Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Monday, December 31, 2012

नववर्ष २०१३ की हार्दिक शुभकामनाये !!




 
आने वाला नया साल २०१३ सभी की जिन्दगी


में खुशिया लाये ! देश और विश्व में शुख शान्ति बनी रहे !



सभी को नववर्ष २०१३ की हार्दिक शुभकामनाये

Tuesday, November 13, 2012

सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !!

पर्व है पुरुषार्थ का, दीप के दिव्यार्थ का !

देहरी पर दीप एक जलता रहे!

अंधकार से युद्ध यह चलता रहे !!



हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा !

जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा !!



दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है!

कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है !!



आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए !

प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!



झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना !

आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!



Thursday, November 8, 2012

"दो पल्हड़े तराजू के " - नैतिकता और अपराध


आज के समय में हमारे देश में दिन प्रतिदिन अपराध बढते जा रहे है ,ये अपराध मुख्यत लूट पाट , चोरी डैकती, छेड़छाड़ रेप , हफ्ता वसूली , मदिरापान करके उत्पात मचाना , हत्या , किसी की संपत्ति पर जबरन कब्ज़ा करना , धोखा धडी आदि की घटनाओं से सम्बंधित होते है .  बहुत पहले से मै ऐसा सुनता  आ रहा  हूँ की हमारे देश में शिक्षा की कमी के कारण ये अपराध बढते है क्यों की अशिक्षित लोग ही मुख्यत रूप से ये अपराध करते है  पर आज के समय में मुझे ये कथन सही नहीं लगता आज के समय में  अधिकतर लोग शिक्षित है और फिर  भी शिक्षित व्यक्ति भी इन अपराधो को अंजाम देता है उदाहरन  के तौर पर मै कहा सकता हु की आज के समय में बड़े बड़े पदों पर बैठे शिक्षित अधिकारी गण और नेता लोग भी इन अपराधो को अंजाम दे रहे है . इन अपराधी में युवा वर्ग के ही नहीं बल्कि ५० से ६५ वर्ष के लोग भी शामिल है ,पुरष ही नहीं बल्कि महिलाए भी शामिल है , आये दिन इस तरह की घटनाओं को आप लोग टी वी पर देखते ही होगे जो सत्य होती है  इसलिए मुझे यहाँ उदाहरन देने की आवश्यकता नहीं है , अब ये सोचनीय बात    है की आखिर ऐसा क्या हो रहा है हमारे समाज में जो  अच्छे  पढ़े लिखे  शिक्षित लोग भी ये अपराध करते है , आखिर हम क्या खोते जा रहे है और किसके लिए ?

                   अगर आप इस सवाल का जवाब ढूँढने की कोशिश  करेंगे तो आप पायेगे  की हम शिक्षित होने के बाद भी नैतिकता को खो रहे है अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए , जिसकी वजह से दिन प्रतिदिन अपराध बढ रहे है ,  अगर हम अपराध और नैतिकता को तराजू के पल्ह्ड़ो में रखे तो जैसे जैसे नैतिकता का पल्ह्डा हल्का होता जाता है वैसे वैसे अपराध का पल्ह्डा भारी हो जाता है , आज के समय में हालात ये है की नैतिकता का ये पल्ह्डा बहुत ही हल्का हो चूका है  आज के समय में युवाओं में भी नैतिकता की बहुत कमी है उनको नैतिक शिक्षा बहुत कम दी जाती है उनको प्रोडक्ट ओरिएंटेड शिक्षा दी जाती है जिससे वो नैतिकता के महत्व को नहीं समझ पाते  यही नहीं बल्कि बड़े बड़े पदों पर आसीन अधिकारीगण   और बुजुर्ग  लोग   भी नैतिकता को भुलाते जा रहे है , अभी मै एक दिन सड़क पर साइकिल से जा रहा था की भीड़ में मै साइकिल बैलेंस नहीं कर पाया और मेरी साईकिल लगभग ६५ साल के एक ताऊ जी से थोड़ी सी टकरा गयी उनको कोई चोट नहीं आई मै ने साइकिल रोककर उनसे माफ़ी मांगी मगर उन  महाशय ने अपनी जुबान से मेरे लिए गालियों की बारिस   कर दी और २ मेरे गाल पर भी जड़ दिए . मै समझ गया और चुपचाप वह से आ गया . अब आप इसे क्या कहेंगे ? हालाकि ये कोई अपराध नहीं किया उन महाशय जी ने .  लेकिन ये घटना ये दर्शाती है की बुजुर्ग लोग भी अपनी समझदारी को खो रहे है आज कल .


