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Sunday, January 8, 2017

दिमाग से कंट्रोल होने वाली कार A Car Which Can be Control by Mind


"जी हां शायद ऊपर लिखा हुआ वाकया सही हो जाये क्यों की भविष्य की कारों को चलाने के लिए स्टियरिंग व ड्राइवर की नहीं, बल्कि आपके दिमाग की जरूरत होगी। आओ जाने कुछ एस कर के बारे में - इसे साकार किया गया है मर्सिडीज की एफ 400 कॉन्सेप्ट कार में। "


डेरेक चिक किन एनजी की डिजाइन की हुई इस कार में सवार व्यक्ति को एक हेलमेट पहनना पड़ता है। इसमें लगा ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस दिमाग की तरंगों को पकड़कर कार को निर्देशित करता है। इस कार में दो लोग सवार हो सकते हैं। कार में कुछ और फीचर्स जोड़ने के लिए अलग से सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। इस कार का इसी साल ट्रायल किया जाएगा।


देखो ये तो सामान्य रूप से होता ही है की भारत में नयी टेक्नोलोजी आने में काफी साल लग जाते है अब इस कार के लिए कितना इंतजार करना पड़ेगा क्या पता जब तक ये सपना पूरा हो जाब तक इस्सी भी बढकर कुछ और आ जाये कुछ भी हो लेकिन एन सब कामो में इंडिया बहुत पीछे है ये बात तो माननी पड़ेगी पाठक बंधू ध्यान दे की यहाँ हम भारत की बुराई नहीं कर रहे है बल्कि हमारे कहने का मतलब ये है की इस तरह की चीजों की खोज में भी भारत के वैज्ञानिको को आगे होना चाहिए .वैसे हम समय समय पर दुनिया को ये साबित करते है की हम भी किसी से कम नहीं है ये बात भी माननी पड़ेगी....................!

Friday, January 6, 2017

"ऑफिस टाइम में चैट और फसबूक करने वाले हो जाये सावधान ...."




"वो सभी ऑफिस कर्मचारी ध्यान दे जो ऑफिस में नेट सर्फिंग  करते है। अगर वो सोसिअल नेटवर्किंग  साईट जैसे फेसबुक ,ऑरकुट या फिर चैटिंग में अपना टाइम पास करते है  या  ऑनलाइन गेम खेलते हैं। अगर वो वास्तव में ऐसा कर करते है तो अपनी  इस आदत को दूर करने   की कोशिश करें. वरना बहुत जल्द ही आपके बॉस की  डाट आप पर पड़ने वाली है। " 



ऐसा  सोफ्टवेयर  आ  रहा  है  जो गुप्तचर कि तरह काम करेगा , और आपकी साड़ी किर्या कलापों पर ध्यान रखकर बॉस को सूचित करेगा। अब इसको अभी डीप सोफ्टवेयर कंपनी ने बनाया है।  खासकर वो कर्मचारी जो कि आई टी कंपनी में वर्क करते है या कॉल सेण्टर में जॉब करते है। यह सॉफ्टवेयर  ई-मेल, फोन कॉल, और विडियो  कांफ्रेंसिंग के दौरान आपके हाव-भाव पर नजर रखेगा (.जैसे चित्रों  में दिखाया गया है ) 




