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Thursday, September 11, 2014

M.C.Mary Kom - एक प्रेरणाश्रोत !

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दोस्तों हाल ही में  रिलीज हुयी हिंदी फिल्म "मेरी कॉम " को देखने का अवसर कल मुझे मिला।  इस  फिल्म में सीखने को काफी कुछ ऐसा है जो न केवल हमको मुश्किल का सामना करने, हालात  के आगे न झुकने , और मेहनत करने की सीख देता है बल्कि हमको ये भी सीख देता  है कि एक अच्छे जीवन साथी के रूप में हमे  जिंदगी को कैसे जीना चाहिए।ये फिल्म भारतीय महिला बॉक्सर "मैरी कॉम" के जीवन पर आधारित है जिनका  पूरा नाम "Mangte Chungneijang Mary Kom" है.  मैरी कॉम का जन्म मणिपुर के एक किसान परिवार 1983 में हुआ उन्होने अपनी प्राथमिक शिक्षा "Loktak Christian Model High School, Moirang " से पास की।  नवी और दसवी की पढ़ाई निओस स्कूल इम्फाल से पास की और फिर स्नातक की डिग्री चुराचांदपुर कॉलेज मणिपुर से प्राप्त की। 


बचपन में उनकी रुचि अथेलिटिक में थी जिससे उनके पिता जी भी सहमत थे , पर  डिंगको सिंह जो की एक भारतीय बॉक्सर रहे हैं और 1998 के एशियाई गेम में गोल्ड मेडल भी जीत चुके हैं के जीवन से प्रभावित होकर   धीरे  धीरे उनका रुझान बॉक्सिंग की तरफ हो चला.  परन्तु उनके बॉक्सिंग के इस शौक से उनके पिता जी सहमत नही थे और उन्होने मेरी कॉम को बॉक्सिंग सीखने लिए मना  किया।  एक स्थिति तो एस आई की उनको अपने पिता और बॉक्सिंग में से बॉक्सिंग को चुनना पड़ा , उन्होने बॉक्सिंग को अपना सब कुछ दे दिया   और उन्होने मणिपुर स्टेट बॉक्सिंग कोच नरजीत  सिंह के मार्गदर्शन  में बॉक्सिंग में वो महारथ हासिल की उन्होने बॉक्सिंग में वो इतिहास रचा जो आज करोड़ो  लोगो के लिए प्रेरणा बन चुका  है।  

वर्ष 2005 में उन्होने के . ओनलर से शादी की और दो जुड़वाँ बच्चो को जन्म दिया शादी के बाद दो  वर्ष  तक उनका बॉक्सिंग से रिश्ता लगभग टूट सा गया था , अब उन  पर दो बच्चो और घर की देखभाल की जिम्मेदारी आ गयी थी ,इन दो सालो में उन्होने बॉक्सिंग को इतना मिस किया किया अक्सर उनकी आँखों से आसूं आ जाते थे जब वो अपने पुराने दिनों को याद करती  जब उनके पति ओनलर  को इस बात का अहसास हुआ तो उन्होने  मैरी कॉम को फिर से बॉक्सिंग शुरू करने के लिए प्रेरित किया और एक अच्छे जीवन साथी की तरह हर मुसीबत में उनके साथ खड़े रहे , उनके इस सपोर्ट और प्रेरणाओं ने बॉक्सिंग की ऊम्मीद छोड़ चुकी मेरी को एक नयी जिंदगी दी और फिर से उन्होने अपने कोच के मार्दर्शन में   दोगुनी मेहनत करके खुद को बॉक्सिंग में नया इतिहास रचने के लिए तैयार कर  लिया।  शादी के बाद भी इतना हौसला और हिम्मत दिखाकर , मुश्किलो का सामना करते हुए  उन्होने जो इतिहास लिखा उसे देखकर उनके जज्बे को सलाम  करने का मन करता है। 

उन्होने वर्ष 2001 में सिल्वर , और 2002 ,2005,2006,2008,2010  में अलग अलग शहरो  में होने वाली सभी  " Women's World Amature Boxing Championship " में लगातार गोल्ड मेडल प्राप्त किया। 

इस फिल्म के माध्यम से आज उन  अनेक लोगो को उनके जीवन के बारे , उनकी उपलब्धियों के बारे पता लग पाया है  जो अब तक उनके नाम उनके जज्बे से अनजान थे और  जो आज  किसी प्रेरणास्रोत से कम  नहीं हैं ! उनके इस जज्बे , इस अटूट मेहनत को मेरा  सलाम !

5 comments:

  1. जो सिलसिला मिल्खा सिंह से शुरू हुआ है और मैरी कोम तक पहुंचा है उसे जारी रखना चाहिए फिल्म इंडस्ट्री को ... आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देती फिल्मों की जरूरत रहती है हमेशा ...

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  2. सच कहा दिगंबर जी आपने !

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  3. वाह...सुन्दर और सामयिक पोस्ट...
    समस्त ब्लॉगर मित्रों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@हिन्दी
    और@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

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  4. Beautiful blog, I read quite some now, and I love your originality,
    from harry

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  5. सुन्दर और सामयिक पोस्ट.

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