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Sunday, December 18, 2011

इंजीनियरिंग कोलिजो में में बढती राजनीति , फर्जीवाड़ा और शोषण


आज कल उत्तर प्रदेश में अधिकतर प्राइवेट इंजिनीयरिंग  ग कोलिजो के हालात बहुत ही बेकार हो चुके है , मै ये बात सभी इंजिनीयरिंग कालिजो के लिए नहीं कहा रहा हू . लेकिन अगर इस बात को लेकर  इंजीनियरिंग  कालिजो में एक सर्वे कराया जाये तो ये बात बिलकुल सही निकलेगी , पच्छिम उतर प्रदेश में कुछ कोलिज तो  बिलकुल ही अपनी हद पर उतर आये है, देखिये कहानी कुछ ऐसी है . सबसे पहले शुरवात करते है राजनीति से , आज कल इन कोलिजो को जो माहोल है वो कुछ इस तरह क़ा है की यहाँ पर जो काम करने  कर्मचारी या अध्यापक है उनमे से कुछ माहोल को बिलकुल बिगाड़ कर रख देते है , जैसे की वो नये अध्यापक को किसी ना किसी केश में फसकर निकलवाने की कोशिश , या फिर ऊशका इतना शोषण करते है कि वो बेचारा खुद ही नौकरी छोड़कर चला ज़ाता है. कुछ लोग तो क्लास में भी स्टुडेंट को पढाने में भी इंटरेस्ट नहीं  लेते और उनको इन्टरनल मार्क्स देकर खुश कर देते है जिससे कि स्टुडेंट कोई शिकायत ना करे . या जब कोई स्टुडेंट शिकायत करता है तो इन्टरनल मार्क्स कि धमकी देते है. कुछ लोग चापलूसी वाला माहोल बना देते , वो अपना काम सही से ना करके , कोलिज डाईरेक्टर या हेड कि चापलूसी करते है और दूसरो कि चुगली करते है ताकि  वो खुद कि जॉब बचा सके.ये तो थी बात इन कोलिजो के माहोल क़ी.
                                         अब बात करते है कि क़ी किस तरह से इनमे डाइरेक्टर और चेयरमन पोस्ट के लोग कर्मचारियों  क़ा शोषण करते है , जैसे क़ी इन कोलिजो में देखा ज़ाता है क़ी जैसे कमर्चारी के सेलरी इन्क्रीमेंट क़ी बात आती है ये उसको भरा क़ा रास्ता दिखा देते है या फिर उतना मेंटली हरास्स्मेंट करते है क़ी वो खुद जॉब छोड़कर चला जाये. जब कोई कर्मचारी अपनी कोई समस्या लेकर इन लोगो के पास जाता है तो ये कहते है क़ी आप कही और जॉब देख लीजये . सबसे बड़ी बात आती है सेलरी क़ी जहा तक मरी जानकारी है क़ी नियम के अनुसार किसी भी कर्मचारी महीने  क़ी सेलरी अगले महीने क़ी १० तारीख तक हर हाल में उसको मिल जानी चाहिए .पर ये लोग अगले महीने क़ी २५ तारीख के बाद ही देते है. उस पर भी वियाज खाते है.   

                                                 

