चंद्रमा पर रहने की इन्सान की खुवाहिस ने उसे नये नये रीसर्च करने को मजबूर कर दिया है। अभी हाल ही में की गयी एक रीसर्च के अनुसार चन्द्रमा पर...
चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण में होनेवाले बदलाव का पता लगाने के लिए भेजे गए जुड़वा प्रोब यानि यान का नाम ग्रेल है और इसे नासा ने प्रक्षेपित किया है। ये अलग-अलग यान वैज्ञानिकों को पृथ्वी के उपग्रह चंद्रमा की आंतरिक संरचना के बारे में नई जानकारियां उपलब्ध करवाएंगे। इससे चन्द्रमा से जुड़े और भी कई रहस्यों को सुलझाने में मदद मिलेगी जैसे कि चंद्रमा का दूर वाला हिस्सा नज़दीक वाले हिस्से से अलग क्यों नज़र आता है।
इससे मिली जानकारी से से भविष्य में चंद्रमा पर भेजे जाने वाले यान को सही जगह उतारने के बारे में जानकारी हासिल हो सकेगी जिसे मिसन को सफल बनाया जा सके। गुरुत्वाकर्षणवैज्ञानिकों के पास चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण की विविधता के बारे में पहले से मानचित्रीय जानकारी मौजूद है लेकिन ये मानचित्र उतने सटीक नहीं हैं, ख़ासतौर से चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से जुड़ी जानकारी इस मिसन से जुड़े वैज्ञानिक डॉक्टर रॉबर्ट फ़ोजेल के अनुसार ,''चंद्रमा के नज़दीक वाले हिस्से के बारे में हमें अभी जो जानकारी हासिल है उसमें सौ गुना सुधार हो जाएगा जबकि दूरवाले हिस्से के बारे में हमारे ज्ञान में हज़ार गुना का फ़र्क़ पड़ जाएगा।''
इस अन्तरिक्ष यान का नाम ग्रेल है मतलब ''ग्रेविटी रिकवरी एंड इंटरनल लैबोरेट्री'' . ग्रेल की तरह ही एक अभियान पहले से नासा और जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी के द्वारा चलाया जा रहा है जिसका नाम ग्रेस है. इस मिसन के अंतर्गत पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर पाए जानेवाले गुरुत्वाकर्षणीय अंतर का अध्ययन किया जा रहा है। चंद्रमा के विभिन्न स्थानों पर गुरुत्वाकर्षण का अंतर द्रव्यमान के अलग अलग होने के कारण है ।
जिसका कारण कुछ इस प्रकार है क्यों की चंद्रमा पर बड़ी पर्वत भी हैं और गहरी घाटियां भी हैं. चंद्रमा की आंतरिक संरचना के अंतर की वजह से इसके गुरुत्वाकर्षणीय प्रभाव में भिन्नता पाई जाती है. ग्रेल ट्विन चंद्रमा की सतह से 55 किलोमीटर की दूरी पर रहकर उसकी परिक्रमा करेंगे। दोनों यान एक दूसरे से 200 किलोमीटर की दूरी पर रहकर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से संबंधित जानकारी एकत्रित करेंगे और दोनों के भेजे जानकारों से ही गुरुत्वाकर्षण से संबंधित सवाल को सुलझाने में मदद मिलेगी।
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