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Wednesday, August 21, 2013

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से होगा अब कैंसर का इलाज




अक्सर जब परेशान  होते है , क्रोधित  होते हैं या नकारात्मक भाव हमारे मन में आते है तो उसके उपाय के लिए हमको खुद ही अपने पर काबू रखना होता है या  खुद ही हम अपनी सोच के जरिये इन सब पर काबू पा सकते है. हमारे शरीर में बीमारी  से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता होती है किस में कम होती है तो किसी में ज्यादा । 


  मगर कुछ भयंकर बीमारिया ऐसी होती है , जिनके आगे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी जवाब दे जाती है कैंसर भी इन ही बीमारियों में से एक है ,मगर हाल ही में कुछ अमेरिकी वैज्ञानिको ने ऐसी खोज की है  जिसमे कैंसर से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली में बदलाव करके काफी हद तक इस से निजात पायी जा सकती है वैज्ञानिकों के अनुसार  शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली बेहद संवेदनशील  होने के साथ संतुलित होती है, जो शरीर में घुसपैठ करने वाले विषाणुओं और रोगाणुओं से लड़ती है, लेकिन वह शरीर के अपने उत्तकों  से नहीं लड़ पाती 

वैज्ञानिको के इस शोध  का ये परिणाम  ‘नेचर मेडिसिन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. जिसके अनुसार फिलाडेल्फिया के बाल अस्पताल के शोधकर्ताओं ने  जानवरों पर ये शोध किया है जिससे ये पता चला है कि प्रतिरोधक प्रणाली के संतुलन में बदलाव करने से कैंसर का एक नया इलाज ढूंढ़ा जा सकता है।  वैज्ञानिकों के मत के अनुसार  जब रोग प्रतिरोधक प्रणाली शरीर के ही उत्तकों पर असर करने लगती है तो 
कई गंभीर बीमारियां जैसे टाइप 1 डायबिटीज हो जाती हैवैज्ञानिको द्वारा  की गयी इस शोध का विवरण कुछ इस तरह है 

    ट्रेग सेल्स कैंसर और ऑटोइम्यून डिजीज में शोध का एक नया और चर्चित क्षेत्र है. ऑटोइम्यून डिजीज का संबंध उन बीमारियों से है, जो रोग प्रतिरोधक प्रणाली से ही शरीर के अंदर के ऊतकों के नष्ट होने के कारण होती हैं.यह रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा है. प्रतिरोधी प्रणाली सामान्य तौर पर शरीर को बाहरी हमलों से बचाती है.शोधकर्ताओं ने प्रतिरोधी प्रणाली को प्रभावी तरीके से नियंत्रित कर ट्रेग फंक्शन को तितर-बितर करने की कोशिश की! 

इस शोध में शामिल वैज्ञानिक  डॉ. वायने हैंकॉक ने कहा, ‘हमें ट्रेग फंक्शन को इस तरह से तितर-बितर करने की जरूरत थी जिससे कि वह ऑटोइम्यून रिएक्शन किए बिना एंटी ट्यूमर एक्टीविटी करे.’शोधकर्ताओं ने दो स्थितियों में शोध किए. पहली स्थिति में उन्होंने उन चूहों पर शोध किया जिनमें ट्रेग के लिए ज़रूरी रसायन नहीं था, जबकि दूसरी स्थिति में उन्होंने एक ऐसी दवा का इस्तेमाल किया जो एक सामान्य चूहे में सामान प्रभाव डालता था. इन दोनों शोध में प्रतिरोधी प्रणाली में बदलाव के कारण फेफड़े के कैंसर में वृद्धि को रोकने में सफलता मिली

डॉ. हैंकॉक ने कहा, "इससे सही मायने में एक ऐसे नए क्षेत्र ‘कैंसर इम्यूनोथेरेपी’ की ओर बढ़ा जा सकता है जिसमें काफी संभावनाए हैं."! अब देखना ये है कब तक इस शोध का फायदा कैंसर से जूझ रहे काफी मरीजो को मिलता है। 


Keyword: प्रतिरोधक क्षमता, कैंसर,कैंसर इम्यूनोथेरेपी !
References : www.nature.com, BBC News

Saturday, August 17, 2013

Electricity from Human Urine / मानव मूत्र से प्राप्त होगी ऊर्जा


"Using the ultimate waste product as a source of power to produce electricity is about as eco as it gets," said Dr. Ioannis Ieropoulos of the Bristol Robotics Laboratory in England. His lab has created electricity by passing human urine through stacks of microbial cells. They react with compounds like chloride, sodium and potassium to give off a charge that's enough to make a brief call.



