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Wednesday, January 28, 2015

खटनी - भाग 1 !

बचपन की यादो के सफर का एक साथी खटनी जिसको भुला पाना मेरे लिए मुमकिन नही है , मन किया आज इसके लिए  कुछ लिखता हु जो इस प्रकार है --

एक विशाल वृक्ष था मेरे बचपन में ,
जो मुझको पास बुलाता था !
जब खेत में काम करके थकता था ,
वह अपनी ठंडी छाव में  मुझे सुलाता  था !!

तपती धुप से गुजर रहे राहगीर को भी ,
ये वृक्ष बहुत लुभाता था !
हर कोई वहा से आने  जाने वाला,
 इसकी छाँव में सस्ताता था !!

रिमझिम बारिश के मौसम में,
यह  वर्षा में भीगने से बचतता था !
आता था जब आम का मौसम,
 तब सबको छककर आम खिलाता था !!



एक नही, बल्कि दो गाव के लोग, 
अक्सर  इसके पास आते थे !
और थैले भरभरकर अपने घर ,
इसके आम ले जाते थे !!

ये बेचारा बिना कुछ लिए,
 सबको अपने आम खिलाता था !
फिर भी ये निर्दयी लोग इस,
 बेचारे पर लकड़ी डंडे बरसाते थे !!

मै देखता था अक्सर कुछ लकड़ी बीनने वाले , 
इसकी लकड़ी चुगकर ले जाते थे !
जिनसे वो अपने घरो के ,
चूल्हे को जलाते थे !!
इसके आम खट्टे होते थे ,
 इसलिए हम इसे खटनी बुलाते थे  !!


                                 - मनोज कुमार 

बचपन की यादो के सफर को जारी रखते हुए , खटनी की आगे की बात भाग २ में लेकर आऊंगा आपके लिए 
तब तक के लिए नमस्कार  ! आपका दिन शुभ हो !

Sunday, January 25, 2015

वर्ल्ड कैलेंडर की निर्माता :- Miss Elisabeth Achelis

दोस्तों कल 24 जनवरी का दिन था।  कल भारत में वसंत पंचमी का त्यौहार मनाया गया।  वही 24 जनवरी को एक ऐसी महिला वैज्ञानिक का जन्म हुआ था जिन्होंने एक ऐसी चीज़ सारे  विश्व को  दी  जिसके आधार  पर आज विश्व के सारे काम काज हो रहे हैं, न सिर्फ समाज  से जुड़े  काम बल्कि घर के काम काज भी इसी के आधार पर होते है।  अब तो आप समझ गए होगे की हम किस चीज़ की बात कर रहे हैं , वो चीज़ है  "वर्ल्ड कैलेंडर"    आज की इस पोस्ट में हम आपको उस महिला वैज्ञानिक के बारे में  कुछ बतायेगे जिन्होंने वर्ल्ड कैलेंडर को बनाया। 

 इनका नाम है Elisabeth Achelis.,  जिनका जन्म 24 जनवरी 1980 को  New York  में हुआ था।  उनके पिता जी Fritz Achelis अमेरिका की एक हार्ड रबर कंपनी में प्रेजिडेंट थे।  उन्होने सन 1929 में  Dr, Melvyl Dewey का एक विख्यान सुना जिसका विषय था - Decimal System  उनके इस विख्यान को सुनने के बाद उन्होने Gregorian Calendar  में सुधार करके वर्ल्ड कैलेंडर बनाया ताकि लोगो के जीवन के काम दिनचर्या के हिसाब से सरल हो सके।   फिर उन्होने  सन 1930 में  "The World Calendar Association " की स्थापना की जिसका प्रमुख उदेश्य पूरे विश्व को वर्ल्ड कैलेंडर को अपनाने के लिए प्रेरित  करना था।  अगले 25 वर्षो तक इस संस्था की लीड रहीं।  इन्होने 1931 में  जर्नल  "Journal of Calendar Reform" का प्रकाशन शुरू किया और अगले 25 वर्षो तक इसका प्रकाशन जारी रखा।   

1956 के बाद से  "The World Calendar Association "  का नाम  "International World Calendar Association " हो गया और 2000 से 2004 के बेच इसकी वेब साइट को लांच किया गया।   2005  में इसका  नाम "The World Calendar Association, International." रखा गया।   आज के समय में Wayne Edward Richardson  इसके डायरेक्टर हैं।  

वर्ल्ड कैलेंडर निर्माता  Miss Elisabeth Achelis  ने चार पुस्तके भी लिखी जिनके नाम इस प्रकार हैं -

  • The World Calendar (Putnam: New York, 1937)
  • The Calendar For Everybody (Putnam: New York, 1943; Omnigraphics: Detroit,1990)
  • Of Time and the Calendar (New York: Hermitage House, 1955)
  • The Calendar For the Modern Age (Nelson: New York, 1959)


11 फ़रवरी   1973 को उनकी मृत्यु  हो गयी।  सारे विश्व को वर्ल्ड कैलेंडर  को अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु इन्होने बहुत संघर्ष  किया।  


 Keywords : Elisabeth Achelis , World Calendar,

आज की पोस्ट में बस इतना ही , आपका दिन शुभ हो।  नमस्कार। 

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Friday, January 23, 2015

मंगल ग्रह की खुसर फुसर !

