Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Saturday, April 25, 2015

जैविक खेती भाग 4 !


जैविक खेती से जुड़े पिछले तीन अंको में जैविक खेती के परिचय , फसलो की सुरक्षा हेतु जैविक विधिया एवं जैविक खेती में गौमूत्र के उपयोग के बारे में जाना।  जैविक खेती के इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए आज हम बात करेंगे  जैविक  खेती में नीम के उपयोग की।


                                                  " जैविक खेती में नीम का महत्त्व "

नीम एक गुणकारी वृक्ष मन जाता है। इसकी पत्तियों से और निमौली से लेकर , इसकी लकड़ी तक में अनेक गुण  छिपे हुए हैं ,जो मानव शरीर के लिए लाभदायक हैं।  नीम उत्पादकों का प्रयोग जैविक खेती में कीट पतंगों की रोकथाम के लिए भी किया जाता  है।  नीम से बने उत्पाद फसलो  पर आने वाले जीव कीटो और सूत्रकृमीओ के लिए प्रतिकर्षी का कार्य  करते हैं जो इनकी भोजन प्रक्रिया में बाधा  उतपन्न करके इनपर नियंत्रण पाने में सहायक हैं।  नीम उत्पादों के मौजूदगी के कारन ये कीट फसलो  पर आक्रमण नही कर पाते। 



कैसे करे खेती में  नीम का  उपयोग : जैविक खेती में नीम का उपयोग हम कुछ इस प्रकार से कर सकते हैं। 

(1 ) नीम की 10 से 12 किलोग्राम पत्तियों को 200 लीटर पानी में भिगो कर रख दे जब पानी का रंग हरा और पीला  सा होने लगे तो इसको निचोड़कर छान ले अब आप इस घोल का छड़काव फसलो  पर करे इतना घोल एक एकड़ एरिया में इली की रोकथाम  के लिए काफी है। 

(2 ) नीम की कली  एक अच्छे दीमक नियंत्रण का काम करती है . अगर बुआई से पहले खेत में 2 से 3 कुंतल पीसी हुयी नीम की कली  मिला दी जाए तो इससे दीमक एवं कीट की रोकथाम के साथ साथ  इसमें पाये जाने वाले फास्फोरस पोटाश जैसे तत्व पौधों के लिए लाभदायक हैं। 

(3 ) 2 किलोग्राम नीम के निबौली को 10 लीटर पानी में डालकर 4 से 7 दिन तक रखे इसे छानकर 200 लीटर पानी में मिलकर फसलो  पर छिड़काव करे इससे कीटो के रोकथाम में मदद मिलती है। 

ऊपर बतायी गयी विधियों दवरा जिन प्रकार के कीटो पर नियंत्रण पाया जा सकता है उनमे आलू का बिटल,टिड्ढा ,छिलका खाने वाला कीट, फसलो पर आने वाले टिड्डे , घुन  एवं सफ़ेद मक्खी आदि प्रमुख हैं। 

Monday, April 20, 2015

"बिरूबाला राभा" तुम्हे सलाम !


अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत रो कि नाय !

का चाचा ?का भयो?

अरे हम सुनत रहे कि  हाल ही में आसाम यूनिवर्सिटी ने "बिरुबाला राभा" नाम की 5  वी  कक्षा पास महिला को डॉक्टरेट की उपाधि दी है। 

चाचा इस पाचवी कक्षा पास महिला ने डॉक्टरेट उपाधि रखने वाले  लोगो से भी कही जयदा बहादुरी का काम किया है। अगर आज देश की हर महिला "बिरुबाला राभा" बन जाए तो किस झाड़ फूक करने वाले ठोंगी बाबा में या किसी और में कहा इतना दम है, जो हमारे देश में  अंधविश्वास , जादू टोन का खौफ  फैलाकर अपना मतलब सीधा कर सके। 

हाँ शायद ऐसा ही होगा !

आज इस पोस्ट में मैं जिनका परिचय आप लोगो से कराने जा रहा हूँ, वैसे से तो आपने हाल फिलहाल अखबारों में या पहले भी कहि इनके बारे में सुन रखा होगा।  लेकिन फिर भी इस महान औरते के जज्बे को सलाम करते हुए मैं आपसे इनका परिचय करना जरूरी समझता हूँ। क्यों की आज के समय में ऐसी महिलाओ की समाज को बहुत जरूरत है ताकि देश को अंधविश्वास से  मुक्ति मिल सके।  


इनका नाम है "बिरूबाला राभा".  इनकी उम्र 61 वर्ष  है और इन्होने केवल 5  वी कक्षा तक  शिक्षा ग्रहण की है।    लेकिन ये आज के समय में उन पढ़ी  लिखी महिलाओ और पुरुषो से कहीं श्रेष्ठ हैं जो कला ,विज्ञान , डॉक्टरी , इंजीनियरिंग में उच्च  शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी अंधविश्वास में यकीन रखते  हैं। हाल ही में गुवाहाटी यूनिवर्सिटी  ने  इन्हे डॉक्टरेट के उपाधि से नवाजा है। 

आसाम के ठाकुरकाला गाँव  की यह आदिवासी महिला 20  साल से जादू टोन और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लड़ रही हैं और अब तक 45  से ज्यादा लोगो की जाने बचा चुकी हैं।  जिसमे चार पुरुष हैं। जादू टोन और अंधविस्वास के खिलाफ उनकी इस लड़ाई का सफर इतना आसान नही रहा। उनको इन २० सालो में कई बार जान से मार देने की धमकी मिली तो कई बार उन पर जानलेवा हमला भी हुआ। उनको गाव छोड़ने को भी कहा गया लेकिन फिर भी इस महिला ने हार नही मानी। 

