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Tuesday, November 25, 2014

चमगादड़ के बारे में कुछ रोचक बाते !

जीव जन्तुओ और  पक्षीयो की दुनिया भी कितनी दिलचस्प है , इतनी रोचक मनुष्यो की  दुनिया कहाँ ? यहाँ तो बस वही लड़ाई - दंगा  , कभी यहाँ चोरी तो कभी वहा, आज यहाँ इतने मारे गए  , आज वहा उस नेता ने अपने भाषण में हमको तुम्हारे खिलाफ भड़काया  तो कल वो दूसरा नेता तुमको  हमारे खिलाफ भड़का रहा था।   फिलहाल हम कुछ देर के लिए इन सब से थोड़ा दूर जाते हैं एक विचत्र प्राणी की दुनिया में आज हम बात करेंगे चमगादड़  के बारे में जो की अपने आप में एक विचत्र प्राणी है।  सबसे पहले कुछ रोचक  बाते जानते है चमगादड़ के बारे में , बाद में चमगादड़ पर हो रहे कुछ शोध के नतीजों के बारे में जानेंगे।  

चमगादड़ के बारे में कुछ रोचक बाते इस तरह है - 

(1)  चमगाड का जंतु वैज्ञानिक नाम  'टैरोपस मीडिएस'  है और ये रात्रिचर  प्राणी है।  

(2) चमगादड़ स्तनधारी होते हुए भी अन्य पक्षियों से तेज उड़ सकता है। 

(3) चमगादड़ अंडे नहीं बल्कि बच्चे देती है।  

(4) चमगादड़ के मूह और कान चूहे से काफी मिलते जुलते हैं।  

(5 ) चमगादड़ फलाहारी और कीटभक्षी दोनों तरह के होते हैं।  

(6 ) चमगादड़ में शरीर पर जो त्वचा होती है उसका आकर पैराशूट जैसा  होता है जिसको आप उड़नझिल्ली भी कह सकते हो।  




(7)   चमगादड़ो की अपनी एक रडार प्रणाली होती है जिसकी मदद से ये अँधेरे में अपनी मंजिल से पहुँचते है मतलब की  रात में उड़ते समय चमगादड़ अपने मुख से उच्च आवृत्ति की पराध्वनिक तरंगें (20000 हर्ट्ज आवृत्तिवाली) उत्पन्न करता है।  जो सामने किसी ठोस वस्तु से परावर्तित होकर तत्काल चमगादड़ के मस्तिष्क को संदेश प्रेषित करती हैं, फलस्वरूप चमगादड़ अपनी दिशा बदल देता है। इसी कारण रात के अँधेरे में चमगादड़ किसी वृक्ष, पहाड़ी या मकान से टकराये बगैर अपने शिकार की तलाश में उड़ता चला जाता है।

(8) चमगादड़ को हम अँधेरे में वास करनेवाला समझते हैं, किंतु अनेक फलाहारी और कीटाहारी चमगादड़ संध्या के चमकीले प्रकाश में शिकार करते हैं और अन्य निशिचर जानवरों की भाँति बदली और कुहरे के मौसम में दिन में ही शिकार करने के लिये निकल पड़ते हैं।




चमगादड़ो के व्यवहार को लेकर  वैज्ञानिको में बड़ी उत्सुकता  देखी  गयी है।  चमगादड़ की विचित्रता को देखते  हुए आये दिन वैज्ञानिक लोग इन पर अनेक  प्रकार के शोध  करते रहते है  अपने एक शोध में वैज्ञानिको ने  चमगादड़ों की आँखों को ढककर उन्हें ऐसे कमरे में छोड़ा गया, जिसकी छत पर रस्सियाँ लटका दी गयीं थीं। उनके लिए कीट-पतंगों और फलों का भी प्रबंध किया गया था। लेकिन चमगादड़ किसी भी रस्सी से बिना टकराये उसी तेजी के साथ उड़ते रहे जैसे वे आँखें खुली रहने पर उड़ते हैं और न ही उनके शिकार करने में कोई फर्क पड़ा। इस प्रकार यह सिद्ध हो गया कि चमगादड़ों को उड़ते समय आँखों से विशेष मदद नहीं मिलती बल्कि कान और मुँह ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।

अभी हाल ही में अपने एक शोध में वैज्ञानिको ने पता लगाया की किस तरह चमगादड़ो के बीच में शिकार को लेकर प्रतियोगिता होती है और एक चमगादड़ पहले चमगादड़ को चकमा देकर शिकार को झपट लेता है।  उतरी कैरोलाइना की वेक फारेस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता आरोन कोरकोरन के शोध के मुताबिक एक चमगादड़  मुख से तेज ध्वनि करते हुए अपने शिकार तक पहुचने की कोशिश कर रहा था की तभी एक दुसरे चमगादड़          कुछ अलग तरह की ध्वनि उत्पन्न करता हुआ पहले चमगादड़ को शिकार तक पहुचने से रोकने की कोशिश कर रहा था ,उन्होने  ये पाया की जब भी दुसरे चमगादड़ ने अलग प्रकार की ध्वनि निकली तब तब पहले वाले चमगादड़ के हाथ से शिकार निकल गया।  

 आज की पोस्ट में बस इतना ही।  




Sunday, November 23, 2014

समुद्र के अंदर पानी में बसेगा ये अनोखा शहर "Ocean Spiral"

अरे ओ छोटू।  

हाँ भैया।  

कछु सुनत रो की नाय।  

का भैया ....का भयो ?  

अरे हम सुनत रहे कि जापान  2030 तक समुद्र   के नीचे एक अनोखा शहर बसाने की योजना बना रहा  है।  

भैया जी  जिस तरह से हिरोशिमा और नाकाशाखी  की तबाही  और अभी कुछ साल पहले जापान में  आई आपदा में अपना सब कुछ गवा देने पर भी जापान अपनी महेनत के  बल  पर हर क्षेत्र में कामयाबी के झंडे गाड़ रहा है उसे देखकर लगता  है निश्चय ही जापान 2030 तक समुद्र  के नीचे   अनोखा शहर  बसा ही लेगा।   


हाँ शायद ऐसा ही होगा !