अरे ओ छोटू !!

हाँ चाचा !

कछु सुनत रहो की नाय ?

का चाचा का भयो ?

यही की अब वैज्ञनिको ने एक ऐसी खोज  की है जिसकी मदद से मनष्य के मूत्र  से कुछ हद तक ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है और इस प्रकार उत्पन्न ऊर्जा से आप अपना मोबाइल  रीचार्ज कर सकते हो !

चाचा अगर सच में दैनिक जीवन में ऐसा होने लागा तो मानव मूत्र भी अब बेकार नहीं जाया करेगा मतलब वो भी कीमती है अब !

हाँ छोटू शायद ऐसा ही होगा !

जी हाँ शायद पोस्ट पढकर  आपको थोडा अजीब सा लगे  पर वैज्ञानिको ये अब संभव कर दिखाया है ये है अब तक गाय के मूत्र का उपयोग दवाई बनाने में किया जाता था लेकिन अब मानव मूत्र भी बेकार नहीं है मानव मूत्र की शक्ति को वैज्ञानिको ने पहचान  लिया है
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ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने ऐसी अनोखी विधि की खोज की है जिसके बारे में उनका कहना  है कि उसका उपयोग कर मोबाइल फोन को मानव मूत्र की सहायता से चार्ज किया जा सकता है. ब्रिस्टल रोबोटिक्स लैबोरेटरी में काम करने वाले वैज्ञानिकों ने यह ‘‘महत्वपूर्ण’’ खोज की है. खोज में उन्होंने पाया कि मूत्र के जरिए बिजली उत्पन्न कर मोबाइल फोन को चार्ज किया जा सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट ऑफ इंग्लैंड (यूडब्ल्यूई), ब्रिस्टल के विशेषज्ञ डॉ. लोएनिस लेरोपौलस ने कहा कि हम इस बात से बेहद उत्साहित हैं कि ऐसा दुनिया में पहली बार हुआ है. किसी ने मूत्र से ऊर्जा उत्पन्न नहीं की थी. इस तरह की खोज बहुत उत्साहवर्धक है. 

इस अपशिष्ट पदार्थ को बिजली उत्पन्न करने के लिए ऊर्जा के रूप में प्रयोग करना पर्यावरण के लिए भी सही है. लेरोपौलस ने कहा कि हमारा मूत्र एक ऐसा उत्पाद है जो कभी भी खत्म नहीं हो सकता. इससे ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए मूत्र को माइक्रोबियल ईंधन कोशिकाओं (एमएफसीज) के कैसकेड से प्रवाहित किया जाता है जिससे बिजली उत्पन्न होती है. 
दोस्तों अब देखना  ये है की कब तक हम लोग अपने मूत्र से होने वाले इस फायदे का  लाभ ले पायेगे ! 

Wednesday, May 15, 2013

"पाकिस्तान - दो तस्वीर "



भारत के साथ जब पाकिस्तान का जब जिक्र  होता है चाहे वो जिक्र किसी भी बात को लेकर क्यों न हो तो उस जिक्र का अपना एक महत्व होता  है जहा बात आ जाती है आन और शान की जो उस जिक्र को बेहद ही रोमांचक बना देता है
                                 अभी हाल ही ( फ़रवरी २०१३) में भारत के एक वरिष्ट पत्रकार श्री लज्जाशंकर हरदेनिया जी पाकिस्तान यात्रा पर गए थे . उनकी इस पाकिस्तान  यात्रा पर अप्रैल माह में " एन. आई . टी.टी.टी. आर" , संस्थान भोपाल   में एक व्यख्यान  का आयोजन हुआ और मुझको  इस व्यख्यान को सुनने का अवसर मिला . जिसको सुनने के बाद मुझे पाकिस्तान की दो तस्वीर साफ़ नजर आ रही थी . श्री हरदेनिया जी ने अपनी पकिस्तान यात्रा का जो विवरण किया उसके अनुसार पकिस्तान की आवाम को दो हिस्सों में बाटा जा सकता है जिसमे एक हिस्से में वो पाकिस्तान के वो बुद्धिजीवी लोग आते है जो भारत के साथ मैत्री सम्बन्ध चाहते है और दोनों देशो के बीच शांति और प्रेम को बढावा देना चाहते है . दुसरे हिस्से में वो वह के वो लोग है जो वह की जनता में भारत के खिलाफ जहर पैदा करते है और अनुचित गतिविधियों को बढावा देते है . 