                                                             
       
                         काफी हद तक टेक्नोलोजी भी अपराध को रोक सकती है जैसे की कोई व्यक्ति अगर शराब पीकर गाडी चलता है तो गाडी में ऐसे सेंसर लगाए जाए जो ये पता लगा सके की व्यक्ति ने शराब पी है और फिर चाहकर भी वो व्यक्ति गाडी न चला पाए , ऐसा वास्तव में संभव है , इसी तरह से ये भी संभव है की कोई व्यक्ति गाडी चलाते समय गाडी  में मोबाइल फ़ोन पर बात ना कर सके और  उसको गाडी चलाते  समय
 अगर नींद आये तो गाडी की गति कम हो जाए और उसको इस बात का अलर्ट हो ये सब तकनीक एक्सीडेंट को कम कर सकती है इसी तरह से टेक्नोलोजी का उपयोग और भी अपराधो को कम करने के लिए भी कर सकते है परंतू इस सब से जायदा महतवपूर्ण है नैतिकता को ना खोना अगर हमको अपराध को कम करना है तो नैतिकता को जिन्दा रखना होगा !नैतिक शिक्षा के महत्व को समझना होगा उसको उपयोग में लाना होगा  !
   आजकल विद्यालयो में भी नैतिक शिक्षा का आभाव है तो जरूरत है नैतिकविदो द्वारा आज के युवा वर्ग के लोगो में नैतिक शिक्षा के संचार की  ताकि भविष्य में अपराध का पल्ह्डा हल्का रहे . 

Thursday, April 5, 2012

अब हर किसी को एक उम्मीद है इंग्लिश से !


आज के समय में हर कोई भारतीय अच्छी इंग्लिश बोलना , इंग्लिश में लिखना  और इंग्लिश में ही अपने बच्चो कि पढाई करवाना चाहता है. आज के समय में किसी भी क्षेत्र में एक अच्छी नौकरी पाने के लिए अच्छी इंग्लिश क़ा ज्ञान  होना जरूरी है ,कैसे इंग्लिश में बोले? कैसे सही इंग्लिस लिखे? कैसे इंग्लिस में लिखे हुए को समझे ? 
                                                                              तभी तो आज के समय में इंग्लिश मीडियम स्कूल  काफी महंगे होते जा रहे है. आज के समय में भारत में हर मीडियम फॅमिली के परेंट्स अपने बच्चो को क़ा दाखिला इंग्लिश मीडियम में ही करवाते है.क्यों कि उनको एक आस रहती है कि इंग्लिश मीडियम में पदने से उनका बच्चा आगे चलकर एक अच्छी नौकरी पा सकेगा. और अपनी जिन्दगी कि जरोरतो को पूरा कर पायेगा . आज के समय में इंग्लिश स्कूलों में पदने वाले बच्चो कि संख्या 2 करोड़ को पार कर गयी  है . गरीब माँ बाप भी मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चो को इंग्लिश मीडियम में भेजते है एक आस के साथ  कि ताकि उनके बच्चो को उनके जैसी जिन्दगी ना गुजारनी पड़े. आज के समय में भारतीयों ने  अपने जीपन यापन के ढंग को भी काफी हद तक सुधारा  है . आज के समय में इंग्लिश बोलना व्यक्ति के जीवन स्तर  और उसके माहौल को प्रदर्शित  करता है . अगर हमारा बच्चा हिंदी मीडियम में पढता  है तो हम गरीब है , हमको दुःख होता है कि हमारा बच्चा आगे चलकर प्रतियोगी परीक्षा में पास हो पायेगा कि नहीं और जॉब मिल पाएगी कि नहीं . मगर अफसोश कि बात तो ये है कि हमारे देश में महंगाई ने ऐसी कमर तोड़ राखी है कि हर आम आदमी के हालत ख़राब है . इंग्लिश स्कूलों  में पढना तो दूर कि बात सही से खाना पीना भी मुस्किल है.


