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Thursday, December 23, 2010

खिलते नहीं है फूल अब तो मेरे बाग़ में……………….

ये क्या हो गया है अब मेरे चमन को
इस प्यारे वतन को , उस नियारे वतन को !
खिलते थे कभी जहा फूल मोहबत के ,
अब वही पर नफरत के फ़साने लिखे जाते है ,
हर तरफ मच रहा है शोर भिरास्ताचार का,
इस बढती महंगाई का , इस बड़ते अपराध का !
सूख गये है पौधे , अब इस बाग़ में ,
खिलते नहीं है फूल अब तो मेरे बाग़ में !
एक वो भी समय था जब, वो दुःख तकलीफ मेंअपना सहारा दिया करते थे।,
अब तो दूर से नज़र चुरा लेते है ,
मिलते भी है तो बस हाय हेल्लो ,टाटा बाय बाय किया करते है।
क्यों होता जा रहा है ये , अब क्यों बढ़ रही है रिश्तो में दूरिया।
क्या कमी हम सब में है , या फिर ये है जमाने कि खामिया।
मिलती नहीं है खूसबू प्यार की अब तो मेरे बाग़ में,
खिलती नहीं बहार , चैन और अमन की अब तो मेरे बाग़ में!
खिलते नहीं है फूल अब तो मेरे बाग़

Wednesday, December 22, 2010

पूजनीय दादा जी को शत शत नमन !

"आज से तीन साल पहले आप हमको छोड़कर चले गये पर आज भी आपका साथ हम महसूस करते है याद करते है आपकी बातो को और प्रेरित होते है कुछ अच्छा करने के लिए "

कुछ लोग इस देश में ऐसे भी होते है जिनका जीवन बहुत ही संघर्षशील होता है , वो दूसरो के लिए बहुत कुछ कर गुजरते है ,लेकिन नीव कि ईंट बनकर रह जाते है . ऐसे ही एक शख्स थे पूजनीय ठाकुर सिंह जी और हमारे दादा जी . ठाकुर सिंह जी का जन्म सन १९०३ को यू.पी. के बिजनौर जिले के अफजलगढ़ क्षेत्र के दहलावला गाँव में हुआ था . वो एक ऐसे शख्स थे जो निडर थे बस एक बार जिस बात को ठान लिया उसको पूरा कर के ही दम लेते थे .काफी लम्बे समय तक वो अपने यहाँ के सरपंच रहे और अफजलगढ़ क्षेत्र में एक सरपंच के रूप में ही विख्यात हो गये . सब उनको सरपंच साहब कहते थे . जब गाँव वालो पर कोई आपत्ति आती या कोई भी झगडा होता तो सब गाँव वाले उनको आगे कर देते थे जिससे कि अगर कोई समस्या हो तो इन्ही का नाम आये लेकिन वो ये सब जानते हुए भी कि इससे उनका नुक्सान हो सकता है ,अकेले ही मोर्चे पर डट जाते थे, और गाँव वालो को नियाय दिलाकर ही रहते थे. अफजलगढ़ क्षेत्र के काफी लोग उनसे सलाह लेने आते थे . हालाकि क्षेत्र के कुछ लोग सोचते थे कि सरपंच साहब कठोर दिल के आदमी है वो किसी कि नहीं सुनते उन्हें मनाना आसान नहीं है और पर उनकी ये गलतफमी तब दूर हो जाती जब वो उनके निकट आते थे . दादा जी एक अनुसासनप्रिय व्यक्ति थे ,वो हर गलत बात के खिलाफ थे ,इसलिए उनको काफी नुक्सान भी हुआ और यही कारण था कि लोग उनको कठोर समझते थे क्यों कि जब क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति उनसे गलत बात या काम के लिए कहता तो वो मना कर देते थे और कभी कभी तो लड़ भी पड़ते थे . दादा जी बात के पक्के व्यक्ति थे , बात कि खातिर उन्होने बहुत तियाग किया. वो पैदल चलने के बहुत बड़े शौक़ीन थे , उन्होने अपने जीवन में ६-७ मुकदमे भी लड़े, जिनमे उनको सफलता भी मिली , उनके वकील भी उनसे सलाह लेकर ही काम करते थे और उनकी बातो को ध्यान से सुनते थे और कहते कि सरपंच साहब आप तो खुद वकीलों से जायदा जानते हो.मुकदमो के सिलसिलो में वो अपनी बेटी(वूआ जी ) के घर बिजनौर जाते थे और वह ५ -६ दिनों तक रूकते भी थे पर बेटी के घर का खाना नहीं खाते थे. बाहर से फल मंगाकर ही ५ दिन तक पेट भरते थे. अपने १०४ साल के जीवन में उन्होने कभी कोई अंडा या मांस नहीं खाया ,ना ही कभी धूम्रपान किया.उनकी एक बात कभी कभी हमारे मन में जिज्ञासा उत्पन्न करती थी वो हमेसा दिन में खाना खाने के बाद पक्षियों को भी दान डालते थे .उनका जीवन बहुत ही संघर्षशील था . 21 दिसम्बर २००७ को वो हम सब से विदा हो गये .उनका १०४ साल का जीवन हमको प्रेरित करता है !

"किसी से ना दबने वाले, ना ही डरने वाले बस अपने स्टाइल में जीवन जीने वाले पूजनीय दादा जी को हम शत शत नमन और श्रधांजलि अर्पित करते है !"

Monday, December 20, 2010

क्रेडिट कार्ड सुरक्षा संबंधी कुछ सुझाव.




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सावधान अब हो जाईये अगर आप अपना क्रेडिट कार्ड अपनी पॉकेट या बोलेट में रखते है ।वैसे तो नेट कि दुनिया में क्रेडिट कार्ड से जुड़े किराईम उतने ही पुराने है जितना कि क्रेडिट कार्ड. लेकिन आज कल कुछ लोग क्रेडिट कार्ड से सम्बंधित जानकारियों को चुराने के लिए एक नये तरीके का प्रयोग कर रहे है।  जिसका नाम है "इलेक्ट्रोनिक पिक पोकेटिंग ".इस तकनीक में एक छोटा सा विशेष वायरलेस स्केनर लगा होता है जो आपकी पेंट कि पीछे कि पॉकेट में रखे बोलेट में रखे क्रेडिट कार्ड की जानकारी (जैसे क्रेडिट कार्ड नंबर )को रीड कर सकता है। 

 अगर आपका क्रेडिट कार्ड RFID "Radio Frequency Identification Technology" के आधार पर काम करता है. खासकर कि उन लोगो के लिए जो "ई - बिजनिस " में इस प्रकार के क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। लेकिन ये तरीका पूरी तरह सफल नहीं है क्यों कि इस टेक्नोलोजी पर बेस्ड क्रेडिट कार्ड का CVV Credit Verification Value थ्री डिजिट सीक्कोरिटी नंबर जो कि कार्ड के पीछे लिखा होता है को ट्रांसमिट नहीं कर पाता इस क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेसन नंबर को जायदातर "ई-रीटेलर " परचेज के समय शेयर करते है।  चूकि इस तरीके के द्वारा क्रेडिट कारदा नहीं चुराया जाता केवल उसकी क्रेडिट कार्ड से सम्बंधित जानकारी चुराई जा सकती है , लेकिन फिर भी अमेरिका में कुछ गवर्नमेंट एम्प्लोयी अपने बोलेट और पॉकेट कि सिक्यूरिटी के लिए स्पेशल जाकेट का प्रयोग करते करते है ताकि कोई रिस्क ना रह सके। 

इसलिए सही कहा गया है कि "अपने सामान कि रक्षा ,स्वयं करें "..................

Friday, December 3, 2010

ड्राईवर साहब अब आपको झपकी नहीं लगने देगा ये सॉफ्टवेर --............?