                           श्री हरदेनिया जी वह ११ दिन रहे और उन्हें इन ११ दिनों में कराची शहर और आस पास के क्षेत्र में अनेक प्रकार के लोगो से मिलना हुआ . उन्होने बताया की उन्हें वह किसी भी प्रकार की कोई तकलीफ नहीं हुयी किसी भी चीज़ को लेकर सभी ने उनका आदर सत्कार किया. उन्होने अपने इस व्यख्यान में कुछ रोचक चीजो का भी जिक्र किया जिनमे से कुछ इस तरह है -





(१) एक बात उन्होने  पाकिस्तान की एक चर्चित महलिया सीमा किमरानी जी के बारे में कही , ये पाकिस्तान की वो महिला है जो पाकिस्तान में रहकर भी वहा पर भारतीय शास्त्रीय संगीत को जिन्दा रखे हुए है और  इसकी शिक्षा देती है ये एक ऐसी निडर महिला है जिन्होंने पाकिस्तान के वजीरे आला के तमाम कोशिशो और जुल्मो के बाबजूद  भी अपनी भारतीय शास्त्रीय संगीत की पूजा को नहीं छोड़ा .

(२) जब एक भारतीय और पाकिस्तानी के बीच बात हो रही हो और कश्मीर का जिक्र न हो ऐसा शायद ही हो कश्मीर के बारे में भी मुझे कुछ नया सुनने  को मिला हालाकि ये बात काफी लोगो को मालूम होगी पर मुझे उस दिन ही पता चली इसमें कोई शक नहीं आज कश्मीर की जनता सबसे जायदा परेशान  है मगर इसके लिए कौन जिम्मेदार है भारत  या पाकिस्तान यहाँ एक बात सुनने को ये मिली की जब भारत और पकिस्तान का विभाजन हुआ तो उस समय कश्मीर के राजा  की एक बहुत बड़ी गलती ये थी की वो ये निर्णय ही नहीं ले पाए की उन्हें पकिस्तान में जाना है या भारत में रहना है

 .(३) तीसरी बात ये पता चली की जब पकिस्तान के एक व्यक्ति ने श्री हरदेनिया जी से कहा की आपके भारत में एक भी ऐसा नेता नहीं हुआ जिसने पाकिस्तान का भला चाहा  हो तब हरदेनिया जी ने भी एक हिन्दुस्तानी होते हुए इस बात को बर्दास्त नहीं किया और कहा जनाब  जब भारत का बटवारा हुआ था तब भारत सरकार  को पाकिस्तान को ५० करोड़ रूपये देने थे  जिसमे हो रही देरी को लेकर महात्मा गांधी जी ने एक अनशन किया और भारत सरकार को मजबूर किया की वो पाकिस्तान को ५० करोड़ रूपये हर हाल में दे , जो दिए भी गये. और ये भी पता चला की महात्मा जी की इस बात से क्षुब्ध होकर नाथू राम गोडसे ने उनकी गोली मारकर  हत्या की . 


(४) एक बात और हरदेनिया जी ने कही की वहा ११ दिनों तक उन्होने जो न्यूज़ पेपर पढ़े उनमे से किसी में भी उन्होने कोई ऐसी खबर नहीं पढ़ी जो भारत के खिलाफ हो या भारत के प्रति भड़काऊ विचार उजागर करती हो .

                                        वहा के हालतों को श्री हरदेनिया जी ने देखा और यही निष्कर्ष निकला  की पाकिस्तान की आवाम भी बहुत परेशान है दोनों देशो के बीच बनी हुयी अनबन को लेकर. पाकिस्तान में शिक्षा के हालात भारत से कही जायदा बत्तर है

 नोट - मेरा सभी पाठक बन्धुओ से ये अनुरोध है   उपरोक्त सभी बातो से ये निष्कर्ष न निकाले  की मै पाकिस्तान की तारीफ़ कर रहा हु मै इस लेख के माध्यम से केवल वहा के हालातो से उजागर करा रहा हु जो की मै ने हरदेनिया जी के इस व्यख्यान में नज़र आई .


                              



                                                 आईये अब आते है हाल ही में घटी कुछ घटनाओं पर जिनमे से कुछ इस प्रकार है -

(१) अभी हाल में पाकिस्तान की जेल में बढ़ भारतीय सरबजीत सिंह की उस जेल में बंद पाकिस्तानी कैदियों द्वारा हमला किया गया जिसके कारण उनकी मौत हो गयी .

(२) बॉर्डर पर भी पाकिस्तानी सैनिको द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ की घटना होती रहती है और वो २ भारतीय सैनिको  सर काट कर ले गये.

(३) भारत में मुंबई बम ब्लास्ट होना .