"वर्ष 2014 ना सिर्फ भारत बल्कि विश्व के अंतरिक्ष वैज्ञानिको के लिए बेहद ही रोचक रोचक रहा। गुजरे  हुए इस साल में अंतरिक्ष वैज्ञानिको ने मंगल ग्रह के अध्ययन और इससे से जुड़े नए नए तथ्यों को जानने  में सफलता हासिल की है। आईये जानते हैं ऐसे ही कुछ रोचक तथ्यों के बारे में "  

(1 ) मंगल ग्रह पर पानी के मौजूद है।  

2014  में नासा   के वैज्ञानिको को मंगल पर पानी  होने  के कुछ प्रमाण  मिले।  हालांकि  ये  सही  सही  पता  नही  लग  पाया है   की   मंगल पर खा  और कितनी  मात्रा  में पानी   है।  जापान में "टोकियो इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी " के तोमोहीरो उसुई ने कहा कि मंगल के उल्कापिंडों (मीटियोराइट) की पिछली स्टडीज में तीसरे ग्रह से जुड़े जलस्रोत के संकेत मिलते रहे हैं लेकिन हमारे नए आंकड़ों के लिए पानी या बर्फ के स्रोत का अस्तित्व होना जरूरी है, उसमें भी मंगल से जुड़े नमूनों के सेट से बदलाव पता लगता है। उसुई रिसर्च पेपर के लेखक हैं और नासा " लूनर एंड प्लेनेटरी इंस्टीट्यूट " के पूर्व पोस्ट डॉक्टरल फेलो हैं।


उसुई ने कहा कि इस स्टडी से पहले तक सतह पर इस जलस्रोत के अस्तित्व का या फिर मंगल की सतह से पृथ्वी पर आने वाली चट्टानों के साथ इस जलस्रोत के संपर्क का कोई प्रत्यक्ष सबूत मौजूद नहीं था। प्राप्त नमूनों में हाइड्रोजन एटम्स से बना पानी दिखाया गया है, जिसमें इसके समरूपों का एक ऐसा अनुपात है, जो लाल ग्रह के मेंटल (आवरण) और मौजूदा वायुमंडल में पाए जाने वाले जल से अलग है।

(2 ) मंगल ग्रह पर जीवन के मिले सबूत। 
 मंगल ग्रह पर कभी जीवन होने या भविष्य में इसकी उम्मीदों के पक्के सबूत मिले हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मार्स रोवर क्यूरियॉसिटी ने पहली बार साफ तौर पर इस ग्रह पर जैविक अणु (ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स) होने के सबूत तलाशे हैं।

साइंटिस्ट्स के मुताबिक, मंगल पर मीथेन और ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स होने इस बात की पुष्टि करता है कि वहां कभी जीवन रहा होगा या आगे इसके होने की संभावनाएं हैं। गौरतलब है कि इससे पहले क्यूरियॉसिटी मंगल पर मीथेन गैस का पता लगाने में नाकाम हो गया था। 'क्यूरियॉसिटी' पर सैंपल एनालिसिस ऐट मार्स (सैम) उपकरण समूह की जिम्मेदारी संभालने वाली टीम ने मार्स रोवर की लैंडिंग साइट 'गेल क्रेटर' में 'शीपबेड मडस्टोन के एक छिद्र वाले सैंपल में ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स देखे। ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स में मुख्य तौर पर कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के एटम से बने मॉलिक्यूल्स की अलग-अलग वेराइटी होती है। बहरहाल, ऐसी रासायनिक प्रतिक्रियाओं से भी ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स बन सकते हैं जिसमें जीवित चीजों की मौजूदगी नहीं होती।
( 3  ) मंगल पर मिली  एलियन  की हड्डी। 