अक्सर ऐसा होता है कि गाडी चालक कितना भी सावधान होकर क्यो ना गाडी चल ले गाडी चलाते चलाते गाडी चालक को झपकी लग ही जाती है । खासकर कि रात के सफ़र् मे ऐसा जरूर होता है । अब इस समस्या का समाधान भी निकल आया है क्यो कि अब विशेषज्ञों ने वाहनों के लिए ऐसा सॉफ्टवेयर सिस्टम तैयार किया है जो चालक को झपकी नहीं आने देगा। यह सिस्टम चालक की आंखों की मूवमेंट पर नजर रखता है और झपकी लगने से पहले ही वार्निग देता है। इस सिस्टम का नाम आईट्रेकर’ है । यह सिस्टम जर्मनी स्थित फ्रैनहोफर इंस्टीटच्यूट फॉर डिजीटल मीडिया टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। इसे किसी भी कार में लगाया जा सकता है। इस सिस्टम के काम करने के लिए पीसी या लैपटॉप की जरूरत नहीं होती है। इसमें दो कैमरे लगे होते हैं ओर सिस्टम का अपना खुद का हार्डवेयर होता है जो इसमे लगे दोनो कमरों द्वारा चालक की आँखों पर राखी जा रही निगरानी को डिटेक्ट करता है ।ये केमरे एक सेकेण्ड् मे २०० से जयदा इमेज को रेकोर्ड् कर सकता है जिससे ये चालक कि आँखों के मूवमेंट पर नजर रखता है । सिस्टम को जैसे ही लगता है कि आंखें एक निश्चित अवधि से अधिक समय तक बंद हैं तो यह अलार्म बजा देगा ओर जिससे गाडी चालक सतर्क हो जायेगा। इस सिस्तम कि खास बात ये है कि इसके लिये किसी इस्पेसल कार कि जरूरत नहीं है इसको किसी भी कार मे लगाया जा सकता है।

Saturday, October 9, 2010

कैसा महसूस करेंगे हम जब होगा "One Laptop Per Child”


कंप्यूटर और मोबाइल ने आज जीवन कि शैली को बदलकर रख दिया हैआज बिना इन दोनों के जिन्दगी अधूरी सी लगती हैलेकिन हमारे देश में अभी भी ऐसे बहुत लोग है जो इन संसाधनों के उपयोग तो दूर सही से जीवन यापन भी नहीं कर पा रहे हैइसका कारण महंगाई तो है ही साथ ही साथ भारत के लोगो कि सोच भी कुछ हद तक उतरदायी है इसके लिएइस समस्या को तो हम अपनी काम करने कि क्षमता को बढाकर ही दूर कर सकते हैवैसे ये एक बहुत ही सोसिअल विषय हैलेकिन मेरा विषय कंप्यूटर और मोबाइल से बदलती जीवन शैली का हैआज से १० साल पहले डाकिया चाचा जी हमारे घर हमसे मिलने वालो कि या हमारे रिश्तेदारों कि चिट्ठी लेकर आते थेलेकिन अब तो डाकिया अंकल केवल मेरे एक्जाम का प्रवेश पत्र लेकर आते है और अगर भी लाये तो वो भी नेट पर वेबसाइट से मिल जा जाता हैऔर रही बात खैर खबर कि तो वो तो मोबाइल से महीने या सप्ताह में में नहीं बल्कि रोज दिन में दो तीन बार हो ही जाती हैतो इन सब कि बात तो रहने दो



सोचो कैसा होगा कि अगर हमारे देश में हर स्कूली बच्चे से लेकर हर कर्मचारी पर अगर एक लैपटॉप होलेकिन आप कहेंगे कि ऐसा नही हो सकताएक बात बताओ जब आज के समय में हर कॉलेज का हर स्टुडेंट एक मोबाइल फ़ोन रख सकता है तो लैपटॉप या कंप्यूटर क्यों नहींलेकिन अब आप कहेंगे कि मोबाइल लैपटॉप से सस्ता आता हैजी हां आप सही कहा रहे है पर अब विश्व का सबसे सस्ता कंप्यूटर भी बन गया है जो कि आने वाले दो या तीन सालो में केवल १५०० रूपये में मिलने लगेगाबंगलौर के भारत विज्ञान अनुसंधान केंद्र और भारत के प्रमुख आई. आई .टी के वैज्ञ्यानिको ने मिलकर ये कर दिखाया है उन्होने आई पैड जैसा तौच स्क्रीन वाला एक कंप्यूटर बनाया है जो कि लाएनाक्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर कार्य करेगाइस कंप्यूटर पर वर्ड प्रोसस्सिंग से लेकर तक वीडिओ कोंफेरेंसिंग तक सभी काम आसानी से किये जा सकेंगेइसमें जी.बी तक मेमोरी इन्बिल्ड होगी जिसे ३० जी.बी तक जा सकता हैअभी हाल ही में केंद्रीय मानव संशाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल जी ने इस कंप्यूटर का अनावरण किया। मात्र १५०० रुपे कि लगत का ये कंप्यूटर भारत के ११ करोड़ स्कूली बच्चो को ५० परसेंट सब्सीडी के साथ २०११ से और उसके बाद उच्च शिक्षा संस्थानों में उपलब्ध कराया जा सकेगा. उनका कहना है की बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन होने पर इसकी कीमत को ५००रूपये तक पहुचाया जा सकेगा. अब देखना ये है की भारत सरकार की ये योजना क्या रंग लाती है ? क्या “One Laptop Per Child” वाला सपना पूरा हो पायेगा. ?

कंप्यूटर के फादर “Charles Babbage” जी को भी अपनी इस खोज पर स्वर्ग में भी अपने आप पर गर्व महसूस होता होगा की उनकी खोज ने आज हमारे कामो को कितना सरल कर । धन्यवाद Charles Babbage जी !



















Sunday, September 26, 2010

ये है पोलीथीन की महिमा


पोलीथीन का नाम तो आपने सुना ही होगा . जिसको परचून कि दूकान से लेकर बिग बाज़ार तक सभी जगह प्रयोग किया जाता है. ये पोलीथीन अपने बड़ते उपयोग के कारण हमारी जिन्दगी का एक हिस्सा बन गया है पोलीथीन एक केमेस्ट्री का शब्द है और मीथाएलीन का एक घटक है . लेकिन ये आज अपने बड़ते उपयोग के साथ साथ बदती गंदगी का भी एक सबब बन गया है . हम पोलीथीन को प्रयोग करने के बाद कूड़े में फेंक देते है या फिर नालो में जहा से निकलकर ये पोलीथीन एक कूड़े के बड़े से ढेर में मिलती जाती है और एस प्रकार बीमारी को जन्म देती है खासकर बरसात के मौसम में .इसलिए इसका बढता उपयोग एक सर दर्द बनता जा रहा है. ये सभी बाते आप जानते है पर ये पोलीथीन कि ख़ास बात ये है इसको न तो हवा तोड़ सकती है ओर न ही पानी गला सकता है . एक पोलीथीन को नष्ट होने में लगभग २५ से ३० साल तक लगते है. हां आग जरूर इसको जला सकती है पर इसको जालने पर हानिकारक मीथेन गैस उत्पन होती है जो वायु को प्रदूषित करती है. तो क्या जलाने के अलावा इसको नष्ट करने का कोई और तरीका नहीं है . अभी गोविन्द बल्लभ पन्त युनिवेर्सिटी के वैज्ञानिको ने एक ऐसे बेक्टीरिया कि खोज की है जो इसको को ३ महीने में ही नष्ट कर देता है जिसका वायुमंडल पर कोई भी हानिकर प्रभाब नही होता है. ये बेक्टीरिया पोलीथीन कि संरचना के बोंड को तोड़ देता है और इसको नष्ट कर देता है.लेकिन क्या ये बेक्टीरिया पोलीथीन की समस्या को ख़तम कर पायेगा? क्या इसके उपयोग से पोलीथीन नालो में नहीं मिलेंगी.? देखिये क्या होता है?...................