                                         अब बात करते करते है इन  कोलिजो में जमकर हो रहे फर्जीवाड़े क़ी , जैसे क़ी देखा ज़ाता है कि इन कोलिजो को ऐ.आई.सी.टी और सम्बंधित यूनिवर्सिटी के नियमो क़ा पलान करना होता है पर ये इन नियमो कि भी जमकर धज्जिया उडाते है .  जैसे कि ऐ.आई. सी.टी ने हर कोलिज के लिए स्टुडेंट और टीचर क़ा रेसियो निर्धारित कर रखा है और टीचर के सेलरी भी उसकी पोस्ट के अनुसार निर्धारित है ,ये उससे काफी कम सेलरी देते है पर सिग्नेचर उतनी ही सेलरी पर करवाते है जितनी ऐ.आई.सी.टी. के नियम के अनुसार है , कर्मचारी कि मजबूरी है जॉब करना घर जो पलना है बेचारे को, अब देखिये ये लोग क्या करते है ये फर्जी बायोडाटा , और कागज दिखाकर ऐ. आई .से.टी कि आँखों में धुल झोखते है . ऐसे कर्मचारियों  क़ा बायोडाटा और कागज दिखाते है जो इनके यहाँ जॉब करता ही नहीं, अब आप कहोगे ये कागज कहा से आते है तो श्रीमान जी जब ये लोग अपने यहाँ टीचर क़ा रिक्रूटमेंट  करते है और जब उनका साक्षात्कार के लिए बुलाते है तो तो उन्ही में से बायोडाटा और कागजो कि फोटोकॉपी मगाते है  साक्षात्कार के समय पर . अब जिनको  ये सेलेक्ट करते है उनको तो जॉब देते है अपने या और जिनको नहीं करते उनका बायोडाटा और कागज रख लेते है और उनसे कहते है कि बही आप वेटिंग में हो . अबस फिर क्या जब कभी चेकिंग क़ा समय होता है तो उन्ही बायोडाटा या कागजो को दिखा देते है . , इसी तरह क़ा कुछ काम ये लोग स्टुडेंट कि इस्कोलर शिप में से पैसा बचा कर भी करते है .


                                            अब देखते  है कि ये लोग स्टुडेंट क़ा किस तरह से पागल बनाते है , सबसे पहले तो स्टुडेंट क़ा पागल बनाते है , प्रवेश के  समय पर अपने कोलिजो में ऐसी शुविधाये दिखाते है विज्ञापन में  जो इन कोलिजो में कभी होती ही नहीं है. , फिर स्टुडेंट क़ा पागल बनाते है प्लेसमेंट के समय पर कुछ कोलिज तो फर्जी कंपनी बुलाकर फर्जी प्लेसमेंट करवा देते है स्टुडेंट कि तसल्ली के लिए , जिससे  उसे ये ना लगे कि कोलिज में कंपनी नहीं आई लेकिन जब इनकी जुवायिनिंग क़ा समय  आता है तब स्टुडेंट को असलियत क़ा अहसास होता है  और तब तक वो कोलिज से पास हो चूका होता है . अब कहा गये ऐ.आई .सी.टी. के नियम और कानून कभी कभी तो लगता कि हर कोई एक दुसरे से मिला हुआ है और सब एक दुसरे को सपोर्ट करते है , भले ही उस  से   स्टुडेंट क़ा करियर  ख़राब हो या फिर कर्मचारी कि नौकरी  जाये. इन्हें बस अपने मुनाफे से मतलब है .

नोट  :- पाठकगण कृपया ध्यान दे कि ये बात सभी इंजीनियरिंग कोलिजो पर लागू नहीं होती. कुछ कोलीज ऐसे भी है जहा क़ा माहोल अच्छा है और वो बास्तव में स्टुडेंट क़ा प्लेसमेंट भी कराते है और कर्मचारी को भी अच्छी सुविधाए  देते है . ये लेख मेरी अपनी  धारणा है इन शोषण कर रहे इंजिनीयरिंग कोलिज के बारे में . कुछ कोलिजो के बारे में ऐसा बहुत सुनने में भी आता है और वास्तव में ऐसा है भी . हो सकता है  कि पढने वाला इसको सही ना समझे इसलिए मेरा निवेदन है कि जो कुछ भी मै ने लिखा है उसको विवाद क़ा विषय ना बनाए .













Tuesday, November 15, 2011

बाल दिवस पर विशेष





हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया ज़ाता है . हमारे देश कि सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि यहाँ नियम क़ानून तो हर चीज़ के लिए बने है पर उनको फोलो करने वाले बहुत ही कम है और कितना फोलो किया ज़ाता है ये तो आप जानते ही हो . जब सुबह सुबह मै कॉलेज की बस में ज़ाता हूँ तो देखता हू कि कुछ लोग कितने गलत तरीके से गाडी को ओवरटेक करते है और रेड लाइट होने पर भी गाडी को निकाल ले जाते है. यातायात पुलिश क़ा चौराहे पर खड़ा एक अकेला कर्मचारी अब रोके भी तो किस किस को रोके. कभी कभी जब दीवान जी भी उसके साथ होते है तो जरूर चालान कट ज़ाता है. यही है भारत के अधिकतर लोगो ई सोच वो अपनी मन मर्जी करते है सारे नियमो को ताख पर रख कर .