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दोस्तों अब जापान के बारे में तो हम सबने अच्छे से सुना ही होगा , जिस  जापान ने एक समय में अपना सब कुछ खो दिया था वही जापान आज हर क्षेत्र में सफलता हासिल कर रहा है है।   चाहे वो अंतरिक्ष का क्षेत्र हो, या हाई स्पीड से चलें वाली ट्रेनों की बात हो या फिर परमाणु शक्ति की बात हो हर क्षेत्र में जापान ने अपनी महेनत के बल पर  कामयाबी हासिल की है. लेकिन अभी हाल ही में जापान ने एक घोषणा करके दुनिया के सारे देशो को चौंका दिया है।  



क्या आदमी पानी के अंदर रह सकता है ? हाँ अब आदमी पानी के अंदर भी रहा पायेगा क्यों कि जापान ने घोषणा की है की जापान 2030 तक समुद्र  के नीचे पानी में , सभी आधुनिक सुख सुविधाओं से युकत एक अनोखा शहर बसाने जा रहा है।   जापान  की कंपनी  Shimizu Corp.  ने इस अनोखे शहर को बनाने का जिम्मा लिया है इस शहर को बनाने में अनुमानित २५ अरब डॉलर का खर्च आएगा और इस शहर में 5000 लोग रह सकते हैं इस अनोखे शहर का नाम ओसियन स्पाइरल रखा जाएगा  कंपनी के अनुसार इस शहर के ढाँचे को तीन भाग में बांटा  गया है, ऊपरी भाग का आकार एक 500 मीटर के स्फीयर ( गोलाकार ) की तहर होगा , मध्य भाग  का आकार  एक 15 किलोमीटर  के स्पाइरल  ( कुंडली नुमा , घुमावदार ) कि  तरह होगा जिसमे   बिज़नेस कंपनी, होटल रूम और स्कूल , रहने के लिए घर इत्यादि होंगे जहा पर 5000 लोग रह सकते हैं , शहर का सबसे निचे का हिस्सा 3000 से 4000 मीटर का होगा जो की एक रिसर्च सेंटर की तरह होगा जहा पर ऐसे यन्त्र लगे होंगे जिनकी मदद से इस शहर पर जीवन के लिए  के लिए विधुत ऊर्जा उतपन्न की जा सकेगी  जहा पर शहर में बिजली की सप्लाई के लिए समुद्र तल और उसके उपरी जल स्तर के तापमान में भारी अंतर को बिजली बनाने के काम में लाया जाएगा . जिससे ऑक्सीजन की कोई कमी न रहे इसके लिए  शहर में उत्सर्जित होने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस को आक्सीजन में बदलने वाले यंत्र भी रहेंगे । इस शहर के ढाँचे को  University of Tokyo, Japan Agency for Marine-Earth Science and Technology and the government’s Fisheries Research Agency. के वैज्ञानिको में सयुंकत रूप से डिज़ाइन किया है।  


Reference - http://rt.com/news/207407-underwater-city-plan-japan/


नोट : अगर आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगे तो कृपया फॉलोवर बनकर अपने सुझाव देकर हमारा मार्गदर्शन करें . फेसबुक यूजर अब फेसबुक पेज डायनामिक पर भी इस ब्लॉग की पोस्ट को पढ़  सकते हैं , ब्लॉग के दाई और ब्लॉग के फेसबुक पेज का लिंक  दिया गया है।     

Thursday, November 20, 2014

दिल्ली में जॉब करने वालो , भैया कछु काम कर लो !


अरे ओ छोटू।  

हाँ भैया।  

कछु सुनत रहो की नाय।  

का भैया ...का भयो ?

अरे हम सुनत रहे की मुंबईवासी काम पर ज्यादा  ध्यान देते हैं और  छुट्टिया कम लेते है।  

भैया जी भारत में अक्सर जॉब करने वाले  व्यक्ति को भले ही  जितनी छुट्टियां मिले वो उसके लिए कम हैं।  लेकिन अगर ऐसे में मुंबईवासी  काम पर ज्यादा ध्यान देकर कम छुट्टिया ले और ज्यादा नाम कमाए तो शायद अब अन्य  के जगह पर जॉब कर रहे लोग भी ये रिपोर्ट पढ़कर इनसे सबक लेने की कोशिश करेंगे।  

हाँ शायद ऐसा ही होगा। 

दोस्तों इस बात से इंकार नही किया जा सकता कि एक जॉब करने वाले व्यक्ति के लिए कुछ छुट्टियां होना जरूरी है पर्सनल लाइफ के लिए भी और ऑफिसियल लाइफ के लिए भी तभी दोनों के बीच तालमेल बैठ पाता है  और जिंदगी सही से आगे बढ़ पाती है।  लेकिन भारत में हालात कुछ ऐसे हैं कि  जॉब करने वाले अधिकाँश लोगो की यही कहानी है की उनको  चाहे जितनी छुट्टिया क्यों न मिल जाए वो भी उनके लिए कम है.  एक्स्ट्रा छुट्टियां लेने के लिए वो पैसो का नुक्सान भी सह लेते हैं लेकिन अभी हाल ही में एक चौकाने  वाली रिपोर्ट सामने आई है जिसमे ये पाया गया है कि मुंबई में जॉब करने वाले लोग छुट्टियों लेने की जगह ऑफिस में काम करने में ज्यादा आनंद महसूस करते हैं।  हाल ही में एक ट्रेवल एजेंसी  एक्सपीडिया .कॉम के द्वारा भारत के 5 महानगरो में एक विशेष सर्वे किया गया और उन्होने ये पाया कि 97  % मुंबई में जॉब करने वाले लोग उतनी छुट्टियां भी नही ले पाते जितनी उनको विभाग  कि और से मिलती हैं और 46 % लोग ऐसे हैं जो छुट्टियां लेने में अपराध महसूस करते हैं।



जबकि दिल्ली  शहर कि कहानी कुछ अलग है वह पर जॉब कर रहे लोग काम करने से ज्यादा छुट्टिया लेने में आनंद महसूस करते हैं। अभी पहली छुट्टियां खत्म करके वो ओफ़िस में जाते ही अगली छुट्टी लेने की प्लानिंग करने लगते हैं।   इसके लिए वो इस बात कि भी चिंता नहीं करते कि इसे हमारी सैलरी का कितना नुक्सान होगा . 60  % लोग दिल्ली में ऐसे हैं जो पैसे कि जगह छुट्टी लेने में आराम सझते हैं बहले ही आप उनके पैसे काट लो बस उनको छुट्टी दे दो साहब।  

एक्सपीडिया कंपनी दवारा ये सर्वे ५ शहरो बैंगलोर, मुंबई, हैदराबाद  , पुणे और दिल्ली में  15 अगस्त 2014  से 17  सितम्बर 2014  के बीच  किया गया . एक्सपीडिया कंपनी के एशिया  डायरेक्टर , विक्रम महाली जी ने सर्वे के  रिजल्ट प्रस्तुत  किये ।

इस सर्वे में शामिल किये गए अन्य शहरो के परिणाम और अधिक जानकरी पाने के लिए आप रेफरन्स में दिए गए लिकं पर क्लिक्स कर सकते हैं। 

Reference - http://businesstoday.intoday.in/story/mumbai-delhi-is-the-most-vacation-deprived-city/1/212456.html

Monday, November 17, 2014

सावधान क्या आप भी रोटेटिंग शिफ्ट में जॉब करते हैं ?


