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Tuesday, February 24, 2015

यहाँ भी होता है एक दिमाग !


दोस्तों दिमाग शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।  इसी के बल पर आज दुनिया के ये नज़ारे हैं पर क्या आप जानते हैं की शरीर में प्रमुख  दिमाग के अलावा एक और छोटा दिमाग होता है जो की रीढ़ की  हड्डी में होता है।  अमेरिकी  वैज्ञानिको ने  रीढ़ की हड्डी में एक छोटे मस्तिष्क होने का का पता लगाया है। रीढ़ की हड्डी का अपना विशेष महत्व है जैसे की यह हमे भीड़ के बीच से गुजरते वक्त या सर्दियों में बर्फीली सतह से गुजरते वक्त शारीरिक संतुलन बनाने में मदद करती है और फिसलने या गिरने से बचाती है। 






हमारी रीढ़ की हड्डी में मौजूद कोशिकाएं  सूचनाओं को इकट्ठा कर मांसपेशियों के आवश्यक समायोजन में मदद करते हैं। कैलिफोर्निया के एक  वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान 'साल्क' के जीवविज्ञानी मार्टिन गोल्डिंग के अनुसार  'हमारे खड़े होने या चलने के दौरान पैर के तलवों के संवेदी अंग इस छोटे दिमाग को दबाव और गति से जुड़ी सूचनाएं भेजते हैं। 

उन्होने कहा कि 'इस अध्ययन के जरिए हमें हमारे शरीर में मौजूद 'ब्लैक बॉक्स' के बारे में पता चला। हमें आज तक नहीं पता था कि ये संकेत किस तरह से हमारी रीढ़ की हड्डी में इनकोड और संचालित होते हैं।'  प्रत्येक मिलिसेकंड पर सूचनाओं की विभिन्न धाराएं मस्तिष्क में प्रवाहित होती रहती हैं।   अपने अध्ययन में साल्क वैज्ञानिकों ने इस संवेदी मोटर नियंत्रण प्रणाली के विवरण से पर्दा हटाया है। अत्याधुनिक छवि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से इन्होंने तंत्रिका फाइबर का पता लगाया है, जो पैर में लग संवेदकों की मदद से रीढ़ की हड्डी तक संकेतों को ले जाते हैं।



इन वैज्ञानिको ने पता लगाया कि  ये संवेदक फाइबर आरओआरआई न्यूरॉन्स नाम के तंत्रिकाओं के अन्य समूहों के साथ रीढ़ की हड्डी में मौजूद होते हैं। इसके बदले आरओआरआई न्यूरॉन मस्तिष्क के मोटर क्षेत्र में मौजूद न्यूरॉन से जुड़े होते हैं, जो मस्तिष्क और पैरों के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध हो सकते हैं। इन वैज्ञानिको ने  ये अध्ययन चूहों पर किया और उन्होने पाया कि  जब साल्क में आनुवांशिक रूप से परिवर्धित चूहे की रीढ़ की हड्डी में आरओआरआई न्यूरॉन को निष्क्रिय कर दिया तो इसके बाद चूहे गति के बारे में कम संवेदनशील हो गए। गोल्डिंग की प्रयोगशाला के लिए शोध करने वाले शोधकर्ता स्टीव बॉरेन ने कहा, 'हमें लगता है कि ये न्यूरॉन सभी सूचनाओं को एकत्र कर पैर को चलने के लिए निर्देश देते हैं।'

Keywords: Spinal Cord, Brain , Neurons etc.

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Saturday, February 21, 2015

सोलर कूकर ख़ास आपके लिए !


