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Wednesday, January 28, 2015

खटनी - भाग 1 !

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बचपन की यादो के सफर का एक साथी खटनी जिसको भुला पाना मेरे लिए मुमकिन नही है , मन किया आज इसके लिए  कुछ लिखता हु जो इस प्रकार है --

एक विशाल वृक्ष था मेरे बचपन में ,
जो मुझको पास बुलाता था !
जब खेत में काम करके थकता था ,
वह अपनी ठंडी छाव में  मुझे सुलाता  था !!

तपती धुप से गुजर रहे राहगीर को भी ,
ये वृक्ष बहुत लुभाता था !
हर कोई वहा से आने  जाने वाला,
 इसकी छाँव में सस्ताता था !!

रिमझिम बारिश के मौसम में,
यह  वर्षा में भीगने से बचतता था !
आता था जब आम का मौसम,
 तब सबको छककर आम खिलाता था !!



एक नही, बल्कि दो गाव के लोग, 
अक्सर  इसके पास आते थे !
और थैले भरभरकर अपने घर ,
इसके आम ले जाते थे !!

ये बेचारा बिना कुछ लिए,
 सबको अपने आम खिलाता था !
फिर भी ये निर्दयी लोग इस,
 बेचारे पर लकड़ी डंडे बरसाते थे !!

मै देखता था अक्सर कुछ लकड़ी बीनने वाले , 
इसकी लकड़ी चुगकर ले जाते थे !
जिनसे वो अपने घरो के ,
चूल्हे को जलाते थे !!
इसके आम खट्टे होते थे ,
 इसलिए हम इसे खटनी बुलाते थे  !!


                                 - मनोज कुमार 

बचपन की यादो के सफर को जारी रखते हुए , खटनी की आगे की बात भाग २ में लेकर आऊंगा आपके लिए 
तब तक के लिए नमस्कार  ! आपका दिन शुभ हो !

1 comment:

  1. उम्दा....बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो
    मुकेश की याद में@चन्दन-सा बदन

    ReplyDelete

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