                                     

                                                          "साहब मेरे घर का तोता भी कहता है की इंग्लिश में रटना, बोलना   सिखाओ मुझे " . अब देखिये ना आज एके समय में भारत में कुछ ऐसी इंटरनेशनल  स्कूल है जिनमे फर्स्ट क्लास से ही एक बच्चे को पढाने क़ा एक महीने क़ा खर्च ६००० से जयादा है . इसी तरह कुछ और भी  प्राइवेट स्कूल है जिनमे फीस  बहुत महँगी है . इंग्लिश मीडियम के सरकारी स्कूलों कि संख्या हमारे  देश में बहुत कम है और जो है भी तो उनके टीचर  इंग्लिश में इतने शिक्षित ही नहीं है . अब जरा सोचिये कि क्या ये सही है? .हर तरफ से आम आदमी को ही रोना पड़ता है सरकारी दफ्तर से लेकर सरकारी नौकरी तक ? मजे कि बात तो ये है साहब कि आज कल हर कोई प्राइवेट हॉस्पिटल , प्राइवेट स्कूल , प्राइवेट कॉलेज, प्राइवेट बस , प्राइवेट बैंक ,में जाना पसंद  करता है पर फिर भी नौकरी सभी सरकारी चाहते है !. 
    चलो  किसी तरह से जुगाड़ पानी करके हम  अपने बच्चो को इंग्लिश मीडियम में पढाते है अच्छी स्नातक कि डिग्री दिलवाते है पर फिर भी  एक उम्मीद के अनुसार  नौकरी पाने के  लाले पड़ जाते है . आखिर कहा है कमी? कैसे सुधार जाये भारत  के एजुकेसन सिस्टम को सिब्बल जी जिससे कि बेरोजगारी कम हो जाये ? आप टैक्स पाने के लिए शिक्षा के वियापारियो  को  इंजीनियरिंग कोलेज , प्राइवेट स्कूल खोलने और चलाने  की इजाजत तो  दे देते हो पर बाद में ये नहीं देखते कि वो विद्यार्थी को कितना लुटे है.यूनिवर्सिटी से निर्धारित फीस से कही गुना जायदा फीस वसूलते है ये कोलेज वाले. और ना ही ढंग के उपकरण और शुविधा  होती है इनमे.  और इस से भी बड़ी बात तो ये है कि आप SC/ST के विद्यार्थियों को तो स्कोलरशिप दे देते  हो . हर सरकारी नौकरी में उनके लिए सीट फिक्स रहती है . उनको हर एक्जाम  में आयु में भी छूट दी जाती है और आवेदन फीस भी बहुत कम होती है. क्या ये जरूरी है कि हर  SC/ST वाले भाई बंधू गर्रेब हैं ?. जरा आकर देखिये साहब सामान्य वर्ग में आने वाले लोगो कि हालत भी इकिटने ख़राब है ? अब आप ही बताइये अभी मेरे एक सामान्य वर्ग के बंधू ने गाते 2012 (कंप्यूटर स्सिएंस)  की परीक्षा  सामान्य वर्ग के लिए पस्सिंग मार्क्स 31.54 थे ओ.बी.सी. वर्ग के लिए 28.39 थे और SC/ST के 21.03. अब सिब्बल जी आप ये बताये कि यहाँ जाती वाद क़ा क्या मतलब एक SC/ST क़ा स्टुडेंट कम मार्क्स लाकर भी उससे कही जायदा मार्क्स लाने वाले  सामान्य वर्ग के स्टुडेंट से काफी अच्छी सीट पा ज़ाता है . क्या ये न्याय  है ? क्या उस बेचारे क़ा कसूर ये है कि वो जायदा मार्क्स लाया या फिर ये कि वो सामान्य वर्ग से है ?.

नोट: पाठकगण  यहाँ ध्यान दे कि मै यहाँ SC/ST वर्ग को मिलने वाली शुविधाओ के खिलाफ नहीं हू बल्कि मै यहाँ सामान्य वर्ग के एक स्टुडेंट कि विय्था को उजागर कर रहा हूँ. और  भारत  के  एजुकेसन  सिस्टम  पर  प्रकाश   डालने  कि  थोड़ी  कोसिस  की है !  

Sunday, March 18, 2012

वाई फाई नेटवर्क एक्सेस करते समय रखे विशेष ध्यान

" अगर आप वाई  फाई नेटवर्क को एक्सेस कर रहे हो तो आपको नेटवर्क से सम्बंधित काफी सावधानी बरतनी होगी क्यों की आपका डाटा चोरी हो सकता है खासकर की  अगर कोई और अमानीय व्यक्ति आपके नेटवर्क को एक्सेस कर रहा है तब।  इसके  लिए आपको अपने नेटवर्क को सिक्योर बनाने के लिए 'सिक्योरिटी की' भी का प्रयोग करना होगा , जिसकी मदद से आप किसी भी  बहारी यूजर  फ्रीलोडर्स और एक्सेस से बच सकते है।  इसलिए अगर आप इस तरह के सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा लेते हैं, तो आपके पर्सनल डाटा के सुरक्षित रहता है।" 