 दोस्तों आज कल हम जिस तरह कि भाग दौड़ वाली जिंदगी जी रहे हैं , उस माहौल में हमारी जिंदगी की गाडी कितने समय तक चलने वाली है इस बारे में कुछ कहना मुस्किल है.  हमको ऑफिस में दिए गए काम को दी गयी तारीख तक ख़त्म कारन होता है जिसके लिए हमको ज्यादा देर तक काम करना पड़ता है , तो कभी कभी हम सुरुवात में काम पर ध्यान नही देते और बाद में तरीक पास आने पर हमको ज्यादा देर तक काम करना पड़ता है।  कभी कभी स्टूडेंट ज्यादा मार्क्स लाने के लिए ज्यादा देर तक पढ़ना होता है तो कभी कभी हमको अपने खर्चो को पूरा करने के लिए ज्यादा पैसे चाहिए होते हैं तो काम भी ज्यादा देर तक करना पड़ेगा बोले तो ओवरटाइम का अलग पैसा ! कुल मिलकर सब कुछ ज्यादा ही ज्यादा हो रहा है , सबको ज्यादा ही चाहिए ! लेकिन इस ज्यादा के चक्कर में जो अनमोल चीज काम हो रही है उस पर हमारा ध्यान ही नही  जाता ।  

अभी हाल ही में फ़्रांस की "Toulouse" और  "Swanesa" यूनिवर्सिटी के  वैज्ञानिको ने 3000   लोगो पर किये गए अपनी एक शोध में पाया कि जो लोग रोटेटिंग शिफ्ट में जॉब करते हैं ( जैसे कि एक  सप्ताह दिन में तो एक सप्ताह रात में )  उनमे याददाश्त कमजोर होने का खतरा  बढ़ जाता है और और उनकी  मानसिक कार्यक्षमता  भी कम हो जाती है।   साथ ही साथ शिफ्ट में जॉब करना  दिमाग के अलावा हमारे शरीर कि अन्य गतिविधियों पर भी बुरा असर डालता हैं और अन्य बिमारिओ को भी जन्म देता है।   

फ्रांस  की "Swanesa University " के प्रोफेसर  Dr. Philip Tucker के अनुसार शिफ्ट में जॉब करना हमारी दिमागी क्षमता को भी कम कर देता है फ्रांस में इस शोध पर काम कर रहे शोध्कर्ताओ ने 10 साल तक ऐसे लोगो कि मानसिक क्षमताओ का  समय समय पर अध्यन्न किया जो शिफ्ट में जॉब करते हैं , फ़्रांस में ये अध्यन्न  इस प्रकार के लोगो पर 1996, 2001, 2006 में किये गए    और शोध में पाया गया कि उनकी याददाश्त और दिमागी क्षमता 2001 में 1996 कि अपेक्षा कम थी और 2006 में ये और भी कम हो गयी जिन लोगो पर ये अध्ययन किया गया उनमे 32, 42, 52 और 62 वर्ष की  आयु के वो लोग थे जो शिफ्ट में जॉब करते हैं।  

शोध में उन्होने ये भी पाया कि जिन लोगो ने रोटेटिंग शिफ्ट में काम करना बंद कर दिया और वो एक ही शिफ्ट (जैसे कि दिन) में काम करने लगे तो उनकी मानसिक कार्यक्षमताओ और मानसिक गतिविधियों में  सुधार पाया गया और यादशत में भी।   अनत में इन शोधकर्ताओं का कहना है कि रोटेटिंग  शिफ्ट में काम करना बंद करके लगातार  कुछ  वर्षो तक किसी एक ही शिफ्ट में काम करके फिर से मानसिक कार्यक्षमता और याद्दाशत को सुधरा जा सकता  है मगर इसमें कम से कम 5  साल तक का समय लगता है।

इस शोध के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप रिफरेन्स में दिए गए लिंक पर क्लिक करे।

Refenrence;- http://www.forbes.com/sites/robertglatter/2014/11/04/long-term-shift-work-linked-to-impaired-brain-function/






Saturday, November 15, 2014

सबसे बड़ा हीरा.................क्या ये सच में हीरा है ?

अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !!

कछु सुनत रहो की नाय ?

का चाचा का भयो ?

छोटू हम खबर सुनत रहे की लन्दन के भूगोल वैज्ञानिको ने धरती जितना बड़ा हीरा खोज निकाला है !


चाचा अगर सच में ये हीरा है और अगर इसका 0.000000000000000000000001 हिस्सा भी हर किसी को मिले तो धरती का हर एक प्राणी मालामाल हो जाए , पर चाचा ये एक धरती के आकार का एक ग्रह है , जिसका हीरे जैसा होने का अनुमान है वरना अब तक दुनिया के तमाम देश इसके लिए लड़ मर जाते  और के पता आने वाले समय में और नयी जानकारी पता चले  इसके बारे में ! 


हाँ छोटू ऐसा ही होगा !!


दोस्तों ऊपर लिखी पंक्तियों को पढ़कर चौकना मत क्यों की शायद ये सच हो वैज्ञानिको ने एक ऐसे तारे की खोज की है जिसके बारे में उनका कहना है  कि ये तर  गैलक्सी के सबसे अजीब तारों में से एक  है। यह ग्रह अविश्वसनीय रूप से ठंडा, प्राचीन और बुझा हुआ है जो धरती के आकार के एक हीरे में क्रिस्टलीकृत (सघन)  तब्दील हो गया है !

