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Monday, May 26, 2014

करो शपथ - अपनी कथनी को अपनी करनी बनाओगे !


आज हो रहा ये सपना साकार , अबकी बार मोदी सरकार !

मोदी जे तुम करो शपथ , भारतवर्ष को विश्व में चमकाओगे !
किये हैं जो वादे रैलियों में, उनको अब तुम निभाओगे !!

कहीं कंकड़ , कहीं पतथर तो तो कहीं रास्ते में कांटो के झाड़ है !
तप रहा है देश सारा , हर तरफ महंगाई की मार है !!

कोई भर रहा अपनी जेबे नोटों से , तो कोई रूखी सुखी खाने को लाचार है !
होती जा रही है पुलिस भिरष्ट , कर रही गरीबो पर अत्याचार है !!



काम पड़े हैं ढीले ऑफिस में , नहीं है कोई डर, न ही इन पर पड़ रही मार है !
हर ऑफिस में आज भीड़ लगी है , ये परेशान जनता की कतार है !!

युवाओ की आखों में नौकरी के अधूरे सपने है , बड़ रहा यहाँ बेरोजगार है !
कुछ रिश्वत देकर सफल हो जाते , तो कुछ को मिल रहा आरक्षण का प्यार है !!

सुन लो मोदी जी , आज हो रहा है आपका सपना साकार !
अबकी बार मोदी सरकार , अबकी बार मोदी सरकार !!

अब देखना ये है कि , आप इस झुलसते देश को कितना बचा पाओगे !
यहाँ हर आँख में आसूं है , इनके साथ कितना न्याय कर पाओगे !!




रैलियों में किये गए वादो और भाषणो को सुन सुन कर ऊब गए हैं अब तो एक्शन देखने का मन है !

शुभकामनाओ सहित !!

Tuesday, May 6, 2014

डिप्रेशन मे रहना बोले तो जल्दी बूढ़ा होना

" दोस्तों हमको भगवान की एक अनमोल  देन है हमारा शरीर ,  अब ये हमारे हाथ  मे है कि हम इसका कितना ध्यान रखते है अपनी पोस्ट खबर सेहत सम्बन्धित की  कुछ सीरीज  के  माध्यम से  इन खबरो को आप तक  पहुचाने  का  एक छोटा  सा प्रयास  कर रहा हूँ।  "
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1-डिप्रेशन मे रहना  बोले तो जल्दी बूढ़ा होना 

दोस्तों डिप्रेशन एक ऐसी बीमारी है जो हमको  दीमक की तरह खोखला बनाकर छोड़ती है  , ये  बीमारी नहीं  बल्कि उस्से कहीँ बढक़र  है क्य कि बीमारि केवल हुमारे शरीर को बीमार करती है  डिप्रेशन शरीर  के साथ साथ हमकों मानसिक रुप से इतना कमजोर  कि हमारे मन मे नेगेटिव भावनाए  आतीं  रहतीं हैँ।  जैसा  की अक्सर माना जाता है कि डिप्रेशन इंसान को मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर बना देता है। मगर अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इन समस्याओं के साथ ही डिप्रेशन बुढ़ापा भी जल्दी लाता है। नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों ने एक स्टडी में पाया है कि डिप्रेशन के कारण शारीरिक क्षमताओं पर भी बुरा असर पड़ता है और यह सेल्स में एजिंग की प्रक्रिया को तेज कर देता है। जो लोग गंभीर किस्म के डिप्रेशन का शिकार होते हैं, वे बाकी लोगों के मुकाबले जल्दी बूढ़े हो जाते हैं। यह नतीजा 2407 लोगों पर की गई एक स्टडी में निकाला गया।




 दोस्तों कोशिश करिये इस डिप्रेशन से बचने  क़ी। कभी आप  नेगेटिव भावनाए आये तो आप खुद को डिप्रेशन क शिकार मह्सूस करो तो आप   अपनी जिंदगी के उन पलों को   याद करो जिन पलो मे आपने किसी सफलता को हासिल किय हो भले हो वो सफलत बडी हो य छोटी ऐसा करकें आप के   अन्दर एक नयी ऊर्ज का  सन्चार होगा !

२ - अगर आप इतने आलसी हो की कसरत नही  कर   सकते तो कम से कम दूसरो को ही कसरत करते हुये देख  लो !