इसी तरह के कुछ नियम क़ानून यहाँ पर बाल मजदूरी को लेकर भी बनाए गये है. 15 साल की ऊम्र से कम बच्चे के द्वारा मजदूरी करवाना कानून अपराध है. लेकिन आप किसी भी हलवाई , चाय वाले, होटल, ढाबे पर चले जाये वहा पर अक्सर बाल मजदूर आपको देखने के लिए मिल ही जाते है .हम लोग भी जो बाल मजदूरी के खिलाफ है जब हम चाय वाले की दूकान पर जाते है तो कहते है "ओये छोटू दो चाय ला ".जब हम लोग इन दुकानों के मालिको से मालुम करते है कि बच्चो से क्यों काम करवाते हो तो उनका कहना होता है कि इनके माता पिता ही इनको हमारे पास छोड़कर जाते है. और उनका ये कहना काफी सही भी है. चाहे छोटा सहर हो या बड़ा बाल मजदूर आपको हर जगह देखने को मिलते है. मै अक्सर कूड़े के ढेर से छोटे छोटे बचो को प्लास्टिक की चीज़े और पन्नी या पोलिथीन छांटते हुए देखता हू ओन्नके पैरो में ना तो चप्पले होती है और ना ही वो गंदगी की परवाह करते बस अपने काम में लग जाते है . इसी तरह से आपको बसों में छोटे छोटे बच्चे , पानी की बोटेल, मूंगफली, खीर , गोला, दाल आदि बेचते हुए भी दिखाई देते होंगे. कुछ बच्चे तो बसों में गाना गाकर पैसे लेते है .ये सब उनकी मजबूरी है साहब . सोचता हू की क्या इन बच्चो को और बच्चो की तरह खेलने और अपने बचपन को जीने क़ा हक़ नहीं ? क्या इनको स्कूल जाने क़ा हक़ नहीं? जब हम इन सब सवालों क़ा जवाबा इनके माता पिता से मागते है तो उनकी आँखों में आसू आ जाते है वो कहते है की साहब हम गरीब लोग है अगर इनको काम पर ना भजे तो हम पेट कैसे भरेंगे?


तो कुल मिलाकर अंत में बात आती है गरीबी पर ये अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है जिसका जायदा जिकर मै यहाँ नहीं करूंगा पर इतना जरूर कहूँगा की जब तक हमारे देश में ये गरीबी रहेगी तब तक ये बच्चे एक खुशाल बचपन नहीं जी पायेंगे और ना ही पढ़ लिख पायेंगे सही से. गरीब माँ बाप भी अपने बच्चो के लिए कहते है कि
" मेरे बच्चे भी अपनी गरीबी की समझ रखते है , तभी तो घर के वर्तनो को ही अपना खिलौना बना लेते है ".
---मनोज बिजनौरी

Wednesday, November 9, 2011

ऊर्जा बचाने में अब ये चिप आपकी मदद करेगी



ऊर्जा का बढता प्रयोग आज हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा बन गया है . हमारे दैनिक जीवन के अधिकतर काम आज के समय में बिजली से चलने वाले यंत्रो की मदद से किये जाते है.इसलिए ऊर्जा का अपना एक विशेष महत्व है . जिसको बनाने के लिए तरह तरह के साधन और तकनीको को विकसित किया जा रहा है. जिनमे बड़े स्तर नदियों पर बाँध बनाकर बिजली उत्पन्न करना तो पहले से ही है .

इसके अतिरिक्त बड़े स्तर पर नाभिकीय रिएक्टर बनाकार परमाणु ऊर्जा के द्वारा बिजली उत्पन्न करना भी एक अहम् कदम है . अगर हम छोटे स्तर पर बात करे तो , बिजली बनाने के लिए डीजल इंजन , पेट्रोल इंजन आदि भी बनाए गये. और साथ ही साथ सेल बेटरी बनाकर रासायनिक क्रिया द्वारा बिजली बनाना भी आम तौर पर प्रयोग होता है.

