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Monday, April 6, 2015

कलम के सिपाही "स्व. श्री बाबू सिंह चौहान "

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यूँ तो उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर का अपना एक गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। राजा दुष्यंत एवं भरत से लेकर  महाभारत काल के काका विदुर जी का बिजनौर से धरती से गहरा रिश्ता  रहा है।  खैर तब का तो हमने देखा नही लेकिन सन  1900  से 2000  के बीच बिजनौर की धरती पर कुछ ऐसी हस्तियों ने जन्म लिया जिनका आज देश भर में नाम हैं। जैसे की फिल्म डायरेक्टर एवं प्रोडूसर स्वर्गीय प्रकाश मेहरा , फ्लिम डायरेक्टर एवं म्यूजिक कंपोजर विशाल भारद्वाज ,फिल्म एक्टर सुशांत सिंह चौधरी , शायर निश्तर खानकाही आदि। ऐसी ही एक सख्सियत थी स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी मिशनरी पत्रकारिता की वजह से देश में अपनी एक विशेष पहचान बनायी। आज स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान जी की  पुण्य तिथि है।  उनको नमन करते हुए इस लेख के माध्यम से श्रधासुमन अर्पित कर रहा हूँ। इस लेख में स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान जी के जन्म  एवं प्रारंभिक  जीवन , राजनितिक जीवन , पत्रकारिक जीवन , साहित्यिक जीवन एवं विदेश यात्राओ आदि के बारे में बतया गया है। 



जन्म एवं प्रारंभिक जीवन  
स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान  जी का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के बिजनौर जिले के अफजलगढ़ क्षेत्र  के गाव महावतपुर  में  फागुन पूर्णिमा को  सन 1930  में हुआ था। उनके पिता जी स्वर्गीय श्री बसंत  सिंह जी गाव के ही प्राइमरी स्कूल में हैड मास्टर  थे। उन्होने शिक्षा में आचार्य ( स्नाकोत्तर के सामान ) उपाधि हासिल की। सन  1943 में उन्हे धामपुर में "भारत  छोड़ो आंदोलन " में भाग लेने के कारण  गिरफ्तार  होना पड़ा और जिसके कारण उन्हे "आर.इस.एम इंटर कॉलेज धामपुर " से निष्काषित कर दिया गया। 

 राजनितिक जीवन   

स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान  स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के  समर्पित कार्यकर्ता रहे।  सन 1948 में स्व, जयप्रकाश नारायण ,डा.राममनोहर लोहिया और आचार्य नरेन्द्र देव जी के साथ कांग्रेस छोड कर सोशलिस्ट पार्टी से जुड़ गए।  जयप्रकाश नारायण और डा. राममनोहर लोहिया ने भी चौहान साहब के पैतृक गाव में  में आकर उनके कार्यों की सराहना की। सन् 1953 में चौहान साहब  सोशलिस्ट पार्टी छोड कर कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए।  उन्होने स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनान्दोलनों तथा मजदूर आन्दोलनों में अनेक जेल यात्राएं। सन 1966 में सभी राजनीतिक दलों से संबंध विच्छेद कर पूर्णकालिक रूप से पत्रकारिता जगत  में प्रवेश किया।  

 पत्रकारिक जीवन 

स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान एक बहुत ही निर्भीक एवं साहसी पत्रकार थे।  उनकी  निर्भीक  लेखनी का प्रभाव उस  समय में बिजनौर प्रशासन  एवं तत्कालीन  उत्तर प्रदेश  सरकार पर भी पड़ा। उन्होने  26 जनवरी, 1950 को ‘चिंगारी’ हिन्दी साप्ताहिक का संपादन एवं प्रकाशन करके पत्रकारिता जगत में प्रवेश किया।  ‘मांझी’,‘अनुशीलन’,‘अणुव्रत ’(कलकत्ता),‘नवरंग आदि पत्रों एवं पत्रिकाओं का सफलतापूर्वक संपादन किया। ‘जनजीव।न’ हिन्दीदैनिक भटिंडा(पंजाब)का संपादन किया।  बिजनौर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रथम दैनिक समाचार पत्र ‘बिजनौर टाइम्म’ का 14 नवम्बर, 1963 से प्रकाशन एवं संपादन शुरू किया।  बिजनौर जनपद के प्रथम साध्ंय दैनिक ‘चिंगारी’ का 25 अक्टूबर ,85 से प्रकाशन शुरू किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रथम उर्दू दैनिक ‘रोजाना खबर जदीद’का 22अगस्त 91 से प्रकाशनं भी किया।  अपने पत्रकारिक जीवन के दौरान स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान उ.प्र. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन (पंजीकृत) के उपाध्यक्ष भी रहे और  आल इंडिया स्माल एवं मीडिया न्यूज पेपर्स फैडरेशन के उपाध्यक्ष भी रहे। 