ये बाते विस्कॉन्सिन-मिलवाउकी यूनिवर्सिटी के प्रफेसर डेविड कैपलान ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कही उनके मत के अनुसार , 'यह निश्चित तौर पर एक अद्भुत वस्तु है।' ऐसी चीजें वहां होनी चाहिए लेकिन क्योंकि इनकी चमक बहुत फीकी है इसलिए इन्हें खोज पाना बहुत मुश्किल है वाइट ड्वार्फ वे तारे होते हैं जो अपने जीवन के अंतिम अवस्था में पहुंच चुके होते हैं। मतलब इस अवस्था में इनकी एनर्जी और गर्मी के लिए जिम्मदार फ्यूजन रिऐक्शन पूरी तरह से रुक जाता है, जिसके कारण इनमें बची हुई कार्बन और ऑक्सीजन एक अविश्वसनीय घनी और ठंडी अवस्था में संघटित हो जाते हैं।





इसी आधार पर हाल ही में खोजे गए इस वाइट ड्वार्फ के बारे में  एस्ट्रोनॉमर्स का मानना है कि यह तारा एक हीरे की तरह ही ठंडा और क्रिस्टलीकृत हो गया है। जिससे इस तारे की उम्र 11 अरब वर्ष होने का अनुमान लगाया जा रहा है ! अक्सर ऐसा मन जाता है की लगभग  97 प्रतिशत तारे  वाइट ड्वार्फ में तब्दील हो जाते हैं, इस तरह के कई ग्रहों की भी खोज की जा चुकी है लेकिन इनको खोज पाना बहुत इतना आसान नही होता क्यों की  इनकी बहुत ही कम चमक होती है जिस वजह से ये धरती पर टेलिस्कोप की नजर में नहीं आ पाते।

अगर हम इसकी भूगोलिक संरचना के बारे में बात करे तो ये इस तारे  के एक पार्टनर तारे की वजह से धरती पर एस्ट्रोनॉमर्स को इसके बारे में पता चला। इसका पार्टनर तारा पल्सर स्टार पीएसआर J2222-0137 एक बहुत ही घना न्यूट्रॉन तारा है, जो जो बहुत ही तेजी से घूमता है और आकाशगंगा में किसी लाइट हाउस की तरह रेडियो किरणें छोड़ता रहता है। लेकिन पीएसआर J2222-0137 के साथ एस्ट्रोनॉमर्स ने नोटिस किया कि इस तारे की रेडियो किरणों के सामने लगातार एक अनजानी वस्तु की रुकावट आ रही है।इसको  सबसे ठंडा वाइट ड्वार्फ बताया जा रहा है।

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइन के ग्रैजुएट स्टूडेंट बार्ट डनलप ने कांफ्रेंस में बताया की , 'हमारी अंतिम इमेज में किसी भी न्यूट्रॉन तारे का चक्कर लगा रहे वाइट ड्वार्फ से 10 गुना ज्यादा ठंडे वाइट ड्वार्फ को दिखना चाहिए, हालांकि हमें कोई चीज दिखाई नहीं दी है।' 'अगर वहां कोई वाइट ड्वार्फ है, जिसका वहां होना लगभग निश्चित है, तो वह निश्चित तौर पर बहुत ही ठंडा है ,  यह डायमंड वाइट ड्वार्फ सूर्य के केंद्र से 5 हजार गुना ज्यादा ठंडा हो लेकिन फिर भी इसका तापमान 2700 डिग्री है या 4,892 डिग्री फारनहाइट है।

Reference - http://www.sciencedaily.com/releases/2014/06/140623131333.htm


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Thursday, November 13, 2014

क्या आप कमर दर्द वाली गाडी में सफर करते हैं ?



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आज कल की भाग दौड़ से भरी जिंदगी , काम की टेंसन , अधिक पैसा कमाने की होड़ में हम अपने शरीर की स्वस्थता की और ध्यान ही नही दे पाते और जाने अनजाने अनेक  प्रकार के रोगो के गाड़ियों में सफर करते करते जिंदगी गुजार देते हैं।  कभी कभी तो पता ही नही चलता की हम अब तक  किस रोग की गाडी में टहल रहे थे , जब ज्यादा ही प्रॉब्लम होती है तब  उस रोग रुपी गाडी के टिकेट चेकर रुपी डॉक्टर को अपनी चेकिंग करवाते हैं तब पता चलता है की बात कितनी सीरियस है लेकिन इन सब चीज़ो में कभी कभी हम इतनी देर कर देते हैं कि तब तक हमारे दुनिया से टहल जाने कि बारी आ जाती है।  इन्ही में से एक है कमर दर्द वाली गाडी जिसमे आज कल लगभग लगभग हर आयु का व्यक्ति जाने अनजाने सफर कर रहा है।   कमर दर्द आज के समय में एक आम बात हो गयी है।  चाहे दफ्तर में 10 घंटे काम करने वाले क्लर्क साहब हो या फिर घर में काम करने वाली महिलाएं, या फिर पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राएं कमर दर्द ने सभी को अपनी गिरफ्त में ले लिया है।   

कमर दर्द के कुछ प्रमुख कारण 


कमर दर्द निम्न कारणों से हो सकता है जिनका हम अक्सर ध्यान नही रखते -
  • गलत तरीके  से वजन उठाना , गलत तरीके से झुकना।  
  • काफी देर तक एक ही अवस्था में जुखकर काम करना कमर  दर्द का एक प्रमुख कारण है। 
  • रीड कि हड्डी में चोट पहुचना।  
  • जयदा थकान और शरीर के मांसपेशियों में होने वाले दर्द से कमर दर्द को बड़वा मिलता है।  
  • आर्थराईटिस, ऑस्टियोपोरोसिस , पथरी होने वाले संक्रमण भी कमर दर्द को बढ़ावा  देते हैं।  






कमर दर्द के कुछ प्रमुख प्रकार 


काक्सीडायनिया


मेरुदण्ड के निचे त्रिकोण के आकार की हड्डी कॉक्सिक्स में होने वाला कमर दर्द  है।  कुर्सी पर बैठकर घंटों काम करने वाले लोग इसका शिकार हो सकते हैं। दर्द वाले भाग कि  सिकाई और  दर्द निवारक इंजेक्शन के जरिए इस  दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। अधिकतर केसेस में ये पाया गया है कि ये  दर्द धीरे-धीरे खुद ही कम हो जाता है. 