धीरे धीरे फिर बारी आई सौर ऊर्जा की मानव ने सूरज की रौशनी क़ा प्रयोग करके भी बिजली बना डाली . इतने सब आविष्कार किये गये बिजली को बनाने के लिए फिर भी आज इसकी कमी महसूस होती है . कितना अच्छा होगा कि हम आज के समय में ऊर्जा के बड़ते उपयोग को देखकर ऐसी तकनीको को प्रयोग करे जो कि ऊर्जा को बनाने में हमारी मदद करे. इस दिशा में एक ऐसी चिप बनायी है


भारतीय मूल के एक अमेरिकी वैज्ञानिक राज दत्त जी ने , जो न सिर्फ ऊर्जा बचाएगी, बल्कि उपलब्ध चिप्स की तुलना में सस्ती भी पड़ेगी.इस चिप की खासियत को ऐसे समझा जा सकता है कि इसकी मदद से प्रोसेसर 90 फीसदी कम ऊर्जा खर्च करेंगे.साथ ही उनकी रफ्तार में 60 परसेंट कि तीव्रता आ जायेगी .

इस तकनीक की खास बात यह है कि सेमीकंडक्टर चिप पर सूचनाओं का ट्रांसफर फोटांस के जरिए होगा.अभी तो इस काम को करने के लिए इलेक्ट्रांस का प्रयोग हो रहा है. पावर कंजंप्शन के नजरिये से तो यह बहुत उपयोगी है ,फोटॉन से सूचनाओं के आदान प्रदान से इतनी हीट उत्पन्न नहीं होती इस कारण प्रोसेसर को ठंडा बनाए रखने के लिए ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ेगी. और इस तरह यह ऊर्जा कि खपत में कटौती करके ऊर्जा बचाएगी . इलेक्ट्रॉन केंद्रित तकनीक में पुर्जो को ठंडा बनाए रखना जरूरी होता है

.इसके साथ ही एक चिप में ट्रांजिस्टर्स की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. पर इसका असर इसकी स्पीड पर पास सकता है .यह चिप अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान पेंटागन को उपयोगी लगी है और वो जल्द ही इसका इस्तेमाल अगली पीढ़ी के ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर विमान एफ-35 में करने जा रहे है. राज दत्त जी अब पेंटागन से करार करने के बाद इसे सामान्य उपयोग के लिए भी इस चिप को उपलब्ध कराने की सोच रहे हैं. अब देखना है कि कब तक मार्केट में आने वाले यंत्रो में इस चिप क़ा प्रयोग होता है .और कब हम ऊर्जा बचा पते हैं.

Wednesday, October 26, 2011

शुभ दीपावली !!

सभी पाठकगणों और भारतवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाये !!

Wednesday, October 19, 2011

” प्यारा बचपन “


एक बचपन का ज़माना था !

वो खुशियों का खज़ाना था !!
चाहत थी चाँद को पाने की !
दिल तितली का दीवाना था !!
खबर ना थी कुछ सुबह की !
ना शाम का ठिकाना था !
थक हार के आना स्कूल से !
पर खेलने भी जाना था !
बारिश में कागज़ की कश्ती थी !
हर मौसम भी सुहाना था !!
हर खेल में साथी थे !
हर रिश्ता निभाना था !!
गम की जुबान ना होती थी !
ना खुशियों का पैमाना था !!
रोने की वजह ना थी !
ना हसने का बहाना था !!

वो खिलोने की दुनिया थी !
हर एक खिलौना दिल का खजाना था !!
शरारत करते थे तो मम्मी डैडी से पिटते थे !
पर कुछ देर बाद फिर कोई नयी शरारत करके दिखाना था !!
अब तो सब यादे रह गयी है , ना दोस्त ऐसे ना ही रिश्ते !
अब ना रही वो जिन्दगी ,जैसा की बचपन का ज़माना था !!

