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Thursday, April 2, 2015

सरकार भू .अधि .अध्या .को छोड़ भूमाफियो पर लगाए लगाम।

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"इसलिए  गलत है नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश !"

समझ नही आता आखिर केंद्र सरकार नया भूमि अधिग्रहण  अध्यादेश लाकर क्यों किसानो के पीछे हाथ धोकर  पड़ी है। कमजोर को हर कोई दबा लेता है वही काम यह सरकार कर रही है। जब तक देश के कोने कोने में मजबूर होकर  दो तीन हज़ार किसान आत्महत्या नहीं कर लगे। तब तक इनके कानो पर जू नहीं रेगेंगी। अभी तो मीडिया में बोल रहे हैं कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश किसानो के हित में है। जिससे ये अध्यादेश किसी तरह से पारित हो जाए और फिर सरकार अपनी मन मर्जी करे। लोकसभा चुनाव अभी भूले नहीं हैं हम। 

मैं यहाँ किसी पार्टी का एजेंट बनकर यह लेख नही लिख रहा हूँ और न ही मैं बी.जी.पी. विरोधी हूँ।  लेकिन मैं हर उस चीज़ का विरोध करता हूँ जो गलत है  चाहे वो किसी भी पार्टी की सरकार क्यों न करे।  चाहे वो बुलेट ट्रेन  का लाना हो या फिर नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश। अगर आप बुद्धिजीवी लोग हैं। समझदार लोग हैं तो आप पहले पूरा लेख पढ़े, फिर  खुद सोचे ,फिर खुद को राजनीतक पार्टी से दूर रखकर  जवाब दे कि मैं कहाँ गलत कह रहा हूँ। मैं यहाँ आपके सामने दो  पॉइंट रख रहा हूँ जो इस विचार को सपोर्ट करते हैं की किसान से उसकी जमीन नही छीनी या ली जानी चाहिए।



 (1 ) किसान के पास उसकी जमीन के अलावा क्या है भला ? जब उसके पास अपने बेटे की इंजीनियरिंग के पढ़ाई के लिए पैसे नहीं होते , जब उसके पास अपनी बेटी कि शादी के लिए पैसे नहीं होते , जब उस किसान के पास अपने बूढ़े माँ बाप कि इलाज़ के इलाज़ के पैसे नही होते , या जब उसके किसी सदस्य पर कोई भारी आपदा आती है तो ऐसे संकट के समय में किसान कि यही जमीन काम आती है , न तो सरकार के मुआइंदे इनकी खबर लेने या पैसे देने आते हैं और न ही किसान के रिस्तेदार। संकट कि घडी में अपनी इस जमीन पर ही किसान बैंक से ऋण लेता है या फिर इस जमीन को बेचकर उस संकट का सामना करता हैं। अब अगर कुछ ऐसे किसान जिनके पास जमीन बहुत कम  है अगर वो इस भूमि अधिग्रहण  अध्यादेश के शिकार हो जाते हैं तो कहा जायेगे  ये लोग ? अधिग्रहण के बाद सरकार से  इनको जो थोड़ा बहुत मुआवजा मिलेगा तो वो जमीन की असली  कीमत का 10  प्रतिशत भी नही होगा  और बात पैसो की नही। बात है किसान के घर परिवार के भविष्य की।  पैसा जयदा दिन घर में नही रुकता चाहे वो कितना भी हो। लेकिन अगर किसान की पास उसकी जमीन सुरक्षित है तो उसके घर परिवार का  भविष्य सुरक्षित रहता है।  उसको एक उम्मीद रहती है की अगर उसके बच्चे कुछ नही भी बन पाये तो कम  से कम  भूखे तो नही मरेंगे। अगर उसके पास जमीन होगी तो वो महंगाई से लड़ सकता हैं क्यों की वो सुखी रोटी खाकर भी अपना पेट भर लेगा और रोटी की लिए आनाज उसको उसकी जमीन ही देगी।


अगर आप किसान से उसकी जमीन लेकर उसे पैसे देकर कोई दूसरा काम शुरू करने की लिए कहते भी हैं तो वह नही कर पायेगा। जब व्यापार में बड़े बड़े माहिर व्यापारी  लोगो को घाटा हो जाता है भला एक अनपढ़ या कम  पढ़ा  लिखा किसान कौन सा व्यापार करेगा।  मजबूर होकर या तो वो मजदूरी करेगा या फिर सड़क पर रेहड़ी लगाकर कोई छोटा मोटा काम शुरू करेगा। लेकिन क्या दिल से चाहते हैं की आप जिस  सुंदर खुशहाल  भारत की बात करते हैं उसमे मजदुर , रेहड़ी लगाकर अपने घर का खर्च चलाने वाले लोगो की संख्या बढ़े क्या आप चाहते हैं कि आपके देश में मजबूर और बेबस जिंदगी जीने वालो की संख्या बढ़े।     

"नया भुमि अधग्रहण अध्यादेश लाने के स्थान पर  यह करे !" 