                                          पाकिस्तान की और से बढ़ रही इन गतिविधियों से अभी तक ये साफ़ है की उसका भारत के प्रति रूख बेहद ही ख़राब है जिसमे दोस्ती की कही कोई किरण नज़र नहीं आती है और ऐसा करके वो हम भारतीय को ही नहीं बल्कि  शायद  पाकिस्तान की उस आवाम को खुश नहीं देखना  चाहता है जो जो शान्ति से जीना चाहती है . 

                           

Wednesday, April 17, 2013

अब सुनिए अपने मस्तिष्‍क का संगीत


" दोस्तो, हम इस दुनिया में विज्ञान के चमत्कारों के बारे में न सिर्फ सुनते और देखते है बल्कि उनको अपने जीवन में उपयोग भी करते है. आज के समय में विज्ञान ने जितनी तरक्की की है शायद ही किसी और क्षेत्र में इतनी तरक्की हुयी हो. विज्ञान और कला दोनों अलग अलग क्षेत्र है और मानव जीवन में दोनों का अपना अपना विशेष महत्व है जिसको की नाकारा नहीं जा सकता विज्ञान और कला दोनों की अलग अलग दुनिया है दोनों के रास्ते अलग अलग है. ये दोनों किन्ही शक्तियों से कम नहीं है और जरा सोचिये की अगर इन दोनों शक्तियों को मिलाकार कोई नयी तकनीक बनायीं जाए तो उसका अपना एक अलग ही महत्त्व होगा आज के समय में कुछ वैज्ञानिक ऐसी ही कुछ तकनीको पर काम कर रहे है जो की काफी रोचक है. "

रोबोटिक्स और आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में की गयी अधिकतर रीसर्च ऐसी ही है जिनमे कला और विज्ञान दोनों का उपयोग है. जैसे की रोबोट द्वारा गाना गाना, रोबोटिक में भावनाओं को समझने की दिशा में काम चल रहा है. ऐसे ही एक तकनीकी सिस्टम को विकसित किया है "University of Electronic Science and Technology, Chengdu, China" के वैज्ञानिक JING HU ने जो की हमारे मष्तिस्क की ब्रेन की तरंगो को म्यूजिक में बदलता है जिसको हम सुन सकते है वैज्ञानिको का कहना है की ब्रेन म्यूजिक की मदद से हम अपने मष्तिस्क की तरंगो को कंट्रोल कर सकते हैं, अक्सर हमारे जीवन ऐसी स्थितियाँ आती है जैसे की गुस्सा आना, अत्यधिक उत्साह, निराश होना, घबराहट और डर इन में हम ब्रेन म्यूजिक की हेल्प से इन पर काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं.

उपरोक्त सिस्टम में 2 अलग अलग तकनीको का प्रयोग किया गया है-

1. Electro encephalo graphy (EEG) जो की ब्रेन तरंगो को कंपोज़ करती है ये तकनीक हमारे मष्तिस्क और खोपड़ी की सभी किर्याओ को रिकॉर्ड करके उनको इलेक्ट्रिक सिग्नल में बदलती है (ठीक उसी तरह जैसा की आप हॉस्पिटल में मरीज के बेड के पीछे लगी इलेक्ट्रॉनिक यन्त्र में उस मरीज के हिर्दय की धडकनों की गति का ग्राफ देखते हो ). बाद में एक विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से इन इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों को म्यूजिक नोट्स में बदला जाता है और उनको प्ले किया जाता है इसे आप कुछ इस तरह समझ सकते है जैसे की आपके मोबाइल में जमा रिंगटोन को आप प्ले करते हो असल में मोबाइल में जमा हर रिंगटोन का एक विशेष डाटा होता है जिसको आप मोबाइल में देख भी सकते हो और आपके मोबाइल का सॉफ्टवेयर रिंगटोन के उस डाटा को पढकर उसके फॉर्मेट के अनुसार प्ले करता है जिसको आप सुन पाते हो.



2. इस सिस्टम में प्रयोग होने वाली दूसरी तकनीक है Functional Magnetic Resonance Imaging or MRI, जो की अत्यंत ही महत्वपूरण है जिसकी मदद से ब्रेन तरंगो को कंट्रोल किया जा सकता है. ये तकनीक मष्तिस्क में ब्रेन में ब्लड और ऑक्सीजन लेवल के लेवल को मापकर ये पता लगाने में सहायक है कि ब्रेन का कौन सा हिस्सा अधिक ऑक्सीजन नेटेड और एक्टिव है और कौन सा हिस्सा कम? जिसकी जानकारी से हम उपरोक्त सिस्टम कि मदद से उसको कंट्रोल कर सकते हैं मेडिकल साइंस में बायोफीडबैक थेरेपी (Biofeedback therapy) में मरीज इस सिस्टम कि मदद से ब्रेन क्रियाओं को कंट्रोल कर सकते है. 