Sunday, October 9, 2011

ग्रेल यान लगायेगा चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण का पता


चंद्रमा पर रहने की इन्सान की खुवाहिस ने उसे नये नये रीसर्च करने को मजबूर कर दिया है। अभी हाल ही में की गयी एक रीसर्च के अनुसार चन्द्रमा पर गुरुत्वाकर्षण का अध्ययन की तैयारी शुरू हो गयी है .इसके लिए अभी चंद्रमा पर जानेवाले अंतरिक्ष यान का फ़्लोरिडा से भेजा गया है ।

चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण में होनेवाले बदलाव का पता लगाने के लिए भेजे गए जुड़वा प्रोब यानि यान का नाम ग्रेल है और इसे नासा ने प्रक्षेपित किया है। ये अलग-अलग यान वैज्ञानिकों को पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा की आंतरिक संरचना के बारे में नई जानकारियां उपलब्ध करवाएंगे। 
इससे चन्द्रमा से जुड़े और भी कई रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलेगी जैसे कि चंद्रमा का दूर वाला हिस्सा नज़दीक वाले हिस्से से अलग क्यों नज़र आता है। 

इससे मिली जानकारी से से भविष्य में चंद्रमा पर भेजे जाने वाले यान को सही जगह उतारने के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी जिसे मिसन को सफल बनाया जा सके। गुरुत्वाकर्षणवैज्ञानिकों के पास चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण की विविधता के बारे में पहले से मानचित्रीय जानकारी मौजूद है लेकिन ये मानचित्र उतने सटीक नहीं हैं, ख़ासतौर से चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से जुड़ी जानकारी इस मिसन से जुड़े वैज्ञानिक डॉक्टर रॉबर्ट फ़ोजेल के अनुसार ,''चंद्रमा के नज़दीक वाले हिस्से के बारे में हमें अभी जो जानकारी हासिल है उसमें सौ गुना सुधार हो जाएगा जबकि दूरवाले हिस्से के बारे में हमारे ज्ञान में हज़ार गुना का फ़र्क़ पड़ जाएगा।'' 

इस अन्तरिक्ष यान का नाम ग्रेल है मतलब ''ग्रेविटी रिकवरी एंड इंटरनल लैबोरेट्री'' . ग्रेल की तरह ही एक अभियान पहले से नासा और जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी के द्वारा चलाया जा रहा है जिसका नाम ग्रेस है. इस मिसन के अंतर्गत पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर पाए जानेवाले गुरुत्वाकर्षणीय अंतर का अध्ययन किया जा रहा है। चंद्रमा के विभिन्न स्थानों पर गुरुत्वाकर्षण का अंतर द्रव्यमान के अलग अलग होने के कारण है । 

जिसका कारण कुछ इस प्रकार है क्यों की चंद्रमा पर बड़ी पर्वत भी हैं और गहरी घाटियां भी हैं. चंद्रमा की आंतरिक संरचना के अंतर की वजह से इसके गुरुत्वाकर्षणीय प्रभाव में भिन्नता पाई जाती है. ग्रेल ट्विन चंद्रमा की सतह से 55 किलोमीटर की दूरी पर रहकर उसकी परिक्रमा करेंगे। दोनों यान एक दूसरे से 200 किलोमीटर की दूरी पर रहकर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से संबंधित जानकारी एकत्रित करेंगे और दोनों के भेजे जानकारों से ही गुरुत्वाकर्षण से संबंधित सवाल को सुलझाने में मदद मिलेगी।

Thursday, September 22, 2011

भिरसटाचार का कड़वा सच

सन 1947 के बाद से भारत ने लगातार काफी तरक्की की है और रोज किसी न किसी क्षेत्र मे नयी नयी बुलान्दियो को छू रहा है . पर भिरसटाचार के कारण देश से बहार गैरकानुनी तरीके से जमा पुंजी के बहिप्रवाह से भारत को सन 2000 से 2010 के लगभग 200 अरब डॉलर से भी जायदा का नुकसान हुया है , वासिंगटन के अनुसंधान ऑर प्रचार संगठन GFI "गोल्बल फ़ाएनेन्सिअल इंतीग्रीती " के रेपोर्ट के अनुसार 2000 से 2008 के बीच ये नुकसान 125 अरब डॉलर था.