फाइब्रोसाइटिस


इस प्रकार के कमर दर्द का कारण  मांसपेशियों में दर्द और कड़कपन  पैदा होना  है। जिसकी वझे से न सिर्फ पीठ में बल्कि  गले, छाती, कंधों, कूल्हों व घुटनों में दर्द कि शिकायत होने लगती है । ज्यादा तनाव व ठीक तरह से न उठना-बैठना इसके प्रकार के दर्द के कारण हैं। गर्म पानी से नहाना , मालिश, दर्दनाशक दवाओं का सेवन और रिलेक्सेशन व्यायामों के जरिए मांसपेशियों के खिंचाव व दर्द को  दूर किया जा सकता है।

आस्टियो-आर्थराइटिस


इस प्रकाार का दर्द मुख्यत 50  वर्ष से अधिक आयु वाले लोगो में होता है किन्तु  इससे कम उम्र वाले लोगों में किसी दुर्घटना के बाद कार्टिलेज में परेसानी  आने के कारण भी ये दर्द हो सकता है  इस प्रकार के दर्द कि पहचान हड्डियों के जोडों में दर्द, कठोरता व सूजन आना आदि हैं । रीढ़ की हड्डी, कूल्हों एवं घुटनों के जोडों में अक्सर यह शिकायत रहती है . 

पायलोनेफ्राइटिस


इस प्रकार का दर्द किडनी में फैले इन्फेक्शन कि वजह से होता है . कभी कभी किडनी में बैक्टिरियल इंफेक्शन  होने से तेज बुखार, कंपकंपी महसूस होने और पीठ दर्द की शिकायत रहने लगती है। अगर सही समय पर उपचार न किया जाए तो उससे किडनी को भी नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। जीवाणु नाशक औषधियों के प्रयोग से इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

स्कोलियोसिस


इस प्रकार के करम दर्द में हमको विशेष सावधानी बरतने होती है क्यों कि ये बचपन से हमको अपनी जकड में ले लेता है ,इसके कारण मेरुदण्ड सीधी न रहकर किसी एक तरफ झुक जाती है और इससे ज्यादा छाती और पीठ के नीचे के हिस्से प्रभावित होते हैं। इसके कारण शारीरिक विकास रुक जाता है, तब तक यह झुकाव साफ नजर आने लगता है। 


ये दर्द इतना भयंकर है कि अगर  समय रहते इसका उपचार न कराया जाए तो यह शरीर में विकृति व विकलांगता भी  पैदा करसकता  है। रीढ़ की हड्डी में किसी जन्मजात असामान्यता के चलते या रीढ़ की हड्डी के दुर्घटना का शिकार हो जाने पर भी स्कोलियोसिस हो सकती है।  अगर स्कोलियोसिस के सही कारण का पता चल जाए जैसे स्लिपडिस्क की वजह से है तो ‘बेडरेस्ट’ के जरिए व पैरों की लम्बाई असमान होने की वजह से है तो विशेष किस्म के आर्थोपैडिक जूतों के उपयोग से इससे बचा जा सकता है। यदि रीढ़ का झुकाव लगातार होता रहे तो आर्थोपैडिक सर्जन से परामर्श करके शल्य क्रिया भी कराई जा सकती है।

स्लिप्ड डिस्क या डिस्क प्रोलैप्स


इस प्रकार का पीठ दर्द एक आम समस्या है। इसके अंतर्गत रीढ़ की हड्डी से लिपटी मांसपेशी कमजोर पड़ जाती है । इस कारण उस क्षेत्र की रीढ़ की हड्डी का गूदेदार नुकीला सिरा बाहर निगल आता है। इस कारण असहनीय कमर दर्द होता है। कई बार यह नुकीला गूदेदार हिस्सा नसों पर इतना दबाव डालता है कि इससे पीड़ित व्यक्ति लाचार या विकलांग जैसा हो जाता है। ज्यादातर पीठ का निचला हिस्सा ही डिस्क प्रोलेप्स का शिकार होता है। इसके कारण कूल्हे या पीठ के ऊपरी हिस्से में भी दर्द हो सकता है

इन बातो पर दे ध्यान

वैसे तो कमर दर्द के सम्पूर्ण इलाज के लिए हमे डॉक्टर के पास जाना ही पड़ता है किन्तु शुवाती अवस्था में हम निम्न तरीको से कमर दर्द को बढ़ने या होने से रोक सकते हैं।  

  • सबसे पहले हमको अपने काम करने के तरीके में सुधार लाना होगा यदि हम काफी समय तक एक ही अवस्था में बैठकर काम करते हैं तो हमको चाहिए कि हम हर ४० या ५० मिनट के बाद थोड़ा ब्रेक ले।    

  •  झटके से बैठने उठने से हमेशा बचे , भारी वजन अकेले न उठाये।  

  • कैल्सियम युकत पौस्टिक भोजन ले। 

  • पीठ दर्द से बचने के लिए व्यायाम करें . नियमित व्यायाम न सिर्फ आपको पीठ दर्द से छुटकारा दिलाता है, बल्कि पुराने पीठ दर्द में भी लाभ पहुंचाता है। व्यायाम उचित ढंग से करें। गलत ढंग से किया गया व्यायाम पीठ दर्द को और बढ़ा सकता है। 


जिन लोगो को कमर दर्द रहता है लेकिन उनको तैरना आता है तो ये उनके लिए सबसे अच्छा व्यायाम  है तैरने से  से हमारे पेट, पीठ, बांह, व टांगों की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। पानी हमारे शरीर के गुरुत्वाकर्षी खिंचाव को कम कर देता है, जिसके चलते तैरते समय पीठ पर किसी तरह का तनाव या बोझ नहीं पड़ता। यह सावधानी जरूर रखें कि कुछ निश्चित स्ट्रोक के बाद अपना चेहरा पानी के भीतर जरूर कर लें। हमेशा सिर ऊपर करके तैरने से रीढ़ के अस्थिबंधों में कुछ ज्यादा ही खिंचाव पैदा हो जाता है। इस कारण पीठ दर्द बढ़ भी सकता है।


तेज चलना भी शरीर में लोच बनाए रखने के लिए लाभदायक है, किन्तु सुबह के समय, खाली पेट ही घूमना अधिक फायदेमंद होता है। दिल के रोगियों को तेज चाल  नहीं करनी चाहिए।




Reference - कमर दर्द से सम्बंधित दी गयी  उपरोक्त जानकारी के कुछ अंश  "कमर दर्द कारण  और निवारण " नामक  पुस्तक से लिए गए हैं   


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Monday, November 10, 2014

दूध पीने वाले हो जाए सावधान - एक विशेष रिपोर्ट।

अरे ओ छोटू !

हाँ चाचा !