Sunday, September 5, 2010

अब स्मार्ट फ़ोन से चलेगी कार


जी हां जापान कि निसान कंपनी ने दुनिया कि पहली ऐसी कार बनायीं है जो कि स्मार्ट फ़ोन कि मदद से कंट्रोल होगी .

"निसान लीफ " नाम कि इस कार में ऐसी प्रणाली प्रयोग कि गयी है जिस से कि कार कि एयर कन्दिसनींग को आईफोन स्मार्ट फ़ोन कि मदद से प्रोग्राम किया जा सकता है।

फोन पर कुछ किलिक कर्त्रे ही चालक ये जान सकता है कि कार किकितनी बैटरी और बची है।

अगर कार को चार्जिंग पर लगाया गया है है तो चालक कार को ये आदेश भी दे सकता है कि चार्जिंग ख़तम होने पर कार फ़ोन में मेसेज भेजे। पांच दरवाजो वाली इस हैचबैक कार में ये भी सुबिधा है कि जब आप कार में बापस आये तो आपको तापमान भी आपके अनुकूल ही मिलेगा । ये कार फुल चार्जिंग पर १०० मील का सफ़र तय कर सकती है और ९० मील / घंटे कि रफ़्तार से दोड़ सकती है।
ये २०११ के शुरुवात में लौंच होगी और इसकी कीमत लगभग १३ लाख रूपये है।

Saturday, August 7, 2010

क्या आपके दिमाग की बत्ती जलती है ?





विज्ञान कि खोज मे होता ये है कि जब् वैज्ञानिक के दिमाग मे विचार आते है तो वो रिसर्च के पीछे लग जाते है ओर फिर ऊनके दिमाग की बत्ती जलती है । दिमाग कि इस बत्ती के ऊपर भी ऊन्होने रीसर्च की है ओर कहा है कि सच मे ऐसा होता है ।
वैज्ञानिको ने एक शोध् के अनुसार पत लगाया है कि जब् कोइ हमारी बात से सहमत होता है तो खुशी से दिमाग कि बत्ती जलने लगती है । व्यक्ति के दिमाग मे एक विशेष भाग ऐसा भी होता है ये भाग तब् सक्रिय होता है जब् किसी किसी मुद्दे पर व्यक्ति कि राय से दूसरे लोग सहमत हो जाते है । इस प्रक्रिया को दिमाग कि बत्ती जलना कहते है। दिमाग की सक्रियता के आधार पर ये भी पता लगाया जा सकता है कि लोग आपकी बात से कितने प्रभावित होते है । देन्मार्क आरहस युनिवर्सिती के सहयोग से प्रोफ़ेसर् क्रिस फ़्रिथ् ने इस रीसर्च के लिये २८ लोगो के दीमाग की जाच की और ऊनक एम आर आइ जाच से ऊनके दिमाग की सक्रियता मापी और इस दौरान ये भी देखा गया कि किसी की बातो मे हा मे हा मिलाने से व्यक्ति के दिमाग पर क्या असर पडता है । पता चला की जब् किसी व्यक्ति की पसंद य ऊसके विचारो से दूसरे लोग सहमत हो जाते है तो दीमाग खुशी से सरोबार हो जाता है ।

विश्वास कीजिये आपके दीमग की बत्ती भी जलेगी।

Wednesday, July 7, 2010

आखिरकार अन्तरिक्ष के बड़ते हुए फैलाव को देखकर वैज्ञानिको को याद आ ही गए आइंस्टाइन जी

अरे ओ छोटू !

हां भैया !

कुछ सुना तुने !

क्या भैया?

यही कि अब अन्तरिक्ष वैज्ञानिको को आइंस्टाइन जी कि याद आने लगी है।

भैया वो इसलिए कि उन्होने जो भविष्यवाणी की थी वो अब वैज्ञानिको को सच लगने लगी है .आखिरवो भी मान ही जायेंगे कि आइंस्टाइन जी भी गलत नहीं थे।

हां छोटू ऐसा ही होगा !




दरअसल ये पता लगा है कि दुनिया में कोई भी चीज स्थिर नहीं है। हम जिन सितारों को आकाश में जगमगाते देखते हैं वे भी लगातार एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। हाल ही में किए गए एक शोध में तो यह बात सामने आई है कि ब्रह्मांड के फैलाव में तेजी आ रही है, जिससे तारों के एक-दूसरे से दूर जाने की गती बढ़ रही है।

वैज्ञानिकों ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हब्बल स्पेस टेलीस्कोप के इस्तेमाल से हजारों आकाशगंगाओं का अध्ययन कर यह पता लगाने में सफलता हासिल कर ली है कि हमारा ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है।वैज्ञानिकों ने इस शोध से महान अंतरिक्ष विज्ञानी एल्बर्ट आइंस्टाइन की भविष्यवाणी सच साबित हुई है।

दरअसल आइंस्टाइन ने भविष्यवाणी की थी कि वक्त के साथ ब्रह्मांड के फैलाव में तेजी आएगी। इस शोध के लिए खगोल विज्ञान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय दल ने करीब 446,000 गैलेक्सियों का अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने अध्ययन में ब्रह्मांड में पदार्थ के बंटवारे को मापने और इसके फैलाव के इतिहास की सही जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की। इस अनुसंधान के परिणाम में वैज्ञानिकों ने पाया कि समय के साथ ब्रह्मांड का फैलाव तेज होता जा रहा है।

शोध में शामिल नीदरलैंड की लेइडेन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक लुदोविक वान वाएरबेक ने कहा कि हमारे नतीजे इस और इशारा करते है कि ब्रह्मांड में ऊर्जा एक गुप्त स्त्रोत है जिसकी वजह से इसका फैलाव रफ्तार पकड़ रहा है।आगे आगे अन्तरिक्ष कि बातो को देखो "आखिर अन्तरिक्ष कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त "
चलते चलते आइंस्टाइन जी को बहुत बहुत धन्याद !

Friday, July 2, 2010

किसी के जी मेल अकाउंट का गलत इस्तेमाल करने वालो कि अब खैर नहीं .... ---



अरे ओ छोटू !

हां भैया!

कुछ सुना तुने !

क्या भैया?
वो ये कि अब किसी के जी मेल का गलत इस्तेमाल करने वाले का पता लगाना होगा और भी आसान

भैया यानी कि अब जी मेल के साथ गलत करने वाले को को बक्शा नहीं जायेगा उसका अच्छा इंतजाम कर दिया गूगल ने !
हां छोटू ऐसा ही होगा !
जी हां अगर आप जी मेल अकाउंट होल्डर है तो आपके लिए सही खबर है लेकिन इसकी लिए आपको सावधानी बरतनी होगी और जीमेल के सिक्यूरिटी के बारे में अपनी जानकारी को को अपडेट करना होगा । लीजिये एक महत्वपूरण जानकारी गामी अकाउंट कि सिक्यूरिटी के बारे में ----