लंदन नासा के क्यूरियॉसिटी रोवर को मंगल की सतह पर अकेले चक्कर काटते हुए 2 साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। हाल ही में इस रोवर द्वारा खींची गई एक तस्वीर से एलियन्स के वजूद में यकीन रखने वाले बेहद उत्साहित हैं। उन्हें मंगल की सतह पर कुछ ऐसा दिखा है, जिसे वे इस बात का सबूत बता रहे हैं कि हमारे अलावा इस ब्रह्मांड में कोई और भी है। मंगल की सतह पर कुछ ऐसा दिखा है, जिसे 'एलियन की जांघ की हड्डी' बताया जा रहा है। 

एलियन की तलाश और उनकी मौजूदगी को साबित करने की कोशिश में नई-नई थिअरीज पेश करने वाले लोग नासा के क्यूरियॉसिटी रोवर की खींची इस तस्वीर के आधार पर दावा कर रहे हैं कि मंगल ग्रह पर भी किसी वक्त जीवन रहा होगा। उनका दावा है कि रोवर के मैस्टकैम से 14 अगस्त को ली गई इस तस्वीर से साफ होता है कि किसी वक्त मंगल की सतह पर बड़े जानवर और शायद डायनॉसॉर तक घूमा करते थे। 

'नॉर्दर्न वॉइसेज ऑनलाइन' नाम के पोर्टल पर एक अज्ञात शख्स ने लिखा है, 'इस तस्वीर में दिख रही हड्डी से साफ होता है कि मंगल पर किसी वक्त कुछ तो रहता था।' पॉप्युलर साइट 'यूएफओ ब्लॉगर' ने तो इस तस्वीर की तुलना धरती पर पाए गए सरीसृप प्रजाति के फॉसिल्स की तस्वीरों से भी की है। वे दिखाना चाहते हैं कि तस्वीर में दिख रही चीज़ किसी जानवर की हड्डियों के अवशेष हैं। 

बहुत सारे लोगों को लगता है कि मंगल ग्रह पर जीवन है। पिछले साल कुछ वैज्ञानिकों ने यह थिअरी सामने रखी थी कि आज से करीब 6 करोड़ 60 लाख साल पहले धरती पर डायनॉसॉर का खात्मा करने वाला जो उल्कापिंड गिरा था, उसके टुकड़े जीवन बनाने के लिए उपयोगी तथ्वों को मंगल तक ले गए होंगे। मगर साइंटिस्ट्स का यह भी मानना है कि मंगल करोड़ों सालों से वीरान है और यहां पानी भी नहीं। ऐसे में यहां जीवन की संभावना का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। 

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हड्डी नहीं, बल्कि पत्थर का कोई ऐसा टुकड़ा है जो हड्डी की तरह दिख रहा है। बावजूद इसके बहुत से लोग इस तस्वीर को मंगल पर जीवन होने का सबूत मानते हुए तरह-तरह की थिअरीज़ गढ़ने में जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कुछ लोगों ने चांद की सतह की एक तस्वीर पर परछाई देखी थी और दावा किया था कि वह एक एलियन था। मगर बाद में नासा ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे लोगों की कल्पना की देन करार दिया था।

(4 ) मंगल पर बनायी जा सकेगी आक्सीजन। 
मंगल की धरती पर साल 2021 में उतरने वाला नासा का रोवर वहां ऑक्सिजन बनाने की कोशिश करेगा। यह रोवर 7 वैज्ञानिक परीक्षण करेगा, जिनका उद्देश्य भविष्य में मंगल पर मानव को भेजने के लिए रास्ता तैयार करना, जीवन की मौजूदगी के सबूत ढूंढना और वापस लाने के लिए चट्टान के नमूने इकट्ठे करना होगा। मंगल पर भारी मात्रा में मौजूद कार्बन डाईऑक्साइड को ऑक्सिजन में बदलने वाला उपकरण भी इन्हीं परीक्षणों में से एक है। 

ये ऑक्सिजन वहां मानव जीवन या वापस आने वाले अभियान में मददगार हो सकती है। इस रोवर के ज़रिए 40 किलो वज़नी उपकरण मंगल पर भेजे जाएंगे, जिनमें दो कैमरे और मौसम परीक्षण संबंधी उपकरण शामिल हैं। मार्स 2020 मिशन की घोषणा करते हुए नासा के प्रशासकीय अधिकारियों ने कहा कि हमारे लिए एक रोमांचक दिन है। एक टन के इस रोवर पर करीब 1.9 अरब डॉलर का खर्च आएगा। इसे अगस्त 2012 में मंगल पर पहुंचे क्यूरियॉसिटी रोवर की तर्ज़ पर ही बनाया जा रहा है। 