इस अंधविश्वास और जादू टोने के प्रति लड़ने की उन्होने जब से ठानी जब सन 1991  में उनके बड़े बेटे धर्मवीर को कोई मानसिक बीमारी हुयी और गॉव के एक झाड़ फूंक करने वाले ने उस पर भूतो का साया  बताया ओर कहा की उसकी तीन दिन में मौत हो जायेगी और उसे गाव से बहार फेकने का फरमान सुनाया।  लेकिन यह महिला अपने बेटे के लिए पूरे गाव से लड़ी और उनका बेटा आज भी जिन्दा है और शिलांग के मानसिक अस्पताल में है। 


उन्होने अपने घर और गाव से शुरुवात करते हुए अपने आस पास के गाव तक जादू टोने और अंधविस्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम किया। 2006  में "असोम महिला समता सोसाइटी" ने उन्हे अपने साथ जोड़ा। अब इन्होने न केवल अंद्विश्वास बल्कि रेप और दहेज़ जैसी घटनाओ के विरुद्ध भी लड़ना शुरू कर दिया। इन्होने एक ऐसी महिला की जान बचाई जिसको गाव वाले पेड़ से उल्टा लटकर पीट रहे थे क्यों की किसी कमवख्त मनहूस ने उस बेचारी महिला  पर भूत का साया बताया था।  बिरूबाला राभा जी के अनुसार उनके यहाँ गाव के कुछ रुतबे वाले लोग गरीबो जमीन हड़पने के लिए जादू टोने का नाटक करते हैं। उस गरीब को जादू टोने का शिकार बताकर उसे गाव से बहार फिकवा दिया जाता था और उसकी जमीन हड़प ली जाती थी। ऐसी सी एक घटना तब घाटी जब एक औरत  ने एक युवक के साथ शारीरिक सम्बन्ध न बनाने पर उस औरत को भूत प्रेत का साया बताकर उसे मरवा दिया गया।  

2008  में देश के नामी रिलायंस इंडस्ट्री इन्हे "रियल हीरो" के रूप  में सम्मानित कर चुकी है।  सन  2005  में इनका  नाम नोबेल पुरूस्कार के लिए भी भेजा गया था। आज के समय में न केवल ग्रामीण क्षेत्रो में बल्कि शहरी इलाको में भी ऐसी महिलाओ की शख्त जरूरत है। 

Saturday, April 18, 2015

तो यह है कुत्ते और इंसान के बीच दोस्ती का राज


अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत रो कि नाय !

का चाचा ?का भयो?

अरे हम सुनत रहे कि कुत्ते और इंसान के बीच  दोस्ती का  राज उनकी आखे  है !

चाचा इसका मतलब  इंसान को कुत्तो को  अपना दोस्त बनाने  के लिए उनके  साथ भी आंखमिचौली खेलनी होगी ताकि दोनों गुन गुना सके "तुझे  देखा तो ये जाना सनम कि तू कितना बफादार है ......!"


हाँ शायद ऐसा ही होगा !

कुत्ते को एक बफादार जानवर माना जाता है।  वर्तमान समय में हर घर में कुत्ते का पाये जाना को आश्चर्य वाली बात नही है। शहर में तो खासकर आज हर घर में एक कुत्ता मिलता है और कुछ अमीर  लोग तो कुत्ते की परवरिश अपने बेटे जैसे करते हैं। आखिर करे भी  भी क्यों नही आखिर कुत्ता हमारे घरो की रखवाली जो करता है। यह कहना गलत होगा की कुत्ता केवल हमारे घर की रखवाली करता है बल्कि वो समय समय पर अपनी हरकतों के द्वारा हमारे  सुख दुःख में शामिल होने ,हमारे प्रति अपने भाव व्यक्त करने जैसा हमको महसूस करता है। 
आखिर ऐसा क्या है कुत्ते और इंसान के बीच जो की ये दोनों अलग अलग प्रकार के प्राणी होते हुए भी दोस्त बन जाते हैं। 


दरअसल इस बात का राज कुत्ते और इंसान की आँखों में छिपा है।  वैज्ञानिको की नयी खोज के अनुसार जब कुत्ते और इंसान दोनों एक दुसरे की आँखों में कुछ देर तक देखते हैं तो इस क्रिया से दोनों के अंदर प्यार के हार्मोन एवं "ऑक्सीटोसिन" लेवल में बढ़ोतरी होती है। आप को शायद ये लाइन पड़कर हसी आये लेकिन क्या करे शोधकर्ताओं  का यही कहना है साहब।  जापान के "Azabu University " के "बायोटेक्नोलॉजी एवं पशु विज्ञान विभाग " के सदस्य " Takefumi Kikusui" ने इस रिसर्च को अपने साथियो के साथ अंजाम दिया है। 


ऑक्सीटोसिन लेवल में बढ़ोतरी की वजह से एक दुसरे पर विश्वास  और भावात्मक सम्बन्धो को मजबूती मिलती है। इस तरह की एक रिसर्च पहले माँ और उसके छोटे बच्चे के बीच प्यार को लेकर भी हो चुकी है जिसमे यह पाया गया था कि माँ और छोटे बच्चे के बीच ये प्यार एक दोस्सरे कि आँखों में देखने के कारन ही होता है और बढ़ता है।  इसी क्रिया के कारण कुत्ता अन्य जानवरो जैसे भेडियो और चिम्पांजी से अलग है इनसे कही अधिक कार्यकुशल है।  कुत्ता मानव के सामाजिक वयवहार को समझता है और अपनी संवेदना भी व्यक्त  करता है। 

इस शोध के शोधकर्ताओं ने  इस शोध को काफी कुत्ते एवं उनके मालिको के बीच व्यवहार के आधार  पर अधयन्न किया है।  उनकी 30 मिनट तक हरी क्रिया को जैसे एक दूसरे को चुना , एक दुसरे को लगातार देखना  आदि और अपने अध्यन में ये पाया कि इस क्रिया के बाद कुत्ते और उनके मालिको के शरीर में  ऑक्सीटोसिन लेवल जो बढ़ोतरी मिली। 

ये आँखे भी अजब चीज है ,कब दोस्त बनवा देती हैं और कब प्यार करवा बैठती हैं कुछ पता ही नही चलता। 

Thursday, April 16, 2015

रॉफेल : भारत को मिला बृह्माश्त्र !

अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत रहो की नाय ?

का चाचा ? का भयो ?

अरे हम सुनत रहे की भारत की फ़्रांस से रॉफेल लड़ाकू विमान खरीदने के डील पूरी हो गयी है !

चाचा , भारत  को रॉफेल मिलने की खबर सुनकर दुश्मन देशो की तो सुलग गयी होगी। अब वो भारत पर हवाई हमला करने से पहले सौ बार सोचेगे !

हाँ शायद ऐसा ही होगा !


अभी हाल ही में कुछ दिन पहले "रॉफेल" शब्द काफी चर्चा में में रहा। दरअसल रॉफेल एक लड़ाकू विमान है जो कुछ ख़ास विशेषताओ को संजोये हुए है बस ये समझ लीजिये  की जिस देश को ये लड़ाकू विमान मिल गया समझो उसको ब्रह्माश्त्र  मिल गया हो। फिर उसके दुश्मन देश उस पर हवाई हमला करने से पहले सौ बार सोचेगे। फ़्रांस देश की भाषा में रॉफेल शब्द का मतलब तूफ़ान है। 

रॉफेल लड़ाकू विमान को फ़्रांस ने बनाया है और भारत अपनी हवाई सैन्य  क्षमता को अधिक मजबूत बनाने के लिए फ़्रांस से इसको खरीदना चाहता है . इसलिए भारत  ने फ़्रांस के साथ एक महत्वपूर्ण डील की है जिसके तहत   भारत की फ्रांस से 128 अत्याधुनिक लड़कू विमान खरीदेगा । जिनमे से 36 विमान जल्द ही भारत को मिलने वाले हैं, जबकि 108 विमानों का निर्माण भारत में ही कराया जाएगा।

 भारत को रॉफेल मिलते ही चीन और पाकिस्तान जैसे देश हवाई हमलों के मामलों में भारत से पंगा नही लेंगे।  क्यों की  रॉफेल 550000 फुट ऊंचाई से भी दुश्मन के ठिकानों पर निशाना लगाकर उन पर बम गिरा सकता है। यह विमान कई तरह की मिशालों समेत परमाणु बम गिराने में भी समर्थ है ।

आपको ये जानकार ख़ुशी होगी कि  अभी सिर्फ दो ही देशों के पास है ये रॉफेल विमान है।  भारत दुनिया का तीसरा ऎसा देश है जो राफेल विमान की ताकत रखने वाला देश बनने जा रहा है। यह लड़ाकू विमान फ्रांस की वायुसेना, जलसेना और थल सेना के अलावा मिश्र की सेना के पास है। भारत के रॉफेल के लिए बढ़ते  हुए  जर्मनी, इटली, स्पेन, यूके, ऑस्ट्रिया और सऊदी अरब भी अब इसे खरीदने की तैयारी कर  है।

 राफेल लड़ाकू विमान को फ्रांस की "डासाल्ट एविएशन" नामक  कंपनी ने बनाया है। रॉफेल 35.4 फुट चौड़ाई में  है एवं   यह 1750 केटीएस की गति से उड़ता है।  रॉफेल लड़ाकू विमान 450 मीटर के एरिया में लैंडिंग करने में सक्षम है  एवं  1000 फुट प्रति सेकेंड की रफ्तार सीधे उड़ सकता है एवं 55000 फुट की ऊंचाई से बम गिराने में सक्षम है. वर्तमान समय में रॉफेल  लड़ाकू विमान अत्याधुनिक फाइटर प्लेन यूरोफाइटर टायफून, सुपर हॉर्नेट, एफ-16 ब्लॉक60, मिग-35, साब ग्रिपिन की टक्कर का है।

भारत के पास रॉफेल लड़ाकू विमान  होना हमारे लिए एक गौरव की बात है।  हम आशा करते हैं की भारत अपनी शक्ति को और मजबूत करता रहेगा।  




Monday, April 13, 2015

चीन का स्पेशल "स्पेस सोलर इलेक्ट्रिसिटी प्लांट " !

अरे ओ छोटू !

हा चाचा !


कछु सुनत रहो की नाय ?


का चाचा ? का भयो ?


अरे हम सुनत रहे कि चीन अंतरिक्ष में सोलर पावर प्लांट बनाने की तैयारी कर रहा है। 


चाचा अगर चीन अपने इस मिशन में सफल हो पाया तो बाकी आर्थिक रूप से मजबूत कुछ देशो के तोते उड़ जायेगे और वो  भी चीन की इस सफलता से सबक  लेने की कोशिश  करेंगे। 


हाँ शायद ऐसा ही होगा। 

चीन एक ऐसा देश है जिसने हर क्षेत्र में अपनी काबलियत के बल पर अपनी धाक जमा रखी  है। इलेक्ट्रिक उत्पाद के मामले में तो सबसे आगे है। चीन हमेशा कुछ न कुछ नया करके बाकी देशो को पीछे छोड़कर उनकी चिंताए बड़ा देता है। ऐसा ही एक कदम चीन उठाने जा रहा है।  दरअसल चीन अपने यहाँ बिजली संकट से निपटने के लिए धरती से लगभग 36000 किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में एक  सोलर इलेक्ट्रिसिटी प्लांट बनाने जा रहा है। 