आपके जीमेल अकाउंट को किसी ने आपकी जानकारी के बगैर खोला है और ई-मेल भेजा है, तो अब आप इसकी जानकारी हासिल कर सकते हैं। जीमेल का यह नया फीचर अब आपको बता पाएगा कि आपका अकाउंट कहां से और कब खोला गया था? हालांकि, यह फीचर जीमेल में पहले से ही मौजूद था, लेकिन यूजर्स की नजर इस पर कम ही पड़ती थी। इसलिए हाल ही गूगल ने यूजर्स की तरफ इसका ध्यान आकर्षित करने के लिए इस जानकारी को बैनर के रूप में देने का फैसला किया है। यदि आप जीमेल अकाउंट मेंटेन कर रहें हैं, तो कुछ ही समय में आप अपने इनबॉक्स के ऊपर यह जानकारी बैनर के रूप में देख पाएंगे। यह फीचर आपको यह भी बताएगा कि अकाउंट खोलने के लिए किस ब्राउजर और आईपी एड्रेस का इस्तेमाल किया गया है।
इसके अलावा गूगल के अन्य सिक्योरिटी फीचर भी लगातार एक्टिव रहेंगे। गूगल की ओर से दी गई इन सुविधाओं का एक मकसद तेजी से लोकप्रिय हो रही सोशल नेटवर्किग से मुकाबले का है, तो दूसरा अपने यूजर्स को फ्रॉड से बचाने का।
आईटी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे निश्चित ही गूगल के यूजर्स की संख्या में इजाफा होगा। साथ ही इसका फायदा यूजर और कंपनी दोनों को ही मिलेगा। एक्सपर्ट्स ने बताया कि यदि आप हर रोज एक ही देश से अकाउंट एक्सेस करते हैं। कभी भी,किसी भी जगह से अकाउंट खोला जाता है और किसी दूसरे द्वारा उसमें बदलाव किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में जीमेल आपके अकाउंट विंडो में एक वॉर्निग मैसेज शो करेगा। इससे यूजर को यह आसानी से पता चल जाएगा कि उनका अकाउंट कहीं हैक हो रहा है। इसके साथ ही डिटेल्स ऑप्शन पर क्लिक करने के साथ ही यूजर जान सकेंगे कि कौनसा आईपी एड्रेस अकाउंट खोलने के लिए यूज किया गया था।
गूगल के इस फीचर के साथ-साथ यूजर्स को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने ई-मेल चेक करने के बाद लॉगआउट करें और थोड़े -थोड़े समय पर अपना पासवर्ड बदलते रहें। इसके साथ ही ऐसा पासवर्ड यूज करें, जिसे आसानी से जाना न जा सके। इस तरह की सावधानियां बरतकर यूजर्स अपने अकाउंट को सुरक्षित रख सकते हैं।


गूगल के इस प्रयास के लिए गूगल जी को बहुत बहुत धन्यवाद !

Tuesday, June 22, 2010

Oldest shoe of the world



Can you believe about this or imagine about the oldest shoe of the world but this is really intresting so let know about it and increase the knowlwdge.....

According to online scientific journal plos one the 5,500 year old shoe, the oldest leather shoe in the world, was discovered by a team of international archaeologists It was made of a single piece of leather and was shaped to fit the wearer's foot. It contained grass, although the archaeologists were uncertain as to whether this was to keep the foot warm or to maintain the shape of the shoe, a precursor to the modern shoe-tree perhaps? "It is not known whether the shoe belonged to a man or woman," said lead author of the research, Dr Ron Pinhasi, University College Cork, Cork, Ireland "as while small (European size 37; US size 7 women), the shoe could well have fitted a man from that era." The cave is situated in the Vayotz Dzor province of Armenia, on the Armenian, Iranian, Nakhichevanian and Turkish borders, and was known to regional archaeologists due to its visibility from the highway below.
The stable, cool and dry conditions in the cave resulted in exceptional preservation of the various objects that were found, which included large containers, many of which held well-preserved wheat and barley, apricots and other edible plants. The preservation was also helped by the fact that the floor of the cave was covered by a thick layer of sheep dung which acted as a solid seal over the objects, preserving them beautifully over the millennia!
"We thought initially that the shoe and other objects were about 600-700 years old because they were in such good condition," said Dr Pinhasi. "It was only when the material was dated by the two radiocarbon laboratories in Oxford, UK, and in California, US that we realised that the shoe was older by a few hundred years than the shoes worn by Ötzi, the Iceman."
Three samples were taken in order to determine the absolute age of the shoe and all three tests produced the same results. The archaeologists cut two small strips of leather off the shoe and sent one strip to the Oxford Radiocarbon Accelerator Unit at the University of Oxford and another to the University of California -Irvine Accelerator Mass Spectrometry Facility. A piece of grass from the shoe was also sent to Oxford to be dated and both shoe and grass were shown to be the same age.
The shoe was discovered by Armenian PhD student, Ms Diana Zardaryan, of the Institute of Archaeology, Armenia, in a pit that also included a broken pot and wild goat horns. "I was amazed to find that even the shoe-laces were preserved," she recalled. "We couldn't believe the discovery," said Dr Gregory Areshian, Cotsen Institute of Archaeology at UCLA, US, co-director who was at the site with Mr Boris Gasparyan, co-director, Institute of Archaeology, Armenia when the shoe was found. "The crusts had sealed the artefacts and archaeological deposits and artefacts remained fresh dried, just like they were put in a can," he said.
The oldest known footwear in the world, to the present time, are sandals made of plant material, that were found in a cave in the Arnold Research Cave in Missouri in the US. Other contemporaneous sandals were found in the Cave of the Warrior, Judean Desert, Israel, but these were not directly dated, so that their age is based on various other associated artefacts found in the cave.
"We do not know yet what the shoe or other objects were doing in the cave or what the purpose of the cave was," said Dr Pinhasi. "We know that there are children's graves at the back of the cave but so little is known about this period that we cannot say with any certainty why all these different objects were found together." The team will continue to excavate the many chambers of the cave.
but in the present date there are different type of shoes are available so do you think that is there is any importance of the oldest shoe.......

share with me about your view as comment.....

Monday, June 14, 2010

क्या ऐसा भी हो सकता है .................आपका क्या कहना है वैज्ञानिको की इस रीसर्च पर ?


पढीये वैज्ञानिको द्वारा किये गए इस प्रोयोग के बारे में ........



ज्यादा उम्र में डिमनेशिया पीड़ित लोगों में गीत नई याददाश्त पैदा करने में मदद करता है। यह पहला कौशल हैं जिसे वे खोते जा रहे हैं। संगीत को याददाश्त बढ़ाने वाला माना जाता है। विशेषत: यह अपनी बीती बातों को पुन: याद करने का जरिया है। उदाहरण के लिए पाश्र्व में जब संगीत बज रहा होता हैतो अल्जाइमर्स के रोगी अपनी जिंदगी से जुड़ी बातों को ज्यादा याद कर पाते हैं। यह बहुत ही कम स्पष्ट थे हालांकि धुनें उन्हें सीखने में मदद कर सकती हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी के ब्रैडन एली और उसकी टीम ने इस रिपोर्ट से उत्साहित थे कि एक अल्जाइमर्स से पीड़ित व्यक्ति को उसकी बेटी पॉप संगीत की धुनों में समाचार गाकर सुनाती थी तब वह हालिया घटनाओं को याद कर लेता था। ब्रैडन एली की टीम ने निर्णय लिया कि यह नुस्खा दूसरों पर भी आजमाएंगे। उन्होनें 13 अल्जाइमर्स पीड़ित व्यक्तियों और 14 स्वस्थ वृद्धों को 40 बच्चों द्वारा संगीत सुनाए गए जिसमें आधे गीत थे जबकि आधे बोले जाने वाले शब्द। सभी प्रतिभागियों को फिर से गीत बिना आडियो के दिखाया गया और 40 अज्ञात गीतों के साथ उसे मिक्सड कर दिया गया। देखा गया कि अल्जाइमर्स पीड़ित 40 फीसदी ने वास्तविक गीत को पहचान लिया जिसे गाने में इस्तेमाल किया गया था लेकिन 28 फीसदी ने ही इसे पढ़ पाया। स्वस्थ 80 फीसदी बुजुर्ग लापरवाह दिखे जब उन्हें गीत गाकर सुनाया गया या उन्हें बोला गया। ब्रैडन एली ने कहा कि, डिमेंशिया पीड़ित लोगों में नई बातें सीखने में अच्छे परिणाम दिखे। वे कहते हैं कि यह बहुत अच्छा रहा कि वे गाने सुनकर उन्होंने ऐसा किया।

Friday, June 11, 2010

मज़ा कभी किसी काम में नहीं होता हम काम की और मज़े लेकर जाते है .....