हालांकि, इस पर क्यूरियॉसिटी के मुकाबले कम उपकरण भेजे जाएंगे, जो जगह बचेगी उसका इस्तेमाल मंगल की चट्टानों के नमूने इकट्ठा करने के लिए किया जाएगा। नासा को उम्मीद है कि भविष्य में मंगल से वापस आने वाली उड़ानों पर इन्हें साथ लाया जा सकेगा। नासा के मौजूदा अंतरिक्ष यान भी ऑक्सिजन का निर्माण कर सकते हैं लेकिन नए 'मॉक्सी अपकरण' इस क्षमता का मंगल ग्रह के वातावरण में पहली बार परीक्षण करेगा।

(5)  मंगल ग्रह पर मिला ताबूत , कहीं ये एलियन का तो नही।


'द इनक्विजिटर' की रिपोर्ट के मुताबिक, यू ट्यूब पर डाले गए विडियो में पहली नजर में एलियन के ताबूत को देखकर उसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है, लेकिन जब उसे ध्यानपूर्वक देखा जाता है तो वह साफ नजर आता है। शोधकर्ता स्कॉट वेरिंग ने 'यूएफओ साइटिंग डेली' के हवाले से कहा, 'यह पत्थरनुमा वस्तु बिल्कुल एक ताबूत की तरह ही दिखती है।' यह लगभग एक फीट लंबी और आधा फीट ऊंची है। वेरिंग के मुताबिक, हो सकता है कि वह पत्थर का एक टुकड़ा हो, लेकिन अगर नासा का क्यूरियोसिटी रॉवर उसका निरीक्षण करे, तो चमत्कार सरीखा हो सकता है।


इन सभी खबरों के अलावा वर्ष 2014 में भारत के मंगल मिशन  की कामयाबी के बारे में हम सबने सुना ही है भारत के मंगल मिशन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ का जिकर हम किसी अन्य पोस्ट में विस्तार पूर्वक करेंगे।  इस पोस्ट में फिलहाल इतना ही।  नमस्कार।  

रेफरेन्स  - समाचार पत्र।  इन सभी  तथ्यों और जानकारियो को समाचार पत्रो से लिया  गया है। 

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Wednesday, January 21, 2015

बिना इंजन वाली कार - "सॉल्ट वाटर और सोलर एनर्जी" से चलेगी कार !

 आज की इस विशेष पोस्ट में मैं सभी सभी पाठकगणो का स्वागत करता हूँ।  इस पोस्ट में हम बात करेंगे एक नयी रिसर्च  की।  दोस्तों आपने पेट्रोल ,डीजल और  सी.एन .जी  से चलने वाली कारो को सड़क पर दौड़ते हुए तो देखा ही होगा।  पर क्या आपने सोचा है की नमके  पानी से भी कार को चलाया जा सकता है।  नहीं सोचा होगा  न।   पर अब सोच लीजिये की ये हो सकता है।  क्यों की भारत के "थाणे" में सरस्वती विधायलय हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज ऑफ़ साइंस के  कुछ छात्रों ने साल्ट वाटर और सोलर एनर्जी के के संयुक्त रूप से  चलने वाली कार को बनाया है।  

 इन छात्रों ने NaCL (साल्ट वाटर) और सोलर एनर्जी की केमिस्ट्री  का  प्रयोग करके इस नयी  कार की हिस्ट्री लिखी है।   असल में इस कार को चलाने के लिए NaCL से बने सेल को सोलर एनर्जी के साथ प्रयोग किया गया है।  स्कूल की प्रधान अध्यापिका श्रीमती अनीता पिंटू जी के अनुसार XI और  XII क्लास के पांच छात्रों की टीम ने इस काम को अंजाम दिया है।  इनके द्वारा  बनाये गए कार के मॉडल को मणिपाल  यूनिवर्सिटी में आयोजित आल इंडिया कम्पटीशन में चयनित किया गया है। इन पांचो छात्रों  के नाम नेहा पाटिल , श्रद्धा  प्रभु,अमेय परब, आकाश डोलस , समृद्धि  वैद्य हैं।  इस टीम ने इस प्रोजेक्ट को अपने टीचर स्वप्निल सोनटके के निर्देशन में पूरा किया है।   इस कर की सबसे अजीब बात ये है कि ये देखने में तो अन्य करो के जैसे ही है परन्तु अन्य करो कि तरह इसमें को भारी भरकम इंजन नही है असल में इंजन है ही नही।   इसके द्वारा कोई वायु प्रदुषण भी नही होगा।  इस कार के अगले पीछे में एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है और अगले हिस्से में सेल यूनिट और सोलर यूनिट। 