कछु सुनत रहो की नाय !

का चाचा का भयो ?

अरे छोटू हम सुनत रहे हैं कि ज्यादा दूध पीना स्वास्थय के लिए हानिकारक है , ऐसा करने से मौत जल्दी आ जाती है !
Keywords: effects on health of drinking more milk in a day in Hindi, drinking more milk is harmful for health in Hindi

चाचा  किसी ने कभी सोचा भी नही होगा कि युगो युगो से  स्वास्थय के  लिए वरदान समझे  जाने वाले दूध को कलयुग  में इस कलंक का सामना करना पड़ेगा।  एक तो पहले ही  चाय , कॉफी जैसी चीजे आज कल लोगो कि डार्लिंग  बन चुकी हैं,  और अब इस रिपोर्ट के बाद कही दुनिया वाले दूध से बिलकुल ही तौबा न कर ले।  

हाँ शायद ऐसा ही होगा !!


जी हाँ दोस्तों , हो सकता है ऊपर कही बात आपको थोड़ी अजीब  लगे पर कुछ वैज्ञानिक अपने शोधो के परिणाम के अनुसार इस बात को बिलकुल सच मान रहे हैं कि प्रतिदिन तीन गिलास या उससे से ज्यादा दूध पीना मतलब अपनी मौत को जल्दी बुलावा देना है।  अब तक स्वास्थय के लिए सबसे अहम समझे जाने वाले दूध को संपूर्ण  पोषण देने वाला एकमात्र आहार माना   जाता रहा है।   अक्सर हमारे घरो में किसी को  चोट लग जाने पर या शरीर में जयदा दर्द होने पर दूध में हल्दी मिलकर पीने के लिए दिया जाता है जिससे आराम मिलता है , लेकिन अब एक नयी रिसर्च सामने आई है जिसके अनुसार ज्यादा  दूध पीने से हमारे शरीर में हडिड्यों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है और मौत के जल्दी आने के सम्भावनाये भी बढ़ जाती है।  अक्सर  डॉक्टर हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्सियम और दूध पीने का सुझाव देते हैं ,लेकिन ये रिसर्च उल्टा ही परिणाम दर्शा रही है.   आइये  जानते हैं क्या है ये  रिसर्च और इसके परिणाम ? 

हाल ही में स्वीडन में  किये गए एक विशेष शोध में ये पाया गया है कि  ज्यादा दूध पीने से हड्डियों के टूटने कि सम्भावनाये बढ़ जाती है और शारीरिक तनाव भी बढ़ता है. इस शोध के दौरान स्वीडन में  पिछले  20  वर्षो में  महिलाओ और पुरुषो  दोनों पर एक विशेष सर्वे किया गया।   




महिलाओ पर किये गए सर्वे में ये पाया गया कि 15541  महिलाये जल्दी मर गयीं , जबकि 17252  महिलाओ   कि हड्डियों में फ्रैक्चर हुए और ऐसा कुछ नहीं पाया गया  जिसके आदः पर  वो ये कह सके कि ज्यादा  दूध पीने से हड्डिया मजबूत होती हैं।   इस शोध में लगे वैज्ञानिको ने ये भी निष्कर्ष निकला कि स्वीडन में जो औरते प्रतिदिन 3 गिलास से ज्यादा दूध पीती हैं उनकी मौत जल्दी होने की अधिक सम्भावनाये हैं , उन औरतो की तुलना  में जो कि प्रतिदिन एक गिलास दूध पीती हैं।  

इसी प्रकार का एक सर्वे स्वीडन में पुरुषो पर  पिछले 11  वर्षो में  किया गया जिसमें  ये पाया गया कि 10112 मर चुके 5,066 कि हड्डियों में फ्रैक्चर हुए . ये औसत महिलो कि तुलना में थोड़ा काम है पर वैज्ञानिको ने कहा है कि अधिक दूध पीने वाले पुरुषो कि मौत कि अधिक सम्भावनाये हैं।  शोधकर्ताओं का कहना है कि दूध में में अधिक मात्र में पाया जाता है जिसका स्वाद शुगर से थोड़ा काम मीठा होता है जो कि मानव शरीर में स्ट्रेस , सूजन और जलन को बढ़ावा देता है इस शोध को स्वीडन कि उपसाला यूनिवर्सिटी के सर्जिकल साईन्स विभाग के लोगो द्वारा अंजाम दिया गया उनका इस शोध कार्य और उनके परिणाम को ब्रिटिश मेडिकल जरनल में प्रकाशित किया गया है।  


वैसे तो आज कल जयदा लोगो का जागना , सोना चाय और कॉफी के साथ ही होता है और दिन में भी 2  या 3  बार चाय को किश कर ही लेते हैं आखिरकार ये जीवन संगनी जो बन गयी हैं. हर चीज़ के जहा अपने फायदे हैं वह कुछ नुक्सान भी हैं मैं  ये तो नही कहता कि चाय और कॉफी पीना दूध  पीने से बेहतर है पर ज्यादा दूध पीना भी एक खतरा हो सकता है ! इस शोध की अधिक जानकारी के लिए आप रिफरेन्स में दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।  

नोट : मैं  ने कल ही अपने इस  ब्लॉग के लिए फेसबुक पेज भी बनाया है इसलिए आपसे  अनुरोध है कि जो पाठकगण फेसबुक पर ब्लॉग पढ़ते या लिखते हैं , वो मेरे ब्लॉग पर लगे के  डायनामिक  फेसबुक पेज को फॉलो करें ताकि मैं उनके कमेंट और सुझाव पढ़ सकूँ !   


Reference:   [1 ] http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmedhealth/behindtheheadlines/news/2014-10-29-milk-may-be-linked-to-bone-fractures-and-early-death/
                       [2 ] http://www.medicalnewstoday.com/articles/284530.php

   



   

Thursday, November 6, 2014

ये फंडा बढ़िया है....लगे रहो खान भाइयो !

