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Thursday, December 23, 2010

खिलते नहीं है फूल अब तो मेरे बाग़ में……………….

ये क्या हो गया है अब मेरे चमन को
इस प्यारे वतन को , उस नियारे वतन को !
खिलते थे कभी जहा फूल मोहबत के ,
अब वही पर नफरत के फ़साने लिखे जाते है ,
हर तरफ मच रहा है शोर भिरास्ताचार का,
इस बढती महंगाई का , इस बड़ते अपराध का !
सूख गये है पौधे , अब इस बाग़ में ,
खिलते नहीं है फूल अब तो मेरे बाग़ में !
एक वो भी समय था जब, वो दुःख तकलीफ मेंअपना सहारा दिया करते थे।,
अब तो दूर से नज़र चुरा लेते है ,
मिलते भी है तो बस हाय हेल्लो ,टाटा बाय बाय किया करते है।
क्यों होता जा रहा है ये , अब क्यों बढ़ रही है रिश्तो में दूरिया।
क्या कमी हम सब में है , या फिर ये है जमाने कि खामिया।
मिलती नहीं है खूसबू प्यार की अब तो मेरे बाग़ में,
खिलती नहीं बहार , चैन और अमन की अब तो मेरे बाग़ में!
खिलते नहीं है फूल अब तो मेरे बाग़

Wednesday, December 22, 2010

पूजनीय दादा जी को शत शत नमन !

"आज से तीन साल पहले आप हमको छोड़कर चले गये पर आज भी आपका साथ हम महसूस करते है याद करते है आपकी बातो को और प्रेरित होते है कुछ अच्छा करने के लिए "

कुछ लोग इस देश में ऐसे भी होते है जिनका जीवन बहुत ही संघर्षशील होता है , वो दूसरो के लिए बहुत कुछ कर गुजरते है ,लेकिन नीव कि ईंट बनकर रह जाते है . ऐसे ही एक शख्स थे पूजनीय ठाकुर सिंह जी और हमारे दादा जी . ठाकुर सिंह जी का जन्म सन १९०३ को यू.पी. के बिजनौर जिले के अफजलगढ़ क्षेत्र के दहलावला गाँव में हुआ था . वो एक ऐसे शख्स थे जो निडर थे बस एक बार जिस बात को ठान लिया उसको पूरा कर के ही दम लेते थे .काफी लम्बे समय तक वो अपने यहाँ के सरपंच रहे और अफजलगढ़ क्षेत्र में एक सरपंच के रूप में ही विख्यात हो गये . सब उनको सरपंच साहब कहते थे . जब गाँव वालो पर कोई आपत्ति आती या कोई भी झगडा होता तो सब गाँव वाले उनको आगे कर देते थे जिससे कि अगर कोई समस्या हो तो इन्ही का नाम आये लेकिन वो ये सब जानते हुए भी कि इससे उनका नुक्सान हो सकता है ,अकेले ही मोर्चे पर डट जाते थे, और गाँव वालो को नियाय दिलाकर ही रहते थे. अफजलगढ़ क्षेत्र के काफी लोग उनसे सलाह लेने आते थे . हालाकि क्षेत्र के कुछ लोग सोचते थे कि सरपंच साहब कठोर दिल के आदमी है वो किसी कि नहीं सुनते उन्हें मनाना आसान नहीं है और पर उनकी ये गलतफमी तब दूर हो जाती जब वो उनके निकट आते थे . दादा जी एक अनुसासनप्रिय व्यक्ति थे ,वो हर गलत बात के खिलाफ थे ,इसलिए उनको काफी नुक्सान भी हुआ और यही कारण था कि लोग उनको कठोर समझते थे क्यों कि जब क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति उनसे गलत बात या काम के लिए कहता तो वो मना कर देते थे और कभी कभी तो लड़ भी पड़ते थे . दादा जी बात के पक्के व्यक्ति थे , बात कि खातिर उन्होने बहुत तियाग किया. वो पैदल चलने के बहुत बड़े शौक़ीन थे , उन्होने अपने जीवन में ६-७ मुकदमे भी लड़े, जिनमे उनको सफलता भी मिली , उनके वकील भी उनसे सलाह लेकर ही काम करते थे और उनकी बातो को ध्यान से सुनते थे और कहते कि सरपंच साहब आप तो खुद वकीलों से जायदा जानते हो.मुकदमो के सिलसिलो में वो अपनी बेटी(वूआ जी ) के घर बिजनौर जाते थे और वह ५ -६ दिनों तक रूकते भी थे पर बेटी के घर का खाना नहीं खाते थे. बाहर से फल मंगाकर ही ५ दिन तक पेट भरते थे. अपने १०४ साल के जीवन में उन्होने कभी कोई अंडा या मांस नहीं खाया ,ना ही कभी धूम्रपान किया.उनकी एक बात कभी कभी हमारे मन में जिज्ञासा उत्पन्न करती थी वो हमेसा दिन में खाना खाने के बाद पक्षियों को भी दान डालते थे .उनका जीवन बहुत ही संघर्षशील था . 21 दिसम्बर २००७ को वो हम सब से विदा हो गये .उनका १०४ साल का जीवन हमको प्रेरित करता है !