जिसकी मदद से ग्रीन हाउस गैसो में कमी लेकर ऊर्जा संकट से निपटा जा सकता है।  चीन की इस योजना का आधार विज्ञान कथा लेखक आइजैक असिमोव की  पहली विज्ञान कथा है जिसको उन्होने सं में लिखा था  असिमोव की कथा 'रीजन' प्रकाशित हुई थी । इसमें यह बताया गया था कि एक अंतरिक्ष संयंत्र सूक्ष्म तरंगों के जरिए सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का ट्रांसमिशन करता है। चीन के जाने माने  संस्थान "Chinese Academy of Science " और  "International Academy of Astronauts  सदस्य  वांग शी के अनुसार  असिमोव की कथा  अपने आप में  एक वैज्ञानिक आधार संजोये हुए है। अगर चीन का यह मिशन सफल हो जाता है तो इस पलनत के दवरा उतपन ऊर्जा को  को माइक्रोवेव तथा लेजर में परिवर्तित कर इसका ट्रांसमिशन पृथ्वी पर एक संग्राहक (रिसेप्टर) तक किया जाएगा।

Detail of Space Solar electricity, Plant by China in hindi,China Space Solar Electricity Plant, features of Space solar electricity plant by china in hindi,Space electricity power plant by China,Chinese Academy of Science in Hindi ,International Academy of Astronauts in hindi, China academy of space technology in hindi,

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी अनुसंधान में 50 से अधिक साल बिता चुके 93 वर्षीय वांग इस संयंत्र के सबसे बड़े पैरोकार हैं। उनके  अनुसार  इस सोलर प्लांट में इसके सौर पैनलों का कुल एरिया  पांच से छह वर्ग किलोमीटर होगा इसका एरिया विश्व के सबसे बड़े सार्वजनिक चौक "पेइचिंग   के तियानमेनन चौक" के मुकाबले 12 गुना बड़ा होगा और धरती पर लोग इसे रात में  एक  सितारे की तरह देख पाएंगे।  

वांग जी  के अनुसार अंतरिक्ष में बने सोलर पावर प्लांट की मदद से धरती पर बने सोलर पावर प्लांट की तुलना में दस गुनी ज्यादा बिजली उत्तपन्न की जा सकती है. इस सोलर पावर प्लांट का वजन 10 ,000  टन होगा , कुछ राकेट केवल 100  टन का भार ही अंतरिक्ष म ले जा सकते हैं।  तो इस पावर प्लांट को अंतरिक्ष में भेजने क लिए एक बहुत भारी भरकम राकेट की भी जरूरत होगी।   "China Academy of Space Technology " के  वाईस प्रेसिडेंट ली.मिंग. जी  के अनुसार चीन २०२० के करीब यह पावर प्लांट बना पायेगा।


Thursday, April 9, 2015

"सावधानीपूर्वक करे मच्छर दूर भगाने वाले पदार्थो का प्रयोग "

                                          
                                


जैसा की हम सब जानते हैं की मच्छरों  से डेंगू और मलेरिया  रोग होने  का खतरा होता है। इसलिए हमको ऐसी चीज़े चाहिए होती हैं जो मच्छरों से हमारी सुरक्षा कर सके।  मचछरो से सुरक्षा के लिए मार्किट में अनेक प्रकार के क्रीम एवं कोइल आती हैं।  लेकिन अगर आप किसी क्रीम और कोइल का उपयोग कर रहे हैं तो उसके चयन में थोड़ी सावधानी वरते  क्यों की इन पदार्थो में जहरीले तत्वों की संख्या बहुत अधिक होती है।  इनके गलत प्रयोग से त्वचा के एलर्जी रोग  और  जलन होने की शिकायत होती है।

डॉक्टर का कहना है की कोइल से कैंसरकारी धुंआ निकलता है।  अगर गलती से  बच्चे  इन पदार्थो को निगल जाते हैं तो खतरा और भी बढ़  जाता है। मच्छरों भगाने वाले पदार्थो में "DEET" और "N.N, Diethyl Benzamide" जैसे  हानिकारक केमिकल्स होते हैं।जो मच्छर भगाने में तो असरदार होते हैं लेकिन इनसे त्वचा को होने वाली एलर्जी रोग होने खतरे काफी अधिक होते हैं।  ऐसे पदार्थो को न खीरदे  जिनमे " DEET" कैमिकल की मात्रा 30 % से जयदा हो। 



                                      
                         
इनके कभी कभी अधिक उपयोग से शारीरिक तंत्रिकाओं में विकार होने की सम्भानए भी काफी बढ़ जाती हैं . लोक नायक हॉस्पिटल के डॉक्टर कबीर सरदाना के अनुसार  जो व्यक्ति इन क्रीम को घाव या झख्म वाली जगह लगा लेते हैं उनमे शारीरिक एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है। इन पदार्थो के उपयोग  से बचने के लिए कुछ  कम्पनियो ने मच्छर भगाने के लिए हर्बल क्रीम बाज़ार में उतारे हैं लकिन लोगो का कहना है की ये कम  असरदार हैं। 

क्या करे  और क्या न करे ?
  • अगर आप मच्छर भगाने के लिए क्रीम प्रयोग कर रहे हैं तो क्रीम को खुली त्वचा पर लगाए मतलब की जिस हिस्से पर आपने क्रीम लगाई हैं उसके ऊपर कपडा न पहने वरना  कैमीकल तत्व कपडे में चले जाते   हैं औरफिर इस कपडे को बिना धोये पहने से एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है खासकर गर्मिओ में।
  • क्रीम को कभी भी घाव या जख्म वाले हिस्से पर न लगाए। 
  • आँखों और चेहरे पर न लगाए। 
  • अगर आपको त्वचा में एलर्जी की शिकायत  है तो इन पदार्थो का उपयोग न करे। 
  • मच्छरदानी  का उपयोग करे। 