हालाकि सभी कर्मचारी इसका विरोध करना चाएगे मगर क्यों कि आपको अपनी इस  आदत को  दूर करना ही होगा।  माइक्रोसॉफ्ट ने भी ऐसे सॉफ्टवेयर को पेश करने का इरादा करते हुए पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया है। खबर  तो  यहाँ  तक  है कि  यह सोफ्टवेयर कमर्चारियो  पर निगाह रखकर  उन्हें उनके क्रिया कलापों के अनुसार  पॉजिटिव व निगेटिव मार्क्‍स देगा , जिसका असर कंपनी में आपके प्रोमोसन और सलारी इन्क्रीमेंट पर भी पद सकता है. इस सोफ्टवेयर क़ा नाम  एक्टिविटी मोनिटर दिया गया है , लेकिन इसके बहुत फायदे है जैसे कि  इसके जरिए कोई संस्थान न सिर्फ गुप्त जानकारियों को लीक होने से रोकता है, बल्कि ग्राहकों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारियों और ट्रेड सीक्रेट्स को भी बचाए रखता है जैसे कि कुछ संस्थानों में इस सिस्टम से अधिकारियों या सहयोगी कर्मचारियों द्वारा उत्पीड़न को भी रोकने में मदद मिलती है, साथ ही साथ इसके द्वारा गलत  तरीके से किसी डाटा या सॉफ्टवेयर की डॉउनलोडिंग को भी रोका जा सकता है 



ये टी एक्टिविटी मॉनीटरकर्मचारियों द्वारा विजिट की गई वेबसाइट्स के लॉग पर निगाह रखता है यानी अगर कोई कर्मचारी काम के समय में ऑनलाइन गेम खेलता है, वीडियो देखता है या सोशल नेटवर्किग साइट्स का उपयोग करता है, तो उसकी जानकारी भी ये रखेगा , इस तकनीक से ऑफिस के  काम के दौरान जो लोग फ़ालतू के काम समय बर्बाद करते है अब उनको आसानी से कण्ट्रोल किया जा सकेगा और वो झूठ  भी नहीं बोल पायेंगे .

 मजे कि बात तो ये है कि इस तकनीक में कुछ ऐसे मोड्यूल भी है जिनकी मदद से व्यक्तिगत आईडी से भेजी गई ई-मेल के टेक्सट को भी कैप्चर  कर सकते हैं,और  किसी ने चैटिंग में क्या-क्या बात कीं उस रहस्य क़ा पाता भी लगाया जा सकता  है, इस तरह ऑफिस में आप हमेशा एक जेल में बंद रहेंगे ये सिस्टम एक ही समय में सभी कंप्यूटरों पर न सिर्फ नजर नज़र रखने के साथ ही साथ उनके ऑपरेशन को भी कण्ट्रोल कर सकता है जैसे कि  एक्टिविटी मॉनीटर नेटवर्क कंट्रोलर और मैं इन्चार्गे  को यह परमीसन देता है  कि वह नियंत्रण कक्ष से किसी भी कंप्यूटर को शट डॉउन या सिस्टम को रिबूट कर सकता है, कर्मचारी द्वारा किए जा रहे किसी फालतू के काम को बीच में भी रोका जा सकता है.




अगर देखा जाये तो ये सोफ्टवेयर काफी हद तक किसी भी संस्था की कार्य विय्वस्था को सुधारने  में काफी हद तक सहायक है .जिसका असर सीधे संस्था की गुणवत्ता पर भी पड़ेगा . परा यहाँ मै ये भी कहना चाहूँगा  की कुछ संस्थान अपने कर्मचारियों क़ा सही से  काम करने के बाद भी उनका शोषण करते है जो की गलत है जैसे की जब मन चाहे वो कर्मचारियों को निकाल देते है ,कभी कभी तो संस्था अपने फायदे के लिए अपने ही कर्मचारियों से  फर्जी काम भी करवाते है जिससे टैक्स कम देना पड़े  या फिर चेकिंग  के दौरान पकडे ना जाये . सत्यम  सोफ्टवेयर कंपनी क़ा घोटाला इसका एक बड़ा उदहरण है. और भी अनेक इंजीनियरिंग कालिजो में बहुत फर्जीवाड़ा चलता  है जैसे की जायदा टीचर दिखाना रिकॉर्ड में ,उनकी सेलरी नियम के अनुसार दिखाना पर उतनी देते नहीं है .और ना ही उतने अध्यापक होते है उनके पास और ना ही लैब   और वो फिर भी ऍ.आई .सी. टी . की चेकिंग में पकडे नहीं जाते . उन सब क़ा  क्या ? क्या ये सब सही है ? 





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