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Thursday, September 22, 2011

भिरसटाचार का कड़वा सच

सन 1947 के बाद से भारत ने लगातार काफी तरक्की की है और रोज किसी न किसी क्षेत्र मे नयी नयी बुलान्दियो को छू रहा है . पर भिरसटाचार के कारण देश से बहार गैरकानुनी तरीके से जमा पुंजी के बहिप्रवाह से भारत को सन 2000 से 2010 के लगभग 200 अरब डॉलर से भी जायदा का नुकसान हुया है , वासिंगटन के अनुसंधान ऑर प्रचार संगठन GFI "गोल्बल फ़ाएनेन्सिअल इंतीग्रीती " के रेपोर्ट के अनुसार 2000 से 2008 के बीच ये नुकसान 125 अरब डॉलर था.




                                     
GFI की गरना के अनुसार 2004 से 2009 के दुराण भारतीय अर्थविवस्था मे बूम कि स्तिथी रही ऑर इस दौरान अर्थविवस्था औस्तन 8 % कि दर से बडी . लेकिन पुंजी के प्रवाह के बाबजूद गरीब आखिर गरीब ही रहा . भारत मे भिरसटाचार फैला हुया है. राजनीतिक ऑर कॉर्पोरेट जगत के प्रबंधक दोनो धन को इधर उधर करते है. रिपोर्ट के अनुसार भारत आर्थिक रूप से आगे बडने के साथ साथ बुनियादी ढाँचे को मजबूत कर रह है ,बढती महंगाई भी काफी हद तक इसके लिए जिम्मेदार है , सरकार भी उद्योगपतियों का ही साथ देती है आम जनता का नहीं ,पर गरीबी की स्तीथि और भी बेकार है . गरीब आखिर गरीब ही है . आम जनता के हित की चिंता किसे है सब अपनी अपनी जेबे भरने में लगे हैएस विषय पर लिखने को तो बहुत कुछ है पर बस इतना ही लिखुंगा , वर्ना सरकार के भिरस्ट मंत्रियो को ओर भिरसटाचार फैलाने वाले लोगो को शर्म आने लगेगी. काश ये आती कम्व्खत वो भी नही आती. अब भैया भिरस्ट कौन है कौन नही ये कहना मुस्किल है क्यो कि अधिकतर हर आदमी भिरस्ट है ,रिश्वत देने वाला भी ओर लेने वाला भी .

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