गर्मी के मौसम में जिन शहरो में बिजली की समस्या नही होती तो चूँकि वहा पंखो और कूलर चलते हैं तो इन पदार्थो के उपयोग के बिना भी काम चल्या जा सकता हैं क्यों की पंखे और कूलर की हवा में मच्छरों का अहसास नही होता वहा आप सोते समय मच्छरदानी का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन समस्या उन  जगहों पर जयदा हैं जहा गर्मी के मौसम में बिजली नही आती और शाम होते ही मच्छरों का भिनभिनाना  शुरू हो जाता है।  ऐसे में अब अगर ये लोग कमरे में मच्छरदानी का उपयोग करते हैं या कोइल या क्रीम का उपयोग करते हैं और बिजली नही है तो गर्मी की समस्या और साथ ही साथ कोइल  के धुएं से होने वाली बेचैनी।  मजबूरन इनको छत  पर जाकर खुले में सोना पड़ता हैं। 

Keywords : Mosquito , Repellents, 

Monday, April 6, 2015

कलम के सिपाही "स्व. श्री बाबू सिंह चौहान "


यूँ तो उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर का अपना एक गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। राजा दुष्यंत एवं भरत से लेकर  महाभारत काल के काका विदुर जी का बिजनौर से धरती से गहरा रिश्ता  रहा है।  खैर तब का तो हमने देखा नही लेकिन सन  1900  से 2000  के बीच बिजनौर की धरती पर कुछ ऐसी हस्तियों ने जन्म लिया जिनका आज देश भर में नाम हैं। जैसे की फिल्म डायरेक्टर एवं प्रोडूसर स्वर्गीय प्रकाश मेहरा , फ्लिम डायरेक्टर एवं म्यूजिक कंपोजर विशाल भारद्वाज ,फिल्म एक्टर सुशांत सिंह चौधरी , शायर निश्तर खानकाही आदि। ऐसी ही एक सख्सियत थी स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान जिन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी मिशनरी पत्रकारिता की वजह से देश में अपनी एक विशेष पहचान बनायी। आज स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान जी की  पुण्य तिथि है।  उनको नमन करते हुए इस लेख के माध्यम से श्रधासुमन अर्पित कर रहा हूँ। इस लेख में स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान जी के जन्म  एवं प्रारंभिक  जीवन , राजनितिक जीवन , पत्रकारिक जीवन , साहित्यिक जीवन एवं विदेश यात्राओ आदि के बारे में बतया गया है। 



जन्म एवं प्रारंभिक जीवन  
स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान  जी का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के बिजनौर जिले के अफजलगढ़ क्षेत्र  के गाव महावतपुर  में  फागुन पूर्णिमा को  सन 1930  में हुआ था। उनके पिता जी स्वर्गीय श्री बसंत  सिंह जी गाव के ही प्राइमरी स्कूल में हैड मास्टर  थे। उन्होने शिक्षा में आचार्य ( स्नाकोत्तर के सामान ) उपाधि हासिल की। सन  1943 में उन्हे धामपुर में "भारत  छोड़ो आंदोलन " में भाग लेने के कारण  गिरफ्तार  होना पड़ा और जिसके कारण उन्हे "आर.इस.एम इंटर कॉलेज धामपुर " से निष्काषित कर दिया गया। 

 राजनितिक जीवन   

स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान  स्वतंत्रता से पूर्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के  समर्पित कार्यकर्ता रहे।  सन 1948 में स्व, जयप्रकाश नारायण ,डा.राममनोहर लोहिया और आचार्य नरेन्द्र देव जी के साथ कांग्रेस छोड कर सोशलिस्ट पार्टी से जुड़ गए।  जयप्रकाश नारायण और डा. राममनोहर लोहिया ने भी चौहान साहब के पैतृक गाव में  में आकर उनके कार्यों की सराहना की। सन् 1953 में चौहान साहब  सोशलिस्ट पार्टी छोड कर कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए।  उन्होने स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनान्दोलनों तथा मजदूर आन्दोलनों में अनेक जेल यात्राएं। सन 1966 में सभी राजनीतिक दलों से संबंध विच्छेद कर पूर्णकालिक रूप से पत्रकारिता जगत  में प्रवेश किया।  

 पत्रकारिक जीवन 

स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान एक बहुत ही निर्भीक एवं साहसी पत्रकार थे।  उनकी  निर्भीक  लेखनी का प्रभाव उस  समय में बिजनौर प्रशासन  एवं तत्कालीन  उत्तर प्रदेश  सरकार पर भी पड़ा। उन्होने  26 जनवरी, 1950 को ‘चिंगारी’ हिन्दी साप्ताहिक का संपादन एवं प्रकाशन करके पत्रकारिता जगत में प्रवेश किया।  ‘मांझी’,‘अनुशीलन’,‘अणुव्रत ’(कलकत्ता),‘नवरंग आदि पत्रों एवं पत्रिकाओं का सफलतापूर्वक संपादन किया। ‘जनजीव।न’ हिन्दीदैनिक भटिंडा(पंजाब)का संपादन किया।  बिजनौर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रथम दैनिक समाचार पत्र ‘बिजनौर टाइम्म’ का 14 नवम्बर, 1963 से प्रकाशन एवं संपादन शुरू किया।  बिजनौर जनपद के प्रथम साध्ंय दैनिक ‘चिंगारी’ का 25 अक्टूबर ,85 से प्रकाशन शुरू किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रथम उर्दू दैनिक ‘रोजाना खबर जदीद’का 22अगस्त 91 से प्रकाशनं भी किया।  अपने पत्रकारिक जीवन के दौरान स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान उ.प्र. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन (पंजीकृत) के उपाध्यक्ष भी रहे और  आल इंडिया स्माल एवं मीडिया न्यूज पेपर्स फैडरेशन के उपाध्यक्ष भी रहे। 

