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Saturday, April 26, 2014

साहब मै मख्खन बेचता हूँ !!

कल शाम जब मार्केट से गुजरा तो देखा की एक दूकान पर बहुत भीड़ लगी हुयी थी ! मन में जिज्ञासा हुयी क्यों न इस दूकान पर जाकर देखा जाए की आखिर यहाँ ऐसी क्या व्यवस्था है जो इतने लोग लाइन लगाकर खड़े हुए हैं !
जब दूकान पर गया तो दूकान वाले ने कहा साहब मै मख्खन बेचता हूँ लेना है तो आप भी लाइन में जाकर खड़े हो जाओ , मै ने कहा मै आपसे कुछ पूछना चाहता हूँ , दूकान वाले भैया ने कहा अभी डिस्टर्ब मत करो , 9 बजे के बाद आना तब तक भीड़ खत्म हो जायेगी , मै ने कहा ठीक है साहब अब तो 9 बजे के बाद ही आउगा !!
जब 9 बजे के बाद गया तो उसने कहा हाँ साहब अब पूछो क्या पूछना चाह रहे थे !
मै ने कहा भाई ये मख्खन बेचकर कितना  कमा  लेते हो? तब उसने कहा साहब मख्खन की बहुत बिक्री है आजा कल मेरा ये धंधा फिलहाल मंदा होने वाले नहीं है , रोज हज़ार हज़ार के नोट बना लेता   हूँ !




मै ने कहा भाई आपके यहाँ कितने प्रकार का मख्खन मिलता है ?
साहब हर प्रकार का मिलता है आपको कौन सा चाहिए ?
मै ने कहा नहीं पहले आप मुझे आप उन सभी मख्खन के बारे में बताओ जो आप बेचते हो जो अच्छा लगेगा वो लूँगा !
साहब पहला मख्खन मै वो बेचता हूँ जिसको आप ऑफिस में अपने बॉस को लगाकर अपने प्रमोशन और सैलरी इन्क्रीमेंट करवा सकते हो !!
साहब दूसरा मख्खन वो है जो मार्केट में नया नया आया है इसको student लोग खरीदते हैं वो इसको अपने गुरुजनो को लगाकर अच्छे मार्क्स और ग्रेड लेते हैं iski बहुत बिक्री है आजा कल !!
तीसरा मख्खन वो है जिसको लोग किसी नेता , अधिकारी या सगे सम्बन्धी को लगाकर अपने सम्बन्धो को मधुर बनाये रखते हैं. !!
साहब चौथा मख्खन वो है जिसे आप अपने दोस्तो को लगाकर उनके प्रिया बने रहते हैं और अपन काम भी निकाल लेते हैं !!
साहब पाचवा मख्खन वो है जिसको आप अपने घर में भाई बहन चाचा ताऊ को लगाकर अपनी जिद पूरी करा सकते हो !
साहब बस इतने ही मख्खन है बस !!
मै ने कहा भाई मुझे वो मख्खन दो जो माँ बाप को लगाया जा सके !
साहब धंधे का सवाल है , झूठ नही बोलुँगा , मख्खन तो वो वाला भी है मेरे पास पर वो जयदा देर तक काम नहीं करता उसकी पावर कम है वो अस्थायी रूप से काम करता है वो भी समय सही रहा तो !
मै ने कहा तब मै चलता हूँ , अच्छा भाई धन्यवाद , नमस्कार , कुछ कदम चला ही था की मन में एक नया सन्देश आया , केवल माँ बाप का रिस्ता ही सुधारता है , बाकी सारी दुनिया सजा देती है साहब ! बाकी सारी दुनिया सजा देती है !! 

Tuesday, April 8, 2014

मै न हिन्दू न मुसलमान मुझे जीने दो !!

दोस्तों जैसे जैसे चुनावो का समय नजदीक आता है नेता लोग सम्प्रदयिकता का खेल शुरू कर देते हैं कोई दलितो को रिझाने में लगा रहता है तो कोई मुस्लिमो को कोई हिन्दू को राम मंदिर के नाम पर भड़काता है तो कोई मुस्लिमो और जाटों  को आरक्षण के नाम पर आखिर कब तक ये नेता लोग अपनी पार्टी के लिए को आपस में लड़वाते रहेंगे। कितने शर्म कि बात है अभी एक दो दिन पहले ही एक वरिस्थ पार्टी के वरिस्ट नेता के खिलाफ बिजनौर और शामली में भड़काऊ वाक्य देने के कारण रिपोर्ट दर्ज कि गयी है इस खबर को काफी अखबारो ने दिखाया है  , वाक्य था अब मुज़फरनगर  दंगो का बदला ले लो ये चुनाव एक  अवसर है , कैसे कैसे नेता हैं यहाँ पर ?  जातीय संघर्ष या साम्प्रदायिक दंगो के भड़कने का कारण भले ही कोई भी बात हो मगर राजनितिक दलों के लोग उस आग को बुझाने के बजाये इतना फैला देते है की आम आदमी अपना बहुत कुछ गवा बैठता है . हिन्दू मुस्लिम के नाम पर नेता लोग ना जाने कब तक अपनी राजनीती की रोटियाँ सेकते रहेंगे . आज भी गुजरात दंगो की फोटो देखकर रूह काँप उठती है 


                
                        



    

          
यही हाल इस बार उतर प्रदेश के मुजफरनगर जिले का रहा . उतर प्रदेश के मुजफरनगर के दंगो की चिनगारिया बुझी भी नहीं थी , कि हमारे महान नेताओ ने उनको फैलाकर मेरठ के सरधना गाँव तक पंहुचा दिया . आज भी जगजीत जी द्वारा गायी ये पंक्तिया याद आने लगती हैं काश हमारे देश के नेता और जनता सभी इन पंक्तियों पर अमल करके देश में अमन और शान्ति बनाए रखते .


आज भारतवर्ष की समझदार जनता यही अपील करती है कि - 

                                         " मै न हिन्दू न मुसलमान , मुझे जीने दो !

                                    बस दोस्ती है मेरा ईमान मुझे जीने दो !!
                                   सब के दुःख दर्द को अपना समझकर जीना !
                                    बस है यही मेरा अरमान मुझे जीने दो !!
                                    मै न हिन्दू न मुसलमान मुझे जीने दो !! "


Thursday, April 3, 2014

मै कुछ ढूंढ़ता हूँ !!

सूरज की तपिश में नरमी को ढूंढ़ता हूँ !
तपती हुयी दोपहरी में पेड़ो की छाँव ढूंढ़ता हूँ !!
जिस देश में होती थी कभी पेड़ पौधों की पूजा !
उस देश में अब उस खोयी हुयी खुशहाली को ढूंढ़ता हूँ !!







राजनीती में अक्सर उस राज को ढूंढ़ता हूँ !
जो करे देश की जनता का भला ऐसे प्रयास ढूंढ़ता हूँ !!
 बस इस देश में एक नये संचार को ढूंढ़ता हूँ !
मैं  कुछ ढूंढ़ता हूँ ,बस यही सब  कुछ ढूंढ़ता हूँ  !!

       
      
नोट – ये मेरी कविता के कुछ अंश है जिनको मै यहाँ शेयर कर रहा हूँ इसको कोई अन्य अपने नाम से प्रकाशित न करे !

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