                                     
GFI की गरना के अनुसार 2004 से 2009 के दुराण भारतीय अर्थविवस्था मे बूम कि स्तिथी रही ऑर इस दौरान अर्थविवस्था औस्तन 8 % कि दर से बडी . लेकिन पुंजी के प्रवाह के बाबजूद गरीब आखिर गरीब ही रहा . भारत मे भिरसटाचार फैला हुया है. राजनीतिक ऑर कॉर्पोरेट जगत के प्रबंधक दोनो धन को इधर उधर करते है. रिपोर्ट के अनुसार भारत आर्थिक रूप से आगे बडने के साथ साथ बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर रह है ,बढती महंगाई भी काफी हद तक इसके लिए जिम्मेदार है , सरकार भी उद्योगपतियों का ही साथ देती है आम जनता का नहीं ,पर गरीबी की स्तीथि और भी बेकार है . गरीब आखिर गरीब ही है . आम जनता के हित की चिंता किसे है सब अपनी अपनी जेबे भरने में लगे हैएस विषय पर लिखने को तो बहुत कुछ है पर बस इतना ही लिखुंगा , वर्ना सरकार के भिरस्ट मंत्रियो को ओर भिरसटाचार फैलाने वाले लोगो को शर्म आने लगेगी. काश ये आती कम्व्खत वो भी नही आती. अब भैया भिरस्ट कौन है कौन नही ये कहना मुस्किल है क्यो कि अधिकतर हर आदमी भिरस्ट है ,रिश्वत देने वाला भी ओर लेने वाला भी .

Tuesday, August 2, 2011

कितना सही कितना गलत?




शिक्षा को बिज्निस बनाने वाले लोगो कि ही जेबे भरी जा रही है, काफी कालिज ऐसे है जो आई सी टी के नियमो को बिलकुल भी पुरा नही कर पा रहे फिर भी अपनी दुकान मजे से चला रहे है यहाँ मै एक
बहुत ही सोचनीय विषय पर बात करने जा रहा हूँ. दरअसल पिछले 10 सालो में उत्तर प्रदेश में प्राइवेट इंजीनियरिंग कालिजो की संख्या में ऐसी बढ़त हुयी है की उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविध्यालय को दो पार्ट में बाटा गया . इसमे कालिजो की संख्या 800 के पास हो गयी है और अब इसके दो पार्ट है जी बी टी यू एंड ऍम टी यू .लेकिन क्या ऐसा करने से कुछ सही हुआ ?

इतना ही नहीं सबसे जायदा लाचार तो कंप्यूटर साइंस और आई टी से बी टेक करने वाले है क्यों की एम् सी ए, बी सी ए , और दुसरे सॉफ्टवेर कोर्स करने वाले भी उनके लिए अवसरों को काफी कम कर देते है. सरकार भी कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने वालो पर महरबान नहीं है , क्यों की जयादातर सरकारी कंपनियों में मेकेनिकल , इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रोनिक्स की ही जायदा पोस्ट होती है. बेचारे कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने वाले तो आई इ एस की परीक्षा भी नहीं दे सकते .

जहा तक मै समजता हूँ की आज के बीटेक स्टुडेंट में वो कुआलिटी नहीं आ पा रही है जो अब से 6 या 7साल पहले थी. कारण बड़ते हु ए इंजीनियरिंग कॉलेज .ए आई सी टी ई भी इन को मान्यता दे देती है और यूनिवर्सिटी भी .आज कल जिस के पास पैसा है हर कोई इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने में लगा हुआ है . जिसका रिजल्ट है की आज का बीटेक स्टुडेंट बहुत लाचार है . और तो और ए आई सी टी ई ने अब बी टेक कोर्स में प्रवेश के लिए १२वी में कम से कम मार्कस 55 % से घटाकर 45% मार्कस कर दिए . इससे साफ़ नज़र आता है की आने वाले समय में बी टेक करणे वालो को ऑर भी मुश्कील का सामना करणा पडेगा क्यो कि अधिकतर कंपनी मे जोब के लिये कम से कम 60% 10, 12, ऑर बीटेक मे होना जरुरी हैअब आप ही बताये ये और भी सोचनीय बात ये है की आज कल जो बड़े प्राइवेट टेक्नीकल एजुकेसन ग्रुप है वो अपनी प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने में लगे हुए है. इतनी जायदा प्राइवेट यूनिवर्सिटी को होना कहा तक सही है और कहा तक गलत? क्या एस से कोई नुकसान है ? क्या एस सबसे स्टुडेंट
के भविष्य पर कोई निगेटिव असर पड़ेगा? बताये ………