आजकल अक्सर ये देखने को मिलता है की  पब्लिक एरिया में कुछ फालतू हॉट-स्पॉट  जैसे की  'बीटी ओपनजोन' जैसे नेटवर्क आपके लिए खतरनाक  हो सकते है। एक बार जब आपकी डिवाइस इस तरह के नेटवर्क से जुड़ जाती है तो उसके डेवलेपर से आपकाडाटा चोरी होने के चांस काफी बढ़ जाते है।   इसलिए इस तरह के नेटवर्क से बचने की कोशिश करें और फ्री वाई-फाई नेटवर्क यूज करने से पहले उसका नाम जरूर चेक कर लें। 

अक्सर काफी  लोग लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन को फ्री पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करते हैं, जबकि यह खतरनाक भी हो सकता है. हैकर्स इसके सहारे आपके वेबसाइट पर भी कब्ज़ा कर सकते है।  ऐसा अक्सर तब होता है जब यूजर अनसिक्योर  वाई-फाई से कनेक्ट हो जाते है  इतना ही नहीं बल्कि , हैकर्स किसी एप्लीकेशन को मेलवेयर का शिकार दिखाकर स्मार्टफोन या टैबलेट से पर्सनल इंफॉर्मेशन भी चोरी कर सकते हैं. इसलिए कुछ चीजों की जरूरत है जिन पर आपको अमल करना होगा।


आज के समय  में स्मार्टफोन और टैबलेट में छिपे हुए एप्लीकेशंस की मदद मेलवेयर में काफी बढ़ोत्तरी हुई है. गेम डाउनलोड  करते समय भी आपको काफी सावधानी बरतनी होगी जैसे की  'एंग्री बड्र्स' जैसे लोकप्रिय गेम्स डाउनलोड करते वक्त मेलवेयर यूजर के सिस्टम में एंट्री कर जाता है. इसलिए, बेहतर होगा कि जब भी वाई-फाई का इस्तेमाल करें, तो न्यू एप्प डाउनलोड करते वक्त सावधान रहें.

अब बात करते है कुछ प्रमुख उपायों की . अगर हम नेटवर्क सिक्योरिटी पर काम करने वाले व्यक्तियों की बात माने  तो हमको  एवीजी  नाम के एंटी वायरस टूल को डिवाइस में डाउनलोड करलेना चाहिए  एवीजी एंटी वायरस टूल गैजट की सभी एप्लीकेशंस को स्कैन कर समय-समय पर यूजर को इंफॉर्म करता रहता है,इस तरह यूजर पहले ही अलर्ट हो जाता है और उनका गैजट मेलवेयर का शिकार होने से बच जाता है.इतना ही नहीं बल्कि ये एंटी वायरस  एसएमएस मेलवेयर के शिकार होने से भी बचाता है . इसी के साथ साथ यूजर पासवर्ड डालकर ऐसे एप्लीकेशंस को लॉक भी कर सकते हैं, जिससे उनका डिवाइस हैकर्स से बचाया जा सकता है. 

साथ ही साथ आपको डीवाईस में प्रयोग होने वाले सोफ्टवेयर को भी समय समय पर अपडेट करते रहना चाहिए आजकल स्मार्टफोन और टैबलेट निर्माता कंपनियां इसके फंक्शंस को इंप्रूव करती रहती हैं, उदाहरण के तौर पर अगर आपने कोई डिवाइस दो महीने पहले खरीदा है तो उसमें आज की तारीख में काफी बदलाव आ गए होंगे इसलिए सावधानी इसी में है कि डिवाइस में सिक्योरिटी फीचर्स को अपडेट करते रहें, ताकि नए खतरों से बच सकें.  हालांकि, स्मार्टफोन और टैबलेट अपने आप भी अपडेट होते रहते हैं जिअसे की  आईफोन और आईपैड में आईओएस-5 वर्जन का सॉफ्टवेयर उपलब्ध है. जब यूजर चीप वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट होने लगते हैं, तो यह सॉफ्टवेयर इंफॉर्म कर देता है. 

                           किसी भी मोबाइल डिवाईस की फिजिकल  सिक्योरिटी और टेक्नीकल  सिक्योर्टी दोनों का ही ध्यान रखकर आप उसमे अपने डाटा को सुरक्षित बना सकते है। 


Recent Posts