करने योग्य हैं  । किन्तु मैं किसी भी हाल में नए भूमि अधिग्रहण अध्यादेश का समर्थन नही करुगा।  ये सब एक छल है और कुछ नहीं।

आज मजदूर दिवस के अवसर पर गरीब मजदूर एवं  किसान भाईयो की आवाज़  बनती ये कविता  कुछ कहती है सरकार से। यह कहती है प्लीज हमसे हमारी रही सही सम्पत्ति हमारी जमीन जिससे हम अपना पेट पालते हैं खेत में म्हणत मजदूरी करके उसको हमसे मत छीनो . सत्ता के नशे में चूर होकर ऐसा मत करो इनके साथ घमंड का क्या है रावण का हो या आपका आखिर टूटता  जरूर है   ऐसा मत करो इनके  साथ मत करो  ! भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को लेकर  ये व्यंग्य कविता -

 इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है! 
किसान भाईओ हम सब पर क्यों कर रही  अत्याचार है !!

बड़े घरानो से पैसे लेकर 6  हज़ार करोड़ रूपये  चुनाव में लगाये हैं !
इन अहसानो की खातिर नया भूमि अधिग्रहण अध्यदेश लाये हैं !!

ये भी खुश हैं वो भी खुश हैं , बस हम पर पड़  रही  मार है !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है !!

रोजगार और विकास का झांसा देकर जमीन हड़पने आये हैं !
करोड़ो अरबो की जमीन, हज़ारो  लाखो में हमसे लेने आये हैं  !!

क्यों उद्योगपतियों के हाथ की ये कठपुतली बनने को तैयार है !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है !!

चलो मान लिया की ये  उद्योग लगाकर विकास करना चाहते है !
 भूमाफिया ,नेताओ की फर्जी जमीन का अधिग्रहण क्यों नही कराते हैं !!
उनको कुछ नहीं कहते , बस हमारा कर रहे बंटाधार हैं !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है !!

किसान की आत्महत्या देखकर भी क्यों शर्म इन्हे नही आती है !
अपनी धून में मस्त होकर बस नया अध्यादेश लाना चाहती  है !! 

हम करे तो आखिर क्या करे ? इनकी वजह से हम मरने को लाचार हैं !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार  है !!

आज एक गजेन्द्र मरा  है, कल और  भी बहुत से मर जाएंगे !
पर ये निर्दयी निष्ठुर नेता फिर भी बाज ना आएंगे !!

हमारे पेट पर लात  मारकर, ये बढ़ा रहीं उनका व्यापार है !
इस सरकार की इस करनी को बहुत बहुत धिक्कार है  !!


आज किसान हर तरफ से सदमे में है। एक तो मौसम की मार से बर्बाद हुयी किसान की फसल और ऊपर से ये सरकार इस कदर सितम ढा रही है की बेचारा किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। लेकिन देखा जाए तो ये आत्महत्या नही बल्कि किसानो का कत्ले आम है। क्या औधोगिक  विकास के लिए किसानो का कत्लेआम जरूरी है ?  सरकार अपनी जिद पर अड़ी रह कर क्यों एक नया जलियावाला बाग़  कांड  खड़ा करना  चाहती है ?

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