                                             

10 common bad habit , How to Change bad habit in hindi, hoe to break a bad habit? how to stop bad habit? how to get rid of bad habit? tips to remove bad habit? tips to remove nail biting, how to stop nail biting, how to rid of smoking, how to rid of drinking, way to stop smoking, way to stop drinking,way to stop forgetting, ow to take interest in study, tips fpr taking interest in study in hindi, ये आदत है बुरी - आदत ये बदल डालो! ,बुरी आदतो को कैसे बदले ? उनसे कैसे निपटे ?पढ़ाई में मन न लगने की आदत से कैसे निपटे की पढ़ाई में मन लगे ,ड्रग्स और स्मोकिंग की आदत से कैसे छुटकारा पाये ?भूंलने की आदत से कैसे निपटे ?,नाख़ून चबाने से कैसे बचे ?किस ख़राब आदत से कैसे पाये छुटकारा ?


अकसर ये देखा जाता है की हम लोगो को टी वी पर पिक्चर देखने ,दोस्तों के साथ घुमने जाने और उनके साथ बाते करने में बहुत मज़ा आता है खेलने में भी ,सोने में भी । लेकिन भैया जब हम लोगो को कोई मेहनत का काम करने के लिए कहता है जैसे की जब टीचर और घरवाले हमको पढने के लिए कहते है तो या फिर घर पर पापा जी के साथ लगकर कर कोई काम करवाना पड़ता है जब जब खेत में काम करना पड़ता है तो ये सब काम हमको बहुत बोरिंग लगते है । लेकिन हमको एन कामो भी उसी मज़े के साथ करना चाहिए जिस मज़े के साथ हम दोस्तों के साथ घूमते है ,खेलते है या फिर टी वी देखते है क्यों की मज़ा किसी काम काम में नहीं होता हमे किसी भी काम को करने में मज़ा आता ही क्यों की हम उस काम की और इंटरेस्ट के साथ जाते है और करते है । अब अगर मै अपने दोस्त से किसी बात को लेकर खफा हो जाओ और फिर उसे बात करू या उसके साथ पिक्चर देखू तो क्या मुझे मज़ा आएगा? नहीं क्यों की उस समय मै उस से खफा हूँ मुझे इंटरेस्ट नहीं होगा । इसलिए पहले हमे इंटरेस्ट बनाना चाहिए फिर काम को करना चाहिए । यदि हम किसी एक काम की और मज़े लेकर जा सकते है तो किसी दुसरे काम की और भी मज़े लेकर जा सकते है। हमे दूसरो की मदद करने, पड़ी करने और घरवालो के काम को भी मज़े का साथ करना चाहिए न की बोज समझकर
क्यों जी आपका क्या कहना है ?

Tuesday, May 25, 2010

अब कंप्यूटर जी धरती में पानी का पता भी लगायेंगे -


जी हां अब कंप्यूटर जी भी धरती में पानी का पता लगायेंगे । असल में आज के टाइम में वैसे भी धरती में पानी की कमी का आंकलन किया जा रहा है और कोसिस की जा रही ही धरती में छिपे पाने के श्रोतो का पता लगाने की ताकि की ये धरती फिर से हरी भरी हो जाए । कोई तो ऐसा हो जो एस धरती को उसका पानी लौट शायद ये कंप्यूटर इस काम में कुछ मदद करे आओ जानते है कुछ इसके बारे में।

वैज्ञानिकों ने एक ऎसा कम्प्यूटर बनाया है जो जमीन में दफन पानी के भण्डार को खोज निकालने में मदद करेगा। ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तान के नीचे अब भी पानी के सोते मौजूद हैं। लाखों साल से जमीन में दफन पानी के इस भंडार को खोज निकालने के लिए वैज्ञानिकों ने पानी के बहाव पर निगाह रखकर एक कम्प्यूटर मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल के आधार पर भूमिगत पानी का मैप तैयार किया गया है।ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी की एक टीम ने सेन्ट्रल ऑस्ट्रेलिया स्थित सिंपसन रेगिस्तान की सतह के नीचे मौजूद पानी की मैपिंग की है। इसे बनाने वाले प्रोफेसर माइकल हचिंसन का कहना है, रेगिस्तान की सतह से 35 मीटर नीचे नदियों और झीलों का नेटवर्क दबा हुआ है। एक समय में ऑस्ट्रेलिया का यह हिस्सा आज से ज्यादा नमीवाला और हराभरा हुआ करता था। इस कम्प्यूटर मॉडल के आधार पर यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज बहने वाली नदियों की भविष्य में क्या स्थिति हो सकती है।


लेकिन भैया हम इंडिया में रहते है यहाँ तक देखो कब तक ये तकनीक उपयोग में लायी जाती है भारत में काफी जगह ऐसी है जो पानी के लिए तरस रही है देखो कब तक और उनको इंतजार करना पड़ता है। फिर हाज़िर होंगे किसी नयी जानकारी के साथ ............

Tuesday, May 18, 2010

नैनो ने जीता एडिसन अवार्ड में स्वर्ण पदक ..



अरे ओ छोटू !
हाँ भैया !
कुछ सुना तुने !
क्या भैया ?
वो ये की अब हमारे देश की सबसे छोटी कार नैनो ने २०१० एडिसन अवार्ड्स में स्वर्ण पदक जीता है।
भैया हमारे देश के अनमोल रतन श्री रतन टाटा जी ने अपने सपनो को को पूरा ही नहीं किया बल्कि उसको उस मुकाम तक पहूचा दिया जहा तक सोचा भी नहीं था । इसके लिए इंडिया की जनता भी बहुत दीवानी रही होगी ।

हाँ भैया ऐसा ही होगा !.................

Thursday, May 13, 2010

अब घरेलू काम में भी रोबोट आपकी मदद करेगा


अक्सर हमारे घरेलू काम भी कभी कभी बहुत टेंशन देने लगते है उनको निपटाने में हमको किसी ऐसे की जरूरत होती है जो हमारी मदद करे लेकिन साहब आज कल सुनता कौन किस की है छोटे भाई से घर के काम को कहते है तो जवाब मिलता है की मुझे दोस्त के पास जाना है । सिस्टर से कहे तो जवाब मिलता है आप ही कर लो मुझे अभी कॉलेज का काम करना है । अब पिताजी से तो कह नहीं सकते वो तो ऑफिस के काम से ही थक जाते है । अब माता जी जी ही एक है जो मादा करती है या फिर यूं कहे की बड़े माता जी की मदद करते है । लेकिन अब एक खुशखबरी है रूको रूको -----अभी बताते है ---
साइंसदानों ने आखिरकार एक ऐसा रोबोट तैयार कर ही लिया जो घरेलू कामकाज में मदद कर सकता है। इसमें अच्छी खबर यह है कि पीआर2 नामक रोबोट तौलियों की तह लगाने जैसा बढ़िया काम भी कर सकता है। जबकि बुरी खबर है कि यह हर तौलिए को तह लगाने में 25 मिनट का समय लेता है।