 साहित्यिक जीवन 

स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान न केवल  एक वरिष्ठ पत्रकार अपितु एक साहित्यकार भी थे। उनकी साहित्यक यात्रा के कुछ प्रमुख अंश  इस प्रकार हैं -
  • ‘प्रकृति पुत्र ’(जैन मुनि के जीवन पर प्रकाश ),‘निराले संत’,‘धर्म दर्शन’,‘जैन धर्म के चार सिद्धांत ’ आदि लिखित एवं प्रकाशित जैन धर्म साहित्य।
  • ‘मैलीचुनरी,उजला मन’,‘हवा के पंख’, ‘पनघट की नीलामी’ उपन्यास।
  • श्रमवीरों के देश में’ (यात्रा संस्मरण)के लेखन पर 1975 में सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला।
  • दर्पण झूठ बोलता हैं’(ललित निबंध संग्रह)जिसके संबंध में ब्लिट्ज तथा अन्य समाचार पत्रो एवं समालोचकों ने लेखक को दूसरे हजारी प्रसाद द्विवेदी की, संज्ञा दी है, का प्रकाशन ।
  • ‘उफनती दुनिया के सामने’, 'पीठ पर नीलगगन’ , ‘मकडजाल में आदमी’ ललित निबंधों के सग्रंह । 
  • निधन तक दस हजार से अधिक अग्रलेख भिन्न विषयों पर लिखे। 

 विदेश यात्राएं 
अपने पत्रकारिक जीवन के दौरान स्वर्गीय बाबू सिंह चौहान  जी ने अनेक विदेश यात्रएं भी की जिनमे कुछ इस प्रकार हैं -
  • विश्व शांति एवं अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव के लिए रूस, चैकोस्लोवा किया , बुल्गारिया तथा कोपिनहेगिन में आयोजित अंतराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में शामिल ।
  •  शांति एवं सद्भाव के प्रतिनिधि के रूप में सोवियत संघ एव बुल्गारिया की यात्राएं ।
  •  सोवोयत संघा की चार बार चैकोस्लाविया की एक बार, बुल्गारिया की एक बार , बेल्जियम की एक बार तथा अन्य देशों की यात्राएं।
  • 1 998 में चीन की यात्रा। 

अपनी लेखनी के माध्यम से स्वर्गीय बाबू  सिंह चौहान आजीवन धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र, समाजवाद, विश्व शांति, बंधुत्व और सांप्रदायिक सद्भाव एवं एकता के लिए प्रतिबद्ध रहे।  6 अप्रैल सन 1999  को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। कलम के इस सिपाही ने बिजनौर जिले की जनता के दिलो में अपनी एक विशेष जग बना ली थी। चौहान  साहब ने कलम के माध्यम से आम जनता के हितो   के लिए हमेशा संघर्ष किया यही कारण  है की आज भी बिजनौर की जनता  उनको याद करती है। 

उनके द्वारा शुरू किये गए दो समाचार पत्र दैनिक "बिजनौर टाइम्स" और सांध्य दैनिक "चिंगारी" आज भी क्रमश : उनके दोनों पुत्रो श्री चंद्रमणि रघुवंशी एवं श्री सूर्यमणि रघुवंशी जी दवरा सफलतापूर्वक प्रकशित किये जा रहे हैं।  वर्तमान समय में  समाचार पत्रो की लेखनी में भी बदलाव आया है।  जो लेखनी चौहान साहब जी के समय में अखवारों में देखने को मिलती थी आज के समय में अखवारों में वह लेखनी नजर नही आती ,शायद ये कहना गलत नही होगा की वर्तमान समय में हमारे देश में पत्रकारिता अपने लक्ष्य से भटक गयी है। कही न कही आज के समय  में पत्रकारिता राजनेताओ के हाथ की कठपुतली बनती नज़र आती  है 

अंत में कलम के  सिपाही स्वर्गीय श्री बाबू सिंह चौहान जी  को  मेरा  शत शत नमन। आप हमेशा पत्रकारिता जगत के  लिए एक प्रेरणाश्रोत बने रहेंगे। 

Sunday, April 5, 2015

जैविक खेती : भाग 3



        "जैविक खेती में गौमूत्र का उपयोग "

एक विशेष प्रयोग में पाया गया है कि गौमूत्र में 44  प्रकार के तत्व पाये जाते हैं।  जिनमे फसलो और वनस्पतियो पर आने वाले कीट पतंगो  फफूंद और विषाणु रोगो पर नियंत्रण करने कि क्षमता होती है। गौमूत्र में गंधक भी पायी जाती है जो कीटनाशक का कार्य करती है। इसके अतिरिक्त इसमें नाइट्रोजन , फास्फोरस , लोहा , चुना , आदि तत्व भी पाये जाते हैं जो वनस्पति को निरोग बनाते है। 



                    

 जैविक खेती में गौमूत्र का उपयोग फसल पर छिड़काव करने के लिए किया जाता है।  जैविक खेती में फसल पर गौमूत्र का छिड़काव निम्न तरह से घोल बनाकर किया जा सकता है  -