अगर आप साधारण कूकर पर खाने पका पका कर बोर हो गयी या गए हो, तो सोलर कूकर प्रयोग करके देखिये। एक नया अनुभव आपकी प्रतीक्षा कर रहा है।   सोलर कूकर सूरज की किरणों की ऊष्मा से भोजन को पकाता है।   यह दिखने में आपके सूटकेस की तरह होता है।  इसमें तीन से चार डिब्बे होते हैं जिनमे भोजन की सामग्री रखकर उसको पकाया जा सकता है।  सोलर कूकर में भोजन को पकाने में समय ज्यादा लगता है मगर फिर भी इसके बहुत फायदे हैं जैसे की -


 (१) इसमें भोजन धीमी आंच से पकता है तो इसमें भोजन के पोषक तत्व नष्ट नही होते हैं। 

  (२) इसमें एक साथ चार अलग अलग चीजो को पकाया जा सकता है।  

  (३) सोलर कूकर में कहाँ बनाने के लिए बहुत कम मात्र में घी तेल की जरूरत होती है इस्ल्ये इसमें बना खाना हिरदय रोगियों और रक्त चाप रोगी के लिए बहुत फायदेमंद है। 

(४) इसके उपयोग से गैस की बचत  होती है। 

(५) सोलर कूकर में पका खाना साधारण  कूकर में पके खाने की तुलना में अधिक पौष्टिक होता है। 





सोलर कूकर में आप दैनिक भोजन की चीजे जैसे चावल दाल खिचड़ी पुलाव बिरयानी , सभी डाले सब्जी इत्यादि पका सकते हो।  इसके अलावा डबल रोटी ,केक , ढोकला, इडली आदि भी बड़ी आसानी से सोलर कूकर में पकाये जा सकते हैं।  खीर, हलवा, मछली, चिकन, मटन आदि भी इसमें पकाये जा सकते हैं। साथ ही साथ चने मूंगफली सूजी आदि को भूनंने  के लिए भी आप सोलर कूकर प्रयोग कर सकते हो।  यहाँ हम एक वीडियो का लिंक भेज रहे हैं अगर आप चाहो तो इस लिंक पर क्लिक करके सोलर  कूकर में खाना पकाने की विधि को देख सकते हो। अगर आप सोलर कूकर कैसा होना चाहिए ?  कहा से खरीदे ? सही दाम क्या होंगे ?  और भी अन्य सवालो के सही जवाब के लिए आप अपने राज्य के ऊर्जा विकासः निगम में संपर्क कर सकते हैं।   


Keywords : Solar Energy, Solar Kookar,


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Wednesday, February 11, 2015

हमने अपना काम किया ,अब आपकी बारी है !

अरविन्द जी “हमने अपना काम किया ,अब आपकी बारी है – यही कह रही दिल्ली सारी है ! ”


दिल्ली  की जनता ने अरविन्द केजरीवाल जी को को एक ऐतिहासिक जीत दिलाकर यही सन्देश दिया है – की केजरीवाल जी हमने आप पर विश्वास करके आपको जीता कर अपना काम पूरा कर दिया है अब आपको अपना काम करना है।  दिल्ली की जनता जो वर्षो से जनजीवन से जुडी तमाम समस्याओ को झेल रही है, अब आपको इन समस्याओ का समाधान करना है।  दिल्ली की जनता ने बड़ी समझदारी का काम किया है दिल्ली की जनता ने विजय के अभिमान में चूर होकर धर्म पर राजनीति करने वालो  के मूह पर एक करारा तमाचा मारा है , दिल्ली की जनता ने ये साबित कर दिया है हमको भाषण देनी वाली , नही राशन देनी वाली सरकार चाहिए। 

दिल्ली की जनता ने ये साफ़ साफ़ सन्देश दिया है की मुसलमानो को धर्म परिवर्तन करके जबरन हिन्दू बनाने जैसे गंभीर मुद्दो पर केंद्र  सरकार ने कोई एक्शन नही लिया, अब सत्ता में आ गए हो तो भूमि अधिग्रहण अध्यादेश लाकर किसानो के पेट पर लात मारकर उद्योगपतियों के जेबे भरना चाहते हो ,भारतीय रेल की हालत तो सुधारि नहीं , किराया भी बड़ा दिया और बुलेट ट्रैन चलाकर कई लाखो करोड़ो रुपया पानी में बहाना  चाहते हो , ऐसी सरकार नही चाहिए जो गरीबो के पेट पर लात मारकर उच्च वर्गीय लोगो को खुश करे अगर आप आम आदमी की
 जरूरत पर ध्यान नही दोगे , तो हर हाल में सबक सिखाएंगे , अब हम हवाई भाषण से खुश होने वाले नही है। 



