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Wednesday, February 4, 2015

स्वच्छ भारत मिशन - प्लानिंग कितनी स्वच्छ ?

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दोस्तों  "स्वछ भारत" मिशन की शुरुवात हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर 2014 को की।  तब से लेकर अब तक हमने देखा की प् उद्योगपतियों ने और बड़े से लेकर सभी छोटे नेताओ ने ,सरकारी कर्मचारियों ने भी कुछ दिनों के लिए हाथ में झाड़ू लेकर  सड़क पर सफाई करते हुए अनेको सीन दिए और फोटो खिंचवाए  और काफी सुर्खिया भी बटोरी। वो बात अलग है की अब ये लोग ठन्डे पड़  गए हैं या कहिये की एक बार झाड़ू लगाने में ही थक गए अब और लगाने की हिम्मत नही बची इनमे।   अगर देखा जाए तो स्वछ भारत मिशन पर सरकार की ये पहल काफी सरहानीय है।  देखते हैं इसके 5 मूल बिंदु  बिन्दुओ के बारे में -

(1) 2 अक्टूबर 2014 से लगाकर अगले 5 सालो तक  "स्वछ भारत " मिशन पर भारत सरकार 2 लाख करोड़ रूपये खर्च  करेगी . क्या ये वाक्य पड़कर आपको झटका नही लगता।  मतलब अगर देखा जाए तो स्वछ भारत अभियान के पीछे भारत सरकार का प्रमुख काम भारतीय नागरिको के बीच में इसके प्रति जागरूकता लाना और उन्हे अपने आस पास के क्षेत्र को स्वछ रखने के लिए प्रेरित करना है।  इसमें किसी  मशीन का कोई प्रयोग नही ,न ही सरकार हर नागरिक को झाड़ू बांटेगी न ही इस अभियान के लिए उन्होने कोई अलग से कर्मचारी नियुक्त किये जो की उनकी सैलरी का खर्च शामिल हो . फिर भी सरकार ने इस अभियान के लिए २ लाख करोड़ जैसी भारी भरकम रकम पास की है    खैर जाने दो कोई  वजह रही होगी। 

(2) अगले 5 वर्षो में इस अभियान को देश के 4041 शहरो में सफल बनाना  है। 

(3) इन 2 लाख करोड़ में से , 62000 करोड़ इस पर "Urban Development Ministry " के द्वारा खरच होने हैं और बाकी 1 लाख 34 हज़ार करोड़ रूपये " Ministry of Drinking Water and Sanitation " खर्च करेगी। 

(4) महाराष्ट्र के अनंत ने इस अभियान के  "Logo" ( ग़ांधी जी का चश्मा ) को डिज़ाइन किया है और गुजरात से भाग्यश्री जी ने इस अभियान की प्रमुख लाइन को इजाद किया है जो है "एक कदम स्वछ भारत की और "  . 

(5) अगर  "वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन " (WHO)  की रिपोर्ट को माना जाए तो भारत में  काम करने वाले एक आम आदमी को एक स्वस्थ जीवन न जीने और बीमारियो से घिरे रहने के कारण  करीब 6500 रूपये का नुक्सान हर साल उठाना पड़ता है। 



क्या हम अब से 5 साल बाद एक स्वछ भारत को देख पायेगे या ये 2 लाख करोड़ इधर उधर ही एडजस्ट कर दिए जायेगे। जैसा की अब तक के अधिकतर अभियान पर होता आया है कहने के लिए तो गंगा , युमना के सफाई पर अब कई हज़ारो करोड़ रुपयो को खरच किया जा चूका है।  वास्तव में इतने खर्च हुए या नही ये नही पता।  लेकिन क्या परिणाम निकला क्या गंगा यूमन के हालत में कुछ सुधार आया ?

स्वछ भारत मिशन एक अच्छी पहल  है इसको हमे गंभीरता के साथ सफल बनाने की भी जरूरत है  लेकिन इसके लिए सही मायने में इतनी बड़ी रकम खर्च करना मेरे व्यतिगत हिसाब से सही नहीं है। और भी अच्छा होता अगर इन रुपयो को ऐसे लोगो के जीवन सुधार में लगे जाता जो गरीबी में जीवन व्यतीत करते हैं और गंदगी में जीने को मजबूर हैं।  इनमे शहरी इलाको के झुप्पड़  जुग्गी वाले क्षेत्र और ऐसे गावं शामिल हैं जहा सफाई की कोई व्यवस्था ही नही है , न ही वह  साफ़ पानी , स्वस्थ्य केन्द्रो  की भी व्यवस्था नही है। 

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