  •  10 लीटर गौमूत्र को एक ताम्बे के वर्तन में 1  किलो नीम कि पतियों के साथ 15  दिन तक गलाने के बाद उबालकर आधी मात्र  बना  ले।  इस उबाल को छानकर इसको पानी में मिलकर फसल पर छिड़काव करे ध्यान रहे कि इस घोल में पानी कि मात्र 95 % और इसकी 5 % से जयदा न हो। 
  • गौमूत्र का सुबह सुबह फसल पर छिड़काव करने से प्रथम अवस्था में ही कीड़ो पर नियंत्रण पाया जा सकता है।  5 लीटर गौमूत्र में 1  लीटर निर्गुण्डी का रस  और एक लीटर हींग का पानी ,इन तीनो को 8  लीटर पानी के साथ मिलकर फसल पर छिड़काव करें।  यह छिड़काव फसल पर लगने वाले कीड़ो के लिए अचूक दवा है। 

Thursday, April 2, 2015

सरकार भू .अधि .अध्या .को छोड़ भूमाफियो पर लगाए लगाम।

"इसलिए  गलत है नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश !"

समझ नही आता आखिर केंद्र सरकार नया भूमि अधिग्रहण  अध्यादेश लाकर क्यों किसानो के पीछे हाथ धोकर  पड़ी है। कमजोर को हर कोई दबा लेता है वही काम यह सरकार कर रही है। जब तक देश के कोने कोने में मजबूर होकर  दो तीन हज़ार किसान आत्महत्या नहीं कर लगे। तब तक इनके कानो पर जू नहीं रेगेंगी। अभी तो मीडिया में बोल रहे हैं कि भूमि अधिग्रहण अध्यादेश किसानो के हित में है। जिससे ये अध्यादेश किसी तरह से पारित हो जाए और फिर सरकार अपनी मन मर्जी करे। लोकसभा चुनाव अभी भूले नहीं हैं हम। 

मैं यहाँ किसी पार्टी का एजेंट बनकर यह लेख नही लिख रहा हूँ और न ही मैं बी.जी.पी. विरोधी हूँ।  लेकिन मैं हर उस चीज़ का विरोध करता हूँ जो गलत है  चाहे वो किसी भी पार्टी की सरकार क्यों न करे।  चाहे वो बुलेट ट्रेन  का लाना हो या फिर नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश। अगर आप बुद्धिजीवी लोग हैं। समझदार लोग हैं तो आप पहले पूरा लेख पढ़े, फिर  खुद सोचे ,फिर खुद को राजनीतक पार्टी से दूर रखकर  जवाब दे कि मैं कहाँ गलत कह रहा हूँ। मैं यहाँ आपके सामने दो  पॉइंट रख रहा हूँ जो इस विचार को सपोर्ट करते हैं की किसान से उसकी जमीन नही छीनी या ली जानी चाहिए।



 (1 ) किसान के पास उसकी जमीन के अलावा क्या है भला ? जब उसके पास अपने बेटे की इंजीनियरिंग के पढ़ाई के लिए पैसे नहीं होते , जब उसके पास अपनी बेटी कि शादी के लिए पैसे नहीं होते , जब उस किसान के पास अपने बूढ़े माँ बाप कि इलाज़ के इलाज़ के पैसे नही होते , या जब उसके किसी सदस्य पर कोई भारी आपदा आती है तो ऐसे संकट के समय में किसान कि यही जमीन काम आती है , न तो सरकार के मुआइंदे इनकी खबर लेने या पैसे देने आते हैं और न ही किसान के रिस्तेदार। संकट कि घडी में अपनी इस जमीन पर ही किसान बैंक से ऋण लेता है या फिर इस जमीन को बेचकर उस संकट का सामना करता हैं। अब अगर कुछ ऐसे किसान जिनके पास जमीन बहुत कम  है अगर वो इस भूमि अधिग्रहण  अध्यादेश के शिकार हो जाते हैं तो कहा जायेगे  ये लोग ? अधिग्रहण के बाद सरकार से  इनको जो थोड़ा बहुत मुआवजा मिलेगा तो वो जमीन की असली  कीमत का 10  प्रतिशत भी नही होगा  और बात पैसो की नही। बात है किसान के घर परिवार के भविष्य की।  पैसा जयदा दिन घर में नही रुकता चाहे वो कितना भी हो। लेकिन अगर किसान की पास उसकी जमीन सुरक्षित है तो उसके घर परिवार का  भविष्य सुरक्षित रहता है।  उसको एक उम्मीद रहती है की अगर उसके बच्चे कुछ नही भी बन पाये तो कम  से कम  भूखे तो नही मरेंगे। अगर उसके पास जमीन होगी तो वो महंगाई से लड़ सकता हैं क्यों की वो सुखी रोटी खाकर भी अपना पेट भर लेगा और रोटी की लिए आनाज उसको उसकी जमीन ही देगी।


अगर आप किसान से उसकी जमीन लेकर उसे पैसे देकर कोई दूसरा काम शुरू करने की लिए कहते भी हैं तो वह नही कर पायेगा। जब व्यापार में बड़े बड़े माहिर व्यापारी  लोगो को घाटा हो जाता है भला एक अनपढ़ या कम  पढ़ा  लिखा किसान कौन सा व्यापार करेगा।  मजबूर होकर या तो वो मजदूरी करेगा या फिर सड़क पर रेहड़ी लगाकर कोई छोटा मोटा काम शुरू करेगा। लेकिन क्या दिल से चाहते हैं की आप जिस  सुंदर खुशहाल  भारत की बात करते हैं उसमे मजदुर , रेहड़ी लगाकर अपने घर का खर्च चलाने वाले लोगो की संख्या बढ़े क्या आप चाहते हैं कि आपके देश में मजबूर और बेबस जिंदगी जीने वालो की संख्या बढ़े।     

"नया भुमि अधग्रहण अध्यादेश लाने के स्थान पर  यह करे !" 