 दिल्ली की जनता ने साफ़ सन्देश दिया है की वो और लोग होगे जो जातिवाद , हिदुत्व और आपके भाषणो की बहकावे में में आकर आपको वोट देते हैं।  हम समझदार लोग हैं हम इस नफरत और दंगे की राजनीति की आग में दिल्ली को नही जलने देंगे दिल्ली की जनता ने इन चुनावो में ये सबक सीखा दिया है की आप चाहे जितने भी आरोप केजरीवाल जी पर लगा लो, जितना भी उनका अपमान कर लो ,चाहे पोस्टर में अन्ना जी को माला पहनाकर उस आदर्श गांधीवादी व्यक्तित्व को जीते जी मार दो, बिहार में मांझी जी को भड़काकर नफरत फैलाते हो ऐसी राजनीति हमे नही चाहिए ये जनता है साहब सब पहचान लेती है और सबक सिखाना भी जानती है। हम आपके बहकावे में नही आने वाले , हमने केजरीवाल जी की पिछली 49 दिन वाली सरकार का काम भी देखा है।  आम जनता की लिए उनके संघर्ष को देखो है जो की आपकी अभी तक 9 महीने की सरकार की तुलना में कई गुना अधिक है। 

                            
अंत में दिल्ली की जनता केंद्र सरकार से निवेदन करती है कि केजरीवाल जी अब दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने जा रहे है तो आप उनका दिल्ली की विकास कार्यो में सहयोग देना , दिल्ली की विकास कार्यो को रोकना मत वरना ये टीम इण्डिया की  हार होगी ,भले ही टीम इंडिया में धोनी और विराट की बीच मतभेद हो पर उन दोनों को ये नही भूलना चाहिए की उन दोनों को आखिर देश की लिए खेलना है।

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Wednesday, February 4, 2015

स्वच्छ भारत मिशन - प्लानिंग कितनी स्वच्छ ?


दोस्तों  "स्वछ भारत" मिशन की शुरुवात हमारे देश के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2 अक्टूबर 2014 को की।  तब से लेकर अब तक हमने देखा की प् उद्योगपतियों ने और बड़े से लेकर सभी छोटे नेताओ ने ,सरकारी कर्मचारियों ने भी कुछ दिनों के लिए हाथ में झाड़ू लेकर  सड़क पर सफाई करते हुए अनेको सीन दिए और फोटो खिंचवाए  और काफी सुर्खिया भी बटोरी। वो बात अलग है की अब ये लोग ठन्डे पड़  गए हैं या कहिये की एक बार झाड़ू लगाने में ही थक गए अब और लगाने की हिम्मत नही बची इनमे।   अगर देखा जाए तो स्वछ भारत मिशन पर सरकार की ये पहल काफी सरहानीय है।  देखते हैं इसके 5 मूल बिंदु  बिन्दुओ के बारे में -

(1) 2 अक्टूबर 2014 से लगाकर अगले 5 सालो तक  "स्वछ भारत " मिशन पर भारत सरकार 2 लाख करोड़ रूपये खर्च  करेगी . क्या ये वाक्य पड़कर आपको झटका नही लगता।  मतलब अगर देखा जाए तो स्वछ भारत अभियान के पीछे भारत सरकार का प्रमुख काम भारतीय नागरिको के बीच में इसके प्रति जागरूकता लाना और उन्हे अपने आस पास के क्षेत्र को स्वछ रखने के लिए प्रेरित करना है।  इसमें किसी  मशीन का कोई प्रयोग नही ,न ही सरकार हर नागरिक को झाड़ू बांटेगी न ही इस अभियान के लिए उन्होने कोई अलग से कर्मचारी नियुक्त किये जो की उनकी सैलरी का खर्च शामिल हो . फिर भी सरकार ने इस अभियान के लिए २ लाख करोड़ जैसी भारी भरकम रकम पास की है    खैर जाने दो कोई  वजह रही होगी। 