सच में हमारे देश में प्रतिभाओ के कमी नहीं है , जरूरत है तो उनको सही मार्गदर्शन और उनका  प्रोत्साहन करने की।  मगर सोचता हु तो एक अफसोस होता है कि  भारत सरकार जितना पैसा अन्य कामो पर खरच  करती है बजट पेश करते समय उसमे रिसर्च वर्क के लिए न के बराबर पैसा खर्च होता है।  जिसकी वजह से कभी कभी कुछ प्रोफेसर और उनके रिसर्च स्कॉलर छात्र साधनो और पैसो की कमी वहज से आगे बढ़ने का साहस नही कर पाते।  केवल डिग्री लेने तक ही वो रिसर्च सिमित रह जाती है।  हालांकि भारत सरकार रिसर्च स्कॉलर छात्रों को स्कालरशिप देती है परन्तु भारत सरकार को रिसर्च वर्क को अधिक गंभीरता के साथ और इसको विशेष महत्व देने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।  इस काम में हम अन्य देशो की अपेक्षा अभी काफी पीछे हैं। अंत में इन सभी छात्रों और इनकी पूरी टीम को मेरी और से बहुत बहुत बधाई। 

इस पोस्ट में इतना ही। आपका दिन शुभ हो।  नमस्कार। 

Keywords: Car, Solar Energy, Salt water etc.

Reference : - http://www.drivespark.com/four-wheelers/2015

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Monday, January 19, 2015

हिंदुत्व की रक्षा का ये कैसा तरीका है ?

कल शाम के समय हम अपने दोस्त के साथ बैठे हुए चच्चू चाय कैफ़े पर  चा पी रहा रहा था।  तबही अचानक हमरा दोस्त चा पीते पीते एक गीत गुनगुनाने लगा ससुरा। हम सुनत रहे तो पता लगा कि एक ठो गाना है जिसके बोल कछु ऐसें है " कैसा ये इश्क़ है , अजब सा रिस्क है ?" .तबही हमार नज़र ऊहाँ रखे एक अखबार पर  पड़ी। अखबार में एक  हैडलाइन थी  " मोदी को दोबारा PM बनाना है, तो 10 बच्‍चे पैदा करें हिंदू - शंकराचार्य ". तुमको समझाए की खातिर थोड़ा डिटेल में बता देत  हैं कि ऊ पेपर में एग्ज़ॅक्ट्ली छपा का था ,ऊ में छपा था  -

"इलाहाबाद में माघ मेले में शिकरत करने आए शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्‍वती ने कहा, "हिंदुओं की एकता की ही वजह से मोदी प्रधानमंत्री बन सके हैं। वह बहुमत में रहें इसलिए प्रत्‍येक परिवारों को 10 बच्‍चे पैदा करने चाहिए।" घर वापसी' कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए उन्‍होंने कहा, "हिंदू धर्म से ही ईसाई, इस्लाम और सिख धर्म का जन्म हुआ हैं, इसलिए सभी को अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। घर वापसी पर बैन नहीं लगना चाहिए। धर्म बदलने पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।" उन्होंने कहा कि जो हिंदू उन्हें अपने बच्चे सौंपेंगे, वे उनकी पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्‍था भी करेंगे।
'



अब जोन गीत वो हमरा दोस्त गुनगुना रहा था हम . ऊ का सही मतबल समजे कि खातिर आँख बंद करके 1  मिनट के लिए कुछ  दिनों पहले कि ऐसी घटनाओ को मन ही मन में  रीडिंग मारने  लगा ,जोन  का सीधा कनेक्शन ई शंकराचार्य जी के वाक्य  से था  

ऐसे ही  वाक्य कछु  दिन पहले भाजपा  के एम.पी.शाक्षी महाराज दिए रहे थे। ऊ कहे  थे कि  एक हिन्दू महिला  को कम से कम 4  बच्चे पैदा करने चाहिए। 

ऐसा ही कछु  पश्चिम बंगाल के भाजपा  नेता श्यामल गोस्वामी कहे रहे कि हिन्दू धर्म के अस्तित्व के लिए एक हिन्दू महिला को कम से कम 5  बच्चे पैदा करने चाहिए।  

तब जाकर हमको पता लगा कि ई शंकरायाचार्य जी और भाजपा के ई सभी नेता  तो "मोदी सरकार"  के  इश्क़ कि बात कर रहा था। फिर हम ई के द्वारा बोले गए वाक्य के बारे में सोचने लगा तो हमको लगा ई में थोड़ा नही, ई में  तो हमको बहुतही बड़ा रिस्क लागे है ससुरा ।  मतलब ये कि मोदी जी को फिर से पी. एम  बनाए कि खातिर शादीसुदा हिन्दू मर्दो को ई शंकराचार्य जी का कहना मानकर और  दस का दम दिखाकर भविष्य में अपने  घर परिवार के साथ सड़क पर कटोरा लेकर बैठना पड़  जाई । 