Thursday, May 5, 2011

सी डैक का एक और शानदार कमाल --- स्पीच टू टैक्स्ट सॉफ्टवेयर

भारत मे सी डैक संस्थान पहले से ही कॉम्पुटर के क्षेत्र मे अपने काफी पकड बन चुका है खासकर की परम नाम का सुपर कॉम्पुटर बनाकर . इसके अलावा भी सी डैक के द्वारा काफी रिसर्च की जा चुकी है जैसे की पहले भी सी डैक ने प्राग नाम का सॉफ्टवेर बनया था जिससे की हुम कही भाषा में काम करने की सुविधा कर सकते थे । अभी अभी हाल ही मे सी डैक के वैज्ञानिकों ने एक अहं सफलता हासील कि है आपको कंप्यूटर पर टाइप करने में परेशानी होती है तो आप स्पीच टू टैक्स्ट सेवा का बख़ूबी उपयोग कर सकते हैं। अंग्रेजी के लिए तो कई प्रोग्राम उपलब्ध हैं और हिंदी के लिए भी 80 प्रतिशत से अधिक शुद्धता में आपकी हिंदी को टाइप करने वाला प्रोग्राम श्रुतलेखन कोई पाँच हजार रुपए में उपलब्ध है। इसे सीडैक ने जारी किया है। लेकिन, अब यह सुविधा ब्राउजर के भीतर ही आ चुकी है और इसके लिए अलग से सॉफ्टवेयर प्रोग्राम खरीदने की जरूरत नहीं है। अभी यह सुविधा अंग्रेजी भाषा में ही है, और उम्मीद करें कि भविष्य में हिंदी समेत अन्य तमाम भाषाओं में सुविधा हमें मिलेंगी।


अभी तक जो पाता चला है उसके अनुसार आप को सबसे पहले गूगल क्रोम 11 के बीटा संस्करण का प्रयोग करते हुए गूगल ट्रांसलेट वेब पन्ने पर जाना होगा।यहां पर आपको इनपुट के लिए माइक्रोफोन में बोलने का विकल्प मिलेगा। ज्सिके कारण अंग्रेजी में बोले गए वाक्य को यह अपने सर्वर पर भेजता है तथा वहां इसे पहचान कर अंग्रेजी पाठ में ट्रांसक्राइब कर ब्राउजर के स्क्रीन पर पेश करता है। इसके बाद में इस अंग्रेजी पाठ को गूगल ट्रांसलेट के जरिए हिंदी में बदल सकते हैं। अब आप इसे गूगल ट्रांसलेट के जरिए लेंग्वेज पेयर अंग्रेजी, हिंदी चुनकर हिंदी में अनुवाद किया जा सकता है। हालांकि इस ट्रांसलेटर के जरिये जटिल ट्रांसलेशन नहीं किया जा सकता। सिर्फ साधारण अंग्रेजी को ही हिंदी में बदला जा सकता है।


                             
तो फिर इसका फायदा क्या है इसका हमारे लिए और क्या फयादा कल्पना कीजिए कि आपके मोबाइल उपकरण में यह सुविधा अब चीनी भाषा में भी उपलब्ध हो गई है। तो आपके मोबाइल में बोली गई चीनी भाषा को आप पहले टैक्स्ट रूप में दर्ज कर सकते हैं फिर उसे गूगल ट्रांसलेट के जरिए चीनी से अंग्रेजी और फिर अंग्रेजी से हिंदी में अनुवाद कर सकते हैं। हो सकता है कि वह अनुवाद स्तरीय न हो, मगर सामने वाले के द्वारा चीनी भाषा में कह क्या रहा है, उसका आशय क्या है यह तो हमें थोड़ा बहुत समझ में आ ही जाएगा। यह सिर्फ अभी की बात है, अगर तकनीक की रफ्तार यही रही तो भाषा की सभी दीवारें टूट जाएंगी।अब इसके असली फायदे का पाता तो प्रयोग करने के बाद ही चल पायेगा तब के लिए इंतजार किजीये

Thursday, March 17, 2011

रंग लायी फ़्रांस के कंप्यूटर वैज्ञानिक यान रेनार्ड और लारेंट बोनेट की ५ साल की मेहनत --


