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Sunday, December 18, 2011

इंजीनियरिंग कोलिजो में में बढती राजनीति , फर्जीवाड़ा और शोषण


आज कल उत्तर प्रदेश में अधिकतर प्राइवेट इंजिनीयरिंग  ग कोलिजो के हालात बहुत ही बेकार हो चुके है , मै ये बात सभी इंजिनीयरिंग कालिजो के लिए नहीं कहा रहा हू . लेकिन अगर इस बात को लेकर  इंजीनियरिंग  कालिजो में एक सर्वे कराया जाये तो ये बात बिलकुल सही निकलेगी , पच्छिम उतर प्रदेश में कुछ कोलिज तो  बिलकुल ही अपनी हद पर उतर आये है, देखिये कहानी कुछ ऐसी है . सबसे पहले शुरवात करते है राजनीति से , आज कल इन कोलिजो को जो माहोल है वो कुछ इस तरह क़ा है की यहाँ पर जो काम करने  कर्मचारी या अध्यापक है उनमे से कुछ माहोल को बिलकुल बिगाड़ कर रख देते है , जैसे की वो नये अध्यापक को किसी ना किसी केश में फसकर निकलवाने की कोशिश , या फिर ऊशका इतना शोषण करते है कि वो बेचारा खुद ही नौकरी छोड़कर चला ज़ाता है. कुछ लोग तो क्लास में भी स्टुडेंट को पढाने में भी इंटरेस्ट नहीं  लेते और उनको इन्टरनल मार्क्स देकर खुश कर देते है जिससे कि स्टुडेंट कोई शिकायत ना करे . या जब कोई स्टुडेंट शिकायत करता है तो इन्टरनल मार्क्स कि धमकी देते है. कुछ लोग चापलूसी वाला माहोल बना देते , वो अपना काम सही से ना करके , कोलिज डाईरेक्टर या हेड कि चापलूसी करते है और दूसरो कि चुगली करते है ताकि  वो खुद कि जॉब बचा सके.ये तो थी बात इन कोलिजो के माहोल क़ी.
                                         अब बात करते है कि क़ी किस तरह से इनमे डाइरेक्टर और चेयरमन पोस्ट के लोग कर्मचारियों  क़ा शोषण करते है , जैसे क़ी इन कोलिजो में देखा ज़ाता है क़ी जैसे कमर्चारी के सेलरी इन्क्रीमेंट क़ी बात आती है ये उसको भरा क़ा रास्ता दिखा देते है या फिर उतना मेंटली हरास्स्मेंट करते है क़ी वो खुद जॉब छोड़कर चला जाये. जब कोई कर्मचारी अपनी कोई समस्या लेकर इन लोगो के पास जाता है तो ये कहते है क़ी आप कही और जॉब देख लीजये . सबसे बड़ी बात आती है सेलरी क़ी जहा तक मरी जानकारी है क़ी नियम के अनुसार किसी भी कर्मचारी महीने  क़ी सेलरी अगले महीने क़ी १० तारीख तक हर हाल में उसको मिल जानी चाहिए .पर ये लोग अगले महीने क़ी २५ तारीख के बाद ही देते है. उस पर भी वियाज खाते है.   

                                                 

                                         अब बात करते करते है इन  कोलिजो में जमकर हो रहे फर्जीवाड़े क़ी , जैसे क़ी देखा ज़ाता है कि इन कोलिजो को ऐ.आई.सी.टी और सम्बंधित यूनिवर्सिटी के नियमो क़ा पलान करना होता है पर ये इन नियमो कि भी जमकर धज्जिया उडाते है .  जैसे कि ऐ.आई. सी.टी ने हर कोलिज के लिए स्टुडेंट और टीचर क़ा रेसियो निर्धारित कर रखा है और टीचर के सेलरी भी उसकी पोस्ट के अनुसार निर्धारित है ,ये उससे काफी कम सेलरी देते है पर सिग्नेचर उतनी ही सेलरी पर करवाते है जितनी ऐ.आई.सी.टी. के नियम के अनुसार है , कर्मचारी कि मजबूरी है जॉब करना घर जो पलना है बेचारे को, अब देखिये ये लोग क्या करते है ये फर्जी बायोडाटा , और कागज दिखाकर ऐ. आई .से.टी कि आँखों में धुल झोखते है . ऐसे कर्मचारियों  क़ा बायोडाटा और कागज दिखाते है जो इनके यहाँ जॉब करता ही नहीं, अब आप कहोगे ये कागज कहा से आते है तो श्रीमान जी जब ये लोग अपने यहाँ टीचर क़ा रिक्रूटमेंट  करते है और जब उनका साक्षात्कार के लिए बुलाते है तो तो उन्ही में से बायोडाटा और कागजो कि फोटोकॉपी मगाते है  साक्षात्कार के समय पर . अब जिनको  ये सेलेक्ट करते है उनको तो जॉब देते है अपने या और जिनको नहीं करते उनका बायोडाटा और कागज रख लेते है और उनसे कहते है कि बही आप वेटिंग में हो . अबस फिर क्या जब कभी चेकिंग क़ा समय होता है तो उन्ही बायोडाटा या कागजो को दिखा देते है . , इसी तरह क़ा कुछ काम ये लोग स्टुडेंट कि इस्कोलर शिप में से पैसा बचा कर भी करते है .


                                            अब देखते  है कि ये लोग स्टुडेंट क़ा किस तरह से पागल बनाते है , सबसे पहले तो स्टुडेंट क़ा पागल बनाते है , प्रवेश के  समय पर अपने कोलिजो में ऐसी शुविधाये दिखाते है विज्ञापन में  जो इन कोलिजो में कभी होती ही नहीं है. , फिर स्टुडेंट क़ा पागल बनाते है प्लेसमेंट के समय पर कुछ कोलिज तो फर्जी कंपनी बुलाकर फर्जी प्लेसमेंट करवा देते है स्टुडेंट कि तसल्ली के लिए , जिससे  उसे ये ना लगे कि कोलिज में कंपनी नहीं आई लेकिन जब इनकी जुवायिनिंग क़ा समय  आता है तब स्टुडेंट को असलियत क़ा अहसास होता है  और तब तक वो कोलिज से पास हो चूका होता है . अब कहा गये ऐ.आई .सी.टी. के नियम और कानून कभी कभी तो लगता कि हर कोई एक दुसरे से मिला हुआ है और सब एक दुसरे को सपोर्ट करते है , भले ही उस  से   स्टुडेंट क़ा करियर  ख़राब हो या फिर कर्मचारी कि नौकरी  जाये. इन्हें बस अपने मुनाफे से मतलब है .

नोट  :- पाठकगण कृपया ध्यान दे कि ये बात सभी इंजीनियरिंग कोलिजो पर लागू नहीं होती. कुछ कोलीज ऐसे भी है जहा क़ा माहोल अच्छा है और वो बास्तव में स्टुडेंट क़ा प्लेसमेंट भी कराते है और कर्मचारी को भी अच्छी सुविधाए  देते है . ये लेख मेरी अपनी  धारणा है इन शोषण कर रहे इंजिनीयरिंग कोलिज के बारे में . कुछ कोलिजो के बारे में ऐसा बहुत सुनने में भी आता है और वास्तव में ऐसा है भी . हो सकता है  कि पढने वाला इसको सही ना समझे इसलिए मेरा निवेदन है कि जो कुछ भी मै ने लिखा है उसको विवाद क़ा विषय ना बनाए .













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