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Monday, April 13, 2015

चीन का स्पेशल "स्पेस सोलर इलेक्ट्रिसिटी प्लांट " !

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अरे ओ छोटू !

हा चाचा !


कछु सुनत रहो की नाय ?


का चाचा ? का भयो ?


अरे हम सुनत रहे कि चीन अंतरिक्ष में सोलर पावर प्लांट बनाने की तैयारी कर रहा है। 


चाचा अगर चीन अपने इस मिशन में सफल हो पाया तो बाकी आर्थिक रूप से मजबूत कुछ देशो के तोते उड़ जायेगे और वो  भी चीन की इस सफलता से सबक  लेने की कोशिश  करेंगे। 


हाँ शायद ऐसा ही होगा। 

चीन एक ऐसा देश है जिसने हर क्षेत्र में अपनी काबलियत के बल पर अपनी धाक जमा रखी  है। इलेक्ट्रिक उत्पाद के मामले में तो सबसे आगे है। चीन हमेशा कुछ न कुछ नया करके बाकी देशो को पीछे छोड़कर उनकी चिंताए बड़ा देता है। ऐसा ही एक कदम चीन उठाने जा रहा है।  दरअसल चीन अपने यहाँ बिजली संकट से निपटने के लिए धरती से लगभग 36000 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में एक  सोलर इलेक्ट्रिसिटी प्लांट बनाने जा रहा है। 


जिसकी मदद से ग्रीन हाउस गैसो में कमी लेकर ऊर्जा संकट से निपटा जा सकता है।  चीन की इस योजना का आधार विज्ञान कथा लेखक आइजैक असिमोव की  पहली विज्ञान कथा है जिसको उन्होने सं में लिखा था  असिमोव की कथा 'रीजन' प्रकाशित हुई थी । इसमें यह बताया गया था कि एक अंतरिक्ष संयंत्र सूक्ष्म तरंगों के जरिए सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का ट्रांसमिशन करता है। चीन के जाने माने  संस्थान "Chinese Academy of Science " और  "International Academy of Astronauts  सदस्य  वांग शी के अनुसार  असिमोव की कथा  अपने आप में  एक वैज्ञानिक आधार संजोये हुए है। अगर चीन का यह मिशन सफल हो जाता है तो इस पलनत के दवरा उतपन ऊर्जा को  को माइक्रोवेव तथा लेजर में परिवर्तित कर इसका ट्रांसमिशन पृथ्वी पर एक संग्राहक (रिसेप्टर) तक किया जाएगा।

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अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुसंधान में 50 से अधिक साल बिता चुके 93 वर्षीय वांग इस संयंत्र के सबसे बड़े पैरोकार हैं। उनके  अनुसार  इस सोलर प्लांट में इसके सौर पैनलों का कुल एरिया  पांच से छह वर्ग किलोमीटर होगा इसका एरिया विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक चौक "पेइचिंग   के तियानमेनन चौक" के मुकाबले 12 गुना बड़ा होगा और धरती पर लोग इसे रात में  एक  सितारे की तरह देख पाएंगे।  

वांग जी  के अनुसार अंतरिक्ष में बने सोलर पावर प्लांट की मदद से धरती पर बने सोलर पावर प्लांट की तुलना में दस गुनी ज्यादा बिजली उत्तपन्न की जा सकती है. इस सोलर पावर प्लांट का वजन 10 ,000  टन होगा , कुछ राकेट केवल 100  टन का भार ही अंतरिक्ष म ले जा सकते हैं।  तो इस पावर प्लांट को अंतरिक्ष में भेजने क लिए एक बहुत भारी भरकम राकेट की भी जरूरत होगी।   "China Academy of Space Technology " के  वाईस प्रेसिडेंट ली.मिंग. जी  के अनुसार चीन २०२० के करीब यह पावर प्लांट बना पायेगा।


7 comments:

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    1. शुक्रिया ऋषभ जी

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  2. Nice post. :)
    Please do check mine and comment:
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    1. अनुराग जी मैं उनको ऐड कर चूका हू अपने सर्किल में और Adsene का भी सोचा नहीं मैं ने

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  4. भाई, खूबसूरत अंदाज़ में अपने बात कही। भारत के भाग्य को भी दिशा दें...

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  5. सभी पाठकगणो का शुक्रिया !

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