अब आप अगर समझदार  लोग हैं तो खुदही सोचो  का ये साधू और ई नेता हमारे देश की जनता को सही सलाह दे रहे है ?  जो जनता बेचारी भोली भाली है दिमाग और समझदारी से काम नही लेती वो तो  इन लोगन को अपना भगवान समझती हैं  ऊ तू  बेचारी इन के वाक्य को सही मानकर 5  से 10  बच्चे पैदा करने की तैयारी में लग जाई । लेकिन बाद में का हाथ  लगेगा ऐसी जनता के सिर्फ और सिर्फ गरीबी और अपने बच्चो का अंधकारमय भविष्य और कछु न रह जाई । अगर फिर भी आप लोग ई  साधू और ई नेताओ की बात को सही मानत  हो तो भैया  हमका  माफ़ करो, हमरी ये  पोस्ट तुम लोगन के  लिए नाही  है। 

हमरी चा अब खत्म होने वाली है और हुमरे दोस्त का ऊ गाना भी। 

चलते चलते माननीय  मोदी जी से एक ठो निवेदन करना चाहेंगे यही की सर जी - भाजपा के जो नेता ऐसा ब्यान दे रहे हैं की हिन्दू महिला को कम से कम 4 -5  बच्चे पैंदा करने चाहिए , जो ई साधू कह रहे की मोदी जी को फिर से पी. एम  बनाने के लिए हिन्दू महिला को 10  बच्चे पैदा करने चाहिए।  इन लोगो के बयान पर अपना समझदारी भरा उत्तर दे और इनके खिलाफ करयवाही करे।  हम माननीय  मोदी जी से ये आशा करता हु कि वो खुद को फिर से पी.एम . बनने के लिए एक हिन्दू महिला को 10  बच्चे पैदा करने जैसी सलहा नही देंगे। 

नमस्ते ! हमरी चा खतम हो गयी है चलते हैं अब ,चलो  बे ई गाना बंद करो  अब और इस इश्क़ का और  रिस्क मत ले।   

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Sunday, January 18, 2015

सत्याग्रह से सत्तागृह तक।

आज कल दिल्ली के गर्माते राजीनितक माहौल की तस्वीर देखता हुँ ,खबरे सुनता हुँ  तो एक सत्याग्रह की याद आने लगती है।   एक ऐसा सत्याग्रह  जिसकी मुहीम अब से ढाई  साल पहले समजासेवी अन्ना जी ने जनता के हितो के लिए छेड़ी  थी।  शायद आजादी के बाद से अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन था यह।  देश की सारी  जनता इसको जी जान से समर्थन कर रही थी।   कुछ प्रत्यक्ष रूप से तो कुछ अप्रत्यक्ष रूप से।   बड़ो से लेकर बच्चो तक की जुबान पर एक ही नारा था " अन्ना  नही आंधी है , दूसरा महात्मा गांधी है ".  सच में ये सत्याग्रह एक ऐसी आंधी थी जिसने कांग्रेस सरकार की जड़ो को हिलाकर कर रख दिया था। जिसका सीधा फायद भाजपा को हुआ और इन कमजोर पड़ी जड़ो को उखाड़ना भाजपा  के लिए और भी आसान हो गया जो की भाजपा पहले से चाहती थी।  इस आंदोलन के दौरान आधी जनता दिल्ली में प्रदर्शन कर रही थी ,जो दिल्ली तक नही पहुंच पाये उन्होने अपने शहर , अपने गाव में गली गली में  इस आंदोलन को जिन्दा रखा।  कई करोडो रुपया देश के कोने कोने से इस आंदोलन के लिए दिल्ली तक पहुचाया गया ताकि एक साफ़ सुथरा लोकपाल बिल पास हो जाए और ये मेहनत  बेकार ना जाये। पर यहाँ सवाल ये उड़ता है की क्या जनता  को सच में  इस आंदोलन का कुछ फायदा हुआ ? जवाब ढूंढे तो हम पायेगे की नही हुआ , जनता का पैसा ही बर्बाद हुआ . अब सवाल ये है की क्या इस आंदोलन का फयदा किसी को नही हुआ ? ऐसा नही है की किसी को फायदा नही हुआ , फायदा तो हुआ पर उन  लोगो को जो इस आंदोलन के जरिये दिल्ली  की सत्ता पाने के मंसूबे बनाये बैठे थे।  जो मंच पर तो अन्ना के साथ बैठे पर दिल से अन्ना के साथ नही थे उनकी आँखों में सत्ता पाने का सपना था। शयद उन्हे आंदोलन के  उद्देश्यों से कोई मतलब था ही नही , बाद में ऐसा साबित हुआ जैसे वो बस अन्ना के साथ मंच पर बैठकर दिखावा कर रहे हो। वो सत्याग्रह की नही बल्कि सत्तागृह को हासिल करने की तैयारी कर रहे थे।   