जाहिर है कि घरेलू महिलाएं इस उपलब्धि से कोई खास उत्साहित नहीं होंगी लेकिन रोबोट मशीनरी के मामले में यह एक महत्वपूर्ण सफलता है। अब तक डिजाइन किए गए रोबोट जटिल काम भी कर लेते हैं लेकिन उनके काम में दोहराव होता है जैसे कि असैम्बली लाइन में कारों का निर्माण जहां उनका एक समान रूप और आकार की वस्तुओं से सामना होता है।
साइंसदान एक ऐसा रोबोट बनाने की कोशिश करते रहे हैं जो ऐसी वस्तुओं को समझ कर उनका इस्तेमाल कर सकें जिन्हें उन्होंने पहले न देखा हो और जिनका रूप भी उनके लिए नया हो। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में एक टीम ने अथक रिसर्च के बाद एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किया ताकि पीआर2 काम करते वक्त अक्ल का इस्तेमाल भी कर सके।
एक परीक्षण के दौरान पीआर2 ने विभिन्न आकार, रंग और मैटीरियल वाले तौलयों के ढेर से छांट कर उनकी तह लगाई। यह वीडियो क्लिप यूट्यूब पर भी डाला गया है जिसे दर्शनीय बनाने की लिए स्पीड 50 गुना बढ़ाई गई है। टीम में शामिल एक कंप्यूटर वैज्ञानिक पीटर एबील ने दावा किया कि पीआर2 के इस कौशल ने रोबोटों के विकास से संबंधित एक मुख्य मुद्दे को हल कर दिया है। रोबोटों और कंप्यूटरों को ऐसी वस्तुओं से निपटने में दिक्कत आती है जिनका आकार बिगड़ जाता है जैसे कि तौलिया।
लेकिन साहब जब तक ये रोबोट मार्केट में घरेलू कामो के लिए उपलब्ध होगा तब तक शायद हम बूड़े हो जाये। चलो कोई बात नहीं अगर हम नहीं तो सहायद हमारी आने वाली पीडी इसका उपयोग कर सके । दुनिया बदल रही है भाई टेक्नीकल तो बनना ही पड़ेगा । आखिर कंप्यूटर का राज है .................

Thursday, April 29, 2010

ये भी है आगे बदने का एक आसान सा तरीका


                             

10 common bad habit , How to Change bad habit in hindi, hoe to break a bad habit? how to stop bad habit? how to get rid of bad habit? tips to remove bad habit? tips to remove nail biting, how to stop nail biting, how to rid of smoking, how to rid of drinking, way to stop smoking, way to stop drinking,way to stop forgetting, ow to take interest in study, tips fpr taking interest in study in hindi, ये आदत है बुरी - आदत ये बदल डालो! ,बुरी आदतो को कैसे बदले ? उनसे कैसे निपटे ?पढ़ाई में मन न लगने की आदत से कैसे निपटे की पढ़ाई में मन लगे ,ड्रग्स और स्मोकिंग की आदत से कैसे छुटकारा पाये ?भूंलने की आदत से कैसे निपटे ?,नाख़ून चबाने से कैसे बचे ?किस ख़राब आदत से कैसे पाये छुटकारा ?
मुझे लगता है की आगे बदने का ये भी एक आसान सा तरीका हो सकता है और कुछ एस तरह कहू की अपने आप की कमियों को सुधारने का --- वो ये है कि हमसे जिन जिन व्यक्तियों को अक्सर शिकायत रहती है और वो हमसे नाराज़ रहते है इसके लिए हमको चाहिए कि उन सभी व्यक्तियों को जिनके आस पास हम रहते है , जिनसे हम बोलते ही , उन सभी को एक पेपर दे और उनसे ये कहे और निवेदन करे कि आपको मेरे अन्दर जो कमिया नज़र आती है उनको एस पेपर पर लिख दो एस तरह हमसे वो नाराज़ भी नहीं होंगे और उनके दिल में भी हम कुछ जगह बना लेंगे । और फिर हम उन कमियों को देखे कि क्या वो हमारी वास्तविक कमिय है यदि हाँ तो उनको सुधारने कि कोसिस करे । ये पेपर हम अपने घर के सदस्यों , मित्रो , अपने अध्यापको को दे सकते है एस तरह हमको आगे बदने का एक अवसर मिल जाता है।

"Always give blank Ppaper to the People"

Friday, April 23, 2010

3-डी अख़बार / 3 D News Paper





"जी हा अब तक आप केवल 3-डी फ़िल्मों और वीडियो गेम के बारे में ही सुनते आए होंगे लेकिन अब एक अख़बार ने भी 3-डी अंक प्रकाशित करने का प्रयोग किया है।  बेल्जियम में फ़्रेच भाषा में छपने वाले एक अख़बार ने यूरोप का पहला 3- डी (त्रिआयामी ) अंक प्रकाशित किया है। "

अख़बार ला डार्नियर ह्यूर (डीएच) ने अपने इस विशेषांक के सभी फ़ोटो और विज्ञापन को थ्रीडी प्रारूप में प्रकाशित किया है. लेकिन इसकी शेष सामग्री सामान्य है। 

फ़्रांस के विश्लेषकों ने अख़बार के इस साहसिक क़दम को सलाम किया है लेकिन कहा है कि यह अभी यह पूरी तरह दोषरहित होने से काफ़ी दूर है.अख़बार के संपादक ह्यूबर्ट लेकलर्क ने बताया कि इस विशेषांक को तैयार करने में दो महीने का समय लगा। 

यह सामान्य अख़बार की एक लाख 15 हज़ार प्रतियों के छापने में लगने वाले समय से बहुत अधिक था। लेकलर्क ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, ''हमने 3-डी सिनेमी, टीवी और वीडियो गेम के बारे में सुना था इसलिए हमने यह चुनौती स्वीकार की.''पीसी वर्ल्ड के फ़्रेच संस्करण के मुतबिक़ आँखों से 50 सेंटीमीटर की दूरी पर रखकर पाठक इसे आसानी से देख सकते हैं। इसके मुताबिक़ ''केवल कुछ मिनटों में ही आँखें थ्री डी तस्वीरों को देखने की अभ्यस्त हो जाती हैं।  

इसके लिए किसी विशेष तरह के चश्मे की ज़रूरत नहीं होती। ''पीसी वर्ल्ड के मुताबिक़ कुछ तस्वीरों, ख़ासकर विज्ञापनों में अच्छा 3-डी प्रभाव है लेकिन बाकी की तस्वीरें अस्पष्ट हैं या उनको देखना कठिन है। चलिए ये खबर तो अच्छी है।  लेकिन देखन ये है अपने भारतवर्ष में थ्री डी अखवार को छपने में कितन समय लगता है । लेकिन जरा सोचिये की स्टार्टिंग में थ्री डी अखवार को पड़ना कितना रोचक होगा मुझे अभी भी याद जब हमने अपने दोस्तों के साथ पहली थ्री डी पिक्चर सिनेमा हॉल में देखी थी उसके लिए मुझे अलग से एक चस्मा लेना पड़ा जिसकी सहायता से उसको देख पाए थे अबग देखो थ्री डी अखवार को पढने का मज़ा भी कुछ अलग ही होगा ......!!

