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Tuesday, November 15, 2011

बाल दिवस पर विशेष





हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया ज़ाता है . हमारे देश कि सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि यहाँ नियम क़ानून तो हर चीज़ के लिए बने है पर उनको फोलो करने वाले बहुत ही कम है और कितना फोलो किया ज़ाता है ये तो आप जानते ही हो . जब सुबह सुबह मै कॉलेज की बस में ज़ाता हूँ तो देखता हू कि कुछ लोग कितने गलत तरीके से गाडी को ओवरटेक करते है और रेड लाइट होने पर भी गाडी को निकाल ले जाते है. यातायात पुलिश क़ा चौराहे पर खड़ा एक अकेला कर्मचारी अब रोके भी तो किस किस को रोके. कभी कभी जब दीवान जी भी उसके साथ होते है तो जरूर चालान कट ज़ाता है. यही है भारत के अधिकतर लोगो ई सोच वो अपनी मन मर्जी करते है सारे नियमो को ताख पर रख कर .

इसी तरह के कुछ नियम क़ानून यहाँ पर बाल मजदूरी को लेकर भी बनाए गये है. 15 साल की ऊम्र से कम बच्चे के द्वारा मजदूरी करवाना कानून अपराध है. लेकिन आप किसी भी हलवाई , चाय वाले, होटल, ढाबे पर चले जाये वहा पर अक्सर बाल मजदूर आपको देखने के लिए मिल ही जाते है .हम लोग भी जो बाल मजदूरी के खिलाफ है जब हम चाय वाले की दूकान पर जाते है तो कहते है "ओये छोटू दो चाय ला ".जब हम लोग इन दुकानों के मालिको से मालुम करते है कि बच्चो से क्यों काम करवाते हो तो उनका कहना होता है कि इनके माता पिता ही इनको हमारे पास छोड़कर जाते है. और उनका ये कहना काफी सही भी है. चाहे छोटा सहर हो या बड़ा बाल मजदूर आपको हर जगह देखने को मिलते है. मै अक्सर कूड़े के ढेर से छोटे छोटे बचो को प्लास्टिक की चीज़े और पन्नी या पोलिथीन छांटते हुए देखता हू ओन्नके पैरो में ना तो चप्पले होती है और ना ही वो गंदगी की परवाह करते बस अपने काम में लग जाते है . इसी तरह से आपको बसों में छोटे छोटे बच्चे , पानी की बोटेल, मूंगफली, खीर , गोला, दाल आदि बेचते हुए भी दिखाई देते होंगे. कुछ बच्चे तो बसों में गाना गाकर पैसे लेते है .ये सब उनकी मजबूरी है साहब . सोचता हू की क्या इन बच्चो को और बच्चो की तरह खेलने और अपने बचपन को जीने क़ा हक़ नहीं ? क्या इनको स्कूल जाने क़ा हक़ नहीं? जब हम इन सब सवालों क़ा जवाबा इनके माता पिता से मागते है तो उनकी आँखों में आसू आ जाते है वो कहते है की साहब हम गरीब लोग है अगर इनको काम पर ना भजे तो हम पेट कैसे भरेंगे?


तो कुल मिलाकर अंत में बात आती है गरीबी पर ये अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है जिसका जायदा जिकर मै यहाँ नहीं करूंगा पर इतना जरूर कहूँगा की जब तक हमारे देश में ये गरीबी रहेगी तब तक ये बच्चे एक खुशाल बचपन नहीं जी पायेंगे और ना ही पढ़ लिख पायेंगे सही से. गरीब माँ बाप भी अपने बच्चो के लिए कहते है कि
" मेरे बच्चे भी अपनी गरीबी की समझ रखते है , तभी तो घर के वर्तनो को ही अपना खिलौना बना लेते है ".
---मनोज बिजनौरी

Wednesday, November 9, 2011

ऊर्जा बचाने में अब ये चिप आपकी मदद करेगी



ऊर्जा का बढता प्रयोग आज हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा बन गया है . हमारे दैनिक जीवन के अधिकतर काम आज के समय में बिजली से चलने वाले यंत्रो की मदद से किये जाते है.इसलिए ऊर्जा का अपना एक विशेष महत्व है . जिसको बनाने के लिए तरह तरह के साधन और तकनीको को विकसित किया जा रहा है. जिनमे बड़े स्तर नदियों पर बाँध बनाकर बिजली उत्पन्न करना तो पहले से ही है .

इसके अतिरिक्त बड़े स्तर पर नाभिकीय रिएक्टर बनाकार परमाणु ऊर्जा के द्वारा बिजली उत्पन्न करना भी एक अहम् कदम है . अगर हम छोटे स्तर पर बात करे तो , बिजली बनाने के लिए डीजल इंजन , पेट्रोल इंजन आदि भी बनाए गये. और साथ ही साथ सेल बेटरी बनाकर रासायनिक क्रिया द्वारा बिजली बनाना भी आम तौर पर प्रयोग होता है.

धीरे धीरे फिर बारी आई सौर ऊर्जा की मानव ने सूरज की रौशनी क़ा प्रयोग करके भी बिजली बना डाली . इतने सब आविष्कार किये गये बिजली को बनाने के लिए फिर भी आज इसकी कमी महसूस होती है . कितना अच्छा होगा कि हम आज के समय में ऊर्जा के बड़ते उपयोग को देखकर ऐसी तकनीको को प्रयोग करे जो कि ऊर्जा को बनाने में हमारी मदद करे. इस दिशा में एक ऐसी चिप बनायी है


भारतीय मूल के एक अमेरिकी वैज्ञानिक राज दत्त जी ने , जो न सिर्फ ऊर्जा बचाएगी, बल्कि उपलब्ध चिप्स की तुलना में सस्ती भी पड़ेगी.इस चिप की खासियत को ऐसे समझा जा सकता है कि इसकी मदद से प्रोसेसर 90 फीसदी कम ऊर्जा खर्च करेंगे.साथ ही उनकी रफ्तार में 60 परसेंट कि तीव्रता आ जायेगी .

इस तकनीक की खास बात यह है कि सेमीकंडक्टर चिप पर सूचनाओं का ट्रांसफर फोटांस के जरिए होगा.अभी तो इस काम को करने के लिए इलेक्ट्रांस का प्रयोग हो रहा है. पावर कंजंप्शन के नजरिये से तो यह बहुत उपयोगी है ,फोटॉन से सूचनाओं के आदान प्रदान से इतनी हीट उत्पन्न नहीं होती इस कारण प्रोसेसर को ठंडा बनाए रखने के लिए ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ेगी. और इस तरह यह ऊर्जा कि खपत में कटौती करके ऊर्जा बचाएगी . इलेक्ट्रॉन केंद्रित तकनीक में पुर्जो को ठंडा बनाए रखना जरूरी होता है

.इसके साथ ही एक चिप में ट्रांजिस्टर्स की संख्या बढ़ाई जा सकेगी. पर इसका असर इसकी स्पीड पर पास सकता है .यह चिप अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठान पेंटागन को उपयोगी लगी है और वो जल्द ही इसका इस्तेमाल अगली पीढ़ी के ज्वाइंट स्ट्राइक फाइटर विमान एफ-35 में करने जा रहे है. राज दत्त जी अब पेंटागन से करार करने के बाद इसे सामान्य उपयोग के लिए भी इस चिप को उपलब्ध कराने की सोच रहे हैं. अब देखना है कि कब तक मार्केट में आने वाले यंत्रो में इस चिप क़ा प्रयोग होता है .और कब हम ऊर्जा बचा पते हैं.

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