अकसर लोगो से एक बात सुनता हुँ की आज की दुनिया में हर कोई अपना फायदा  देखता है , पहले मुझे ये बात थोड़ी गलत लगती थी पर अब सच लगने लगी है कुछ ऐसे चेहरे जिनका राजनीति के क्षेत्र में कोई बजूद ही नही था, न तो उनको कोई जनता था , न ही कोई पहचनाता था। उन्होने इस आंदोलन को अपना हत्यार बनाया और पैसे की कोई कमी थी ही नही वो जनता का ही प्रयोग ही किया गया  जो आंदोलन के बाद पैसा  बचा हुआ वो भी सब डकार गए ये सत्ता के लोभी।  कुछ ऐसे नाम जिनको आज हर कोई जानता है पहचानता है की उन्होने अन्ना के मंच का फयदा उठाकर  कुर्सी हासिल की , कुछ ने अपनी अलग पार्टी बनायीं तो कुछ बाजपा में शामिल होकर एम.पी. बन गए।   एक महिला तो ऐसी थी की उन्होने तो मतलबीपन की सीमाये ही तोड़ थी , अन्ना के मंच से पहले "आप" को मजबूत देखा तो 'आप" में शामिल हुयी , जब आप को कमजोर पड़ते देखा तो , पाला  बदलकर भाजपा में चली गयी , मैं तो कभी वोट न दू ऐसे लोगो को।  2 दिन पहले एक नई खबर सुनने को मिली तो मेरा कुछ लोगो से और भी विश्वाश उठ गया।  एक ऐसी महिला जिनका मैं बहुत आदर करता था , मैं ही नही बल्कि वो देश के सारे महिला समाज के लिए प्रेणना का स्रोत थी ,जब पता चला की उन्होने भी सत्ता के लोभ में अन्ना जी धोखा  दे दिया और अन्ना जी से बताये  बिना भाजपा में शामिल हो गयी।  दुःख इस बात की नही की आप चुनाव में खड़ी हो रही हैं , दुःख इस बात की है की एक समय में निडर होकर काम करने वाली देश की प्रथम आई पी. एस  महिला  ऐसे माहौल मे हैं  जहाँ लोगो को बहलाकर , प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन जैसी शर्मनाक घटनाएं हो रही हैं। अब अगर कोई मुझसे ये कहेगा कि नही सब लोग मतलबी नही होते तो मैं समझूगा  की वो कोनो और  गोले से आया है ई  गोले का प्राणी नही है . सच तो ई  है की ई गोले पर हर कोई इहा अपना फयदा देखत है  बस। 

      "अन्ना जी आपने जी आपने मेहनत की थी  जो भी ,फायदा उठा ले गए उसका बस ये सत्ता के लोभी "
     

        

Monday, January 12, 2015

इतने सर्द दिनों में भी तुम ............


सर्दियों के दिनों में अक्सर जब अपने गांव में  रुकता हूँ तो किसान लोगो को खेत में काम करते हुए देख सोचता हू कि इतने सर्द दिनों में और सर्द रातो में भी ये लोग कुछ सपनो को पूरा करने लिए कभी नंगे पाँव सर्दियों की रातो में गेहू के  खेत में पानी लगाते हैं तो कभी कोहरे से भरे दिन में गन्ने के खेत में काम करते हैं।   इस आस में की इस साल तो बिटिया के शादी हर हाल में करनी  है , बेटे की कॉलेज और टूशन फीस भी भरनी है ,शायद इस बार काम जरूर हो जाएगा।  ऐसे ही किसानो की व्यथा को इस कविता में व्यक्त करने की कोशिश कर रहा हू - 

इतने सर्द दिनों में भी तुम अक्सर रोज खेत पर जाते हो !
सुबह सुबह कोहरे की ओस से भी नही घबराते हो !

कपकपाते हुए हाथो से फिर गन्ना छिलने लग जाते हो !
दिन भर खेत में काम करते हो देखते हुए उम्मीद के रास्ते  !!


सोचते हो जल्दी ही मिलेगा मील से गन्ने का पेमेंट, बेटे  की कॉलेज फीस के वास्ते !
कभी बूढ़े बाप के इलाज के लिए , तो कभी बिटिया की शादी के वास्ते !!

बस इन्ही सपनो को लेकर तुम मेहनत  करते जाते हो !
इतने सर्द दिनों में भी तुम अक्सर  रोज खेत पर जाते हो !!



