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Tuesday, May 25, 2010

अब कंप्यूटर जी धरती में पानी का पता भी लगायेंगे -


जी हां अब कंप्यूटर जी भी धरती में पानी का पता लगायेंगे । असल में आज के टाइम में वैसे भी धरती में पानी की कमी का आंकलन किया जा रहा है और कोसिस की जा रही ही धरती में छिपे पाने के श्रोतो का पता लगाने की ताकि की ये धरती फिर से हरी भरी हो जाए । कोई तो ऐसा हो जो एस धरती को उसका पानी लौट शायद ये कंप्यूटर इस काम में कुछ मदद करे आओ जानते है कुछ इसके बारे में।

वैज्ञानिकों ने एक ऎसा कम्प्यूटर बनाया है जो जमीन में दफन पानी के भण्डार को खोज निकालने में मदद करेगा। ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तान के नीचे अब भी पानी के सोते मौजूद हैं। लाखों साल से जमीन में दफन पानी के इस भंडार को खोज निकालने के लिए वैज्ञानिकों ने पानी के बहाव पर निगाह रखकर एक कम्प्यूटर मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल के आधार पर भूमिगत पानी का मैप तैयार किया गया है।ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की एक टीम ने सेन्ट्रल ऑस्ट्रेलिया स्थित सिंपसन रेगिस्तान की सतह के नीचे मौजूद पानी की मैपिंग की है। इसे बनाने वाले प्रोफेसर माइकल हचिंसन का कहना है, रेगिस्तान की सतह से 35 मीटर नीचे नदियों और झीलों का नेटवर्क दबा हुआ है। एक समय में ऑस्ट्रेलिया का यह हिस्सा आज से ज्यादा नमीवाला और हराभरा हुआ करता था। इस कम्प्यूटर मॉडल के आधार पर यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज बहने वाली नदियों की भविष्य में क्या स्थिति हो सकती है।


लेकिन भैया हम इंडिया में रहते है यहाँ तक देखो कब तक ये तकनीक उपयोग में लायी जाती है भारत में काफी जगह ऐसी है जो पानी के लिए तरस रही है देखो कब तक और उनको इंतजार करना पड़ता है। फिर हाज़िर होंगे किसी नयी जानकारी के साथ ............

Tuesday, May 18, 2010

नैनो ने जीता एडिसन अवार्ड में स्वर्ण पदक ..



अरे ओ छोटू !
हाँ भैया !
कुछ सुना तुने !
क्या भैया ?
वो ये की अब हमारे देश की सबसे छोटी कार नैनो ने २०१० एडिसन अवार्ड्स में स्वर्ण पदक जीता है।
भैया हमारे देश के अनमोल रतन श्री रतन टाटा जी ने अपने सपनो को को पूरा ही नहीं किया बल्कि उसको उस मुकाम तक पहूचा दिया जहा तक सोचा भी नहीं था । इसके लिए इंडिया की जनता भी बहुत दीवानी रही होगी ।

हाँ भैया ऐसा ही होगा !.................

Thursday, May 13, 2010

अब घरेलू काम में भी रोबोट आपकी मदद करेगा


अक्सर हमारे घरेलू काम भी कभी कभी बहुत टेंशन देने लगते है उनको निपटाने में हमको किसी ऐसे की जरूरत होती है जो हमारी मदद करे लेकिन साहब आज कल सुनता कौन किस की है छोटे भाई से घर के काम को कहते है तो जवाब मिलता है की मुझे दोस्त के पास जाना है । सिस्टर से कहे तो जवाब मिलता है आप ही कर लो मुझे अभी कॉलेज का काम करना है । अब पिताजी से तो कह नहीं सकते वो तो ऑफिस के काम से ही थक जाते है । अब माता जी जी ही एक है जो मादा करती है या फिर यूं कहे की बड़े माता जी की मदद करते है । लेकिन अब एक खुशखबरी है रूको रूको -----अभी बताते है ---
साइंसदानों ने आखिरकार एक ऐसा रोबोट तैयार कर ही लिया जो घरेलू कामकाज में मदद कर सकता है। इसमें अच्छी खबर यह है कि पीआर2 नामक रोबोट तौलियों की तह लगाने जैसा बढ़िया काम भी कर सकता है। जबकि बुरी खबर है कि यह हर तौलिए को तह लगाने में 25 मिनट का समय लेता है।

जाहिर है कि घरेलू महिलाएं इस उपलब्धि से कोई खास उत्साहित नहीं होंगी लेकिन रोबोट मशीनरी के मामले में यह एक महत्वपूर्ण सफलता है। अब तक डिजाइन किए गए रोबोट जटिल काम भी कर लेते हैं लेकिन उनके काम में दोहराव होता है जैसे कि असैम्बली लाइन में कारों का निर्माण जहां उनका एक समान रूप और आकार की वस्तुओं से सामना होता है।
साइंसदान एक ऐसा रोबोट बनाने की कोशिश करते रहे हैं जो ऐसी वस्तुओं को समझ कर उनका इस्तेमाल कर सकें जिन्हें उन्होंने पहले न देखा हो और जिनका रूप भी उनके लिए नया हो। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में एक टीम ने अथक रिसर्च के बाद एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किया ताकि पीआर2 काम करते वक्त अक्ल का इस्तेमाल भी कर सके।
एक परीक्षण के दौरान पीआर2 ने विभिन्न आकार, रंग और मैटीरियल वाले तौलयों के ढेर से छांट कर उनकी तह लगाई। यह वीडियो क्लिप यूट्यूब पर भी डाला गया है जिसे दर्शनीय बनाने की लिए स्पीड 50 गुना बढ़ाई गई है। टीम में शामिल एक कंप्यूटर वैज्ञानिक पीटर एबील ने दावा किया कि पीआर2 के इस कौशल ने रोबोटों के विकास से संबंधित एक मुख्य मुद्दे को हल कर दिया है। रोबोटों और कंप्यूटरों को ऐसी वस्तुओं से निपटने में दिक्कत आती है जिनका आकार बिगड़ जाता है जैसे कि तौलिया।
लेकिन साहब जब तक ये रोबोट मार्केट में घरेलू कामो के लिए उपलब्ध होगा तब तक शायद हम बूड़े हो जाये। चलो कोई बात नहीं अगर हम नहीं तो सहायद हमारी आने वाली पीडी इसका उपयोग कर सके । दुनिया बदल रही है भाई टेक्नीकल तो बनना ही पड़ेगा । आखिर कंप्यूटर का राज है .................

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