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Friday, October 3, 2014

बापू ऐसा था दर्द तेरा !!

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बापू जी को  अपने जीवन के अंतिम  दिनों में अहिंसा सिद्धांत   की अवहेलना देखकर बहुत कष्ट होता था , उन्होने कई बार अपने दर्द को प्रकट किया वो कहते थे कि एक तरफ तो हम संसार  को अहिंसक बनने , युद्ध को त्यागने का सन्देश देते हैं और दूसरी तरफ  मेरी आँखों के आगे ही भारतवासी आपस में खून खराबा कर रहे हैं , स्त्रियो  की बेज्जती की जा रही है, धार्मिक स्थलों को नष्ट किया जा रहा है ,   ऐसे में मै  जिन्दा नहीं रहन चाहता , बापू जी अक्सर कहते थे कि कि पहले मै 120 वर्ष तक जीना चाहता था , किन्तु भारत में  मौजूदा  आपसी फुट और धार्मिक शत्रुत्ता को देखकर मै  अब एक दिन भी जीना नहीं चाहता , बापू जी  की ये बात इतनी सच हो गयी कि मानो उन्होने काल पर विजय प्राप्त कर ली हो और इस बात को कहने के मात्र  कुछ दिन बाद वो हमसे दूर चले गए !   

  


अपने जीवन के अंतिम दिनों में वो किसी  तरह जीवित तो थे और हिंसापूर्ण माहौल को सुधारने की कोशिश भी कर रहे थे , पर वो ये जान गए थे कि जातीय विदुएष  और हिंसा  भावना ने लोगो के दिलो में अपना ऐसा  घर बना लिया था  जिसको  आने वालो कई वर्षो तक नही निकाला  जा सकता  , गांधी जी ने इस माहौल  को बदलने के लिए के लिए उपवास रखने का निर्णय किया उन्होने कहा की मै  अक्सर देखता हूँ की मेरे मूह पर एक बात कहते हैं  और पीछे दूसरी बात  होती है , कांग्रेस में गंदगी पनपने लगी है , राजनेताओ के बीच के मतभेद से जनता  को नुक्सान उठाना पड़ रहा है .इसका एकमात्र उपय मेरा अनसन है अगर ऐसा करने से देश सुधर सकता है तो मै  ये अनसन करुगा !



महत्मा गांधी जी ने 13 जनवरी से 18 जनवरी तक अनसन किया , जिसका प्रभाव सभी धर्म के लोगो पर पड़ा . हिन्दू , मुसलमान, सिक्ख , ईसाई कोई भी गांधी जी की मौत का जिम्मेदार नही बनना चाहता था इसलिए सभी  धर्म  के लोगो ने हिंसा और धार्मिक लड़ाई के वातावरण को शांत करने की लिखित प्रतिज्ञा की और फिर गांधी जी ने अनसन तोड़ दिया और भारत में शांति बनाने की कोशिश करने लगे. उस समय भारत में मौजूद अल्प्शंख्यक मुसलमानो की रक्षा की समस्या ने बापू जी का ध्यान अपनी और आकर्षित किया और उन्होने इस विषय पर गंभीरता से जवहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, राजेन्द्र प्रसाद आदि तात्कालिक नेताओ से बात की, किन्तु हालात तब बिगड़ गए जब पाकिस्तान में जो लोग अपना  घर वार , जमीन  छोड़कर , वाह  पर अपने साथियो को मरता छोड़कर भारत में सड़को पर धर्मशालों में शरण ले रहे थे उनको इसका बहुत दुःख हुआ  . पाकिस्तान में हिन्दुओ पर मनमाने जुल्म हो रहे थे , सैकड़ो व्यक्ति काटे जा रहे थे , धर्म स्थानो पर आकर्मण किये जा रहे थे , बहु बेटियो की इज्जत ख़राब की जा रही थी . इन खबरों को देखकर जो लोग पाकिस्तान में अपना सब कुछ छोड़कर भारत में शरण लिए थे उन्होने गांधी  जी से कहा  की -"आपने यहाँ तो मुसलमानो की रक्षा कर ली , अब पाकिस्तान जाकर हिन्दुओ को तो बचाइए , सीमाप्रांत से आये लोगो ने स्पष्ट रूप से गांधी जी से कहा कि- " हमको आपकी जरूरत नही है, आप हमारे बीच में क्यों दखल देते हैं ? आप हिमालय में जाकर एकांत में बैठिये ",इन सभी घटनाओ को देखकर गांधी जी की अंतरात्मा बहुत दुखी हो रही थी और उन्होने कहा अब मेरी कौन सुनेगा ? " अपने जीवन के अंतिम दस दिनों में उन्होने आत्म दान का बिलकुल निश्चय कर लिया था. जिस घटनास्थल पर गांधी जी की मृत्यु हुयी , जब उन पर गोलियां दागी गयीं तो गिरते गिरते गांधी जी के मुख से "राम राम" शब्द निकला . सोचिये अगर  उस समय अगर गांधी जी हत्या किसी मुसलमान ने की होती तो , भारत के एक कोने से दुसरे कोने तक ऐसी साम्प्रदियक आग फैलती की उसको बुझाना मुश्किल  हो जाता , 1947 से आज 2014 आ गया है पर हम ये आपसी धार्मिक शत्रुता अभी तक अपने दिलो से नही निकाल पाएं !
                             