खुद को फिट रखना चाहते हैं लेकिन आलस्य आपको जिम जाने से रोकता है। कोई नहीं, यह खबर आपके लिए है। एक स्टडी में पता चला है कि दूसरों को कसरत करते देखने से भी आपके दिल की धड़कन और दूसरी शारीरिक प्रक्रियाएं उसी तरह तेज हो जाती हैं, जैसा कि आपके खुद के एक्सरसाइज करने पर होता। यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न सिडनी के रिसर्चरों ने कहा है कि स्पोर्ट्स के प्रोग्राम देखने से आपकी हार्ट बीट, सांस लेने की रफ्तार और शरीर में खून का प्रवाह तेज हो जाता है, जिसकी वजह से आपका स्वास्थ्य बेहतर होता है। स्टडी में पता चला कि जब कोई व्यक्ति किसी एक शख्स के दौड़ने का विडियो देखता है तो उसकी हार्ट बीट, सांस लेने की रफ्तार और खून का प्रवाह तेज हो जाता है और विडियो में दिख रहे शख्स की दौड़ खत्म होते ही देखने वाले व्यक्ति के शारीरिक एक्टिविटी दोबारा से सामान्य हो जाती है। खास बात यह है कि पहली बार पता चला है कि हमारी मांसपेशियों की एक्टिविटी उस वक्त तेज हो जाती है, जब हम कोई फिजिकल एक्टिविटी देखते हैं। 
                                            
                                                    

३- महिलाये अपने ब्लड प्रेशर का विषेश  ध्यान  रखें क्यो कि महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है हाई ब्लड प्रेशर!

वैज्ञानिकों ने पहली बार अपनी रिसर्च में पाया है कि ब्लड प्रेशर के मर्ज से जुड़ा मेकेनिजम पुरुष और महिलाओं में अलग-अलग होता है। अमेरिका के वेक फॉरेस्ट बैपटिस्ट मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों का कहना है कि डॉक्टरों को महिलाओं को होने वाली हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत से पुरुषों के मुकाबले ज्यादा एक्टिव और बेहतर तरीके से निपटना चाहिए। मेडिकल सेंटर में प्रफेसर ऑफ सर्जरी कॉर्लोस फेरारियो के मुताबिक, अभी तक मेडिकल कम्यूनिटी को लगता था कि ब्लड प्रेशर की दिक्कत महिलाओं और पुरुषों में एक सी ही है, इसलिए इससे जुड़ा ट्रीटमेंट भी इसी आधार पर किया जाता था। फेरारियो के मुताबिक, यह पहली ऐसी स्टडी है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर के इलाज के दौरान दी जाने वाली दवाओं के निर्धारण में लिंग (पुरुष या स्त्री) भी एक फैक्टर है।


                                                     


     फेरारियो कहते हैं कि बीते 20-30 साल में दिल की समस्याओं से पुरुषों में मौत के मामलों में कमी आई है, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता। नई स्टडी के तहत प्रयोग के लिए 53 साल या उससे ज्यादा उम्र के 100 से ज्यादा ऐसे पुरुष और महिलाओं को चुना गया, जिन्हें हाईबीपी की शिकायत थी लेकिन फिलहाल उनका इलाज शुरू नहीं किया गया था। इस टेस्ट में हीमोडायनामिक फोर्सेज (ब्लड सर्कुलेशन के लिए जिम्मेदार फोर्स) के अलावा हाई ब्लड प्रेशर से जुड़े मेकेनिजम में हार्मोनल उतार-चढ़ाव का भी अध्ययन किया गया। रिसर्च में पता चला कि बढ़े ब्लड प्रेशर की स्थिति में महिलाओं में दिल संबंधित बीमारियां पुरुषों के मुकाबले 30 से 40 पर्सेंट ज्यादा थीं। इसके अलावा, महिलाओं का कार्डियोवेस्कुलर सिस्टम पुरुषों के मुकाबले बिलकुल अलग तरीके से व्यवहार करता पाया गया।

                       दोस्तों इन खबरों को  कुछ हिंदी समाचार पत्रो से लिया गया है, अपने अंदाज  मे प्रस्तुतिः देकर  आप तक पहुँचाने  के लिये ! सेहत से सबंन्धित खबरों से जुडी इस  कड़ी में बस इतना ही  अगली कड़ी मे  फिर होगे क़ुछ  नई  खबरोँ   के साथ !!

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