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Saturday, September 26, 2009

गांधीनगर के चराड़ा गांव निवासी प्रहलाद भाई !

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"अंबा माता जी के पास गब्बर पर्वतमाला की गुफा में रह रहे चुनरी वाले माताजी पिछले 65 साल से बिना कुछ खाए-पिए रहने तथा दैनिक क्रियाओं को भी योग की शक्ति से रोक देने की वजह से चिकित्सा विज्ञान के लिए एक चुनौती बन गए हैं। "

मुंबई तथा अहमदाबाद के चिकित्सकों ने सीसीटीवी के बीच उनकी जांच भी की लेकिन उनके इस रहस्य पर से पर्दा उठाने में वे भी नाकाम रहे। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी इसमें रुचि दिखाई है, यदि माताजी के ऊर्जा का स्रोत का पता चल जाता है तो शायद यह अंतरिक्ष यात्रियों एवं सेना के जवानों के लिए कारगर साबित होगा।


गांधीनगर के चराड़ा गांव निवासी प्रहलाद भाई जानी कक्षा तीन तक पढे़ लिखे हैं। ग्यारह वर्ष की उम्र में उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ, और उन्होंन घर त्याग कर जंगलों में रहना शुरू कर दिया। जानी का दावा है कि दैवीय कृपा तथा योग साधना के बल पर वे करीब 65 वर्ष से वह बिना कुछ खाए पिए जिंदा हैं। इतना ही नहीं मल मूत्र त्यागने जैसी दैनिक क्रियाओं को योग के जरिए उन्होंने रोक रखा है। स्टर्लिग अस्पताल के न्यूरोफिजिशियन डा. सुधीर शाह बताते हैं कि जानी के ब्लेडर में मूत्र बनता है लेकिन कहां गायब हो जाता है इसका पता करने में विज्ञान भी अभी तक विफल ही रहा है। 

रक्षा मंत्रालय के डा. सेल्वा मूर्ति की अगुआई में 15 चिकित्सकों की टीम ने लगातार दस दिन तक उनका वीडियो कैमरों के बीच चिकित्सकीय परीक्षण भी किया लेकिन उनके समक्ष आज भी चुनरी वाले माता जी का यह केस एक यक्ष प्रश्न ही बना हुआ है। डा. शाह बताते हैं कि पहली बार माताजी का मुंबई के जे जे अस्पताल में परीक्षण किया गया था लेकिन इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका।

वे बताते हैं कि यह माताजी कभी बीमार नहीं हुए, उनकी शारीरिक क्रियाएं सभी सामान्य रूप से क्रियाशील हैं। चिकित्सक समय समय पर उनका परीक्षण भी करते हैं लेकिन ब्लड प्रेशर, हार्ट बीट आदि सभी सामान्य ही पाई गई हैं। चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान डिस्कवरी चैनल ने भी उन पर एक लघु फिल्म तैयार की है। इसके अलावा डा. शाह ने भी माताजी के तथ्यों को केस स्टडी के रूप में अपनी वेबसाइट पर डालकर दुनिया के चिकित्सकों को इस पहेली को सुलझाने की चुनौती दी है, लेकिन फिलहाल तक कोई भी इस पहेली को नहीं सुलझा पाया है।

Reference: Dainik Jagran News Paper

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