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Thursday, November 8, 2012

"दो पल्हड़े तराजू के " - नैतिकता और अपराध

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आज के समय में हमारे देश में दिन प्रतिदिन अपराध बढते जा रहे है ,ये अपराध मुख्यत लूट पाट , चोरी डैकती, छेड़छाड़ रेप , हफ्ता वसूली , मदिरापान करके उत्पात मचाना , हत्या , किसी की संपत्ति पर जबरन कब्ज़ा करना , धोखा धडी आदि की घटनाओं से सम्बंधित होते है .  बहुत पहले से मै ऐसा सुनता  आ रहा  हूँ की हमारे देश में शिक्षा की कमी के कारण ये अपराध बढते है क्यों की अशिक्षित लोग ही मुख्यत रूप से ये अपराध करते है  पर आज के समय में मुझे ये कथन सही नहीं लगता आज के समय में  अधिकतर लोग शिक्षित है और फिर  भी शिक्षित व्यक्ति भी इन अपराधो को अंजाम देता है उदाहरन  के तौर पर मै कहा सकता हु की आज के समय में बड़े बड़े पदों पर बैठे शिक्षित अधिकारी गण और नेता लोग भी इन अपराधो को अंजाम दे रहे है . इन अपराधी में युवा वर्ग के ही नहीं बल्कि ५० से ६५ वर्ष के लोग भी शामिल है ,पुरष ही नहीं बल्कि महिलाए भी शामिल है , आये दिन इस तरह की घटनाओं को आप लोग टी वी पर देखते ही होगे जो सत्य होती है  इसलिए मुझे यहाँ उदाहरन देने की आवश्यकता नहीं है , अब ये सोचनीय बात    है की आखिर ऐसा क्या हो रहा है हमारे समाज में जो  अच्छे  पढ़े लिखे  शिक्षित लोग भी ये अपराध करते है , आखिर हम क्या खोते जा रहे है और किसके लिए ?

                   अगर आप इस सवाल का जवाब ढूँढने की कोशिश  करेंगे तो आप पायेगे  की हम शिक्षित होने के बाद भी नैतिकता को खो रहे है अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए , जिसकी वजह से दिन प्रतिदिन अपराध बढ रहे है ,  अगर हम अपराध और नैतिकता को तराजू के पल्ह्ड़ो में रखे तो जैसे जैसे नैतिकता का पल्ह्डा हल्का होता जाता है वैसे वैसे अपराध का पल्ह्डा भारी हो जाता है , आज के समय में हालात ये है की नैतिकता का ये पल्ह्डा बहुत ही हल्का हो चूका है  आज के समय में युवाओं में भी नैतिकता की बहुत कमी है उनको नैतिक शिक्षा बहुत कम दी जाती है उनको प्रोडक्ट ओरिएंटेड शिक्षा दी जाती है जिससे वो नैतिकता के महत्व को नहीं समझ पाते  यही नहीं बल्कि बड़े बड़े पदों पर आसीन अधिकारीगण   और बुजुर्ग  लोग   भी नैतिकता को भुलाते जा रहे है , अभी मै एक दिन सड़क पर साइकिल से जा रहा था की भीड़ में मै साइकिल बैलेंस नहीं कर पाया और मेरी साईकिल लगभग ६५ साल के एक ताऊ जी से थोड़ी सी टकरा गयी उनको कोई चोट नहीं आई मै ने साइकिल रोककर उनसे माफ़ी मांगी मगर उन  महाशय ने अपनी जुबान से मेरे लिए गालियों की बारिस   कर दी और २ मेरे गाल पर भी जड़ दिए . मै समझ गया और चुपचाप वह से आ गया . अब आप इसे क्या कहेंगे ? हालाकि ये कोई अपराध नहीं किया उन महाशय जी ने .  लेकिन ये घटना ये दर्शाती है की बुजुर्ग लोग भी अपनी समझदारी को खो रहे है आज कल .


                                                             
       
                         काफी हद तक टेक्नोलोजी भी अपराध को रोक सकती है जैसे की कोई व्यक्ति अगर शराब पीकर गाडी चलता है तो गाडी में ऐसे सेंसर लगाए जाए जो ये पता लगा सके की व्यक्ति ने शराब पी है और फिर चाहकर भी वो व्यक्ति गाडी न चला पाए , ऐसा वास्तव में संभव है , इसी तरह से ये भी संभव है की कोई व्यक्ति गाडी चलाते समय गाडी  में मोबाइल फ़ोन पर बात ना कर सके और  उसको गाडी चलाते  समय
 अगर नींद आये तो गाडी की गति कम हो जाए और उसको इस बात का अलर्ट हो ये सब तकनीक एक्सीडेंट को कम कर सकती है इसी तरह से टेक्नोलोजी का उपयोग और भी अपराधो को कम करने के लिए भी कर सकते है परंतू इस सब से जायदा महतवपूर्ण है नैतिकता को ना खोना अगर हमको अपराध को कम करना है तो नैतिकता को जिन्दा रखना होगा !नैतिक शिक्षा के महत्व को समझना होगा उसको उपयोग में लाना होगा  !
   आजकल विद्यालयो में भी नैतिक शिक्षा का आभाव है तो जरूरत है नैतिकविदो द्वारा आज के युवा वर्ग के लोगो में नैतिक शिक्षा के संचार की  ताकि भविष्य में अपराध का पल्ह्डा हल्का रहे . 

1 comment:

  1. जब अ -नैतिकता चरम को छू लेती है नैतिकता के लिए खुद बा खुद जगह बन जाती है यह एक आवधिक चक्र है .अभी तो गिरावट का दौर है .होने दो पोटेंशियल

    एनर्जी को जीरो .

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