आज  थोड़ा लीक से हटकर पोस्ट लिख रहा हूँ ,  रोचक  लगा इसलिए लिख रहा हूँ  उम्मीद है आपको  ये पोस्ट   रोचक लगेगी।  कल  जब "हैप्पी न्यू ईयर  " देखकर आया तो ये अहसास हुआ  कि आज कल बॉलीवुड की फिल्मो में  एक नया फंडा खूब सफल हो रहा है .अब का बताय भईया आप सब कुछ तो जानते हो . चलो जब लिखना शुरू कर दिया है तो बता ही देते हैं। बॉलीवुड में कुछ सफल  फिल्म निर्माताओ, निर्देशकों और अभिनेताओं  ने एक नया फंडा अपनाना शुरू कर दिया है  जो की इतना सफल हो रहा है की ये लोग अरबो कम  रहे हैं इसी फंडे का प्रयोग करके।  दरअसल आज कल हमारे तीनो खान अभिनेता फिल्मो में चोरी करने वाले रोल को बहुत ही अच्छे ढंग से पूरी मेहनत ,ईमानदारी और लगन के साथ निभा रहे हैं.  आज के समय में बॉलीवुड फिल्म निर्माताओ की बीच ऐसी फिल्म बनाने का कम्पटीशन सा  चल रहा है जिसमे बड़ी से बड़ी चोरी को तकनीक की मदद से अंजाम दिया जा सके ! एक निर्देशक , दुसरे निर्देशक की फिल्म  में  चोरी करने के ढंग को देखते हैं और उसके आधार   एक चोरी करने के एक नए ढंग की खोज करते हैं और उसको लेकर एक नयी फिल्म बनाते है और अरबो कमाते हैं साहब !

असल में आज कल टेक्नोलॉजी का जमाना है तो फिल्म में फिल्म निर्देशक एडवांस  टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके स्मार्टनेस  और इंटेलिजेंस के साथ चोरी करने के नए नए तरीके को थोड़ी बहुत इमोशनल कहानी, थोड़ा बहुत डांस मसाले के साथ  नयी फिल्म मार्केट  में उतारते  है और बॉक्सऑफिस को  हिलाकर  रख देते हैं. अजी साहब कुछ यूं समझ लो की  फिल्म में चोरी जितनी बड़ी और जितनी स्मार्टनेस से होगी फिल्म उतनी ही हिट होगी ! अब आपको भी बच्चो की तरह उदारहण देकर समझाना  पड़ता है तो लो लाइव उदारहण आपके सामने रख रहा हूँ !

                                    


(1 ) सबसे पहले बात करते हैं बॉलीवुड की अब तक सबसे जायदा कमाई करने वाली फिल्म धूम 3  की ! इस फिल्म के किरदार में  हमारे माननीय अभिनेता आमिर खान साहब  फिल्म के  बचपन वाले सीन में उनके  ईमानदार  पिताजी (जैकी श्राफ ) जी को आत्म हत्या करनी पड़ती है क्यों की वो बैंक से लिया गया लोन नही चूका पाते , वो अपने सर्कस का कमाल  बहुत ही खूबी के  साथ दिखाते हैं पर बैंक मैनेजर को वो पसंद नही आता और मैनेजर  उनका लोन माफ़ नही करता और वो आत्म हत्या कर लेते हैं ! फिल्म में  इस घटना का असर आमिर जी के दिलो दिमाग पर इतना गहरा  पड़ता है की वो फिल्म में बड़े होकर उस बैंक में सबसे आधुनिक टेक्नोलॉजी के मदद से सबसे बड़ी चोरी को अंजाम देते हैं जिस बैंक के मैनेजर की वजह से  उन्होने बचपन में अपने पिताजी को खोया था ! आमिर खान  खान साहब इस फिल्म में पुलिस की नाक में और फिल्म में इंस्पेक्टर का किरदार निभा रहे  अभीषेक बच्चन साहब की नाक में  इतना दम  कर देते हैं की कोई उनको पकड़ ही  नही पता, फिल्म के आखिर में वो जरूर पकड़ में आ जाते हैं पर अपने जुड़वाँ भाई की कमी  की वजह  से  लेकिन फिर भी दोनों भाई पुलिस को सरेंडर नही करते और एक दुसरे का हाथ पकड़कर पूल से निचे कूद जाते हैं .जिसका कलेक्शन  भारत में 351.29 करोड़ और विदेशो में 150 .06  करोड़ था !

              "वन्दे हैं हम उसके हम पर किसका जोर , उम्मीदों के सूरज निकले चारो और "

सच में आमिर जी आप फिल्म में किरदार को इतनी कुशलतापूर्वक  निभाते हैं की आप पर किसी का जोर चल ही नही सकता ! धूम फिल्म के इससे पहले वाले सभी वर्जनों  में भी स्मार्टनेस के साथ चोरी करने के कांसेप्ट को शामिल किया गया है !

(2) अब बात करते हैं दुसरे खान साहब  की और 2014  की अब तक की सबसे बड़ी फिल्म किक की इस फिल्म में देवी  लाल और डेविल(हमारे सल्लू भाई , सलमान खान साहब  ) बार बार चोरी करते हैं और पुलिस इंस्पेक्टर हिमांशु त्यागी ( रणदीप हुड्डा ) को बार बार चकमा देकर फरार हो जाते हैं और पकड़ में ही नही आते और फिल्म के आखिर में एक बहुत बड़ी चोरी को बड़ी ही होसियारी के साथ अंजाम देते हैं  ! डेविल को चोरी करनी पड़ती है  क्यों की हमारे देश कुछ गरीब बच्चे जो की  बचपन में ही अनेक प्रकार की बीमारियो का शिकार हो जाते हैं और अपना इलाज़ नही करा पाते तो डेविल जी इन अनेको बच्चो के इलाज के लिए चोरी करते हैं ! फिल्म में देवी लाल जी को चोरी करने के प्रेणना तब मिलती है जब देवी जी फिल्म में  एक भ्रस्ट बिजनेसमैन ( नव्जुदीन सिद्द्की ) से एक बच्ची के  इलाज़ के  लिए 10  लाख रूपये देने के लिए विनती करते हैं और सिद्द्की साहब उन्हे  100  रूपये देकर उनकी भावनाओ का मजाक बनाते हैं ! ये फिल्म ने 233  करोड़ का कलेक्शन किया है !