Monday, April 5, 2010

पर्यटकों और जानवरों की फोटोज लेने वाले शौकिनो के लिए फुजी फ्लिम वालो का एक अनमोल तोहफा

जी हां अब गर्मिय तो आ ही गयी है और साथ ही साथ जून की होलिडेज भी आने वाली है तो अब पर्यटकों का ठन्डे स्थानों पर घूमना भी शुरू हो जयेगाऔर अगर घूमते वक़्त एक केमरासाथ न हो तो बेकार है इसलिए फुजी फ्लिम वालो ने पेश किया है एक अदभुतकैमरा आओ जाने इसकी खासियत के बारे में अब एक क्लिक पर पैट की तस्वीरें चेहरे पर मुस्कान नहीं तो तस्वीर नहीं उतरेगी वाली तकनीक के कैमरों के बाद फुजी फिल्म ने कुत्तों और बिल्लियों की आसानी से फोटो लेने वाला अत्याधुनिक कैमरा आज बाजार में उतारा है। फुजीफिल्म इंडिया के प्रबंध निदेशक केरिशी टनाका फुजीफिल्म के 14 नए कैमरे पेश करते हुए एफ 80 ईएक्सआर माडल भी पेश किया जिसमें पालतू जानवरों की तस्वीर लेने के शौकीन लोगों को अब दिक्कत नहीं होगी। 

उन्होंने कहा कि पालतू जानवरों की पहचान करने वाली तकनीक का यह पहला कैमरा है। कुžो बिल्ली को देर तक स्थिर बैठाए रखना कठिन है और इस वजह से उनकी फोटो लेना आसान नहीं होता इसलिए कंपनी ने पेट डिटेक्शन फीचर विकसित कर कुत्ता बिल्लियों की तस्वीर खींचने के लिए अत्याधुनिक तकनीक वाला कैमरा जारी किया है। 

उन्होंने कहा कि यह तकनीकी फेस डिटेक्शन तकनीक की तरह काम करती है लेकिन फिलहाल इसमे सामने से सही तस्वीर लेने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि इसमें कुत्ता और बिल्ली दो मोड हैं और कैमरामैन अपने मन पसंद के मोड पर जाकर अपने प्रिय जानवर की अच्छी तस्वीर उतार सकता है।


उन्होंने कहा कि कंपनी ने बेहद चर्चित फेस डिटेक्शन तकनीकी की मदद से चेहरे पर मुस्कान का पता चलते ही कैमरे का स्माइल एंड शूट मोड अपना कमाल दिखाना शुरू कर देता है। इस तकनीक वाले कैमरे से चेहरे पर मुस्कान नहीं होने की स्थिति में तस्वीर नहीं उतारी जा सकती है। 

उन्होंने कहा कि इसकी एक खूबी ब्लिंक डिटेक्शन है जो तस्वीर खींचते समय पलकें झपकने पर सचेत कर देती है और फिर उसकी जगह दूसरी तस्वीर ली जा सकती है। इस मौके पर कंपनी के महाप्रबंधक ए राजकुमार ने कहा कि कंपनी ने भारती बाजार को ध्यान में रखेते हुए अपने कैमरों के 14 नए माडल पेश किए हैं जिनमें सबसे महंगा एफ 80 मॉडल 17999 रूपए तथा एवी100 मॉडल की कीमत 4999 रूपए है। उन्होंने कहा कि कैमरों की बिक्री के लिहाज से भारत एक महत्वपूर्ण बाजार है और उपभोक्ताओं की रूचि को देखते हुए यहां नवीनतम तकनीकी के कैमरे लांच किए गए हैं।

Tuesday, February 23, 2010

BOSS: An Operating System Made by CDAC

"जी हाँ माइक्रोसोफ्ट के विंडो ऑपरेटिंग सिस्टम को टक्कर देने आ गया है।  अब भारत का नया बॉस ऑपरेटिंग सिस्टम बॉस । ये ऑपरेटिंग सिस्टम यूज़र्स को भारतीय भाषाओ में कार्य करने की सुविधा प्रदान करेगा। इस बॉस ऑपरेटिंग सिस्टम को भारतीय सरकार द्वारा संचालित सी - डेकसंस्थान ने बनाया है।"

इसका नाम भारत ऑपरेटिंग सिस्टम शोलूशन है और ये जल्द ही देश भर के संस्थानों में मुफ्त में उपलब्ध होगा । इतना ही नहीं ये सिस्टम क्षेत्रीय भाषाओ में भी काम करने कारगार साबित होगा। सी - डेक के वैज्ञानिक अलका इरानी के अनुसार इस ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से भारतीय लिपियों में टेक्स्ट की प्रोसस्सिंग बहुत ही एजी होगी। साथ ही साथ ये ऑपरेटिंग सिस्टम इंग्लिश में भी बेहतर तरीके से भी काम करेगा। 

ये ऑपरेटिंग सिस्टम तीन सी ड़ी के पैक में उपलब्ध होगा । बॉस में डुअल बूटेबल की शुविधा भी होगी साथ ही साथ आप वर्ड की डोक फाइल पर भी काम कर सकेंगे। ये ऑपरेटिंग सिस्टम एक साल बाद आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। इसके अलावा इस ऑपरेटिंग सिस्टम की लाइसेंस की फीस भी विंडो के मुकाबले काफी कम होगी। बॉस की प्रोमोसन के लिए देश में २५ सेंटर बनाये गए है। 

जिनमे प्रमुख रूप से डेल्ही, मुंबई, कोलकाता ,पुणे आदि है। इसके अलावा सी - डेक संस्थान फले ही संस्कृत , राजस्थानी और अन्य भारतीय भाषाओ के लिए अनेक सॉफ्टवेर बना चूका है। वास्तव में से- डेक भारत के लिए एक सां से कम नहीं जिस पर हम सब को गर्व है।

Friday, January 22, 2010

सौर मंडल के बाहर भी है बहुत ग्रह


"आज के समय में अन्तरिक्ष में दिन प्रतिदिन नई नई खोजे हो रही है । इसी ही एक खोज स्विट्जर्लैंड के वैज्ञानिको ने भी की है आओ जाने इस खोज के बारे में । स्विट्जर्लैंड के वैज्ञानिको ने हमारे सौर मंडलों के बाहर ३२ ग्रह की घोषणा की है। इनमे प्रथ्वी के आकार से पांच गुना बड़े ग्रह भी शामिल है। "


इतना ही नहीं बल्कि ब्र्हश्पति गृह से भी बड़े ५ से दस गुना ग्रह भी शामिल है .इन ग्रहों की खोज दक्ष्णि अमेरिकी देश चिली की एक वेधशाला में ३.६ मीटर दूरबीन से की गयी है। इस दूरबीन में लगे सवेंदनशील उपकरणों से इन ग्रहों की पहचान हो सकी है। इस खोज से ये उमीद लगायी जा रही है की हामारी आकाशगंगा में छोटे छोटे अनेक ग्रह हो सकते है । 


स्विट्जर्लैंड के जेनेवा के स्टीफन उदरी ने बताया की सूर्य जैसे कम से कम ४०% तारो के अनेक छोटे छोटे गृह है। इन ३२ ग्रहों के खोजे जाने के बाद हमारे सौर मंडल से बाहर ग्रहों कि गिनती ४०० हो गयी है । इन ग्रहों कि खोज कई प्रकार के खगोलीय उपकरणों और दूरबीनों के प्रयोग से हुई है लेकिन इन ३२ ग्रहों कि खोज वेधशाला में लगे दूरबीन में लगे उपकरण हफ्रस स्पेक्तोमीटर से संभव हो पाई है। हफ्रस ने १ अप्रैल को एक आकाशीय पिंड कि खोज कि जिसका आकर प्रथ्वी से २ गुना है । अब देखना ये है की मानव चाँद की तरह इन ग्रहों पर पहुच पाने में सफल होगा की नहीं।

Saturday, January 16, 2010

माइक्रोसॉफ्ट के ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज 7 की खूबियां : Features of Operating System Windows 7



" विण्डोज़ 7 माइक्रोसॉफ्ट विंडोज परिवार का नवीनतम प्रचालन तन्त्र है। यह कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट द्वारा 23 अक्तूबर २००९ को जारी किया गया नया ऑपरेटिंग सिस्टम है। इसे अपने पिछले ऑपरेटिंग सिस्टम ‘विस्टा’ से ज्यादा यूज़र फ्रेंडली बनाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने कई सुधार किए हैं। "


विंडोज 7 तैयार करने में इतिहास के सबसे बड़े परीक्षण कार्यक्रम का सहारा लिया गया है। माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसके इतिहास का यह सबसे सरल और बेहतरीन ऑपरेटिंग सिस्टम है।विस्टा की सबसे बड़ी खराबी यह है कि ये कई उत्पादों को चलाता ही नहीं है। इसके अलावा यह मेमोरी की खपत ज्यादा करता है। 