"किसी से ना दबने वाले, ना ही डरने वाले बस अपने स्टाइल में जीवन जीने वाले पूजनीय दादा जी को हम शत शत नमन और श्रधांजलि अर्पित करते है !"

Monday, December 20, 2010

क्रेडिट कार्ड सुरक्षा संबंधी कुछ सुझाव.




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सावधान अब हो जाईये अगर आप अपना क्रेडिट कार्ड अपनी पॉकेट या बोलेट में रखते है ।वैसे तो नेट कि दुनिया में क्रेडिट कार्ड से जुड़े किराईम उतने ही पुराने है जितना कि क्रेडिट कार्ड. लेकिन आज कल कुछ लोग क्रेडिट कार्ड से सम्बंधित जानकारियों को चुराने के लिए एक नये तरीके का प्रयोग कर रहे है।  जिसका नाम है "इलेक्ट्रोनिक पिक पोकेटिंग ".इस तकनीक में एक छोटा सा विशेष वायरलेस स्केनर लगा होता है जो आपकी पेंट कि पीछे कि पॉकेट में रखे बोलेट में रखे क्रेडिट कार्ड की जानकारी (जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर )को रीड कर सकता है। 

 अगर आपका क्रेडिट कार्ड RFID "Radio Frequency Identification Technology" के आधार पर काम करता है. खासकर कि उन लोगो के लिए जो "ई - बिजनिस " में इस प्रकार के क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। लेकिन ये तरीका पूरी तरह सफल नहीं है क्यों कि इस टेक्नोलोजी पर बेस्ड क्रेडिट कार्ड का CVV Credit Verification Value थ्री डिजिट सीक्कोरिटी नंबर जो कि कार्ड के पीछे लिखा होता है को ट्रांसमिट नहीं कर पाता इस क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेसन नंबर को जायदातर "ई-रीटेलर " परचेज के समय शेयर करते है।  चूकि इस तरीके के द्वारा क्रेडिट कारदा नहीं चुराया जाता केवल उसकी क्रेडिट कार्ड से सम्बंधित जानकारी चुराई जा सकती है , लेकिन फिर भी अमेरिका में कुछ गवर्नमेंट एम्प्लोयी अपने बोलेट और पॉकेट कि सिक्यूरिटी के लिए स्पेशल जाकेट का प्रयोग करते करते है ताकि कोई रिस्क ना रह सके। 

इसलिए सही कहा गया है कि "अपने सामान कि रक्षा ,स्वयं करें "..................

Friday, December 3, 2010

ड्राईवर साहब अब आपको झपकी नहीं लगने देगा ये सॉफ्टवेर --............?




अक्सर ऐसा होता है कि गाडी चालक कितना भी सावधान होकर क्यो ना गाडी चल ले गाडी चलाते चलाते गाडी चालक को झपकी लग ही जाती है । खासकर कि रात के सफ़र् मे ऐसा जरूर होता है । अब इस समस्या का समाधान भी निकल आया है क्यो कि अब विशेषज्ञों ने वाहनों के लिए ऐसा सॉफ्टवेयर सिस्टम तैयार किया है जो चालक को झपकी नहीं आने देगा। यह सिस्टम चालक की आंखों की मूवमेंट पर नजर रखता है और झपकी लगने से पहले ही वार्निग देता है। इस सिस्टम का नाम आईट्रेकर’ है । यह सिस्टम जर्मनी स्थित फ्रैनहोफर इंस्टीटच्यूट फॉर डिजीटल मीडिया टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इसे किसी भी कार में लगाया जा सकता है। इस सिस्टम के काम करने के लिए पीसी या लैपटॉप की जरूरत नहीं होती है। इसमें दो कैमरे लगे होते हैं ओर सिस्टम का अपना खुद का हार्डवेयर होता है जो इसमे लगे दोनो कमरों द्वारा चालक की आँखों पर राखी जा रही निगरानी को डिटेक्ट करता है ।ये केमरे एक सेकेण्ड् मे २०० से जयदा इमेज को रेकोर्ड् कर सकता है जिससे ये चालक कि आँखों के मूवमेंट पर नजर रखता है । सिस्टम को जैसे ही लगता है कि आंखें एक निश्चित अवधि से अधिक समय तक बंद हैं तो यह अलार्म बजा देगा ओर जिससे गाडी चालक सतर्क हो जायेगा। इस सिस्तम कि खास बात ये है कि इसके लिये किसी इस्पेसल कार कि जरूरत नहीं है इसको किसी भी कार मे लगाया जा सकता है।

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