एक समय था जब केवल मेकेनिकल और ऑटोमोबाईल के क्षेत्र में नयी नयी मशीनो को बनाया जा रहा था । फिर समय आया इलेक्ट्रोनिक्स का जिसमे टीवी...
एक समय था जब केवल मेकेनिकल और ऑटोमोबाईल के क्षेत्र में नयी नयी मशीनो को बनाया जा रहा था । फिर समय आया इलेक्ट्रोनिक्स का जिसमे टीवी से लेकर मोबाईल ,कंप्यूटर तक सभी प्रकार कि इलेक्ट्रोनिक्स मशीनो को बनाया गया और इलेक्ट्रोनिक्स के क्षेत्र में जितने विकास हुए शायद ही किसी अन्य क्षेत्र में इतने हुए हो।इलेक्ट्रोनिक ने मानव जीवन को बिलकुल बदलकर रख दिया ।
यदि 20 वी सदी को इलेक्ट्रोनिक्स युग का नाम दिया जाए तो ये गलत नहीं होगा। जैसा कि आज हम सभी प्रकार के इलेक्ट्रोनिक्स यंत्रो का उपयोग कर ही रहे हैं।लेकिन जरा कल्पना करो कि क्या 21 वी सदी में इलेक्ट्रोनिक्स का स्थान कोई ले पायेगा ? ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। लेकिन फोटोनिक टेक्नोलोजी के क्षेत्र में हो रही नई नई खोजो और इनके बड़ते उपयोग को देखकर लगता है कि ये भी इलेक्ट्रोनिक्स टेक्नोलजी से कम नहीं है।
यदि 20 वी सदी को इलेक्ट्रोनिक्स युग का नाम दिया जाए तो ये गलत नहीं होगा। जैसा कि आज हम सभी प्रकार के इलेक्ट्रोनिक्स यंत्रो का उपयोग कर ही रहे हैं।लेकिन जरा कल्पना करो कि क्या 21 वी सदी में इलेक्ट्रोनिक्स का स्थान कोई ले पायेगा ? ये तो आने वाला वक़्त ही बताएगा। लेकिन फोटोनिक टेक्नोलोजी के क्षेत्र में हो रही नई नई खोजो और इनके बड़ते उपयोग को देखकर लगता है कि ये भी इलेक्ट्रोनिक्स टेक्नोलजी से कम नहीं है।

फोटोनिक यानी प्रकाश का उपयोग कर सूचना को हासिल करना, आगे पहुंचाना और प्रोसेस करना। यह रिसर्च का हाईटेक क्षेत्र है। इसका विकास ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स के फ्यूजन से हुआ है। फिजिक्स की इस शाखा में फोटॉन यानी प्रकाश के मूल तत्व का अध्ययन होता है। लेसर गन,काप्टिकल फाइबर्स, ऑप्टोमेट्रिक इंस्ट्रुमेंट्स आदि पर रिसर्च भी इसी के तहत होती है। इसे अगली पीढ़ी यानी 21वीं सदी की तकनीक माना जाता है। ठीक उसी तरह जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स को 20 वीं सदी की तकनीक माना जाता है। हालांकि फोटोनिक युग की शुरूआत 60 के दशक में लेजर की खोज के साथ ही हो गई थी। इसने 70 के दशक में टेलिकम्युनिकेशन में अपना असर दिखाया।
इसके नेटवर्क ऑपरेटर्स ने फाइबर ऑप्टिक्स डाटा ट्रांसमिशन का तरीका अपना लिया। इसीलिए काफी पहले ही गढ़ा जा चुका शब्द फोटोनिक्स आम प्रचलन में आया 80 के दशक में। अभी कुछ सालों से टेलिकम्युनिकेशन, कंप्यूटिंग, सुरक्षा और कई अन्य प्रक्रियाओं में फोटोनिक्स का उपयोग आधारभूत तकनीक के रूप में होने लगा है। इससे न सिर्फ काम की स्पीड कई गुना बढ़ जाती है बल्कि वह प्रभावशाली भी हो जाता है। इसका उपयोग बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायलॉजी, मेडिसिनल साइंस, सर्जरी और लाइफ साइंस में भी होता है। अब औद्योगिक उत्पादन, माइक्रोबायलॉजी, मेट्रोलॉजी में भी इसका उपयोग होने लगा है। कुछ भी कहो पर विज्ञान ने 50 सालो में इतनी तरक्की कर ली है तो आगे के आने वाले 50 सालो बाद क्या होगा ?
COMMENTS