(2) अगले 5 वर्षो में इस अभियान को देश के 4041 शहरो में सफल बनाना  है। 

(3) इन 2 लाख करोड़ में से , 62000 करोड़ इस पर "Urban Development Ministry " के द्वारा खरच होने हैं और बाकी 1 लाख 34 हज़ार करोड़ रूपये " Ministry of Drinking Water and Sanitation " खर्च करेगी। 

(4) महाराष्ट्र के अनंत ने इस अभियान के  "Logo" ( ग़ांधी जी का चश्मा ) को डिज़ाइन किया है और गुजरात से भाग्यश्री जी ने इस अभियान की प्रमुख लाइन को इजाद किया है जो है "एक कदम स्वछ भारत की और "  . 

(5) अगर  "वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन " (WHO)  की रिपोर्ट को माना जाए तो भारत में  काम करने वाले एक आम आदमी को एक स्वस्थ जीवन न जीने और बीमारियो से घिरे रहने के कारण  करीब 6500 रूपये का नुक्सान हर साल उठाना पड़ता है। 



क्या हम अब से 5 साल बाद एक स्वछ भारत को देख पायेगे या ये 2 लाख करोड़ इधर उधर ही एडजस्ट कर दिए जायेगे। जैसा की अब तक के अधिकतर अभियान पर होता आया है कहने के लिए तो गंगा , युमना के सफाई पर अब कई हज़ारो करोड़ रुपयो को खरच किया जा चूका है।  वास्तव में इतने खर्च हुए या नही ये नही पता।  लेकिन क्या परिणाम निकला क्या गंगा यूमन के हालत में कुछ सुधार आया ?

स्वछ भारत मिशन एक अच्छी पहल  है इसको हमे गंभीरता के साथ सफल बनाने की भी जरूरत है  लेकिन इसके लिए सही मायने में इतनी बड़ी रकम खर्च करना मेरे व्यतिगत हिसाब से सही नहीं है। और भी अच्छा होता अगर इन रुपयो को ऐसे लोगो के जीवन सुधार में लगे जाता जो गरीबी में जीवन व्यतीत करते हैं और गंदगी में जीने को मजबूर हैं।  इनमे शहरी इलाको के झुप्पड़  जुग्गी वाले क्षेत्र और ऐसे गावं शामिल हैं जहा सफाई की कोई व्यवस्था ही नही है , न ही वह  साफ़ पानी , स्वस्थ्य केन्द्रो  की भी व्यवस्था नही है। 

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Sunday, February 1, 2015

खटनी भाग 2 !

 पिछली पोस्ट में बचपन के एक विशाल वृक्ष खटनी ( 1930-1995)  के लिए कुछ पंक्तिया लिखी,  इसके लिए  भाग 2 में कुछ पंक्तियाँ  इस प्रकार हैं -


अनेक पक्षी आकर इस पर,
 अपना घौंसला बनात्ते थे !
सभी सुबह होते उड़ जाते , 
शाम को फिर अपने घर आ जाते थे !!

इन पक्षियों का ये प्यारा घर था ,
सभी इसकी डाल पर ख़ुशी से  चहचाहते  थे !!

एक था वो भयानक साया ,
जो खटनी की जिंदगी में  आया !
आखिर इसके मालिक ने ,
पैसो की खातिर इस पर आरा चलवाया !!


,और फिर गिर गया धरा पर,
 बिखर गए इसके सभी अंग !
बेघर हो गए जाने कितने,
 पक्षी इसकी यादो क संग !!


वो ले जा रहे थे इसके अंगो को,
 और भरने लगे इन्हे ट्रॉली में !
हम सब बेबस होकर देख रहे थे ये दृश्य,
 और आँशु गिरने लगे झोली में !!

फिर वो ले गए उसको ऐसे,
 जैसे कोई मरे हुए को ले जाता है!
अब न कोई ऐसा खटनी है ,
जो दो गाव को आम खिलाता है !!

मालिक की भी थी ,
कोई आर्थिक परेशानी !!
वरना जिस खटनी को 65 सालो तक पाला,
 कौन खोना चाहेगा ऐसी प्यारी  निशानी !!

                                          - मनोज कुमार 

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