मील वालो को नही दीखता तुम्हारा ये कठिन परिश्रम !
वो पिछले साल का पेमेंट देने में , अगला साल लगाते है !

पैसो की पड़ती जरूरत तो तुम बैंक के चक्कर  लगाते  हो !
लोन पास हो जाए किसी तरह से बस यही दुआ मनाते हो !!

कभी बिटिया  की शादी तो , कभी बेटे की कॉलिज फीस के वास्ते !
इतने सर्द दिनों में भी तुम अक्सर रोज खेत पर जाते हो !!


ये  सिचाई विभाग वाले भी तुमको बहुत ही रुलाते है !
 समय पर नहर में पानी नही देते , देते है तो दिन की जगह रात में !

इन  ठिठुरती रातो में तुम  गेहू के पौधों को पानी देने जाते हो !
इतने सर्द दिनों में भी तुम अक्सर रोज खेत पर जाते हो !

       कभी बेटे की कॉलेज फीस के वास्ते तो कभी बिटिया की शादी के वास्ते !






Thursday, January 1, 2015

कुछ आँखों में आसूं थे और कुछ में थी मंजिल !

वर्ष 2014 काफी  संवेदनशील था दुनिया में कही  दुःख भरी ख़बरें थी तो कही ख़ुशी का माहौल , वही जाते जाते कुछ लोगो की आँखों में ख़ुशी तो कुछ की आँखों में आशु दे गया .आइये  नजर डालते कुछ ऐसी ही खबरों पर -


  • मलेशिया का विमान एम.एच .370 उड़ते उड़ते अचानक लापता हो गया , सभी ने मिलकर इसका कारण ढूंढने की कोशिश की पर  सही वजह अभी भी रहस्य  बनी हुयी है। 
  • पश्चिम अफ्रीका में इबोला नाम की महामारी ने जन्म लिया और धीरे धीरे दुनिया के  अन्य देशो को भी अपनी गिरफ्त  में ले लिया और 15000 लोग अब तक इसकी चपेट में हैं और 7000 की मृत्यु हो गयी।  
  • खेल शुरू हुआ भारत  की सत्ता परिवर्तन का ,भाजपा ने कांग्रेस का सफाया कर जीत हासिल की।  मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया गया उन्होने तुरंत अपना जलवा दिखलाया।   कुछ पुराने वरिष्ठ नेताओ  बाहर का रास्ता दिखा दिया और  नये नेताओ को वरीयता दी।  फिर मोदी जी अमेरिका गये , अमेरिका में भाषण देकर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया। 
  • स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे जी की सड़क दुर्घटना में मौत एक दुखद घटना थी लेकिन रहस्य अभी है की ये सड़क दुर्घटना थी या सोची समझी साजिस , साजिस भी हो सकती है आखिर वो महाराष्ट्र के  लोकप्रिय नेता थे और मुख्यमंत्री पद के  प्रबल दावेदार  थे।  राम जाने क्या सच था , वैसे भी  जिन जिन राज्यों में भजपा जीती है वहां नये नये चेहरों को मुख्यमंत्री  बनाया गया है ना  कि  बहुत  लोकप्रिय नेताओ को,  चाहे  महाराष्ट्र हो , हरयाणा  हो या फिर कोई राज्य मध्य प्रदेश की अलावा।   
  • जम्मू कश्मीर में बाढ़ का भयानक मंजर , लोगो को किया बेघर। 
  • मंगल पर मंगल किया भारत ने  , अंतरिक्ष की क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान बनाया।  
  • भारत से कैलाश सत्यार्थी  जी और पाकिस्तान से  मलाला  को नोबेल  पुरूस्कार।  
  • तूफ़ान हुदहुद ने मचाई तबाही।  
  • पाकिस्तान में आतंकवाद की ही शर्मनाक और दुखद घटना , जिसमे आतंकवादियों ने पेशावर एक एक स्कूल में मासूमो को अपनी गोलियों का निशाना बनाया , पाकिस्तान की नींद खुली और पाकिस्तान ने  आतकंवाद के खिलाफ मोर्चा संभाला।  
  • मदन मोहन मालवीय और अटल बिहारी बाजपेयी जी को भारत रत्न। 
  • आमिर खान साहब की फिल्म पी.के. ने देश की जनता का पथ प्रदर्शित करने की कोशिश , अच्छी कमाई भी की  और विवाद की घेरे में भी घिर गयी।  

                           


आईये  अब आँखों में नयी उम्मीदे लिए , नये सपने लिए उन  सपनो को पूरा करने की जिद लिए उनके लिए महेनत करे 2015  में इन्ही शब्दों की साथ सभी को मेरी तरफ से  "नव वर्ष 2015"   की हार्दिक शुभकामनाये !!






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