(3 ) आइये अब बात करते हैं तीसरे खान साहब शाहरुख़  खान साहब की, भला ये इस रेस में क्यों पीछे रह जाते  और बना  डाली एक ऐसी फिल्म "हैप्पी न्यू ईयर " जिसमे दुनिया की सबसे बड़ी  चोरी को हैकिंग तकनीक के सहारे से इंजाम दिया गया है बड़े ही कमाल के साथ ! लगता है जरूर ही इन्होने धूम ३ और किक  से प्रेणा ली होगी ! इस फिल्म में चार्ली ( शाहरुख़ खान ) अपनी एक टीम तैयार करते हैं और तीन सो करोड़ के हीरो की चोरी को अंजाम देते हैं ! क्यों की ये हीरे चार्ली शहाब के पिताजी मनोहर शर्मा (अनुपम खेर) की फैक्ट्री में काम करने वाले चरण ग्रोवर ( जैकी श्राफ ) ने चुरा लिए थे और इस चोरी का  इल्जाम मनोहर शर्मा जी के सर आ जाता है और उनको जेल में बंद कर दिया जाता है जहा वो एक दिन अपनी आत्महत्या कर लेते हैं. जिसका बदला चार्ली  लेते हैं.  ये फिल्म अभी भी सिनेमा घरो में धमाल  मचा  रही है और 2014  की अब तक दूसरी सबसे बड़ी (188   करोड़ का कलेक्शन कर चुकी है ) फिल्म बन गयी है और अभी तक सिनेमा घरो में चल रही है !

वैसे   हमारे तीनो खान भाइयो  के अलावा ऋतिक रोशन साहब भी फिल्म" बैंग  बैंग "में दुनिया के सबसे फेमस    हीरे  कोहिनूर की चोरी कर चुके हैं और ये फ्लिम 2014  की अब तक की तीसरी सबसे बड़ी फिल्म है कमाई के मामले  में ! जिसने लगभग 182  करोड़ का कारोबार किया !
 अब देखते हैं की आने वाली फिल्मो में  अगली सबसे बड़ी चोरी कौन करता है  !

नोट : इस पोस्ट का  उदेश्य किस भी अभिनेता की भावनाओ  या उनके द्वारा किये गए  रोल  या फिर किसी  भी अभिनेता के प्रशंषको  को ठेस पहुचना नहीं है ! इस पोस्ट में मैं ने  तीन बड़े एक्टर द्वारा   बड़ी फिल्मो में निभाये गए रोल की समानता को उजागर  किया है !

Saturday, November 1, 2014

साहब जी ये भी हैं इंडिया वाले……..

इससे बड़ा दुर्भाग्य हमारे देश का और क्या होगा कि जहा एक और हमारे देश के लोगो के काले धन से विदेशो के बैंक भरे पड़े हैं और वहीँ दूसरी और ऐसे भी लोग हैं और बस किसी तरह से जिंदगी जी रहे हैं , शायद ये रोज दुआ करते होंगे भगवान से कि इस नरक कि जिंदगी से अच्छा तो हमको मौत दे दे।   इन बेचारो को नही पता कि काला धन क्या है ? इनको तो ये भी नही पता कि क्या सरकार ने इनके लिए कुछ योजनाये भी चला रखी हैं या नही ? जवाब है शायद नही।   और अगर हैं भी तो इनको सरकारी दफ्तरों के दरवाजों से ही लौटा दिया जाता है कोई नही सुनता साहब इनकी।  


साहब मै नही जानता कि आप काला धन बापस लाने वाले हैं या नही? मै ये भी नही जानता कि अगर आप काला धन बापस भारत ले भी आये तो उसका एडजस्टमेंट कैसे करंगे ? मै ये भी नही जानता कि आप काले धन रखने वालो को क्या सजा दोगे? दोगे भी या नहीं या उनके साथ कोई समझोता करके मामले को निपटा दोगे कि चलो भैया तुम भी खुश और हम भी खुश।  मै आपसे ये भी नहीं कहता कि आपने जो अपने देश कि जनता को जो सपने दिखाकर इतना ऊँचा पद हासिल किया है आप उन सपनो को पूरा करो, मत करो साहब , ये भोली भाली जनता है लोगो कि बातो में आ जाती है , सपनो में जीकर खुश हो जाती है। मत चलाओ बुलेट ट्रेन कोई ख़ास जरूरत नहीं है उसकी , क्यों हज़ारो करोड़ खरच कर रहे  हो इस पर, इंडियन रेलवे की हालत सुधार दो , वही बहुत बड़ा उपकार होगा आपका देश की गरीब जनता पर !

   
मगर हाथ जोड़कर एक विनती हैं जरूर करता हूँ कि जिनके पास रहने को घर नही हैं, जिनके पास खाने को रोटी नही है, जो अपना इलाज नही करा सकते , जो सड़को पर सोकर जिंदगी गुजार देते हैं।  जहा हम एक और अपने घरो में दिवाली और होली मना रहे होते हैं, लड्डू और मिठाई खा रहे होते हैं वही ये लोग अपनी आँखों से देखकर , मन में सोचकर , बिना कसी को अपने दुःख बताये मन ही मन में खुश होकर भगवान को याद करके अपनी होली दिवाली मना लेते हैं , लेकिन मनाते जरूर हैं साहब उस हर चीज़ को , उस हर बात को जिसका इंडिया कि संस्कृति से गहरा नाता है ये उसका पूरी श्रद्धा से आदर करते हैं उसको मानते है क्यों कि साहब ये भी इंडिया वाले हैं।   आप भले ही कुछ करो या मत करो मगर कम से कम इनका ख्याल कर लो , इनका सहारा बन जाओ साहब जी , ये लोग बहुत दुःख दर्द में हैं।  देश कि लोगो ने अब इनको सहारा देना बंद कर दिया है , जो अमीर हैं वो अपने घमंड में चूर होकर , अपने ऊचे लाइफ स्टाइल कि दिखावटी इज्जत को बचाने के लिए इनके पास जाना नही चाहते उन्हे लगता है ऐसा करने से इनकी शान घट जायेगी। 


साहब ये बेसहारा और बेहद ही गरीब लोग भी इंडिया वाले ही हैं , इनके शरीर पर भले ही अच्छे कपडे नही हैं, इनके बच्चे भले ही नंगे हैं,या कीचड और गंदे पानी में खलते हैं , बहले ही ये भूखे सड़क पर सो जाते हैं पर इनके दिलो में भी तिरंगा रहता है साहब , ये काले धन रखने वालो कि तरह देश के साथ गद्दारी नही करते।  अंत में बस यही कहुगा कि साहब ये भी इंडिया वाले हैं इन से भी मिल लो एक बार ,अगर आप काला धन बापस लाते हैं तो उसका सबसे बड़ा हिस्सा इन लोगो को सहारा देने में खरच करो ताकि ये भी एक खुशहाल जिंदगी जी सके।  
काश भगवान ने सबको बराबर बराबर बाटी होती ये धरती और धन दौलत ।  

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