विंडोज 7 में इन समस्याओं को दूर किया गया है। विंडोज विस्टा में बार-बार आने वाले सुरक्षा सचेतक लोगों के लिए परेशानी के सबब थे। नया ऑपरेटिंग सिस्टम बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि सुरक्षा सचेतक एक सीमा से ज्यादा न आए।


विस्टा की अपेक्षा संगनक को खोलने और बंद करने में भी यह कम समय लेता है।विंडोज 7 में विंडोज विस्टा के कुछ फीचरों को जहां बदल दिया गया है वहीं कुछ को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इनमें क्लासिक स्टार्ट मीनू , विंडोज अल्टीमेट एक्सट्राज, इंक बाल और विंडोज कैलेंडर प्रमुख है। विंडोज विस्टा से जुड़े चार अप्लीकेशन विंडोज फोटो गैलेरी, विंडोज मूवी मेकर, विंडोज कैलेंडर विंडोज मेल को विंडोज 7 में शामिल नहीं किया गया है लेकिन ये अलग पैकेज जिसे विंडोज लाइव इसेंशियल कहा जाता है, के रूप में उपलब्ध है।

विंडोज 7 चलाने के लिए उपभोक्ता के पास 1 गीगाहर्ट्ज का प्रोसेसर और एक जीबी की मेमोरी की जरूरत पड़ेगी। यदि आप अछे से अच्च्हे कल्र्स च्हह्ते है तो आप के पास ग्राफिक्स काद होना जरुरि है।

हाई एंड मशीन से डीवीडी द्वारा विंडोज 7 को इंस्टाल करने में 15 मिनट का समय लगेगा। पी-4 में ये इंस्टालेशन करने में 25 मिनट का समय लगेगा। विंडोज 7 को पेन ड्राइव द्वारा भी इंस्टाल किया जा सकता है।
इसमें ये है कुछ नई नई खुबिया ----

विंडो टास्क बार- विंडोज 7 को ज्यादा उपयोगकर्तानुकुल बनाने की कोशिश की गई है। इससे उपयोगकर्ता सिर्फ प्रोग्राम आइकन पर क्लिक करके सभी खुले विंडो को एक साथ देख सकता है। इसके अलावा जब भी कोई उपयोगकर्ता टास्क बार में प्रोगाम आइकन पर क्लिक करेगा, वह देख पाएगा कि कितने दस्तावेज खुले हैं। यही नहीं, वह एक दस्तावेज से दूसरे पर आसानी से पहुँच कर सक्रिए कर सकता है।

जंप लिस्ट- इसकी मदद से उपयोगकर्ता को हाल ही में काम किए गए फाइलों के बारे में जानकारी मिल सकती है। इसके साथ ही इसमें वर्ड या एक्सप्लोरर खोले बगैर ही उपयोगकर्ता द्वारा ये पता लगाया जा सकता है कि इस पर आमतौर पर कौन-कौन सी साइटें खोली जाती हैं। 


कंट्रोल पैनल- कंट्रोल पैनल में कई नए फीचर्स बढ़ाए गए है, जिनमें क्लीयर टाइप टेक्स्ट ट्यूनर, डिस्प्ले कलर कैलीब्रेशन विजार्ड, रिकवरी, ट्रबलशूटिंग, वर्कस्पेस सेंटर, क्रिडेंशिएल मैनेजर, बायोमैट्रिक डिवाइस, सिस्टम आइकन और डिस्प्ले शामिल है। टचस्क्रीन- विंडोज 7 में उपयोगकर्ता को टचस्क्रीन की सुविधा प्रदान की गई है। उपयोगकर्ता को फोल्डर और कंट्रोल प्रोग्राम सेलेक्ट करने के लिए माउस की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इसमें खोज का काम तेज गति से किया जा सकता है। ब्राउज करना पहले से अधिक आसान है।बेहतर नेटवर्क- वाई-फाई, मोबाइल ब्राडबैंड कारपोरेट वीपीएन आदि मौजूद नेटवर्क को सिर्फ एक क्लिक की सहायता से खोला जा सकता है।डिवाइस के अनुकूल- इसकी मदद से कैमरा, प्रिंटर आदि को आसानी से जोड़ा जा सकता है। ड्राइवर की कम आवश्यकता- विंडोज 7 में अधिकांश ड्राइवर इंस्टाल है।

विंडोज 7 बाजार में छह संस्करण में उपलब्ध होगा, पर ज्यादातर देशों में खुदरा में इसके होम और प्रीमियम एडीशन ही उपलब्ध होंगे। माइक्रोसॉफ्ट विंडोज 7 प्रीमियम का परिवार पैक ऑफर कर मनोज है, जिसे तीन कंप्यूटरों में इंस्टाल किया जा सकता है। विंडोज 7 के होम बेसिक एडीशन की कीमत 5,899 रुपए रखी गई है जबकि इससे उन्नत संस्करण विंडोज 7 अल्टीमेट का मूल्य 11,799 रुपए है।


Thursday, January 7, 2010

आओ जाने नासा के एल क्रोस मिशन के बारे में


"आज के युग में प्रथ्वी पर मानव जिस तरह से चाँद की और अपने कदम बड़ा रहा है उससे लगता है की एक दिन वह दुनिया जरूर बसेगी। इतना ही नहीं बल्कि आज के समय में वैज्ञानिक चाँद पर खनिज संस्थानों की खोज भी कर रहा है ताकि उनको धरती पर लाकर उनका प्रोयोग किया जा सके।"


 आओ बात करते है दुनिया की सबसे बड़ी अन्तरिक्ष अगेंच्य नासा की अमेरिका चन्द्र अन्वेंसन के प्रय्तोगो के लिए पहले से ही परषिद रहा है। अमेरिका की अन्तरिक्ष अगेंच्य नासा के वैज्ञानिको ने अपना ऍम ३ यंत्र का उपयोग भारतीय चंद्रयान-१ मिसन में किया था । अमेरिका की भरता के साथ इस सजेदारी के बाद अमेरिका ने अपना स्वंत्रत मिसन अल क्रोस भी प्रक्षेपित किया ।




अल-क्रोस नासा का रोबोटिक्स अन्तरिक्ष यान था। जिसको अन्तरिक्ष में एक अन्य रोबोटिक्स अन्तरिक्ष यान अल आर ओ के साथ १८ जून २००९ को प्रक्षेपित किया गया था । इस रोबोटिक्स यान ने चाँद के निकट साउथ धुर्वो के समीप अब तक के सात ठन्डे स्थानों के रूप में नामाकिंत किया है। ये सभी उपग्रह एटलस बी रोकेट पर केप वायुसेना स्टेशन से प्रक्षेपित किये गए थे। 

वैसे तो एल्क्रोस मिसन का उदेश्य चाँद की साथ पर पानी का पता लगाना था । इस एल्क्रोस मिसन के प्रमुख भाग शेफेर्डिंग स्पेस क्राफ्ट और सन्तार रोकेट थे .९ अक्टूबर २००९ को सन्तार स्टेज रोकेट तथा उसके चार मिनट बाद शेफेर्डिंग रोकेट चाँद के साउथ ध्रुव के समीप स्थित किबिय्स क्रेटर से टकराए । पानी की तलाश में हुई इस जबरदस्त टक्कर के कारन चाँद की साथ पर धुल का गुबार बन गया । इन तक्कारो से चटाने टूट गयी और काफी ऊपर तक मिटटी हो गयी थी। शेफेर्डिंग यान ने में लगे हुए कैमरों से इसके फोटोस लिए गए इसको प्रमुख उदेश्य धुल के गुबार में पानी का पता लगाना और अन्य जल सामग्री का पता लगाना था ।

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