अब मैं आता हु दुसरे पॉइंट पर दूसरा पॉइंट जरा  ध्यान  से पढियेगा अगर ये बात आपकी समझ में आ गयी या सरकार ने इस बात पर अमल कर लिया तो नया भूमि अध्यादेश लाये बिना ही सरकार का काम हो जाएगा।

(2 ) सरकार भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाने कि लिए तर्क देती है की उसे नए नए मेडिकल कॉलेज खोलने  हैं।  नए नए संस्थाए खोलने कि लिए जमीन की जरूरत है। दोस्तों अगर सच कहूँ सरकार ने अपनी आँखों  पर पट्टी बाँध रखी है या फिर वो जानबूझकर कोई कदम नही उठाना चाहती।  आप जानते हैं की हमारे देश में आज भूमाफियां ने कितनी फर्जी जमीन कब्ज़ा रखी है ? अगर आप पूरे भारत में इस बात की जांच करेंगे तो आप पायेगे की आज कि समय में भूमाफियो दवरा कब्जाई गयी फर्जी जमीन सरकार को भविष्य में ये नई नई संस्थाए  खोलने कि लिए जरूरत पड़ने वाली जमीन से कहीं जयदा है।  अगर सरकार सही मायनो में देश की उन्नति चाहती है या सरकार सही मायनो में हिम्मत  वाली सरकार है तो सरकार को चाहिये की इन भूमाफियो द्वारा कबाजायी गयी फर्जी जमीन का अधिग्रहण करे ? क्या सरकार ऐसा करेगी ? है हिम्मत ? बिलकुल नहीं करेगी ।. क्यों असलियत यह है की भूमाफियो को ये फर्जी जमीन कब्जाने में कुछ सरकारी मुआइंदे ही मदद करते हैं। उनका सपोर्ट मिलता है तभी तो इन भूमाफियाओ की हरकते इतनी बढ़ती जा रही हैं। 

आप मेरे दुसरे पॉइंट को गलत मत समझना जिस को गलत लग रहा हो तो उनको मैं बता दूँ की मेरे जिला बिजनौर में कुछ ऐसी जमीन पर  जिस पर की नदी बहती है या जो नदी क्षेत्र में आती है उस पर भूमाफियो ने सरकारी मुआएंदो  की मिली भगत से कॉलोनियां बनाने कि लिए प्लॉटिंग कर दी है क्या ये सही है ? ये तो एक उदारहण दिया है और भी जमीने हैं । आप  एक दिन के लिए मंत्रालय से आइये तो सही ,देखें , जांच करें आपको पता लग जाएगा  कहा कहा कितनी फर्जी जमीन भूमाफियो ने कब्ज़ा रखी है ? इस शुभ  काम के लिए आगे नहीं आयेगे आप।   मेरे जिले का ये हाल है तो मैं समझता हूँ की भारत के अन्य जिलो में भी यही हालत होगी और दोस्तों मजे की बात तो यह है की ये भूमाफिया क्षेत्र कि बाहूबली , विधायक  और सांसद जैसे ही  लोग  हैं। और उसे भी मजे की बात ये है की जब आपको पता लगेगा की इन भूमाफियाओं में से जो राजनीतक क्षेत्र से हैं उनमे से अधिकतर  किस पार्टी से हैं आपके होश उड़ जायेगे। 

तो भैया कुलमिलाकर बात यह है की अगर सरकार को जमीन चाहिए तो सही यही होगा की इन भूमाफियो पर लगाम लगाए इनके दवरा कब्जाई गयी फर्जी जमीनो का अधिग्रहण करे  उसी से बहुत जमीन मिल जायेगी सरकार को, कोई नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाने का कष्ट न करे।  पर सरकार ऐसा करने वाली नहीं है।   जो  काम करने चाहिए वो तो करेंगे नहीं और बात करते हैं कि  भूमि अधिग्रहण अध्यदेश किसानो कि हित  में है । 


आखिर क्यों यह सरकार इतनी निर्दयी और निष्ठुर हो गयी है जो किसानो के पेट पर लात मारने को आमदा है ? क्या सरकार को इन किसानो के आसूं नहीं दिखाई देते ? जब  हर साल बुंदेलखंड में किसानो की  फसल किसी आपदा का शिकार हो जाती है तो वह किसान आत्महत्या कर लेते  हैं। आपको किसानो दवरा की गयी आत्महत्यों की खबर पढ़ने को मिलती रहती होगी। अब जरा सोचिये जब किसान फसल न हो पाने , सुख पड़  जाने या बाढ़  में फसल बर्बाद हो जाने जैसी घटनाओ से ही आत्महत्या कर लेता है। तो जब उसकी जमीन ही छीन  ली जायेगी तो क्या वह आत्महत्या नही करेगा ? क्या उसकी मानसिक और पारिवारिक हालत सही होगी इससे ? आखिर क्यों नही इस निर्दयी सरकार को इनके आसूं दिखाए देते हैं ? क्यों  नही इनके कानो किसानो की आत्महत्याएं सुनाई देते ? आखिर क्यों  नया भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लेकर सरकार किसानो की हत्या कर भारत में मौत का तांडव करना चाहती है ? अगर सरकार को जमीन चाहिए तो भूमाफियो की जमीं अधिग्रहण करे उन बड़े बड़े व्यापारियों  की जमीन अधिग्रहण करे जिनके फ़ार्महाऊस खाली पड़े हैं और वह नंबर दो के काम होते हैं। लेकिन सरकार ऐसा नही करेगी इतनी हिम्मत ही नही है।


Keywords: Land Acquisition, Farmer Suicide, Land Bill, Farmer Poverty  

Recent Posts