अब मैं आता हु दुसरे पॉइंट पर दूसरा पॉइंट जरा  ध्यान  से पढियेगा अगर ये बात आपकी समझ में आ गयी या सरकार ने इस बात पर अमल कर लिया तो नया भूमि अध्यादेश लाये बिना ही सरकार का काम हो जाएगा।

(2 ) सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाने कि लिए तर्क देती है की उसे नए नए मेडिकल कॉलेज खोलने  हैं।  नए नए संस्थाए खोलने कि लिए जमीन की जरूरत है। दोस्तों अगर सच कहूँ सरकार ने अपनी आँखों  पर पट्टी बाँध रखी है या फिर वो जानबूझकर कोई कदम नही उठाना चाहती।  आप जानते हैं की हमारे देश में आज भूमाफियां ने कितनी फर्जी जमीन कब्ज़ा रखी है ? अगर आप पूरे भारत में इस बात की जांच करेंगे तो आप पायेगे की आज कि समय में भूमाफियो दवरा कब्जाई गयी फर्जी जमीन सरकार को भविष्य में ये नई नई संस्थाए  खोलने कि लिए जरूरत पड़ने वाली जमीन से कहीं जयदा है।  अगर सरकार सही मायनो में देश की उन्नति चाहती है या सरकार सही मायनो में हिम्मत  वाली सरकार है तो सरकार को चाहिये की इन भूमाफियो द्वारा कबाजायी गयी फर्जी जमीन का अधिग्रहण करे ? क्या सरकार ऐसा करेगी ? है हिम्मत ? बिलकुल नहीं करेगी ।. क्यों असलियत यह है की भूमाफियो को ये फर्जी जमीन कब्जाने में कुछ सरकारी मुआइंदे ही मदद करते हैं। उनका सपोर्ट मिलता है तभी तो इन भूमाफियाओ की हरकते इतनी बढ़ती जा रही हैं। 

आप मेरे दुसरे पॉइंट को गलत मत समझना जिस को गलत लग रहा हो तो उनको मैं बता दूँ की मेरे जिला बिजनौर में कुछ ऐसी जमीन पर  जिस पर की नदी बहती है या जो नदी क्षेत्र में आती है उस पर भूमाफियो ने सरकारी मुआएंदो  की मिली भगत से कॉलोनियां बनाने कि लिए प्लॉटिंग कर दी है क्या ये सही है ? ये तो एक उदारहण दिया है और भी जमीने हैं । आप  एक दिन के लिए मंत्रालय से आइये तो सही ,देखें , जांच करें आपको पता लग जाएगा  कहा कहा कितनी फर्जी जमीन भूमाफियो ने कब्ज़ा रखी है ? इस शुभ  काम के लिए आगे नहीं आयेगे आप।   मेरे जिले का ये हाल है तो मैं समझता हूँ की भारत के अन्य जिलो में भी यही हालत होगी और दोस्तों मजे की बात तो यह है की ये भूमाफिया क्षेत्र कि बाहूबली , विधायक  और सांसद जैसे ही  लोग  हैं। और उसे भी मजे की बात ये है की जब आपको पता लगेगा की इन भूमाफियाओं में से जो राजनीतक क्षेत्र से हैं उनमे से अधिकतर  किस पार्टी से हैं आपके होश उड़ जायेगे। 

तो भैया कुलमिलाकर बात यह है की अगर सरकार को जमीन चाहिए तो सही यही होगा की इन भूमाफियो पर लगाम लगाए इनके दवरा कब्जाई गयी फर्जी जमीनो का अधिग्रहण करे  उसी से बहुत जमीन मिल जायेगी सरकार को, कोई नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाने का कष्ट न करे।  पर सरकार ऐसा करने वाली नहीं है।   जो  काम करने चाहिए वो तो करेंगे नहीं और बात करते हैं कि  भूमि अधिग्रहण अध्यदेश किसानो कि हित  में है । 


आखिर क्यों यह सरकार इतनी निर्दयी और निष्ठुर हो गयी है जो किसानो के पेट पर लात मारने को आमदा है ? क्या सरकार को इन किसानो के आसूं नहीं दिखाई देते ? जब  हर साल बुंदेलखंड में किसानो की  फसल किसी आपदा का शिकार हो जाती है तो वह किसान आत्महत्या कर लेते  हैं। आपको किसानो दवरा की गयी आत्महत्यों की खबर पढ़ने को मिलती रहती होगी। अब जरा सोचिये जब किसान फसल न हो पाने , सुख पड़  जाने या बाढ़  में फसल बर्बाद हो जाने जैसी घटनाओ से ही आत्महत्या कर लेता है। तो जब उसकी जमीन ही छीन  ली जायेगी तो क्या वह आत्महत्या नही करेगा ? क्या उसकी मानसिक और पारिवारिक हालत सही होगी इससे ? आखिर क्यों नही इस निर्दयी सरकार को इनके आसूं दिखाए देते हैं ? क्यों  नही इनके कानो किसानो की आत्महत्याएं सुनाई देते ? आखिर क्यों  नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लेकर सरकार किसानो की हत्या कर भारत में मौत का तांडव करना चाहती है ? अगर सरकार को जमीन चाहिए तो भूमाफियो की जमीं अधिग्रहण करे उन बड़े बड़े व्यापारियों  की जमीन अधिग्रहण करे जिनके फ़ार्महाऊस खाली पड़े हैं और वह नंबर दो के काम होते हैं। लेकिन सरकार ऐसा नही करेगी इतनी हिम्मत ही नही है।


Keywords: Land Acquisition, Farmer Suicide, Land Bill, Farmer Poverty  

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