हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया ज़ाता है . हमारे देश कि सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि यहाँ नियम क़ानून तो हर चीज़ के लिए बने है ...



हर साल 14 नवम्बर को बाल दिवस के रूप में मनाया ज़ाता है . हमारे देश कि सबसे बड़ी ख़ास बात ये है कि यहाँ नियम क़ानून तो हर चीज़ के लिए बने है पर उनको फोलो करने वाले बहुत ही कम है और कितना फोलो किया ज़ाता है ये तो आप जानते ही हो . जब सुबह सुबह मै कॉलेज की बस में ज़ाता हूँ तो देखता हू कि कुछ लोग कितने गलत तरीके से गाडी को ओवरटेक करते है और रेड लाइट होने पर भी गाडी को निकाल ले जाते है. यातायात पुलिश क़ा चौराहे पर खड़ा एक अकेला कर्मचारी अब रोके भी तो किस किस को रोके. कभी कभी जब दीवान जी भी उसके साथ होते है तो जरूर चालान कट ज़ाता है. यही है भारत के अधिकतर लोगो ई सोच वो अपनी मन मर्जी करते है सारे नियमो को ताख पर रख कर .
इसी तरह के कुछ नियम क़ानून यहाँ पर बाल मजदूरी को लेकर भी बनाए गये है. 15 साल की ऊम्र से कम बच्चे के द्वारा मजदूरी करवाना कानून अपराध है. लेकिन आप किसी भी हलवाई , चाय वाले, होटल, ढाबे पर चले जाये वहा पर अक्सर बाल मजदूर आपको देखने के लिए मिल ही जाते है .हम लोग भी जो बाल मजदूरी के खिलाफ है जब हम चाय वाले की दूकान पर जाते है तो कहते है "ओये छोटू दो चाय ला ".जब हम लोग इन दुकानों के मालिको से मालुम करते है कि बच्चो से क्यों काम करवाते हो तो उनका कहना होता है कि इनके माता पिता ही इनको हमारे पास छोड़कर जाते है. और उनका ये कहना काफी सही भी है. चाहे छोटा सहर हो या बड़ा बाल मजदूर आपको हर जगह देखने को मिलते है. मै अक्सर कूड़े के ढेर से छोटे छोटे बचो को प्लास्टिक की चीज़े और पन्नी या पोलिथीन छांटते हुए देखता हू ओन्नके पैरो में ना तो चप्पले होती है और ना ही वो गंदगी की परवाह करते बस अपने काम में लग जाते है . इसी तरह से आपको बसों में छोटे छोटे बच्चे , पानी की बोटेल, मूंगफली, खीर , गोला, दाल आदि बेचते हुए भी दिखाई देते होंगे. कुछ बच्चे तो बसों में गाना गाकर पैसे लेते है .ये सब उनकी मजबूरी है साहब . सोचता हू की क्या इन बच्चो को और बच्चो की तरह खेलने और अपने बचपन को जीने क़ा हक़ नहीं ? क्या इनको स्कूल जाने क़ा हक़ नहीं? जब हम इन सब सवालों क़ा जवाबा इनके माता पिता से मागते है तो उनकी आँखों में आसू आ जाते है वो कहते है की साहब हम गरीब लोग है अगर इनको काम पर ना भजे तो हम पेट कैसे भरेंगे?
तो कुल मिलाकर अंत में बात आती है गरीबी पर ये अपने आप में बहुत बड़ी समस्या है जिसका जायदा जिकर मै यहाँ नहीं करूंगा पर इतना जरूर कहूँगा की जब तक हमारे देश में ये गरीबी रहेगी तब तक ये बच्चे एक खुशाल बचपन नहीं जी पायेंगे और ना ही पढ़ लिख पायेंगे सही से. गरीब माँ बाप भी अपने बच्चो के लिए कहते है कि
" मेरे बच्चे भी अपनी गरीबी की समझ रखते है , तभी तो घर के वर्तनो को ही अपना खिलौना बना लेते है ".
---मनोज बिजनौरी
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