अभी हाल ही में आई.आई टी. मुम्बई में एक तकनीक कांफेरेंस का आयोजन हुआ . जिसमे मुख्य केंद्र फ़्रांस से आये कंप्यूटर वैज्ञानिक यान रेनार्ड और लारेंट बोनेट की रीसर्च रही. इन कंप्यूटर वैज्ञानिको ने एक ऐसा सॉफ्टवेर विकसित किया है जिसके द्वारा अब आपको कंप्यूटर पैर कुछ काम करने के लिए की बोर्ड पर कुछ टाइप करने की जरूरत नहीं बल्कि इस सॉफ्टवेर की मदद से ही कंप्यूटर आपके दिमाग के विचारों को पड़कर अपने आप काम करेगा . ये सॉफ्टवेर आपके दिमाग के विचारों को कमांड में बदलेगा . इस सॉफ्टवेर का नाम
ओपन वाईब है. यह प्रोग्राम एक तरह से आपके दिमाग को पढ़ कर कंप्यूटर को कमांड देगा। यह सॉफ्टवेयर को बनाने कि प्लान्निंग 2005 में ही कंप्यूटर वैज्ञानिक यान रेनार्ड और लारेंट बोनेट द्वारा शुरू कर डी गई ऑर ये इनकी 6 साल की महेनत का ही परिणाम है, कि ये सॉफ्टवेयर कई प्रयोग करने में सहायक है
कंप्यूटर वैज्ञानिक यान रेनार्ड और लारेंट बोनेट ने कहा कि ओपन वाईब सॉफ्टवेयर ऐसी प्रणाली है जिसके विद्युत संकेत मस्तिष्क की गतिविधियों से जुड़े हैं। यह विचारों को कमांड में बदल देते हैं, जिसे मशीन आसानी से समझ लेती है। यह सॉफ्टवेयर लोगों को कंप्यूटर से संवाद करने का मौका देता है। यह स्वचालित प्रणाली है जिसमें लोगों को हाथों या किसी आउटपुट का प्रयोग किए बगैर रिमोट कंट्रोल को सक्रिय किया जा सकता है। विचारों को लिख भी सकेगा सॉफ्टवेयर: वैज्ञानिकों ने बताया ओपन वाईब को शोधकर्ताओं, चिकित्सकों से लेकर वीडियो गेम विकसित करने वाले को ध्यान में रखकर बनाया गया है।














Friday, February 25, 2011

ननोटेक्नोलोजी मचा रही है इलेक्ट्रोनिक्स में भी अपना धमाल


अभी हाल ही में जहाँ आई बी एम् कंपनी ने नेनोटेकनोलोजी का प्रयोग करके रेसट्रेक मेमोरी युक्त कंप्यूटर बनाया है . जो की आने वाले समय में काफी मददगार होंगे बिजली के कम खर्च में और प्रोसस्सिंग स्पीड को बढाने में. वही दूसरी और नेनोटेकनोलोजी का प्रयोग करके वैज्ञानिकों ने दुनिया की सबसे छोटी बैटरी बनाई है। जिसमे नानोवायर का प्रयोग किया गया है . इसका एनोड एक सिंगल नैनोवायर है। मजे की बात तो ये है की इसकी मोटाई इंसानी बाल के सात हजारवें हिस्से के बराबर है। लिथियम आधारित इस बैटरी को ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप (टीईएम) के अंदर बनाया गया है। इस रीसर्च का श्रेय अमेरिका स्थित सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड नैनोटेक्नोलॉजीस के वैज्ञानिकों को ज़ाता है . जिसमे "Sandia National Laboratories " के वैज्ञानिक जिंयु हुंग की भूमिका अहम् है जिन्होंने अपनी टीम को लीड किया और इस रीसर्च में सफलता पायी .उनका कहना है की इस बैटरी के प्रयोग के आधार पर आगे और अध्ययन करने के बाद नई पीढ़ी के प्लग-इन हाइब्रिड इलेक्ट्रिक व्हीकल, लैपटॉप व सेलफोन की परफार्मेस को और बेहतर किया जा सकता है। इसमें कोई शक नहीं की नेनोटेकनोलोजी का उपयोग काफी मददगार है .और लगातार सफल हो रहा है . आने वाले समय में इसकी बादशाहत भी कायम हो सकती है ...........

Saturday, January 1, 2011

"हैप्पी न्यू इयर २०११ टू आल "


--------------------------"सभी को नव वर्ष २०११ कि हार्दिक शुभकामनाये "

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