अक्सर जब परेशान होते है , क्रोधित होते हैं या नकारात्मक भाव हमारे मन में आते है तो उसके उपाय के लिए हमको खुद ही अपने पर काबू रखना ह...
अक्सर जब परेशान होते है , क्रोधित होते हैं या नकारात्मक भाव हमारे मन में आते है तो उसके उपाय के लिए हमको खुद ही अपने पर काबू रखना होता है या खुद ही हम अपनी सोच के जरिये इन सब पर काबू पा सकते है. हमारे शरीर में बीमारी से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता होती है किस में कम होती है तो किसी में ज्यादा ।
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मगर कुछ भयंकर बीमारिया ऐसी होती है , जिनके आगे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता भी जवाब दे जाती है कैंसर भी इन ही बीमारियों में से एक है ,मगर हाल ही में कुछ अमेरिकी वैज्ञानिको ने ऐसी खोज की है जिसमे कैंसर से लड़ने के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली में बदलाव करके काफी हद तक इस से निजात पायी जा सकती है वैज्ञानिकों के अनुसार शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली बेहद संवेदनशील होने के साथ संतुलित होती है, जो शरीर में घुसपैठ करने वाले विषाणुओं और रोगाणुओं से लड़ती है, लेकिन वह शरीर के अपने उत्तकों से नहीं लड़ पाती ।
वैज्ञानिको के इस शोध का ये परिणाम ‘नेचर मेडिसिन’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. जिसके अनुसार फिलाडेल्फिया के बाल अस्पताल के शोधकर्ताओं ने जानवरों पर ये शोध किया है जिससे ये पता चला है कि प्रतिरोधक प्रणाली के संतुलन में बदलाव करने से कैंसर का एक नया इलाज ढूंढ़ा जा सकता है। वैज्ञानिकों के मत के अनुसार जब रोग प्रतिरोधक प्रणाली शरीर के ही उत्तकों पर असर करने लगती है तो
कई गंभीर बीमारियां जैसे टाइप 1 डायबिटीज हो जाती है।वैज्ञानिको द्वारा की गयी इस शोध का विवरण कुछ इस तरह है
ट्रेग सेल्स कैंसर और ऑटोइम्यून डिजीज में शोध का एक नया और चर्चित क्षेत्र है. ऑटोइम्यून डिजीज का संबंध उन बीमारियों से है, जो रोग प्रतिरोधक प्रणाली से ही शरीर के अंदर के ऊतकों के नष्ट होने के कारण होती हैं.यह रोग प्रतिरोधक प्रणाली का हिस्सा है. प्रतिरोधी प्रणाली सामान्य तौर पर शरीर को बाहरी हमलों से बचाती है।.शोधकर्ताओं ने प्रतिरोधी प्रणाली को प्रभावी तरीके से नियंत्रित कर ट्रेग फंक्शन को तितर-बितर करने की कोशिश की!
इस शोध में शामिल वैज्ञानिक डॉ. वायने हैंकॉक ने कहा, ‘हमें ट्रेग फंक्शन को इस तरह से तितर-बितर करने की जरूरत थी जिससे कि वह ऑटोइम्यून रिएक्शन किए बिना एंटी ट्यूमर एक्टीविटी करे.’शोधकर्ताओं ने दो स्थितियों में शोध किए. पहली स्थिति में उन्होंने उन चूहों पर शोध किया जिनमें ट्रेग के लिए ज़रूरी रसायन नहीं था, जबकि दूसरी स्थिति में उन्होंने एक ऐसी दवा का इस्तेमाल किया जो एक सामान्य चूहे में सामान प्रभाव डालता था. इन दोनों शोध में प्रतिरोधी प्रणाली में बदलाव के कारण फेफड़े के कैंसर में वृद्धि को रोकने में सफलता मिली।
डॉ. हैंकॉक ने कहा, "इससे सही मायने में एक ऐसे नए क्षेत्र ‘कैंसर इम्यूनोथेरेपी’ की ओर बढ़ा जा सकता है जिसमें काफी संभावनाए हैं."! अब देखना ये है कब तक इस शोध का फायदा कैंसर से जूझ रहे काफी मरीजो को मिलता है।
Keyword: प्रतिरोधक क्षमता, कैंसर,कैंसर इम्यूनोथेरेपी !
References : www.nature.com, BBC News
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