अंत में हम ये उम्मीद और दुआ करते है कि ब्रेन तरंगो के म्यूजिक कि मदद से ब्रेन क्रियाओं पर कंट्रोल पाने वाली इस तकनीक का उपयोग सफल और हितकारी साबित होगा. अधिक जानकारी के लिए आप www.asia.cnet.com वेब साईट पर क्लिक करे. University of Electronic Science and Technology, Chengdu, China" की वेब साईट और कुछ अन्य वेब साईट पर भी आप ब्रेन तरंगो के म्यूजिक का विडियो और ऑडियो सुनकर इसका आन्नद ले सकते है.

Wednesday, February 13, 2013

भक्ति के साथ साथ सेहत के लिए भी लाभप्रद है "ओउम" ध्वनि !




हमारे शास्त्रों में ओउम ध्वनि को विशेष महत्व दिया गया है , प्राचीन काल में ऋषि मुनि जब वर्षो तक तपस्या करते थे तो ये "ओउम" ध्वनि उनको काफी शक्ति प्रदान करती थी .शास्त्रों के अनुसार समस्त बिरम्हांड इस "ओउम" ध्वनि में समाया हुआ है ओउम कोई शब्द नहीं बल्कि एक ध्वनि है शास्त्रों के अनुसार ये सर्वशक्तिमान है ! ये ध्वनि भगवान् का ही एक नाम है अतः इसके जाप से हम भगवान् को भी याद करते है !

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अब इसके बारे में ज्यादा   विस्तार से न बताकर आइये बात करते है की "ओउम" ध्वनि सेहत के लिए कैसे लाभप्रद है !
सबसे पहले तो ऐसा माना  जाता  है की ओउम ध्वनि का उच्चारण हमारे वातावरण को शुद्ध करता है दुसरे ओउम ध्वनि मष्तिस्क के लिए काफी हितकारी है ! इसका उच्चारण करने से न केवल मष्तिस्क के रोगों से छुटकारा मिलता है बल्कि मष्तिस्क का व्यायाम भी होता है जब हम ओउम ध्वनि का उच्चारण करते है तो इससे उत्पन्न कम्पन्न हमारे मष्तिस्क को शांति और स्थिरता प्रदान करते है और सकारात्मक सोच बढाने में भी सहायक है , 


जब हमारे मष्तिस्क के अस्वस्थ होने के कारण उसके आंतरिक तंत्र में गड़बड़ी आती है तो इसका असर हमारी स्मरण शक्ति पर पड़ता है जो की कम होती जाती है ऐसा खासकर 6० वर्ष   की आयु के बाद होता है ऐसे में ओउम ध्वनि का उच्चारण काफी लाभप्रद है स्मरण शक्ति को भी बढाता    है   एक विशेष बात ये है की जब आप किसी कार्य में व्यस्त  हो य ड्राइविंग कर रहे तो ओउम ध्वनि को न सुने (खासकर   ऐसे काम जिनमे मष्तिस्क की एकाग्रता की जरूरत होती है )

Wednesday, January 2, 2013

फूलो को खिलने दो


खिलते हुए फूलो का अभी और खिलना बाकी है !
इनके रंगों की सुन्दरता का अभी और चमकना बाकी है !!
इनकी लहलहाती हुई बहारो का अभी और निकलना बाकी है !
मत तोड़ो इनके सपनो को , इनकी हसरतो का अभी और महकना बाकी है !!
आओ मिलकर सहयोग करे इनके सपनो को पूरा करने में !
इनके सपनो को अभी ऊचाईओ को छूना बाकी है !!
गौर से देखो इनकी नयी नयी उमंगो को ,ये कहती है मुझे खिलने दो क्यों की
मेरे साथ कुछ बूढी आखों का सपना बाकी है !
ये कहती है अभी हमको बुद्धि और ज्ञान का दीप जलाना है !
खुशहाली हो सदा यहाँ पर , हमे जंगलराज को मिटाना है !!
न रहे कोई दानव यहाँ पर हर तरफ रौशनी हो शिष्टाचार और स्वाभिमान की !
आओ हम सब दुआ करे इसके लिए , अभी चमन में इन्ही उम्मीदों को पूरा होना बाकी है !!
फूलो को खिलने दो अभी इनका और खिलना बाकी है !!

                                            ------ इनकी खुशियों के नाल मनोज

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