 बापू जी चाहते थे की हम सभी धर्मो के लोग सुख शान्ति से रहे किस से कोई शत्रुता नहीं रखें , हम लड़ाई झगडे   को छोड़कर अहिंसा को अपनाये , हम सभी ऐसा करने का प्रण ले  यही उनको हमारी सच्ची श्रद्धाजंलि होगी !! जनमानस को सत्य  अहिंसा और आत्म त्याग का  उपदेश देने वाले , इन सभी चीज़ो का अनुसरण करने वाले और जनकल्याण के लिए हमेसा अपने प्राण देने को तत्पर रहने वाले माहत्मा गांधी  जी को मेरा सत  सत नमन !

                                                  " रघुपति राघव , राजा राम , सब को सम्मति दे भगवान ! " 

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13 comments:

  1. गांधी मार्गसे हम भारतीय भटक गए है इस मे कोई संदेह नही है मनोजभाई और आपने सही कहा है ....... किस से कोई शत्रुता नहीं रखें , हम लड़ाई झगडे को छोड़कर अहिंसा को अपनाये , हम सभी ऐसा करने का प्रण ले यही उनको हमारी सच्ची श्रद्धाजंलि होगी !!

    मेरे इंटरनेट कनेक्सन मे खराबी होने की वजह से मै आपका ब्लॉग फॉलो नहीं कर पा रहा मगर एकाद दीन मे ये खराबी दूर होते ही आपका ब्लॉग जरूर फॉलो करूंगा
    बेहतरीन ब्लॉग है आपका

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  2. शुक्रिया सर जी आप मेरे ब्लॉग पर आये !
    मै आशा करता हूँ की आगे भी आपका स्नेह
    मुझे प्राप्त होता रहेगा !

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  3. आपके ब्लाग का अनुसरण करने लगा हूँ। आभार मेरे ब्लाग पर आने के लिये । गाँधी कह देने से नहीं होना है कुछ भी जमीनी सच्चाई को स्वीकार किये बिना कुछ नहीं होना है ।अपने अंदर झाँके वो सब लोग जो गाँधी जी के नाम को फिर से भुनाने के जुगाड़ में लग गये हैं ।

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  4. पर वो ये जान गए थे कि जातीय विदुएष और हिंसा भावना ने लोगो के दिलो में अपना ऐसा घर बना लिया था जिसको आने वालो कई वर्षो तक नही निकाला जा सकता ........
    और आज ऐसा ही देखने को मिल रहा है ,.
    बहुत दूरदर्शी से बापू जी
    काश आज वे होते तो भारत दुनिया का सिरमौर होता ...

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  5. रघुपति राघव , राजा राम , सब को सम्मति दे भगवान ! "
    बहुत सुन्दर सामयिक प्रस्तुति

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  6. अच्छी जानकारी ।शुक्रिया

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  7. बहुत सुन्दर, अच्छी जानकारी...

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  8. मनोजजी गाँधीजी महात्मा थे और हमारे देश में यह एक सामान्य धारणा है कि महात्मा पूज्यनीय होते हैं अनुकरणीय नहीं. यही नियति बापू की हो गई है. उनका नाम सभी भुनाना चाहते हैं पर उनके दिखाए रास्ते पर चलना लोगों को दुष्कर या अव्यवहार्य प्रतीत होता है. उनके साथ सर्वप्रथम यह व्यवहार उन्हीं लोगों ने किया जो स्वयं को उनका शिष्य कहते थे. पर बापू ने जो कुछ हमें बताया है उसमें बहुत कुछ ऐसा है जो सार्वदेशिक और सार्वकालिक है इसलिए उनकी प्रासंगिकता सदैव बनी रहेगी जिसे आपने बखूबी इंगित किया है.

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  9. गांधी जी की शिक्षाएं केवल पुस्तकों तक ही सीमित रह गयी हैं. उनके तथाकथित अनुयायी ही उनके आदर्शों और सिद्धांतों को भूल गए हैं..बहुत सार्थक आलेख

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  10. गांधी जी के विषय में फ़ैली भ्रांतियों को दूर करने में सहयोगी रचना !

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  11. your writing skills and thoughts are heart touching keep it up dear
    our blog portal is http://www.nvrthub.com

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