 साहित्यिक जीवन 

स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान न केवल  एक वरिष्ठ पत्रकार अपितु एक साहित्यकार भी थे। उनकी साहित्यक यात्रा के कुछ प्रमुख अंश  इस प्रकार हैं -
  • ‘प्रकृति पुत्र ’(जैन मुनि के जीवन पर प्रकाश ),‘निराले संत’,‘धर्म दर्शन’,‘जैन धर्म के चार सिद्धांत ’ आदि लिखित एवं प्रकाशित जैन धर्म साहित्य।
  • ‘मैलीचुनरी,उजला मन’,‘हवा के पंख’, ‘पनघट की नीलामी’ उपन्यास।
  • श्रमवीरों के देश में’ (यात्रा संस्मरण)के लेखन पर 1975 में सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला।
  • दर्पण झूठ बोलता हैं’(ललित निबंध संग्रह)जिसके संबंध में ब्लिट्ज तथा अन्य समाचार पत्रो एवं समालोचकों ने लेखक को दूसरे हजारी प्रसाद द्विवेदी की, संज्ञा दी है, का प्रकाशन ।
  • ‘उफनती दुनिया के सामने’, 'पीठ पर नीलगगन’ , ‘मकडजाल में आदमी’ ललित निबंधों के सग्रंह । 
  • निधन तक दस हजार से अधिक अग्रलेख भिन्न विषयों पर लिखे। 

 विदेश यात्राएं 
अपने पत्रकारिक जीवन के दौरान स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान  जी ने अनेक विदेश यात्रएं भी की जिनमे कुछ इस प्रकार हैं -
  • विश्व शांति एवं अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव के लिए रूस, चैकोस्लोवा किया , बुल्गारिया तथा कोपिनहेगिन में आयोजित अंतराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में शामिल ।
  •  शांति एवं सद्भाव के प्रतिनिधि के रूप में सोवियत संघ एव बुल्गारिया की यात्राएं ।
  •  सोवोयत संघा की चार बार चैकोस्लाविया की एक बार, बुल्गारिया की एक बार , बेल्जियम की एक बार तथा अन्य देशों की यात्राएं।
  • 1 998 में चीन की यात्रा। 

अपनी लेखनी के माध्यम से स्वर्गीय बाबू  सिंह चौहान आजीवन धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, समाजवाद, विश्व शांति, बंधुत्व और सांप्रदायिक सद्भाव एवं एकता के लिए प्रतिबद्ध रहे।  6 अप्रैल सन 1999  को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। कलम के इस सिपाही ने बिजनौर जिले की जनता के दिलो में अपनी एक विशेष जग बना ली थी। चौहान  साहब ने कलम के माध्यम से आम जनता के हितो   के लिए हमेशा संघर्ष किया यही कारण  है की आज भी बिजनौर की जनता  उनको याद करती है। 

उनके द्वारा शुरू किये गए दो समाचार पत्र दैनिक "बिजनौर टाइम्स" और सांध्य दैनिक "चिंगारी" आज भी क्रमश : उनके दोनों पुत्रो श्री चंद्रमणि रघुवंशी एवं श्री सूर्यमणि रघुवंशी जी दवरा सफलतापूर्वक प्रकशित किये जा रहे हैं।  वर्तमान समय में  समाचार पत्रो की लेखनी में भी बदलाव आया है।  जो लेखनी चौहान साहब जी के समय में अखवारों में देखने को मिलती थी आज के समय में अखवारों में वह लेखनी नजर नही आती ,शायद ये कहना गलत नही होगा की वर्तमान समय में हमारे देश में पत्रकारिता अपने लक्ष्य से भटक गयी है। कही न कही आज के समय  में पत्रकारिता राजनेताओ के हाथ की कठपुतली बनती नज़र आती  है 

अंत में कलम के  सिपाही स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान जी  को  मेरा  शत शत नमन। आप हमेशा पत्रकारिता जगत के  लिए एक प्रेरणाश्रोत बने रहेंगे। 

3 comments:

  1. कलम के सिपाही "स्व. श्री बाबू सिंह चौहान " जी के व्यक्तिव -कृतित्व पर बहुत बढ़िया विस्तृत आलेख प्रस्तुति हेतु आभार!

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  2. मनोज मम्मी आपके Google प्लस और आपके ब्लॉग डायनामिक दोनों की सदस्य बन गयी हैं. कृपया मम्मी के Google प्लस तथा उनके ब्लॉग wikismarter . com के सदस्य बनें।

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  3. बहुत बढ़िया लेख.....नमन

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